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क्या म्यांमार ने Coco Islands को लेकर भारत से बोला झूठ? कहा- नहीं हैं चीनी सैनिक, नौसेना के लिए क्यों है चिंता की बात, पढ़ें एक्सप्लेनर

Coco Islands Chinese Presence
Coco Islands Chinese Presence (Pic: Google Earth)

Coco Islands: भारत और म्यांमार के बीच डिफेंस डॉयलॉग के दौरान यंगून स्थित जुंटा सरकार ने भारत को भरोसा दिलाया है कि बंगाल की खाड़ी में स्थित कोको द्वीपों पर कोई भी चीनी नागरिक या सैनिक मौजूद नहीं है। यह बयान तब आया जब भारत ने पिछले कई महीनों से इस क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों को लेकर चिंता जताई थी।

म्यांमार की यह सफाई ऐसे समय में आई है जब सैटेलाइट इमेजरी में कोको द्वीपों पर नए निर्माण, लंबे रनवे और कम्यूनिकशन इक्विपमेंट्स की तैनाती देखी गई है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह क्षेत्र चीन की समुद्री निगरानी रणनीति का हिस्सा बन सकता है।

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Coco Islands: भारतीय नौसेना को दौरे की नहीं मिली अनुमति

भारत ने कोको द्वीपों का निरीक्षण करने के लिए म्यांमार सरकार से औपचारिक अनुमति मांगी थी। सूत्रों के मुताबिक, भारतीय नौसेना ने “फ्रेंडली विजिट” के तहत वहां एक प्रतिनिधिमंडल भेजने का अनुरोध किया था, लेकिन अब तक जंटा शासन की ओर से कोई मंजूरी नहीं दी गई है।

भारतीय रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने 25 से 27 सितंबर के बीच म्यांमार की यात्रा की थी और वहीं यह मुद्दा उठाया था। यह उनका दूसरा सालाना डिफेंस डॉयलॉग था, जिसमें म्यांमार के सशस्त्र बलों के ट्रेनिंग चीफ मेजर जनरल क्याव को हटिके भी शामिल थे। हालांकि म्यांमार ने यह दोहराया कि “कोको द्वीपों पर एक भी चीनी नागरिक नहीं है,” लेकिन भारत को दौरे की इजाजत न मिलने से संदेह पैदा हो गया है।

Coco Islands: भारत की चिंता: सर्विलांस सेंटर बना सकता है चीन

भारत की मुख्य चिंता यह है कि म्यांमार के इन द्वीपों पर चीन ने सर्विलांस और सिग्नल इंटेलिजेंस (SIGINT) इक्विपमेंट्स तैनात किए हैं। माना जाता है कि यह सेंटर भारत के बालासोर मिसाइल परीक्षण रेंज और रामबिल्ली नौसैनिक अड्डे की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

बालासोर और एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप (ओडिशा) जहां भारत अपने बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण करता है, कोको द्वीपों के लगभग समान अक्षांश यानी लेटिट्यूड पर स्थित हैं। रणनीतिक जानकारों का कहना है कि चीन इस इलाके का इस्तेमाल भारतीय परमाणु पनडुब्बियों और मिसाइल परीक्षणों को ट्रैक करने के लिए कर सकता है।

Coco Islands: क्या है इसका रणनीतिक महत्व

कोको द्वीप बंगाल की खाड़ी में स्थित एक छोटा लेकिन रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण द्वीप समूह है। वहीं इनकी दूरी म्यांमार के मुख्य भूमि से करीब 414 किमी दक्षिण में है। जबकि भारत के अंडमान-निकोबार द्वीप समूह से मात्र 55 किलोमीटर दूर है। यह इलाका भारत के अंडमान और निकोबार के भी नजदीक है, जहां भारत का एकमात्र ट्राई-सर्विसेज थिएटर कमांड है और जो हिंद महासागर में भारत की सैन्य मौजूदगी का प्रमुख केंद्र है।

यह द्वीप दो प्रमुख हिस्सों में बंटा है ग्रेट कोको और लिटिल कोको। यहां के रनवे को हाल ही में बढ़ाकर 2,300 मीटर किया गया है, जिससे अब यहां ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट उतर सकते हैं।

