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IAF Chief on Operation Sindoor: वायुसेना प्रमुख बोले- पाकिस्तान का नैरेटिव ‘मनोहर कहानियों’ जैसा, ऑपरेशन सिंदूर में गिराए एफ-16 और जेएफ-17 समेत 10 फाइटर जेट

IAF Chief on Operation Sindoor
Photo: Raksha Samachar

IAF Chief on Operation Sindoor: भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने वायुसेना दिवस से पहले आयोजित सालाना प्रेस कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कई खुलासे किए। उन्होंने बताया कि मई में हुई झड़पों के दौरान भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के 10 से अधिक फाइटर जेट गिराए, जिनमें अमेरिका निर्मित एफ-16 और चीन-पाकिस्तान के बनाए जेएफ-17 भी शामिल थे।

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उन्होंने पाकिस्तान के दावों को खारिज करते हुए कहा कि “उनकी बातें मनोहर कहानियों जैसी हैं।” एयर चीफ ने बताया कि भारतीय वायुसेना ने 300 किलोमीटर अंदर जाकर पाकिस्तान के एयरबेस, राडार, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और लड़ाकू विमानों को सटीक हमलों में निशाना बनाया। यह भारतीय वायुसेना का अब तक का सबसे लंबा “किल” माना जा रहा है।

पाकिस्तान का झूठा नैरेटिव- “मनोहर कहानियों” जैसा

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासभा में दावा किया था कि उन्होंने भारत के 7 फाइटर जेट गिराए। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए एयर चीफ मार्शल सिंह ने व्यंग्य में कहा, “अगर उन्हें लगता है कि उन्होंने हमारे 15 विमान गिराए हैं, तो उम्मीद है अगली बार जब वे लड़ाई में आएंगे, तो 15 कम विमान लेकर आएंगे।”

ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पाकिस्तान की तरफ से किए जा रहे दावों पर एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि पाकिस्तान की जो नैरेटिव फैलाया जा रहा है वह “मनोहर कहानियों जैसा” है, जिनका कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के एयरबेस, एयर डिफेंस और कमांड सेंटरों को स्ट्राइक्स में निशाना बनाया।

ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायुसेना की जबरदस्त स्ट्राइक -IAF Chief on Operation Sindoor

22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत ने जवाबी कार्रवाई करते हुए 6 और 7 मई की दरमियानी रात ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया। यह 2019 की बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद सबसे बड़ा सैन्य अभियान था।

इस ऑपरेशन में भारतीय वायुसेना ने बिना एलओसी या इंटरनेशनल बॉर्डर पार किए पाकिस्तान की सीमा के अंदर 300 किलोमीटर तक अंदर जाकर रडार स्टेशन, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, रनवे और हैंगर को निशाना बनाया।

एयर चीफ ने बताया कि इस अभियान में चार रडार साइट, दो कमांड कंट्रोल सेंटर, दो रनवे और तीन बड़े हैंगर को भारी नुकसान पहुंचा। एक सी-130 श्रेणी का विमान और पांच एफ-16 व जेएफ-17 वर्ग के लड़ाकू विमान भी नष्ट कर दिए गए।

उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन रणनीतिक और मनोवैज्ञानिक दोनों स्तरों पर पाकिस्तान के लिए झटका था और अंततः उन्हें 10 मई को सीजफायर के लिए भारत से अनुरोध करना पड़ा।

एयर चीफ मार्शल सिंह ने बताया कि भारतीय वायुसेना ने हवा में 4 से 5 फाइटर जेट मार गिराए। इनमें अमेरिकी एफ-16 और जेएफ-17 श्रेणी के लड़ाकू विमान थे। इसके अलावा, एक लॉन्ग रेंज स्ट्राइक में पाकिस्तान का एक अवॉक्स या सिग्निफिकेंट इंटेलिजेंस एयरक्राफ्ट भी ध्वस्त हुआ।

IAF Chief on Operation Sindoor

उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने एक बार फिर दिखा दिया कि भारतीय वायुसेना किसी भी चुनौती का जवाब निर्णायक और सटीक तरीके से दे सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर का मकसद आतंकवाद के खिलाफ सर्जिकल और सीमित कार्रवाई करना था, न कि व्यापक युद्ध को भड़काना।

स्वदेशी हथियारों और नई तकनीक पर फोकस

प्रेस कॉन्फ्रेंस में एयर चीफ ने भारत की आत्मनिर्भरता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि तेजस एमके1ए, एएमसीए (AMCA), आकाश-NG, एस्ट्रा मिसाइल, नए रडार सिस्टम्स और एयरबॉर्न वॉर्निंग सिस्टम्स पर तेजी से काम हो रहा है।

उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना घरेलू उद्योगों, एमएसएमई सेक्टर और स्टार्टअप्स को रक्षा उत्पादन में बढ़ावा दे रही है। स्वदेशी हथियार प्रणालियों के जरिए न सिर्फ आयात पर निर्भरता घटाई जाएगी बल्कि भारत को रक्षा निर्यातक बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।

एयर चीफ ने कहा कि भारत भविष्य के लिए फिफ्थ जनरेशन और उससे आगे की टेक्नोलॉजी को अपनाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। एएमसीए प्रोग्राम पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है और इसकी पहली उड़ान परीक्षण इस दशक के अंत तक होने की उम्मीद है। और 2035 तक इसे ऑपरेशनल करने का लक्ष्य है। इस बार निजी उद्योगों को भी प्रोजेक्ट में शामिल किया गया है जिससे प्रगति तेज होने की उम्मीद है।

वहीं, राफेल और एस-400 को लेकर उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना किसी भी वेपन सिस्टम के सिलेक्शन में अपनी दीर्घकालिक जरूरतों और ऑपरेशनल क्षमता को प्राथमिकता देती है। राफेल जैसे विमानों को शामिल करना आसान है क्योंकि इनकी ट्रेनिंग और मेंटेनेंस सिस्टम पहले से मौजूद है। एयर चीफ ने कहा कि 114 रफाल विमान भारत के लिए एक संभावित विकल्प हैं। पहले के अनुभव और तैयारियों के कारण राफेल को शामिल करना आसान होगा। जो भी कंपनी भारत में मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का प्रस्ताव देगी, उस पर विचार किया जाएगा।

IAF Chief on Operation Sindoor
Photo: Raksha Samachar

बढ़ेगी अनमैन्ड सिस्टम की जरूरत

एयर चीफ ने कहा कि भविष्य में अनमैन्ड सिस्टम (UAV/UCAV) की भूमिका और बढ़ेगी। हालांकि, उन्होंने साफ कहा कि मैन और मशीन का कॉन्बिनेशन ही निर्णायक रहेगा। अनमैन्ड सिस्टम कुछ मिशनों में अहम भूमिका निभाएंगे, लेकिन मैन सिस्टम को पूरी तरह रिप्लेस नहीं करेंगे।

भारतीय वायुसेना इस क्षेत्र में स्वदेशी प्रोजेक्ट्स और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के साथ तेज़ी से काम कर रही है। डीआरडीओ के कई प्रोजेक्ट्स इस दिशा में आगे बढ़ चुके हैं।

एयर चीफ ने बताया कि 2047 तक का एक रोडमैप तैयार किया गया है जिसमें वायुसेना को मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस के लिए सक्षम बनाया जा रहा है। तीनों सेनाओं के बीच तालमेल को औपचारिक ढांचा देने पर काम हो रहा है ताकि किसी भी ऑपरेशन में सामूहिक ताकत का प्रभावी इस्तेमाल हो सके।

उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्ध में साइबर, स्पेस और इंफॉर्मेशन वॉरफेयर की भूमिका अहम होगी और भारतीय वायुसेना इस दिशा में पूरी तैयारी कर रही है।

बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट की कमी से ट्रेनिंग पर असर?

