📍नई दिल्ली/नागपुर | 18 Jan, 2026, 8:21 PM
Aatmanirbhar Defence Manufacturing: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि देश को गोला-बारूद यानी एम्युनिशन के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाना अब सिर्फ एक लक्ष्य नहीं, बल्कि रणनीतिक जरूरत बन चुका है। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य है कि जल्द ही डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में प्राइवेट कंपनियों की हिस्सेदारी 50 फीसदी से ज्यादा हो। इस मौके पर रक्षा मंत्री ने न सिर्फ देश में गोला-बारूद निर्माण को लेकर सरकार की सोच साफ की, बल्कि यह भी दोहराया कि भारत को आने वाले समय में इस क्षेत्र का ग्लोबल प्रोडक्शन हब बनाया जाएगा।
महाराष्ट्र के नागपुर में सोलार डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड की मीडियम कैलिबर एम्युनिशन मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी का उद्घाटन करने पहुंचे रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में उन दिनों को याद किया जब भारत को गोला-बारूद की कमी का सामना करना पड़ा था और इससे देश की सैन्य तैयारियों पर असर पड़ा था। उन्होंने कहा कि उन्हीं अनुभवों से यह समझ बनी कि अगर देश को सुरक्षित रखना है, तो हथियार और गोला-बारूद के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहा जा सकता। इसी सोच से आत्मनिर्भर भारत की नींव पड़ी और आज उसका असर जमीन पर साफ दिख रहा है। (Aatmanirbhar Defence Manufacturing)
Aatmanirbhar Defence Manufacturing: पूरी तरह ऑटोमेटेड फैक्ट्री का उद्घाटन
नागपुर में जिस मीडियम कैलिबर एम्युनिशन फैसिलिटी का उद्घाटन हुआ, वह पूरी तरह से ऑटोमेटेड प्लांट है। इस यूनिट में 30 एमएम एम्युनिशन का निर्माण किया जाएगा, जिसका इस्तेमाल भारतीय सेना और भारतीय नौसेना बड़े पैमाने पर करती हैं। यह एम्युनिशन खास तौर पर एयर डिफेंस सिस्टम, नेवल गन्स और कुछ आर्मर्ड प्लेटफॉर्म्स में काम आता है।
रक्षा मंत्री ने फैक्ट्री का निरीक्षण करते हुए कहा कि इस तरह की आधुनिक यूनिट्स यह दिखाती हैं कि भारत अब सिर्फ लाइसेंस पर निर्माण करने वाला देश नहीं रहा, बल्कि क्वालिटी और भरोसेमंद डिफेंस प्रोडक्ट्स खुद बनाने की क्षमता हासिल कर चुका है। उन्होंने इसे निजी क्षेत्र की तकनीकी क्षमता और सरकार की नीति के सही तालमेल का उदाहरण बताया। (Aatmanirbhar Defence Manufacturing)

पिनाका रॉकेट्स की पहली खेप आर्मेनिया रवाना
अपने इस दौरे के दौरान रक्षा मंत्री ने आर्मेनिया के लिए रवाना होने वाले गाइडेड पिनाका रॉकेट्स की पहली खेप को खुद हरी झंडी दिखाकर इन रॉकेट्स को फ्लैग ऑफ किया। यह कदम भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट की दिशा में एक बड़ा माइलस्टोन माना जा रहा है।
पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम पहले ही भारतीय सेना की ताकत बन चुका है। अब इसके गाइडेड वर्जन का निर्यात यह दिखाता है कि भारत की डिफेंस इंडस्ट्री अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी जगह बना रही है। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत अब सिर्फ हथियार आयात करने वाला देश नहीं है, बल्कि तेजी से निर्यातक बन रहा है। (Aatmanirbhar Defence Manufacturing)
निजी क्षेत्र की भूमिका पर जोर
राजनाथ सिंह ने अपने भाषण में बार-बार निजी क्षेत्र की भूमिका का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी 50 फीसदी या उससे ज्यादा हो। उनके मुताबिक, मौजूदा हालात में रक्षा निर्माण और रिसर्च एंड डेवलपमेंट में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाना समय की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि निजी कंपनियों ने यह साबित कर दिया है कि वे जटिल टेक्नोलॉजी, बड़े पैमाने का प्रोडक्शन और समय पर डिलीवरी करने में सक्षम हैं। सरकार की कोशिश है कि उन्हें ज्यादा मौके दिए जाएं, ज्यादा जिम्मेदारी सौंपी जाए और नई टेक्नोलॉजी तक उनकी पहुंच आसान बनाई जाए। (Aatmanirbhar Defence Manufacturing)