ब्रिटिश शासन के दौरान भारत का हिस्सा थे Coco Islands

ब्रिटिश शासन के दौरान कोको द्वीप भारत का हिस्सा था। 1948 में म्यांमार की आजादी के बाद ये द्वीप उसके कंट्रोल में आ गए। 1962 के म्यांमार के सैन्य तख्तापलट के बाद, ग्रेट कोको पर एक जेल कॉलोनी बनी, जो 1971 में बंद हो गई। उसके बाद ये म्यांमार नेवी के कब्जे में आ गए।

1990 के दशक में जापानी मीडिया ने रिपोर्ट किया कि चीन म्यांमार को यहां सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में मदद कर रहा है। 1994 में अफवाहें फैलीं कि म्यांमार ने यह द्वीप चीन को 30 साल की लीज पर दे दिया है, ताकि वह यहां रडार और सर्विलांस केंद्र स्थापित कर सके। हालांकि म्यांमार और चीन दोनों ने इससे इनकार किया।

Coco Islands: 2005 में भारत ने किया था दौरा

भारत ने 2005 में तत्कालीन भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश ने कोको द्वीप (Coco Islands) का दौरा किया था। उनके दौरे का मकसद उन अफवाहों की जांच करना था, जिनमें कहा जा रहा था कि चीन ने कोको द्वीप पर सैन्य या सिग्नल इंटेलिजेंस बेस स्थापित किया है। दौरे के बाद, एडमिरल अरुण प्रकाश ने सार्वजनिक रूप से कहा कि कोको द्वीप पर कोई चीनी सैन्य मौजूदगी नहीं है। उन्होंने इन अफवाहों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि द्वीप पर केवल म्यांमार की नौसेना की सीमित सुविधाएं हैं, और वहां कोई विदेशी सैन्य गतिविधि या बेस नहीं देखा गया। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कोको द्वीप की सामरिक स्थिति भारत के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के करीब है।

Coco Islands: सैटेलाइट तस्वीरों ने बढ़ाई चिंता

2023 से लेकर अब तक कई अंतरराष्ट्रीय सैटेलाइट एजेंसियों जैसे मैक्सार और प्लैनेट लैब्स की तस्वीरों में कोको द्वीपों (Coco Islands) पर नए निर्माण दिखाई दिए हैं। इनमें रनवे विस्तार, हैंगर, बैरक और नई सड़कों का निर्माण शामिल है। खुफिया सूत्रों के अनुसार, यहां अब लगभग 1,500 सैन्यकर्मी तैनात हैं और पास के जेरी आइसलैंड से जुड़ने के लिए एक कॉजवे का निर्माण हो रहा है। इन सभी गतिविधियों ने भारत के साथ-साथ अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे इंडो-पैसिफिक सहयोगी देशों की चिंता बढ़ा दी हैं।

देखें: गूगल मैप्स में पूरा कोको आइसलैंड 

Coco Islands: भारत की रणनीतिक तैयारी

भारत ने हाल के सालों में अंडमान-निकोबार में अपनी सैन्य मौजूदगी को मजबूत किया है। यहां नौसेना के जहाजों के लिए नया डॉकयार्ड, एयरबेस और मिसाइल सिस्टम तैयार किए जा रहे हैं। इसके अलावा, भारत ने म्यांमार के साथ द्विपक्षीय रक्षा संवाद को तेज किया है ताकि चीन के प्रभाव को सीमित किया जा सके। वहीं क्वाड देशों भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने भी हिंद महासागर में समुद्री निगरानी बढ़ाने का फैसला किया है।

चीन पर निर्भर म्यांमार

2023 की चैथम हाउस की रिपोर्ट कहती है कि 2021 में म्यांमार में सेना के तख्तापलट के बाद से वहां की जुंटा सरकार अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के चलते चीन पर और अधिक निर्भर हो गई है। चीन न सिर्फ म्यांमार का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, बल्कि उसकी सैन्य तकनीक और हथियारों का भी मुख्य स्रोत है। भारत को यह डर है कि इस निर्भरता के चलते म्यांमार चीन को अपने सामरिक ठिकानों तक पहुंच दे सकता है। वहीं, बीजिंग लगातार यह कहता रहा है कि “चीन की कोई सैन्य मौजूदगी कोको द्वीपों (Coco Islands) में नहीं है।”