एयर चीफ ने माना कि बेसिक ट्रेनर विमानों में सप्लाई चेन की दिक्कतों के कारण देरी हुई है। हालांकि, वायुसेना ने अपनी ट्रेनिंग संरचना को पुनर्गठित किया है ताकि कम प्लेटफॉर्म होने के बावजूद पायलटों की ट्रेनिंग प्रभावित न हो। वहीं, नए विमान के आने से यह समस्या हल हो जाएगी।

वहीं सुखोई-30 के अपग्रेड को लेकर उन्होंने कहा कि एक विस्तृत अध्ययन के आधार पर वायुसेना का प्रॉस्पेक्टिव प्लान तैयार किया गया है। इसमें न केवल प्लेटफॉर्म अपग्रेड, बल्कि नए रडार, सरफेस-टू-एयर सिस्टम, ट्रेनिंग और मानव संसाधन सुधार शामिल हैं। वहीं अधिकांश सुखोई-30 बेड़े का 70–75% अपग्रेड किया जाएगा।

किए कई अंतरराष्ट्रीय अभ्यास

एयर चीफ ने बताया कि पिछले एक साल में भारत ने अमेरिका, फ्रांस, ग्रीस, सिंगापुर, मिस्र जैसे देशों के साथ कई बड़े सैन्य अभ्यास किए हैं। IAF Chief on Operation Sindoor इन अभ्यासों में इन देशों ने भारतीय वायुसेना की पेशेवर क्षमता और सटीकता की तारीफ की। उन्होंने कहा कि इन अभ्यासों से न केवल इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ती है बल्कि भारत की एयर पावर की वैश्विक विश्वसनीयता भी मजबूत होती है।

Amir Khan Muttaqi visit India: अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी अगले हफ्ते आएंगे दिल्ली, तालिबान सरकार को सौंपा जा सकता है नई दिल्ली स्थित अफगान दूतावास

Amir Khan Muttaqi India visit: Taliban flag sparks diplomatic dilemma
(File Photo)

Amir Khan Muttaqi visit India: अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी अगले हफ्ते भारत का दौरा करेंगे। सूत्रों के मुताबिक, मुत्ताकी 9 और 10 अक्टूबर को नई दिल्ली में रहेंगे और इस दौरान कई अहम बैठकों में हिस्सा लेंगे। माना जा रहा है कि यह दौरा भारत और तालिबान के बीच बढ़ते कूटनीतिक रिश्तों में एक अहम पड़ाव साबित हो सकता है।

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अगस्त में नहीं मिली थी यात्रा की अनुमति

दरअसल, मुत्ताकी की पहले अगस्त 2025 के आखिरी हफ्ते में दिल्ली आने की योजना थी, लेकिन उस समय उन्हें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से यात्रा प्रतिबंध छूट नहीं मिल पाई थी। अब जब यह औपचारिकता पूरी हो गई है, तो उनका यह दिल्ली दौरा तय हुआ है।

2021 के बाद बदले हालात

2021 में तालिबान के अफगानिस्तान की सत्ता संभालने के बाद से भारत और काबुल के बीच रिश्तों में बड़ा बदलाव आया है। हालांकि भारत ने अब तक तालिबान शासन को औपचारिक मान्यता नहीं दी है, लेकिन मानवीय सहायता भेजने से लेकर काबुल में अपना दूतावास फिर से खोलने तक, कई स्तरों पर दोनों देशों के बीच बातचीत और संपर्क जारी है।

इस्लामाबाद-काबुल रिश्तों में तनाव

Amir Khan Muttaqi visit India का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब काबुल और इस्लामाबाद के बीच रिश्ते लगातार खराब हो रहे हैं। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के आतंकियों को पनाह देने का आरोप लगाया है। हाल ही में पाकिस्तान ने अफगान सीमा पर हवाई हमले भी किए, जिनका तालिबान ने कड़ा विरोध किया। ड्यूरंड लाइन पर हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं।

विदेश सचिव गए थे तालिबान

इससे पहले जनवरी 2025 में भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने दुबई में तालिबान के कार्यवाहक विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी से मुलाकात की थी। यह 2021 के बाद बड़े स्तर दूसरा द्विपक्षीय संपर्क था। चर्चा में अफगानिस्तान की सुरक्षा, विकास परियोजनाएं, मानवीय सहायता और ईरान के चाबहार पोर्ट के माध्यम से व्यापार बढ़ाने पर फोकस रहा। तालिबान ने भारत को “महत्वपूर्ण क्षेत्रीय और आर्थिक साझेदार” बताया। यह पाकिस्तान-तालिबान तनाव (जैसे पाकिस्तानी हवाई हमलों) के बीच हुआ, जिससे भारत को फायदा मिला।

इसके बाद मई 2025 में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मुत्तकी से फोन पर बात की थी। जयशंकर ने अफगानिस्तान के लिए “बोल्ड मूव्स” और प्रत्यक्ष मानवीय सहायता बढ़ाने का संकेत दिया था। वहीं, तालिबान ने अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की थी।

नई दिल्ली में तालिबान के कई अधिकारी

पिछले कुछ महीनों में तालिबान के कई वरिष्ठ अधिकारी दिल्ली आ चुके हैं। पिछले महीने ही अफगानिस्तान के दवा और खाद्य उप मंत्री हमदुल्लाह जाहिद फार्मास्यूटिकल्स और हेल्थकेयर की एक अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी में भाग लेने के लिए भारत आए थे। इसके अलावा, एक और वरिष्ठ तालिबान अधिकारी, जो सुरक्षा और रणनीतिक मामलों को देखते हैं, सितंबर में लगभग एक महीने तक दिल्ली में रहे और भारतीय अधिकारियों के साथ बातचीत करते रहे।

वहीं, भारत ने अफगानिस्तान को लगातार मानवीय मदद भेजी है। पिछले साल आए भूकंप के बाद भी भारत ने लगातार मदद पहुंचाई। इसके साथ ही, भारत ने मुंबई और हैदराबाद में अफगानिस्तान के कॉन्सुलेट्स तालिबान अधिकारियों को सौंप दिए हैं। हालांकि, नई दिल्ली स्थित अफगान दूतावास अब भी अशरफ गनी सरकार के प्रतिनिधि चार्ज डी’अफेयर्स मोहम्मद इब्राहिम खिल के पास है। सूत्रों का कहना है कि मुत्ताकी की इस यात्रा के दौरान नई दिल्ली स्थित अफगान दूतावास को भी तालिबान अधिकारियों को सौंपे जाने की संभावना पर चर्चा हो सकती है।

Amir Khan Muttaqi visit India

मुत्ताकी 2021 से तालिबान सरकार में विदेश मंत्रालय संभाल रहे हैं और उनकी यह यात्रा भारत-अफगान रिश्तों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। खास बात यह है कि ऐसे समय में जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव चरम पर है, Amir Khan Muttaqi visit India तालिबान के विदेश मंत्री का भारत आना कूटनीतिक समीकरणों में नई हलचल ला सकता है।

Afghanistan FM Amir Khan Muttaqi visit India: Afghanistan’s Foreign Minister Amir Khan Muttaqi is scheduled to visit New Delhi on October 9-10, 2025, marking a key development in India-Afghanistan relations under the Taliban regime. This visit comes at a time of rising Kabul-Islamabad tensions over the Durand Line and Pakistan’s cross-border strikes. India, which has not formally recognized the Taliban government, continues to engage through humanitarian aid, embassy operations, and dialogue. Sources indicate discussions may also cover handing over Afghanistan’s New Delhi embassy to Taliban diplomats, signaling deeper engagement between New Delhi and Kabul despite complex regional challenges.

Mig La Pass: दशहरा पर BRO ने रचा इतिहास, 19,400 फीट पर बनाया दुनिया का सबसे ऊंचा मोटरेबल पास, उमलिंग ला पहुंचा दूसरे नंबर पर

Mig La Pass: BRO Creates History with World’s Highest Motorable Road at 19,400 Feet

Mig La Pass: भारत ने दशहरा के अवसर पर एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन ने लद्दाख में दुनिया का सबसे ऊंचा मोटरेबल पास मिग ला पास तैयार कर लिया है। विजयादशमी के दिन बीआरओ ने मिग ला पास पर झंडा भी फहराया 19,400 फीट की ऊंचाई पर बना यह पास मौजूदा उमलिंगला पास से भी ऊंचा है, जिसकी ऊंचाई 19,024 फीट है। मिग ला पास न केवल इंजीनियरिंग का चमत्कार है, बल्कि यह भारत की सामरिक क्षमता और संकल्प का प्रतीक भी है।

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प्रोजेक्ट हिमांक के तहत बना पास

यह सफलता बीआरओ के प्रसिद्ध प्रोजेक्ट हिमांक के अंतर्गत हासिल हुई। 1 अक्टूबर 2025 को चीफ इंजीनियर ब्रिगेडियर विशाल श्रीवास्तव के नेतृत्व में टीम ने मिग ला पास पर राष्ट्रीय ध्वज और बीआरओ का झंडा फहराया।

इससे पहले लद्दाख का ही उमलिंग ला पास (19,024 फीट, लगभग 5,799 मीटर) दुनिया का सबसे ऊंचा मोटरेबल पास माना जाता था। यह लद्दाख, भारत में हंसुला घाटी में स्थित है और पहले दुनिया का सबसे ऊंचा मोटरेबल पास था। लेकिन अब मिग ला पास (19,400 फीट) ने यह रिकॉर्ड तोड़कर नया इतिहास रच दिया है। बीआरओ ने लगातार कठिन चुनौतियों के बीच काम करते हुए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड को फिर से अपने नाम कर लिया।