ऑपरेशन सिंदूर और स्वदेशी हथियारों की भूमिका
रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि यह ऑपरेशन इस बात का बड़ा उदाहरण है कि आत्मनिर्भरता कितनी जरूरी है। उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन के दौरान निजी क्षेत्र द्वारा बनाए गए कई सिस्टम्स का इस्तेमाल हुआ, जिसने उनकी विश्वसनीयता और क्षमता को साबित किया।
उन्होंने खास तौर पर नागास्त्र ड्रोन का उल्लेख किया, जिसे सोलार ग्रुप ने बनाया है। रक्षा मंत्री ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नागास्त्र ड्रोन ने सटीकता के साथ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। इससे यह साफ हो गया कि भारतीय निजी कंपनियां अब ऐसे हथियार बना रही हैं जो युद्ध जैसी परिस्थितियों में भी भरोसेमंद साबित हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नागास्त्र के और ज्यादा एडवांस्ड वर्जन पर काम चल रहा है, जो भविष्य में देश की सुरक्षा को और मजबूत करेंगे। (Aatmanirbhar Defence Manufacturing)
काउंटर ड्रोन सिस्टम और नई तकनीक
रक्षा मंत्री ने सोलार कंपनी के बनाए भार्गवास्त्र काउंटर ड्रोन सिस्टम के सफल परीक्षण का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह सिस्टम निजी क्षेत्र की तकनीकी क्षमता का शानदार उदाहरण है। आज के दौर में ड्रोन वारफेयर तेजी से बढ़ रहा है और ऐसे में काउंटर ड्रोन टेक्नोलॉजी की अहमियत कई गुना बढ़ गई है।
उनका कहना था कि आधुनिक युद्ध सिर्फ सीमा तक सीमित नहीं रहे हैं। अब ऊर्जा, व्यापार, सप्लाई चेन, टेक्नोलॉजी और सूचना भी संघर्ष के नए क्षेत्र बन चुके हैं। ऐसे में देश को हर स्तर पर तैयार रहना होगा और इसके लिए मजबूत डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस जरूरी है।
राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में डिफेंस प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट से जुड़े आंकड़े भी साझा किए। उन्होंने बताया कि साल 2014 में जहां भारत का डोमेस्टिक डिफेंस प्रोडक्शन करीब 46,425 करोड़ रुपये था, वहीं आज यह बढ़कर लगभग 1.51 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। इसमें से 33,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का योगदान निजी क्षेत्र का है।
इसी तरह, डिफेंस एक्सपोर्ट जो दस साल पहले 1,000 करोड़ रुपये से भी कम था, अब बढ़कर 24,000 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। रक्षा मंत्री ने कहा कि यह बदलाव सिर्फ नीतियों का नतीजा नहीं है, बल्कि निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की साझेदारी का परिणाम है। (Aatmanirbhar Defence Manufacturing)
पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर का अनोखा तालमेल
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत के पास डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर का जो मिश्रण है, वह देश की सबसे बड़ी ताकत है। एक तरफ अनुभवी और मजबूत सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां हैं, तो दूसरी तरफ तेजी से उभरती और इनोवेशन से भरपूर निजी कंपनियां हैं।
उन्होंने कहा कि अब जरूरत इस बात की है कि इस तालमेल को और गहरा किया जाए। दोनों सेक्टर एक-दूसरे की ताकत को समझें, एक-दूसरे की कमी को पूरा करें और देशहित में साथ आगे बढ़ें। सरकार की नीति यही है कि निजी कंपनियों को नई टेक्नोलॉजी, नए मौके और बड़ी जिम्मेदारियां दी जाएं, ताकि वे सार्वजनिक क्षेत्र के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकें। (Aatmanirbhar Defence Manufacturing)