Coco Islands Chinese Presence
Coco Islands Chinese Presence (Pic: Google Earth)

क्या कहती हैं भारत की इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स

भारतीय खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट में कहा गया है कि कोको द्वीपों (Coco Islands) पर लगे नए रडार और एंटीना सिस्टम 1,000 किलोमीटर तक की दूरी तक सिग्नल ट्रैक कर सकते हैं। इसका सीधा असर भारत की सामरिक गोपनीयता पर पड़ सकता है। इसके अलावा, रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन इन द्वीपों से हिंद महासागर में भारतीय नौसेना की गतिविधियों की निगरानी करता है, खासकर जब परमाणु-संचालित पनडुब्बियां रामबिल्ली नेवल बेस से निकलती हैं।

रामबिल्ली आंध्र प्रदेश का एक छोटा तटीय गांव है, यह भारत का पहला समर्पित न्यूक्लियर सबमरीन बेस है, जो न्यूक्लियर बैलिस्टिक मिसाइल सबमरीन (SSBN) और न्यूक्लियर अटैक सबमरीन (SSN) के लिए बनाया गया है। यह भारत की “सी-बेस्ड न्यूक्लियर डिटरेंट” (समुद्री-आधारित परमाणु प्रतिरोध) को मजबूत करेगा। यह भारतीय नौसेना के ईस्टर्न नेवल कमांड का हिस्सा है। यह नौसेना का सबसे सुरक्षित और आधुनिक सबमरीन बेस है, जो मुख्य रूप से न्यूक्लियर-पावर्ड सबमरीनों के लिए डिजाइन किया गया है। यह विशाखापत्तनम बंदरगाह को डीकंजेस्ट करने के लिए बनाया गया है, जहां नौसेना और सिविल शिपिंग दोनों का उपयोग होता है। इसका निर्माण लगभग पूरा हो चुका है और 2026 में कमीशनिंग की उम्मीद है। यहां कालवरी-क्लास सबमरीनों जैसे आईएनएस अरिहंत भी डॉक की जा सकेंगी।

यहां डिस्ट्रॉयर और फ्रिगेट के अलावा 8 से 12 न्यूक्लियर सबमरीन रखी जा सकेंगी। इसमें वेरी लो फ्रिक्वेंसी संचार प्रणाली, डीमैग्नेटाइजेशन (पनडुब्बियों को चुंबकीय रूप से न्यूट्रलाइज करने) की सुविधा और हाई-सिक्योरिटी शेल्टर्स हैं। यह यह चीनी हैनान द्वीप के न्यूक्लियर बेस जैसा है, जिसे “लुक ईस्ट पॉलिसी” के तहत बनाया गया, जो इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की विस्तारवादी गतिविधियों का जवाब है। यह बंगाल की खाड़ी में भारत की पावर प्रोजेक्शन बढ़ाएगा।

म्यांमार ने दिया ये आधिकारिक बयान

हाल ही में म्यांमार के विदेश मंत्रालय ने कहा, “कोको द्वीप (Coco Islands) पर केवल हमारे सैनिक हैं, कोई विदेशी नहीं।” यंगून ने यह भी कहा कि द्वीप पर हो रहा विकास कार्य पूरी तरह नागरिक उद्देश्य के लिए है। हालांकि, भारतीय अधिकारियों का मानना है कि खासकर चिंदविन नदी के पार वाले क्षेत्रों में म्यांमार सरकार का नियंत्रण देश के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों में कमजोर है, वहां चीन समर्थित सशस्त्र समूहों का प्रभाव अधिक है।

इंडो-पैसिफिक पर क्या पड़ेगा असर

वहीं, कोको द्वीपों (Coco Islands) का मामला केवल भारत-म्यांमार तक सीमित नहीं है। यह पूरे इंडो-पैसिफिक सुरक्षा ढांचे से जुड़ा मुद्दा है। यह इलाका मलक्का जलडमरूमध्य (स्ट्रैट ऑफ मलक्का) के पास स्थित है, जिससे होकर दुनिया के 25 फीसदी समुद्री व्यापारिक जहाज गुजरते हैं। अगर चीन यहां अपनी स्थायी उपस्थिति बनाता है, तो वह हिंद महासागर में सामरिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है।

Air Force Day Viral Menu: वायुसेना दिवस के डिनर मेन्यू में रावलपिंडी चिकन टिक्का से बहावलपुर नान तक! सोशल मीडिया पर मची हलचल, जानें सच्चाई

Air Force Day Viral Menu
Left Menu is Original and Right Menu is Fake.