Mig La Pass: BRO Creates History with World’s Highest Motorable Road at 19,400 Feet

क्या है इसका रणनीतिक महत्व

Mig La Pass का महत्व केवल ऊंचाई तक सीमित नहीं है। यह मार्ग लिकारू-मिग ला-फुकचे रोड अलाइनमेंट का हिस्सा है और सीधे फुकचे गांव तक कनेक्टिविटी प्रदान करता है। फुकचे भारत-चीन सीमा के बेहद नजदीक है, इसलिए यह मार्ग भारतीय सेना के लिए एक तीसरा अहम एक्सिस बन गया है। मिग ला पास से जुड़ी सड़क फुकचे गांव तक जाती है। यह गांव भारत-चीन सीमा के पास स्थित है और यहां के स्थानीय निवासियों को भी इस सड़क से बड़ा फायदा होगा। पहले यहां तक पहुंचना बेहद कठिन था, लेकिन अब बेहतर कनेक्टिविटी से लोगों के जीवन स्तर में सुधार आएगा।

इस पास के जरिए तेजी से सैनिकों, वाहनों और रसद की आवाजाही आसान होगी। अब दौलत बेग ओल्डी जैसे सामरिक एयरबेस और अन्य फॉरवर्ड पोस्ट तक पहुंच आसान हो जाएगी।

किया कई चुनौतियों का सामना

19,400 फीट की ऊंचाई पर सड़क निर्माण किसी भी इंजीनियरिंग संस्था के लिए आसान नहीं होता। यहां ऑक्सीजन की मात्रा समुद्र तल की तुलना में लगभग 50 फीसदी कम होती है। -40°C तक गिरने वाले तापमान, लगातार बर्फबारी, भूस्खलन और ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी इलाकों ने निर्माण कार्य को और कठिन बना दिया।

फिर भी BRO की टीम ने अदम्य साहस और तकनीकी उत्कृष्टता दिखाते हुए असंभव को संभव बना दिया। ब्रिगेडियर विशाल श्रीवास्तव ने कहा, “यह उपलब्धि हमारी टीम की निष्ठा, दृढ़ संकल्प और भारत की सीमाओं की सुरक्षा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है।”

वहीं, मिग ला पास का सीधा लाभ भारतीय सेना को मिलेगा। इस मार्ग से अब भारी सैन्य वाहन और सप्लाई ट्रक आसानी से आगे तक जा सकेंगे। इसके अलावा, यह सड़क से किसी भी आकस्मिक परिस्थिति में सेना की तेजी से तैनाती संभव होगी। सरहद पर चीन के साथ मौजूद संवेदनशील परिस्थितियों को देखते हुए यह उपलब्धि सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

Mig La Pass: BRO Creates History with World’s Highest Motorable Road at 19,400 Feet

वहीं, सैन्य महत्व के अलावा मिग ला पास का पर्यटन की दृष्टि से भी बड़ा महत्व है। लद्दाख पहले से ही रोमांचक पर्यटन और एडवेंचर स्पोर्ट्स का गढ़ है। अब 19,400 फीट की ऊंचाई पर स्थित मिग ला पास साहसिक यात्रियों और बाइकर्स के लिए एक नया आकर्षण होगा।

यह पास आगंतुकों को सिंधु घाटी के अद्भुत नज़ारे और बर्फीले पहाड़ों की भव्यता का अनुभव कराएगा। हालांकि, इतनी ऊंचाई पर यात्रा करने से पहले स्वास्थ्य और सुरक्षा के विशेष इंतजाम जरूरी होंगे।

बीआरओ ने बनाए सबसे ऊंचे मोटरेबल पास

बीआरओ अब तक दुनिया के 14 सबसे ऊंचे मोटरेबल पास में से 11 का निर्माण कर चुका है। जिससे न केवल भारत की सीमाओं को मजबूत हो रही हैं, बल्कि इंजीनियरिंग की दृष्टि से नए आयाम भी स्थापित कर रही है। Mig La Pass पर काम पूरा करना इस बात का प्रमाण है कि भारतीय इंजीनियर किसी भी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपनी क्षमता का परिचय दे सकते हैं।

Mig La Pass: BRO Creates History with World’s Highest Motorable Road at 19,400 Feet

Mig La Pass उमलिंग ला से भी ऊंचा

अगर Mig La Pass पास की तुलना उमलिंग ला पास से की जाए तो दोनों ही लद्दाख की ऊंचाई वाली घाटियों में हैं। उमलिंग ला पास 19,024 फीट पर स्थित है और यह भी बीआरओ द्वारा बनाया गया था। लेकिन मिग ला पास 19,400 फीट की ऊंचाई के साथ अब सबसे ऊपर है।

यह ऊंचाई माउंट एवरेस्ट बेस कैंप (17,600 फीट) से भी अधिक है और एवरेस्ट कैंप-1 (20,000 फीट) से केवल 600 फीट नीचे है। जिससे पता चलता है यहां सड़क बनाना कितना चुनौतीपू्र्ण रहा होगा।

Rajnath Singh Shastra Puja: दशहरा पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की पाकिस्तान को चेतावनी, सर क्रीक सेक्टर में न करे कोई दुस्साहस

Rajnath Singh Shastra Puja

Rajnath Singh Shastra Puja: विजयादशमी के अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुजरात के भुज मिलिट्री स्टेशन पर शस्त्र पूजन किया और भारतीय सशस्त्र बलों के शौर्य को नमन किया। इस मौके पर उन्होंने पाकिस्तान पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम की पोल खोलकर रख दी और यह साबित कर दिया कि भारत किसी भी परिस्थिति में निर्णायक जवाब देने में सक्षम है।

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राजनाथ सिंह ने कहा कि पाकिस्तान ने लेह से लेकर सर क्रीक सेक्टर तक भारत की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देने की कोशिश की थी, लेकिन भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना ने रिकॉर्ड समय में ऑपरेशन चलाकर न केवल पाकिस्तान की मंशा को नाकाम किया बल्कि उसकी एयर डिफेंस की कमजोरी भी दुनिया के सामने ला कर रख दी।

Rajnath Singh Shastra Puja

सर क्रीक सेक्टर को लेकर दी चेतावनी

रक्षा मंत्री ने पाकिस्तान को चेताते हुए कहा कि वह लगातार सर क्रीक सेक्टर में विवाद खड़ा करने की कोशिश कर रहा है और मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा बातचीत के जरिए समाधान की कोशिश की है लेकिन पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आता।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर पाकिस्तान ने सर क्रीक सेक्टर में कोई दुस्साहस किया तो उसका जवाब इतना कड़ा होगा कि इतिहास और भूगोल दोनों बदल जाएंगे। 1965 में भारतीय सेना लाहौर तक पहुंची थी और पाकिस्तान को याद रखना चाहिए कि 2025 में क्रीक से कराची का रास्ता भी जाता है।”

जॉइंटनेस से मिली ऑपरेशन सिंदूर में सफलता

राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर की सफलता भारतीय सेनाओं की जॉइंटनेस और सामंजस्य का परिणाम है। इस ऑपरेशन में थल सेना, वायु सेना और नौसेना ने मिलकर रणनीतिक कौशल और साहस का परिचय दिया। उन्होंने सैनिकों और अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि भारत की सेनाओं ने यह साबित कर दिया है कि वे हर चुनौती का सामना कर सकती हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत ने संयम का परिचय दिया क्योंकि यह ऑपरेशन आतंकवाद के खिलाफ था, न कि युद्ध छेड़ने के लिए। सभी सैन्य उद्देश्यों को सफलतापूर्वक हासिल किया गया और आतंक के खिलाफ भारत का संकल्प अडिग है।

विजयादशमी पर शस्त्र पूजन के महत्व पर बोलते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि भारत की सभ्यता का प्रतीक है। किसान हल की पूजा करता है, विद्यार्थी किताबों की पूजा करता है और सैनिक अपने हथियारों की पूजा करता है।

राजनाथ सिंह ने कहा, “ज्ञान बिना शक्ति असुरक्षित है और शक्ति बिना ज्ञान अराजकता लाती है। शास्त्र (ज्ञान) और शस्त्र (हथियार) का संतुलन ही हमारी सभ्यता को अमर और अजेय बनाता है।”

