IAF Chief on Operation Sindoor: भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने वायुसेना दिवस से पहले आयोजित सालाना प्रेस कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कई खुलासे किए। उन्होंने बताया कि मई में हुई झड़पों के दौरान भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के 10 से अधिक फाइटर जेट गिराए, जिनमें अमेरिका निर्मित एफ-16 और चीन-पाकिस्तान के बनाए जेएफ-17 भी शामिल थे।
उन्होंने पाकिस्तान के दावों को खारिज करते हुए कहा कि “उनकी बातें मनोहर कहानियों जैसी हैं।” एयर चीफ ने बताया कि भारतीय वायुसेना ने 300 किलोमीटर अंदर जाकर पाकिस्तान के एयरबेस, राडार, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और लड़ाकू विमानों को सटीक हमलों में निशाना बनाया। यह भारतीय वायुसेना का अब तक का सबसे लंबा “किल” माना जा रहा है।
पाकिस्तान का झूठा नैरेटिव- “मनोहर कहानियों” जैसा
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासभा में दावा किया था कि उन्होंने भारत के 7 फाइटर जेट गिराए। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए एयर चीफ मार्शल सिंह ने व्यंग्य में कहा, “अगर उन्हें लगता है कि उन्होंने हमारे 15 विमान गिराए हैं, तो उम्मीद है अगली बार जब वे लड़ाई में आएंगे, तो 15 कम विमान लेकर आएंगे।”
ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पाकिस्तान की तरफ से किए जा रहे दावों पर एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि पाकिस्तान की जो नैरेटिव फैलाया जा रहा है वह “मनोहर कहानियों जैसा” है, जिनका कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के एयरबेस, एयर डिफेंस और कमांड सेंटरों को स्ट्राइक्स में निशाना बनाया।
ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायुसेना की जबरदस्त स्ट्राइक -IAF Chief on Operation Sindoor
22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत ने जवाबी कार्रवाई करते हुए 6 और 7 मई की दरमियानी रात ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया। यह 2019 की बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद सबसे बड़ा सैन्य अभियान था।
इस ऑपरेशन में भारतीय वायुसेना ने बिना एलओसी या इंटरनेशनल बॉर्डर पार किए पाकिस्तान की सीमा के अंदर 300 किलोमीटर तक अंदर जाकर रडार स्टेशन, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, रनवे और हैंगर को निशाना बनाया।
एयर चीफ ने बताया कि इस अभियान में चार रडार साइट, दो कमांड कंट्रोल सेंटर, दो रनवे और तीन बड़े हैंगर को भारी नुकसान पहुंचा। एक सी-130 श्रेणी का विमान और पांच एफ-16 व जेएफ-17 वर्ग के लड़ाकू विमान भी नष्ट कर दिए गए।
उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन रणनीतिक और मनोवैज्ञानिक दोनों स्तरों पर पाकिस्तान के लिए झटका था और अंततः उन्हें 10 मई को सीजफायर के लिए भारत से अनुरोध करना पड़ा।
एयर चीफ मार्शल सिंह ने बताया कि भारतीय वायुसेना ने हवा में 4 से 5 फाइटर जेट मार गिराए। इनमें अमेरिकी एफ-16 और जेएफ-17 श्रेणी के लड़ाकू विमान थे। इसके अलावा, एक लॉन्ग रेंज स्ट्राइक में पाकिस्तान का एक अवॉक्स या सिग्निफिकेंट इंटेलिजेंस एयरक्राफ्ट भी ध्वस्त हुआ।
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने एक बार फिर दिखा दिया कि भारतीय वायुसेना किसी भी चुनौती का जवाब निर्णायक और सटीक तरीके से दे सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर का मकसद आतंकवाद के खिलाफ सर्जिकल और सीमित कार्रवाई करना था, न कि व्यापक युद्ध को भड़काना।
स्वदेशी हथियारों और नई तकनीक पर फोकस
प्रेस कॉन्फ्रेंस में एयर चीफ ने भारत की आत्मनिर्भरता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि तेजस एमके1ए, एएमसीए (AMCA), आकाश-NG, एस्ट्रा मिसाइल, नए रडार सिस्टम्स और एयरबॉर्न वॉर्निंग सिस्टम्स पर तेजी से काम हो रहा है।
उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना घरेलू उद्योगों, एमएसएमई सेक्टर और स्टार्टअप्स को रक्षा उत्पादन में बढ़ावा दे रही है। स्वदेशी हथियार प्रणालियों के जरिए न सिर्फ आयात पर निर्भरता घटाई जाएगी बल्कि भारत को रक्षा निर्यातक बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
एयर चीफ ने कहा कि भारत भविष्य के लिए फिफ्थ जनरेशन और उससे आगे की टेक्नोलॉजी को अपनाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। एएमसीए प्रोग्राम पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है और इसकी पहली उड़ान परीक्षण इस दशक के अंत तक होने की उम्मीद है। और 2035 तक इसे ऑपरेशनल करने का लक्ष्य है। इस बार निजी उद्योगों को भी प्रोजेक्ट में शामिल किया गया है जिससे प्रगति तेज होने की उम्मीद है।
वहीं, राफेल और एस-400 को लेकर उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना किसी भी वेपन सिस्टम के सिलेक्शन में अपनी दीर्घकालिक जरूरतों और ऑपरेशनल क्षमता को प्राथमिकता देती है। राफेल जैसे विमानों को शामिल करना आसान है क्योंकि इनकी ट्रेनिंग और मेंटेनेंस सिस्टम पहले से मौजूद है। एयर चीफ ने कहा कि 114 रफाल विमान भारत के लिए एक संभावित विकल्प हैं। पहले के अनुभव और तैयारियों के कारण राफेल को शामिल करना आसान होगा। जो भी कंपनी भारत में मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का प्रस्ताव देगी, उस पर विचार किया जाएगा।

बढ़ेगी अनमैन्ड सिस्टम की जरूरत
एयर चीफ ने कहा कि भविष्य में अनमैन्ड सिस्टम (UAV/UCAV) की भूमिका और बढ़ेगी। हालांकि, उन्होंने साफ कहा कि मैन और मशीन का कॉन्बिनेशन ही निर्णायक रहेगा। अनमैन्ड सिस्टम कुछ मिशनों में अहम भूमिका निभाएंगे, लेकिन मैन सिस्टम को पूरी तरह रिप्लेस नहीं करेंगे।
भारतीय वायुसेना इस क्षेत्र में स्वदेशी प्रोजेक्ट्स और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के साथ तेज़ी से काम कर रही है। डीआरडीओ के कई प्रोजेक्ट्स इस दिशा में आगे बढ़ चुके हैं।
एयर चीफ ने बताया कि 2047 तक का एक रोडमैप तैयार किया गया है जिसमें वायुसेना को मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस के लिए सक्षम बनाया जा रहा है। तीनों सेनाओं के बीच तालमेल को औपचारिक ढांचा देने पर काम हो रहा है ताकि किसी भी ऑपरेशन में सामूहिक ताकत का प्रभावी इस्तेमाल हो सके।
उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्ध में साइबर, स्पेस और इंफॉर्मेशन वॉरफेयर की भूमिका अहम होगी और भारतीय वायुसेना इस दिशा में पूरी तैयारी कर रही है।
बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट की कमी से ट्रेनिंग पर असर?
एयर चीफ ने माना कि बेसिक ट्रेनर विमानों में सप्लाई चेन की दिक्कतों के कारण देरी हुई है। हालांकि, वायुसेना ने अपनी ट्रेनिंग संरचना को पुनर्गठित किया है ताकि कम प्लेटफॉर्म होने के बावजूद पायलटों की ट्रेनिंग प्रभावित न हो। वहीं, नए विमान के आने से यह समस्या हल हो जाएगी।
वहीं सुखोई-30 के अपग्रेड को लेकर उन्होंने कहा कि एक विस्तृत अध्ययन के आधार पर वायुसेना का प्रॉस्पेक्टिव प्लान तैयार किया गया है। इसमें न केवल प्लेटफॉर्म अपग्रेड, बल्कि नए रडार, सरफेस-टू-एयर सिस्टम, ट्रेनिंग और मानव संसाधन सुधार शामिल हैं। वहीं अधिकांश सुखोई-30 बेड़े का 70–75% अपग्रेड किया जाएगा।
किए कई अंतरराष्ट्रीय अभ्यास
एयर चीफ ने बताया कि पिछले एक साल में भारत ने अमेरिका, फ्रांस, ग्रीस, सिंगापुर, मिस्र जैसे देशों के साथ कई बड़े सैन्य अभ्यास किए हैं। IAF Chief on Operation Sindoor इन अभ्यासों में इन देशों ने भारतीय वायुसेना की पेशेवर क्षमता और सटीकता की तारीफ की। उन्होंने कहा कि इन अभ्यासों से न केवल इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ती है बल्कि भारत की एयर पावर की वैश्विक विश्वसनीयता भी मजबूत होती है।




