Air Force Day Viral Menu: भारतीय वायुसेना के 93वें स्थापना दिवस पर आयोजित स्पेशल डिनर के कथित मेन्यू को लेकर सोशल मीडिया पर जबरदस्त हलचल मची हुई है। इस मेन्यू में परोसे गए व्यंजनों के नाम पाकिस्तान के शहरों और एयरबेस के नाम पर रखे गए थे। वहीं केंद्र सरकार के मंत्री किरेन रिजीजू ने भी इस मेन्यू कार्ड को ट्वीट कर दिया। वहीं यह मेन्यू अब सोशल मीडिया पर “IAF Air Force Day Viral Menu” के नाम से वायरल हो रहा है।

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एयरफोर्स डे पर खास डिनर का आयोजन किया गया था। जैसा कि हर साल होता है। लेकिन एक डिनर मेन्यू सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मेन्यू में दिए गए नाम न सिर्फ पाकिस्तानी शहरों से जुड़े थे, बल्कि इनमें से कई वही स्थान थे, जिन्हें भारतीय वायुसेना ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान निशाना बनाया था।

Air Force Day Viral Menu: रावलपिंडी चिकन टिक्का से बहावलपुर नान तक

इस विशेष डिनर में व्यंजनों के नामों में पाकिस्तानी शहरों का सीधा संदर्भ था। मेन्यू में शामिल प्रमुख व्यंजन थे, रावलपिंडी चिकन टिक्का मसाला, रफीकी रारा मटन, भोलारी पनीर मेथी मलाई, सुक्कुर शाम सवेरा कोफ्ता, सरगोधा दाल मखनी, जैकबाबाद मेवा पुलाव और बहावलपुर नान।

मिठाइयों के मेन्यू में बालाकोट टिरामिसु, मुझफ्फराबाद कुल्फी फालूदा और मुरीदके मीठा पान शामिल थे। बता दें कि 2019 में भारतीय वायुसेना ने पीओके के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी कैंप पर एयर स्ट्राइक की थी। वहीं रावलपिंडी, सरगोधा और जैकबाबाद पाकिस्तान की वायुसेना के रणनीतिक एयरबेस माने जाते हैं।

Air Force Day Viral Menu: सोशल मीडिया पर वायरल मेन्यू की धूम

एयरफोर्स-डे के अगले दिन यह मेन्यू सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर वायरल हो गया। कई पूर्व सैनिकों, राजनेताओं और पत्रकारों ने इसकी तस्वीर शेयर की। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी इस मेन्यू को शेयर करते हुए लिखा कि यह वायुसेना का “न्यू नॉर्मल” है।

भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने भी पोस्ट किया, “From serving dishes to serving justice, now even the IAF Menu conveys a New Normal!” यानी स्वाद परोसने से लेकर न्याय परोसने तक, भारतीय वायुसेना का मेन्यू भी अब एक संदेश देता है।

ऑपरेशन सिंदूर की झलक

Air Force Day Viral Menu मेन्यू में शामिल शहर और नाम ऑपरेशन सिंदूर से गहराई से जुड़े हैं। 7 मई 2025 को, पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में 9 आतंकी ठिकानों पर सटीक एयर स्ट्राइक की थी। इसमें लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों को निशाना बनाया गया था। इन हमलों में रावलपिंडी, बहावलपुर, मुरीदके, कोटली, बाग और मुजफ्फराबाद जैसे स्थान शामिल थे। वायुसेना ने इन ठिकानों की सैटेलाइट तस्वीरें भी जारी की थीं, जिनमें हमले से पहले और बाद की स्थिति स्पष्ट दिखाई गई थी।

पाकिस्तान में मची हलचल

इस वायरल मेन्यू ने पाकिस्तान में हलचल मचा दी। कई पाकिस्तानी सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे “उकसाने वाला” बताया, जबकि भारतीय यूजर्स ने इसे “क्रिएटिव स्ट्राइक” करार दिया। बहुत से लोगों ने लिखा कि “आईएएफ ने स्ट्राइक जमीन पर ही नहीं, मेन्यू में भी कर दी।”