आत्मनिर्भर भारत का विजन

रक्षा मंत्री ने बताया कि भारत आज आत्मनिर्भर भारत के विजन के तहत रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बन रहा है। भारत अब न केवल अपने हथियार बना रहा है बल्कि उन्हें निर्यात भी कर रहा है। उन्होंने कहा कि आज भारतीय सैनिक मिशन एरिया में पूरी तरह स्वदेशी उपकरणों का उपयोग कर रहे हैं।

रक्षा मंत्री ने तीनों सेनाओं की संयुक्तता की सराहना की और कहा कि वे भारत की सुरक्षा के तीन मजबूत स्तंभ हैं। उन्होंने हाल ही में की गई एक्सरसाइज वरुणास्त्र का भी जिक्र किया, जिसमें तीनों सेनाओं की संयुक्त क्षमता और तैयारी को दिखाया गया।

नई चुनौतियों का किया जिक्र

अपने संबोधन में राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की सीमाओं पर हमेशा चुनौतियां रही हैं, लेकिन अब वे और जटिल हो गई हैं। आज बाहरी आक्रमण के साथ-साथ आतंकवाद, साइबर युद्ध और सूचना युद्ध भी बड़े खतरे के रूप में सामने आ रहे हैं। उन्होंने सैनिकों से हर परिस्थिति के लिए तैयार रहने की अपील की।

महात्मा गांधी को किया याद

रक्षा मंत्री ने विजयादशमी और महात्मा गांधी जयंती पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह पर्व हमें सिखाता है कि बुराई कितनी भी ताकतवर क्यों न लगे, अंततः अच्छाई ही जीतती है। शस्त्र पूजन भारत के राष्ट्रीय जीवन से जुड़ा है और यह हमारे सामूहिक बल और स्वतंत्रता का सम्मान है।

महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देते हुए उन्होंने कहा कि गांधीजी ने केवल आत्मबल के सहारे सबसे शक्तिशाली साम्राज्य को झुकने पर मजबूर किया। उन्होंने कहा कि आज हमारे सैनिकों के पास मनोबल भी है और हथियार भी, इसलिए कोई चुनौती उनके सामने टिक नहीं सकती।

इस मौके पर रक्षा मंत्री ने सर क्रीक सेक्टर में टाइडल इंडिपेंडेंट बर्थिंग फैसिलिटी और जॉइंट कंट्रोल सेंटर का वर्चुअल उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि ये सुविधाएं तटीय सुरक्षा, संयुक्त ऑपरेशनल क्षमता और किसी भी खतरे का तेजी से जवाब देने में मददगार साबित होंगी।

वहीं, इस मौके पर चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी, साउदर्न आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ, 12 कॉर्प्स कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल आदित्य विक्रम सिंह राठी और एयर फोर्स स्टेशन भुज के एयर कमोडोर केपीएस धाम भी मौजूद थे।

Opinion: From Rama to Gandhi to Operation Sindoor; India’s Eternal Triumph of Truth

Dussehra and Gandhi Jayanti

It is not often that epic and modern history converge on the same calendar date to remind us of timeless values. This year, Dussehra and Gandhi Jayanti fall together, offering India a rare moment of reflection. One festival takes us back to the epic battle of Lord Rama against Ravana; the other recalls Mahatma Gandhi’s lifelong struggle against colonial injustice. Both, however, shine as twin lights of truth-illuminating India’s path with faith, courage, and righteousness.

Opinion: क्या अब ‘नो रिटर्न पॉइंट’ पर पहुंच चुका है मणिपुर? या फिर शांति और विकास की नई सुबह की उम्मीद बाकी है?

The Eternal Lesson of Dussehra

Dussehra, or Vijaya Dashami, tells us that darkness cannot overcome light. In the north, it symbolizes Lord Rama’s victory over Ravana, an arrogant monarch consumed by deceit and lust. In the east, it is remembered as Goddess Durga’s triumph over the demon Mahishasura, a celebration of justice over oppression.

The traditions vary-effigy burning in the north, Ayudha Puja in the south, Shami worship in the west-but the essence is universal. Dussehra is not just about external battles; it is about the inner Ravanas of greed, ego, and anger. It teaches us that humility, truth, and self-belief are the real weapons-the true brahmastra-to overcome adversity, both within and outside.

Lt Gen Anil Puri, PVSM, AVSM, SM, VSM (Retd)
Lt Gen Anil Puri, PVSM, AVSM, SM, VSM (Retd)

Gandhi Jayanti and the Force of Ahimsa

On the same day, India honours the birth of Mahatma Gandhi, the apostle of Satya (truth) and Ahimsa (non-violence). Gandhi’s battles were not fought with bows or swords but with the quiet force of the soul. For him, truth was synonymous with God, and self-realisation was the beginning of social change.

Gandhi’s idea of Atmanirbharta (self-reliance) was profound. Whether through the spinning wheel of khadi or the simplicity of village life, he taught that true independence was not just political or economic, but moral. His emphasis on cleanliness, long before it became a national mission, linked outer purity with inner discipline.

If Dussehra speaks of divine power defeating arrogance, Gandhi Jayanti speaks of moral power defeating injustice. Together, they underline that courage and faith are the twin foundations of any righteous struggle.

A Shared Legacy in Modern India

These values are not confined to epic or history-they echo in India’s contemporary journey. The Indian Army’s Operation Sindoor, a calibrated and proportional military action, reflected the same principle: strength balanced by restraint. Much like Gandhi’s approach to injustice, the operation was not about overkill, but about decisive, measured response.

Similarly, today’s calls for Atmanirbharta and cleanliness are not mere government campaigns. They are extensions of age-old lessons-self-reliance, dignity, and moral strength. They remind us that progress is sustainable only when it is rooted in self-belief and discipline.

Why This Convergence Matters

When epic and history converge, they create a guiding star for the nation. Both Dussehra and Gandhi Jayanti remind us to burn the effigies of hatred, anger, and greed, and instead embrace compassion, truth, and peace. They show us that the greatest victory is not over others but over ourselves.

From the battlefield of Lanka to the quiet strength of Sabarmati, from Rama’s bow to Gandhi’s walking stick, and from ancient epics to modern conflicts, India’s message has been consistent: true power lies in righteousness, not excess.

Final Reflection

In celebrating these two occasions together, India is reminded of its noblest aspiration: to be a nation that is self-reliant, disciplined, and capable of strength with restraint. The legacy of Dussehra and Gandhi Jayanti is not just religious or political-it is civilisational.

Both urge us to live as better human beings and to strive for a society where harmony prevails. That is the noble goal they leave behind: progress with purpose, strength with wisdom, and truth as the eternal light.

 

Raksha Mantri at Bhuj: दशहरा मनाने भुज पहुंचे रक्षा मंत्री, बोले- नई तकनीक अपनाएं जवान, ट्रेनिंग पर दें जोर

Raksha Mantri at Bhuj
सैनिकों के साथ दशहरा मनाने भुज पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बड़ाखाना में शामिल होते हुए। साथ में सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ।

Raksha Mantri at Bhuj: विजयदशमी की पूर्व संध्या पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुजरात के भुज में सेना के जवानों के साथ परंपरागत ‘बराखाना’ में शामिल होकर उनके साथ बातचीत में शामिल हुए। इस मौके पर उन्होंने सैनिकों को संबोधित करते हुए बदलते समय और मुश्किल चुनौतियों पर पर चर्चा की और उनसे नई तकनीक को अपनाने, नियमित ट्रेनिंग को प्राथमिकता देने और हर परिस्थिति में तैयार रहने का आह्वान किया।

Rajnath Singh Celebrate Dussehra: भुज में जवानों के साथ दशहरा मनाएंगे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, देखेंगे संयुक्त सैन्य अभ्यास

रक्षा मंत्री ने कहा कि आज की दुनिया बेहद तेजी से बदल रही है। तकनीक का स्वरूप लगातार बदल रहा है। जो चीज कुछ समय पहले आधुनिक लगती थी, वह आज अप्रासंगिक हो रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पारंपरिक खतरों के साथ-साथ आतंकवाद, साइबर हमले, ड्रोन युद्ध और सूचना युद्ध जैसे नए खतरे भी सामने आ रहे हैं। इन खतरों से केवल हथियारों के बल पर नहीं निपटा जा सकता। उन्होंने कहा कि मानसिक मजबूती, अपडेटेड जानकारी और परिस्थितियों के अनुसार तुरंत ढलने की क्षमता भी उतनी ही जरूरी है।

विजयदशमी की शुभकामनाएं देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि यह पर्व अच्छाई की बुराई पर, सत्य की असत्य पर और न्याय की अन्याय पर विजय का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस पावन अवसर पर भुज की धरती पर सैनिकों के साथ समय बिताना उनके लिए गर्व की बात है। Raksha Mantri at Bhuj धरती हमेशा से साहस और पराक्रम के लिए जानी जाती रही है।

Raksha Mantri at Bhuj

सैनिकों को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा, “युद्ध केवल हथियारों से नहीं जीते जाते, बल्कि अनुशासन, मनोबल और निरंतर तैयारियों से जीते जाते हैं। नई तकनीकों को अपनाइए, ट्रेनिंग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाइए और हर परिस्थिति के लिए खुद को तैयार रखिए। आज की दुनिया में वही सेना अजेय रहती है, जो लगातार सीखती है और नई चुनौतियों के अनुसार खुद को ढालती है।”

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार सैनिकों के कल्याण, भारतीय सेनाओं के आधुनिकीकरण, वेटरंस के सम्मान और सैनिक परिवारों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उनके शब्दों में, “हमारे सैनिकों की भलाई किसी भी कीमत पर समझौते योग्य नहीं है।”

रक्षा मंत्री ने यह भी दोहराया कि एक मजबूत, आत्मनिर्भर और विकसित भारत का सपना हमारे सैनिकों के कंधों पर टिका है। उनकी निष्ठा और बलिदान के कारण ही यह सपना हर दिन साकार हो रहा है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी भारत की सदी है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। रक्षा मंत्री ने विश्वास जताया कि आर्म्ड फोर्सेस की प्रतिबद्धता के दम पर भारत जल्द ही दुनिया की सबसे सक्षम सेनाओं में शामिल होगा।

Raksha Mantri at Bhuj की धरती की वीरता को याद करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि यह केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि साहस और संघर्ष की गाथा है। उन्होंने 1971 के युद्ध, 1999 के कारगिल संघर्ष और 2001 के विनाशकारी भूकंप का जिक्र करते हुए कहा कि भुज ने हमेशा राख से उठने वाले पौराणिक फीनिक्स पक्षी की तरह खुद को साबित किया है। उन्होंने कहा, “कच्छ की मिट्टी के कणों में यहां के लोगों और सैनिकों का साहस और अदम्य जज्बा बसता है।”

इस अवसर पर चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल उपेन्द्र द्विवेदी, साउदर्न कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ और 12 कोर के कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल आदित्य विक्रम सिंह राठी भी मौजूद रहे।

Raksha Mantri at Bhuj की लगातार चर्चा हो रही है क्योंकि Bhuj की धरती हमेशा ही याद की जाती हैं।

Protests in POJK: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के लोगों ने पाक को बताया ‘चुड़ैल’, कोटली से मुजफ्फराबाद तक हालात हुए बेकाबू

Protests in POJK: Clashes erupt across Kotli, Muzaffarabad, Rawalakot and Bagh

Protests in POJK: पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में हालात बिगड़ते जा रहे हैं। 30 सितंबर को कई जिलों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए, जिनमें पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच हिंसक झड़पें भी हुईं। कोटली, दादयाल, बाग, रावलाकोट और राजधानी मुजफ्फराबाद में हजारों लोग सड़कों पर उतरे। इन प्रदर्शनों के पीछे जम्मू-कश्मीर अवामी एक्शन कमेटी की अहम भूमिका रही है।

कोटली जिले के दादयाल में अवामी एक्शन कमेटी के काफिले पहुंचे। ये काफिले रावलाकोट और मीरपुर से आए थे। प्रशासन ने इन्हें रोकने के लिए पलक ब्रिज पर कंटेनर रख दिए थे। लेकिन प्रदर्शनकारियों ने सभी बाधाओं को हटाकर आगे बढ़ना जारी रखा। यह काफिला मुजफ्फराबाद की ओर बढ़ रहा है और स्थानीय लोगों की संख्या भी इसमें लगातार बढ़ रही है।

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मुजफ्फराबाद में सबसे ज्यादा हिंसा और मौतें – Protests in POJK

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की राजधानी मुजफ्फराबाद में हालात सबसे अधिक तनावपूर्ण रहे। लाल चौक इलाके में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ। पाकिस्तानी पुलिस ने गोलीबारी की, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हुए। इस घटना ने प्रदर्शनकारियों का गुस्सा और भड़का दिया।

जम्मू-कश्मीर अवामी एक्शन कमेटी नेतृत्व ने सरकार से तुरंत मोबाइल सेवाएं बहाल करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह मांग नहीं मानी गई, तो संचार टावर गिरा दिए जाएंगे।

रावलाकोट में नारेबाजी

रावलाकोट, जिसे लंबे समय से पाकिस्तान की आईएसआई का ठिकाना माना जाता है और जहां से भारत विरोधी गतिविधियां संचालित की जाती रही हैं, अब पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ विरोध का केंद्र बन गया है। यहां बड़ी संख्या में लोगों ने प्रदर्शन किया और नारे लगाए कि कश्मीर के संसाधनों पर पहला अधिकार स्थानीय जनता का है।

वहीं, बाग जिले में हिंसा और तेज रही। यहां स्थानीय लोगों और पंजाब पुलिस के जवानों के बीच झड़प हुई। रिपोर्ट्स के मुताबिक कई पुलिसकर्मियों को प्रदर्शनकारियों ने पकड़ लिया। इस घटना के बाद से पाकिस्तानी प्रशासन सकते में है, Protests in POJK अब चर्चा का विषय रहने वाला है।

 

मार्च से बिगड़ सकते हैं हालात

अवामी एक्शन कमेटी ने सभी जिलों के लोगों से 1 अक्टूबर को मुजफ्फराबाद की ओर मार्च करने की अपील की थी। इस आह्वान से साफ है कि आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं।

पाकिस्तान की तुलना चुड़ैल से

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में अवामी एक्शन कमेटी के शीर्ष नेता शौकत नवाज मीर ने पाकिस्तान सरकार और सेना पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद की सरकार और रावलपिंडी स्थित सेना जनता को दबा रही है। उन्होंने पाकिस्तान की तुलना एक ऐसी चुड़ैल से की है जो अपने ही लोगों को मारने पर तुली है।

मीर ने कहा कि तथाकथित “आजाद कश्मीर” असल में बिल्कुल भी आजाद नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर ने पहलगाम हमले से पहले हिंदुओं को “काफिर” कहा था। मीर का आरोप है कि पाकिस्तान दूसरों पर अत्याचारों का आरोप लगाता है, लेकिन खुद अपने ही नागरिकों पर अत्याचार करता है।

मीर ने यह भी कहा कि पाकिस्तान में आम लोगों की आवाज को कुचला जा रहा है। स्थानीय मीडिया को चुप करा दिया गया है और जो लोग हक की बात कर रहे हैं उन्हें पुलिस और सेना द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि जो पाकिस्तानी फोर्स खुद उन्हीं लोगों को मारती है, जिनका प्रतिनिधित्व करने का दावा करती है, उसकी वैधता पर सवाल उठना लाजमी है।

वहीं, पीओजेके में चल रहे विरोध प्रदर्शनों ने यह दिखा दिया है कि यहां के लोग पाकिस्तानी शासन से बेहद नाराज हैं। राजनीतिक दमन, आर्थिक शोषण और अत्यधिक बल प्रयोग ने जनता का सब्र तोड़ दिया है। अब वही इलाके, जिन्हें कभी भारत विरोधी गतिविधियों का गढ़ कहा जाता था, पाकिस्तान के खिलाफ आवाज उठाने लगे हैं।

पाकिस्तानी सेना पर जनता का गुस्सा

मुजफ्फराबाद से लेकर बाग तक, हर जगह जनता ने पाकिस्तानी फोर्स की कार्रवाई का जवाब दिया है। कई जगह प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बल को घेर लिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके संसाधनों का शोषण हो रहा है और पाकिस्तान उन्हें अधिकार देने के बजाय उनकी जिंदगी और मुश्किल बना रहा है।

Protests in POJK have escalated with violent clashes reported in Muzaffarabad, Kotli, Dadyal, Rawalakot and Bagh. In Muzaffarabad, Pakistani police opened fire on demonstrators, killing two and injuring several. Protesters in Bagh captured Punjab Police personnel, while in Rawalakot, large gatherings raised slogans against Pakistan’s exploitation of Kashmir’s resources. The Jammu & Kashmir Awami Action Committee (JKAAC) has demanded restoration of mobile services and warned of dismantling towers if ignored. JKAAC leader Shaukat Nawaz Mir accused Pakistan’s government and army of suppressing voices in so-called “Azad Kashmir.” A mass march to Muzaffarabad has been announced for October 1.