क्या है सच्चाई

हमने वायुसेना के सूत्रों से इस मेन्यू के बारे में सच्चाई जाननी चाही। उन्होंने बताया कि एयरफोर्स डे की पार्टी में जो मेन्यू सर्व हुआ वह बिल्कुल दूसरा था। उसमें पाकिस्तानी शहरों के नाम पर रखी गई डिशेज का कोई जिक्र नहीं था। उन्होंने इससे इनकार भी किया। वहीं उन्होंने यह भी कहा कि हो सकता है कि एयरफोर्स डे का जश्न पूरी वायुसेना में मनाया जाता है। हो सकता है कि किसी एयरफोर्स यूनिट ने मजे लेने के लिए ऐसा मेन्यू कार्ड झपवा दिया हो।

सोशल मीडिया पर वायरल हुए मेन्यू को लेकर भी कहा जा रहा है कि ये एआई जनरेटेड मेन्यू था। उसमें पाकिस्तान के ठिकानों से जुड़े कई नाम शामिल थे, लेकिन वास्तविक कार्यक्रम में परोसा गया Air Force Day Viral Menu मेन्यू कुछ अलग था।

SAKSHAM CUAS System: भविष्य के युद्धों में ड्रोन खतरों से निपटने में भारतीय सेना होगी ‘सक्षम’, दोस्त और दुश्मन ड्रोन का चुटकियों में चलेगा पता

SAKSHAM Counter UAS System
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SAKSHAM CUAS System: देश की हवाई सुरक्षा क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में भारतीय सेना ने एक बड़ा कदम उठाया है। सेना ने स्वदेशी रूप से विकसित सक्षम काउंटर यूएएस सिस्टम (SAKSHAM Counter UAS System) के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल यानी आरएफपी जारी किया है।

यह अत्याधुनिक सिस्टम दुश्मन के ड्रोन और अनमैन्ड एरियल सिस्टम न केवल रियल टाइम में ड्रोन की पहचान कर उन्हें ट्रैक करेगा, साथ ही उन्हें मार भी गिराएगा। यह सिस्टम जमीनी युद्धक्षेत्र के ऊपर 3,000 मीटर यानी 10,000 फीट तक के हवाई क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए तैयार किया गया है, जिसे अब टैक्टिकल बैटलफील्ड स्पेस (टीबीएस) कहा जाता है।

Tethered Surveillance Drones: ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय सेना को चाहिए ये खास ड्रोन, जो 9 घंटे तक लगातार रखें दुश्मन पर नजर

SAKSHAM CUAS System: ऑपरेशन सिंदूर से मिली सीख

इस सिस्टम की जरूरत ऑपरेशन सिंदूर के दौरान महसूस हुई, जब पाकिस्तान के ड्रोन और अनमैन्ड एरियल सिस्टम भारतीय सीमा में निगरानी और हमले के लिए पहुंचे। इस ऑपरेशन में यह सामने आया कि आधुनिक युद्ध केवल जमीन पर नहीं, बल्कि उससे ऊपर के हवाई क्षेत्र में भी लड़ा जा रहा है। जिसके बाद भारतीय सेना ने पारंपरिक टैक्टिकल बैटल फील्ड (टीबीए) की बजाए टैक्टिकल बैटलफील्ड स्पेस पर फोकस किया।

टैक्टिकल बैटलफील्ड स्पेस में जमीन के ऊपर 3,000 मीटर की ऊंचाई तक का हवाई क्षेत्र शामिल है, जिसे एयर लिट्टोरल कहा जाता है। इस इलाके पर कंट्रोल बनाए रखना भविष्य के युद्धों के लिए जरूरी माना जा रहा है। इससे मित्र देशों और अपने एय़र एसेट्स को सुरक्षित उड़ान भरने की सुविधा मिलती है, साथ ही दुश्मन के ड्रोन या विमान को ट्रैक करने के साथ और मार गिराया भी जा सकता है।

SAKSHAM CUAS System: कैसे काम करेगा ‘सक्षम’?