India UN Peacekeeping Policy: भारत ने कहा- यूक्रेन और गाजा में सैनिक तैनाती केवल यूएन के तहत ही, UNTCC में 30 देश होंगे शामिल, चीन-पाकिस्तान नहीं

India UN Peacekeeping Policy: New Delhi rules out troop deployment in Ukraine, Gaza without UN mandate

India UN Peacekeeping Policy: भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी विदेशी संघर्ष क्षेत्र, चाहे वह यूक्रेन हो या गाजा, में अपने सैनिक तभी भेजेगा जब यह मिशन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के तहत और संयुक्त राष्ट्र के झंडे के नीचे होगा। यह बयान उस समय आया जब मीडिया ने भारत से यह सवाल पूछा कि क्या नई दिल्ली मौजूदा जंग वााले इलाकों जैसे गाजा यूक्रेन में शांति सैनिक तैनात करने पर विचार कर रहा है।

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संयुक्त राष्ट्र के झंडे के नीचे काम करे शांति सेना

दिल्ली में आयोजित संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों से जुड़े आर्मी चीफ्स के सम्मेलन से पहले आयोजित एक कर्टेन रेजर इवेंट में विदेश मंत्रालय से रक्षा मंत्रालय में नियुक्त अधिकारी जॉइंट सेक्रेटरी विश्वेश नेगी और वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल राकेश कपूर ने भारत का रुख दुनिया के सामने रखा।

India UN Peacekeeping Policy: New Delhi rules out troop deployment in Ukraine, Gaza without UN mandate

विश्वेश नेगी ने साफ शब्दों में कहा कि भारत की स्थिति वर्षों से बिल्कुल स्पष्ट है। भारतीय सैनिक केवल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी के बाद ही किसी शांति मिशन का हिस्सा बनते हैं। उन्होंने कहा कि भारत के लिए वैधता का मतलब यही है कि शांति सेना संयुक्त राष्ट्र के झंडे के नीचे काम करे।

उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा हालात में यूक्रेन और गाजा जैसे संघर्ष वाले क्षेत्रों में संयुक्त राष्ट्र की शांति सेना भेजे जाने की संभावना बेहद कम है। कारण यह है कि सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता में शामिल देशों के बीच आम सहमति बन पाना लगभग असंभव है।

51 मिशनों में भारत ने 182 से ज्यादा जवान खोए

लेफ्टिनेंट जनरल राकेश कपूर ने भी भारत की स्थिति को और स्पष्ट करते हुए कहा, “हम केवल संयुक्त राष्ट्र के झंडे के नीचे ही काम करते हैं, क्योंकि हमें वैधता की अहमियत समझ आती है।” उन्होंने बताया कि भारत दुनिया के सबसे बड़े शांति सैनिक भेजने वाले देशों में से एक है और पिछले 75 सालों में 50 से अधिक मिशनों में 2,90,000 से ज्यादा भारतीय सैनिक और पुलिस कर्मियों ने हिस्सा लिया है। वहीं 51 मिशनों में भारत ने 182 से ज्यादा जवान खोए भी हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह नीति भारत की विदेश नीति का अभिन्न हिस्सा है और इसका पालन हर हाल में किया जाएगा।

India UN Peacekeeping Policy: New Delhi rules out troop deployment in Ukraine, Gaza without UN mandate
LT GEN RAKESH KAPOOR, AVSM, VSM, DCOAS (IS&T)

यूएन से बाहर किसी भी शांति सेना का हिस्सा नहीं बनेगा भारत

India UN Peacekeeping Policy के तहत  वहीं, मीडिया के इस सवाल पर कि क्या भारत भविष्य में यूक्रेन युद्ध या गाजा युद्ध में सैनिक भेज सकता है। इस पर कपूर ने कहा कि यह सवाल जायज है क्योंकि आज की दुनिया में युद्धों की प्रकृति बदल चुकी है। पहले संयुक्त राष्ट्र के शांति सैनिक केवल सीजफायर लाइन पर निगरानी करते थे। लेकिन अब युद्धों का स्वरूप बदल गया गए हैं, जिसमें नॉन स्टेट एलिमेंट्स, एनजीओ और नई टेक्नोलॉजी शामिल हो गई हैं।

उन्होंने साफ कहा कि भारत कभी भी संयुक्त राष्ट्र से बाहर किसी भी शांति सेना का हिस्सा नहीं बनेगा। केवल यूनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल के चार्टर के चैप्टर 6 और चैप्टर 7 के तहत आने वाले मिशनों में ही भारतीय सैनिक तैनात होंगे।

कपूर ने यह भी स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र के मौजूदा स्ट्रक्चर और सुरक्षा परिषद की राजनीति को देखते हुए, यूक्रेन या गाजा जैसे इलाकों में शांति सेना भेजना लगभग असंभव है।

बता दें कि इजरायल के राजदूत नाओर गिलोन अजार ने कहा था कि गाजा में तुरंत तैनात की जाने वाली इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फोर्स (ISF) में भारत की भागीदारी का फैसला पूरी तरह नई दिल्ली पर निर्भर है। उन्होंने कहा, भारत स्वयं तय करेगा कि वह ऐसी किसी बहुराष्ट्रीय ताकत का हिस्सा बनेगा या नहीं। इजरायल की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब गाजा संकट को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति बनाए रखने के लिए संभावित सैन्य बल की चर्चा चल रही है। भारत पहले ही साफ कर चुका है कि वह केवल संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव वाले मिशनों में ही सैनिक भेजेगा।

India UN Peacekeeping Policy: New Delhi rules out troop deployment in Ukraine, Gaza without UN mandate

भारत ने पहली महिला पुलिस यूनिट की तैनात

भारत की भूमिका संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में हमेशा महत्वपूर्ण रही है। 1948 में कांगो से लेकर हाल के अफ्रीका और पश्चिम एशिया के मिशनों तक, भारतीय सैनिकों ने शांति स्थापित करने और बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई है।

2007 में भारत ने लाइबेरिया में पहली बार पूरी तरह महिला पुलिस यूनिट तैनात कर इतिहास रचा। इसके बाद से भारतीय सेना और अन्य बल हर मिशन में महिला एंगेजमेंट टीम्स भेज रहे हैं, जो सीधे तौर पर संघर्षग्रस्त इलाकों की स्थानीय आबादी, खासकर महिलाओं से संवाद करती हैं और बच्चों से बातचीत कर शांति की प्रक्रिया को मजबूत करती हैं।

उन्होंने बताया कि संघर्ष के समय सबसे अधिक प्रभावित होने वाला वर्ग महिलाएं ही होती हैं। ऐसे में जब हमारी महिला टीमें उनसे जुड़ती हैं, तो वे उनकी समस्याओं को बेहतर तरीके से समझ पाती हैं। साथ ही, स्थानीय महिलाओं को यह भी प्रेरणा मिलती है कि वे भी समाज में सक्रिय भूमिका निभा सकती हैं।

महिलाओं की भागीदारी की भागीदारी 20 फीसदी तक

भारतीय सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राकेश कपूर ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र ने शांति मिशनों में महिलाओं की भागीदारी के लिए लक्ष्य तय किए हैं। आज की स्थिति में, अलग-अलग रोल में भारतीय योगदान लगभग 20 फीसदी तक पहुंच चुका है, खासकर स्टाफ ऑफिसर और ऑब्जर्वर स्तर पर। हालांकि, महिला कंटिंजेंट्स की संख्या बढ़ाने की दिशा में और काम किया जा रहा है।

India UN Peacekeeping Policy के तहत कपूर ने कहा कि भारत शांति मिशनों में महिला मनोवैज्ञानिक काउंसलर भी भेज रहा है। उनका काम युद्ध या संघर्ष से प्रभावित परिवारों, खासकर महिलाओं और बच्चों की मानसिक स्थिति को संभालना है। मानसिक स्वास्थ्य और वेल-बीइंग पर भारतीय योगदान संयुक्त राष्ट्र के लिए एक नया मानदंड बना रहा है।

30 देशों सैन्य प्रमुख लेंगे हिस्सा, चीन-पाक नहीं शामिल

भारत 14 से 16 अक्टूबर तक नई दिल्ली में संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में सैनिक भेजने वाले देशों (Troop Contributing Countries – TCCs) के आर्मी चीफ्स का सम्मेलन आयोजित करेगा। इसमें 30 से अधिक देशों के सैन्य प्रमुख और वरिष्ठ अधिकारी हिस्सा लेंगे।

India UN Peacekeeping Policy सम्मेलन में अल्जीरिया, आर्मेनिया, बांग्लादेश, भूटान, ब्राज़ील, बुरुंडी, कंबोडिया, कोट डी आईवोर, इथियोपिया, फिजी, फ्रांस, घाना, इंडोनेशिया, कजाखस्तान, केन्या, किर्गिस्तान, मेडागास्कर, मलेशिया, मंगोलिया, मोरक्को, नेपाल, नाइजीरिया, रवांडा, सेनेगल, श्रीलंका, तंजानिया, युगांडा, उरुग्वे, वियतनाम और इटली जैसे देश शामिल होंगे। हालांकि अहम बात यह है कि पाकिस्तान और चीन को इस सम्मेलन में आमंत्रित नहीं किया गया है।

स्वदेशी डिफेंस इक्विपमेंट्स शोकेस करेगा भारत

राकेश कपूर ने कहा कि पहले के समय भारत को इक्विपमेंट्स लीज पर लेने पड़ते थे, लेकिन अब सभी भारतीय कंटिंजेंट्स पूरी तरह स्वदेशी उपकरणों का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं, सम्मेलन के दौरान भारत अपने स्वदेशी डिफेंस इक्विपमेंट्स को भी शोकेस करेगा, जो शांति मिशनों में इस्तेमाल किए जा रहे हैं। लेफ्टिनेंट जनरल कपूर ने बताया कि आज भारतीय कंटिंजेंट्स लगभग 1600 तरह के स्वदेशी उपकरणों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

इनमें प्रोटेक्टेड व्हीकल्स, नाइट विजन डिवाइस और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल इक्विपमेंट्स शामिल हैं। ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय इक्विपमेंट्स के शानदार परफॉरमेंस ने कई देशों का ध्यान भी खींचा है और कई देशों ने इन्हें खरीदने में रुचि दिखाई है।

यूएन शांति मिशनों में भारत का ग्रीन एनर्जी पर जोर

लेफ्टिनेंट जनरल राकेश कपूर ने बताया कि भारतीय सेना संयुक्त राष्ट्र मिशनों में डिजिटाइजेशन को भी प्राथमिकता दे रही है। भारत ने ‘युनिट अवेयर प्रोग्राम’ लॉन्च किया है जो बेहतर सिचुएशनल अवेयरनेस प्रदान करता है। इसके अलावा, भारतीय सेना अपने घरेलू स्तर पर विकसित डिजिटाइजेशन सॉल्यूशंस भी साझा करने के लिए तैयार है।

उन्होंने बताया कि भारत अपने सैनिकों को साइबर सुरक्षा, नई एनक्रिप्शन तकनीक और मिनिएचराइज्ड उपकरणों से लैस कर रहा है। इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल डिवाइस और थर्मल इमेजिंग जैसे संसाधन अब भारतीय सैनिकों के पास मौजूद हैं ताकि वे हर परिस्थिति में काम कर सकें।

उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में भारत ग्रीन एनर्जी पर भी जोर दे रहा है। भारतीय सेना ने बताया कि एक बड़े ग्रीन एनर्जी प्लांट की स्थापना की जा रही है, जो संभवतः किसी मिशन एरिया में भारत द्वारा लगाया जाने वाला सबसे बड़ा प्रोजेक्ट होगा।

लेफ्टिनेंट जनरल राकेश कपूर के मुताबिक भारतीय सेना का मानना है कि सतत शांति केवल तब संभव है जब समाज के हर वर्ग को साथ लिया जाए। महिलाओं को शामिल करना, मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना, इंडिजिनस तकनीक का इस्तेमाल और डिजिटाइजेशन की दिशा में काम करना, ये सभी कदम इसी सोच का हिस्सा हैं।

India UN Peacekeeping Policy has once again been reiterated, with New Delhi making it clear that Indian troops will only be deployed under a clear United Nations Security Council (UNSC) mandate and strictly under the UN flag. Dismissing the possibility of sending soldiers to conflict zones like Ukraine or Gaza without UN approval, Lt Gen Rakesh Kapoor and MEA official Vishwesh Negi emphasized India’s long-standing position. From October 14–16, New Delhi will host the UNTCC Chiefs Conclave with military leaders from 30 nations, excluding Pakistan and China. India will also showcase its indigenous defence equipment used in UN missions.

Tejas Mk1A Engine Delivery: एचएएल को जीई से मिला चौथा एफ404 इंजन, वायुसेना को जल्द होगी दो तेजस जेट्स की डिलीवरी

Tejas Mk1A Engine GE-F404 engine
GE-F404 engine

Tejas Mk1A Engine Delivery: हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस से चौथा जीई-एफ404 इंजन मिल गया है। यह डिलीवरी 2021 में साइन हुए उस कॉन्ट्रैक्ट का हिस्सा है जिसके तहत जीई को एचएएल को कुल 99 इंजन उपलब्ध कराने हैं। इन इंजनों की सप्लाई से स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस एमके1ए के प्रोडक्शन में तेजी आएगी और भारतीय वायुसेना को जल्द ही पहले एमके1ए जेट्स मिलने का रास्ता साफ होगा।

Tejas Mk-1A Price Hike: अब 97 नए तेजस मार्क-1ए को महंगे दामों पर बेचेगी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड! जानें HAL ने क्यों बढ़ाईं कीमतें?

वायुसेना को जल्द मिलेंगे दो तेजस Mk1A – Tejas Mk1A Engine Delivery

एचएएल अधिकारियों ने पुष्टि की है कि पहले दो तेजस एमके1ए विमान भारतीय वायुसेना को सौंपने के लिए तैयार हैं। इसके अलावा कम से कम 10 अतिरिक्त यूनिट्स भी एचएएल ने असेंबल कर ली हैं और वे सिर्फ इंजनों का इंतजार कर रही हैं। एचएएल ने बताया कि “हमारी तैयारी पूरी है। दो जेट्स की डिलीवरी जल्द की जा सकती है। सूत्रों का कहना है कि तेजस एमके1ए के वेपन इंटीग्रेशन ट्रायल पूरे कर लिए हैं, जिसमें अस्त्रा और ASRAAM मिसाइलों का सफल परीक्षण भी शामिल है। उन्होंने बताया कि 10 और विमान तैयार हैं जिनमें इंजन लगते ही उड़ान भर सकेंगे।”

भारत ने 2021 में जीई एयरोस्पेस के साथ 716 मिलियन डॉलर का समझौता किया था। इस डील के तहत 99 जीई-एफ404 इंजनों की सप्लाई की जानी है। एचएएल ने इस कॉन्ट्रैक्ट के जरिए अपने प्रोडक्शन कार्यक्रम को बनाए रखने और समय पर तेजस एमके1ए विमानों की सप्लाई सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा था। हालांकि, दक्षिण कोरिया के एक कंपोनेंट सप्लायर की समस्या और ग्लोबल सप्लाई चेन में दिक्कतों के चलते इंजनों की सप्लाई में देरी हुई। अब चौथे इंजन की डिलीवरी के बाद एचएएल को भरोसा है जल्दी ही बाकी इंजन भी समय पर आएंगे।

Tejas Mk1A Engine GE-F404 engine
GE-F404 engine

एचएएल अधिकारियों ने बताया कि अक्टूबर में नासिक स्थित प्रोडक्शन लाइन से फ्लाइट टेस्ट शेड्यूल किए गए हैं। हथियार परीक्षण पहले से ही जारी हैं। नासिक फैसिलिटी को अप्रैल 2023 में 150 करोड़ रुपये से अधिक की लागत के साथ शुरू किया गया था। यह एचएएल की तीसरी प्रोडक्शन लाइन है। यहां हर साल आठ विमान तैयार करने की क्षमता है। बेंगलुरु की दो मौजूदा लाइनों के साथ मिलकर एचएएल का टारगेट है कि वर्ष 2027 से हर साल 24 तेजस एमके1ए विमानों की डिलीवरी की जाए।

एचएएल ने ऐलान किया है कि वित्तीय वर्ष के अंत तक उसे 12 इंजन मिल जाएंगे। इसके बाद अगले वित्त वर्ष में सप्लाई सुचारू हो जाएगी। 2026–27 तक एचएएल का लक्ष्य हर साल 30 तेजस एमके1ए विमान तैयार करना है। इसमें निजी और सरकारी साझेदार कंपनियों को भी शामिल किया जाएगा।

बता दें कि भारतीय वायुसेना ने पहले से ही 2021 में Tejas Mk1A Engine Delivery ऑर्डर एचएएल को दिया है। इसके अलावा 97 और तेजस एमके1ए खरीदने पर चर्चा चल रही है। लंबे समय में वायुसेना का लक्ष्य कुल 352 तेजस विमान अपने बेड़े में शामिल करना है, जिनमें एमके1ए और एमके2 दोनों वेरिएंट होंगे। इस कदम से न केवल वायुसेना की कॉम्बैट स्ट्रेंथ बढ़ेगी बल्कि भारत के रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण को भी मजबूती मिलेगी।

तेजस एमके1ए का प्रोजेक्ट भारत की स्वदेशी क्षमताओं का प्रतीक है। हालांकि इसमें इंजन जैसे कुछ विदेशी कंपोनेंट्स हैं, लेकिन विमान का डिजाइन, स्ट्रक्चर और कई महत्वपूर्ण सिस्टम डीआरडीओ और एचएएल ने डेवलप किए हैं।

Tejas Mk1A Engine Delivery विमान में अत्याधुनिक एवियोनिक्स, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट, ओईएसए रडार और अत्याधुनिक हथियार प्रणालियां शामिल हैं। यह विमान एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड मिशनों में सक्षम है। तेजस एमके1ए को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वह भविष्य के खतरों का सामना करने के लिए तैयार रहे।

HAL Tejas Mk1A Engine Delivery has gained momentum as Hindustan Aeronautics Limited (HAL) received the fourth GE-F404-IN20 engine from GE Aerospace under the 2021 contract for 99 engines. This milestone brings the indigenous Light Combat Aircraft (LCA) Tejas Mk1A closer to induction into the Indian Air Force (IAF). HAL officials confirmed that the first two Tejas Mk1A jets are ready for handover, while 10 more units await engines. With production lines in Bengaluru and Nashik, HAL is targeting annual deliveries of 24 aircraft by 2027. The Tejas Mk1A project strengthens India’s defence preparedness and supports the vision of Atmanirbhar Bharat.

Project Swastik 65th Raising Day: कैसे सिक्किम की लाइफलाइन बना प्रोजेक्ट स्वास्तिक? 65 सालों में बनीं 1412 किमी लंबी सड़कें और 80 से ज्यादा बड़े पुल

Project Swastik 65th Raising Day

Project Swastik 65th Raising Day: सिक्किम की ऊंची पहाड़ियों और दुर्गम घाटियों में भारतीय सेना की जरूरतों और आम जनता की कनेक्टिविटी को बनाए रखने वाले प्रोजेक्ट स्वास्तिक के 65 साल पूरे हो गए हैं। 1 अक्टूबर 2025 को बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन प्रोजेक्ट स्वास्तिक का 65वां रेजिंग डे मना रही है। इस प्रोजेक्ट के तहत पिछले छह दशकों में न केवल सड़कों और पुलों का निर्माण हुआ, बल्कि सिक्किम जैसे मुश्किल इलाके में विकास कार्यों की रफ्तार भी बढ़ी।

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1960 से शुरू हुई यात्रा – Project Swastik 65th Raising Day

प्रोजेक्ट स्वास्तिक को 1960 में शुरू किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य था भारतीय सेना की ऑपरेशनल जरूरतों को पूरा करना और सिक्किम के दूरदराज वाले इलाकों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ना। बीते 65 सालों में इस परियोजना ने 1412 किलोमीटर से अधिक की सड़कें और 80 से ज्यादा बड़े पुल बनाए। यह काम उस इलाके में किया गया, जहां मौसम हर बार नई चुनौतियां लेकर आता है।

बीआरओ डीजी ने दी बधाई

65वें रेजिंग डे के मौके पर बीआरओ के डीजी लेफ्टिनेंट जनरल रघु श्रीनिवासन, डायरेक्टर जनरल बॉर्डर रोड्स ने सभी अधिकारियों, जवानों और उनके परिवारों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट स्वास्तिक के जवान और श्रमिक कठिन परिस्थितियों में भी जिस समर्पण और निष्ठा से काम करते हैं, वह सराहनीय है। उन्होंने सभी को प्रेरित किया कि वे इसी जज़्बे के साथ संगठन की सफलता और राष्ट्र निर्माण में योगदान देते रहें।

प्राकृतिक आपदाओं से भी जूझा प्रोजेक्ट स्वास्तिक

बीआरओ के कर्मयोगियों के लिए बर्फीली चोटियों, ग्लेशियर से बने झरनों, तेज ढलानों और भूस्खलन की आशंका वाले इलाकों में सड़कों का निर्माण करना किसी भी इंजीनियरिंग चमत्कार से कम नहीं है। इस दौरान ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF), बादल फटने और तीस्ता नदी की बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से भी प्रोजेक्ट स्वास्तिक जूझता रहा, लेकिन इसके काम पर कोई असर नहीं पड़ा।

10 सालों में बनीं 350 किमी लंबी सड़कें

पिछले दस सालों में ही प्रोजेक्ट स्वास्तिक ने 350 किलोमीटर से ज्यादा सड़कों का निर्माण किया है। इसके साथ ही 26 नए पुल और एक सुरंग बनाई गई है। इन सभी निर्माण कार्यों ने न सिर्फ सेना की तैनाती को आसान बनाया बल्कि स्थानीय निवासियों को भी 12 महीने सड़क को भी आसान बनाया। वहीं, हाई एल्टीट्यूड इलाकों में जहां पहले लोग महीनों तक कटे रहते थे, वहां अब प्रोजेक्ट स्वास्तिक के तहत बनीं सड़कें और पुल लोगों के लिए लाइफलाइन साबित हो रहे हैं।

नए प्रोजेक्ट्स पर फोकस – Project Swastik 65th Raising Day

बीआरओ की योजना आने वाले वर्षों में सिक्किम में और बड़े स्तर पर बुनियादी ढांचे का निर्माण करने की है। इसके तहत 1152.66 करोड़ रुपये की परियोजनाएं शुरू की जाएंगी। इनमें वेस्टर्न सिक्किम हाइवे, राष्ट्रीय राजमार्ग 310A और राष्ट्रीय राजमार्ग 310AG का निर्माण शामिल है।

इन परियोजनाओं का उद्देश्य उत्तर सिक्किम की कनेक्टिविटी को और मजबूत करना है। इसके साथ ही सुरंगों और अत्याधुनिक पुलों का निर्माण भी होगा, जिससे सेना की तेज़ी से तैनाती और लोगों की सुविधा दोनों सुनिश्चित हो सकेगी।

अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल

इसके अलावा बीआरओ अब नई-नई तकनीकों का भी इस्तेमाल कर रहा है। इनमें जियोटेक्सटाइल्स, एडवांस्ड सरफेसिंग टेक्निक्स, स्लोप स्टेबलाइजेशन, एवलॉन्च मिटिगेशन मेजर्स और ईको-फ्रेंडली कंस्ट्रक्शन मेथड्स शामिल हैं। इनसे न सिर्फ सड़कों की उम्र बढ़ेगी बल्कि प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा।

वहीं, बीआरओ ने 65वें रेजिंग डे के मौके पर गंगटोक में कई कार्यक्रम आयोजित किए। सबसे पहले स्वास्तिक मेमोरियल पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। इसके बाद सैनिक सम्मेलन और बड़ाखाना का आयोजन हुआ, जहां अधिकारी और जवान एक साथ भोजन कर परंपरागत भाईचारे को मजबूत करते हैं। कार्यक्रम में स्वास्तिक मेला और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का भी आयोजन किया गया।

Project Swastik 65th Raising Day प्रोजेक्ट स्वास्तिक की रीढ़ माने जाने वाले कर्मयोगी कैजुअल पेड लेबरर्स के लिए भी इस अवसर पर कई नई कल्याणकारी योजनाओं का ऐलान किया गया। इनमें बेहतर आवास, सुरक्षित पेयजल और स्वच्छता सुविधाएं, सर्दियों के कपड़े और सुरक्षा उपकरण, साथ ही नियमित स्वास्थ्य जांच और स्वास्थ्य शिविर शामिल हैं। बीआरओ ने यह सुनिश्चित किया है कि इन श्रमिकों को कठोर मौसम में काम करते हुए अधिकतम सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें।

Project Swastik 65th Raising Day was celebrated by the Border Roads Organisation (BRO) in Gangtok, Sikkim on 1 October 2025. Established in 1960, Project Swastik has played a vital role in building over 1,412 km of roads and 80 bridges in high-altitude terrain, ensuring year-round connectivity for the Armed Forces and local communities. The 65th Raising Day honoured its legacy with cultural events, a Swastik Mela and new welfare measures for workers. Future projects worth ₹1152.66 crore, including the Western Sikkim Highway and NH 310A, will further strengthen BRO’s role in national security and regional development.