सक्षम (SAKSHAM CUAS System) का पूरा नाम सिचुएशनल अवेयरनेस फोर काइनेटिक सॉफ्ट एंड हार्ड किल असेट्स मैनेजमेंट है। यह एक सॉफ्टवेयर है जिसे हाई लेवल मॉड्यूलर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम के तौर पर डेवलप किया गया है। इसे भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, गाजियाबाद के सहयोग से डिजाइन और तैयार किया गया है।

यह सिस्टम सुरक्षित आर्मी डेटा नेटवर्क (एडीएन) पर काम करती है और रियल टाइम में पूरी टैक्टिकल बैटलफील्ड स्पेस में जमीन और हवाई क्षेत्र की सटीक जानकारी सभी मिलिट्री यूनिट्स को उपलब्ध कराती है। सक्षम सिस्टम का उद्देश्य दुश्मन और अपने सभी अनमैन्ड एरियल सिस्टम डेटा को एक जीआईएस आधारित कॉमन प्लेटफॉर्म पर इंटीग्रेट करना, सॉफ्ट और हार्ड किल सिस्टम्स को जोड़ना, और फील्ड कमांडरों को ऑटोमेटेड डिसीजन सपोर्ट और विजुअलाइजेशन की सुविधा देना है।

सैन्य सूत्रों ने बताया कि यह सिस्टम (SAKSHAM CUAS System) भारतीय सेना के आकाशतीर सिस्टम से भी इनपुट लेगा, जिससे हवाई क्षेत्र में मौजूद सभी ऑब्जेक्ट्स चाहे वे फ्रैंडली हों, न्यूट्रल हों या दुश्मन के हों, उनकी एक स्पष्ट तस्वीर तैयार की जा सकेगी। जो बड़े से मॉनिटर पर दिखेगी।

सूत्रों ने बताया कि यह सिस्टम वायुसेना के इंटीग्रेटिड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (IACCS) और आकाशतीर जैसा ही होगा, लेकिन ये केवल ड्रोन के लिए ही काम करेगा। इसमें मॉनिटर पर फ्रैंडली, न्यूट्रल और दुश्मन के ड्रोन अलग-अलग रंग के दिखाई देंगे। जिससे उन्हें पहचनना आसान होगा।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड थ्रेट एनालिसिस – SAKSHAM CUAS System

‘सक्षम’ सिस्टम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड थ्रेट एनालिसिस का इस्तेमाल करता है, जिससे संभावित हवाई खतरों की पहचान पहले से हो जाती है और तेजी से फैसले लेने में आसानी होती है। सक्षम सिस्टम रियल टाइम में रिकॉग्नाइज्ड यूएऍस पिक्चर (RUASP) तैयार कर सकता है। यह कई (काउंटर अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स) हथियारों और सेंसरों को एक साथ जोड़कर कॉर्डिनेट रेस्पॉन्स देता है।

बॉर्डर Let’s में सभी यूनिट्स में होगा तैनात

सक्षम सिस्टम (SAKSHAM CUAS System) पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर आधारित है। बीईएल के बनाए इस सिस्टम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित फ्यूजन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिससे भविष्य के युद्धक्षेत्रों के लिए इसे आसानी से अपग्रेड किया जा सकेगा।

SAKSHAM CUAS System  प्रोजेक्ट को फास्ट ट्रैक प्रोक्योरमेंट के तहत मंजूरी दी गई है ताकि इसे तेजी से सेना की सभी फील्ड फॉर्मेशंस में शामिल किया जा सके। अगले एक साल के भीतर सक्षम सिस्टम को फील्ड में उतारने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सूत्रों ने बताया कि बॉर्डर इलाके में तैनात सभी यूनिट्स को इस सिस्टम से लैस किया जाएगा।

वहीं, सक्षम सिस्टम (SAKSHAM CUAS System) के लागू होने के बाद यह भारतीय सेना के काउंटर काउंटर अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स ग्रिड की रीढ़ साबित होगी। यह जमीनी और हवाई दोनों तरह के खतरों की इंटीग्रेटेड तस्वीर कमांडरों को देगा। इस सिस्टम की मदद से भारतीय सेना भविष्य के बैटलफील्ड में एक डिजिटल और टेक्नोलॉजी-ड्रिवन कंट्रोल सिस्टम डेवलप करेगी, जो भारतीय सेना के डिकेड ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन (2023–2032) कार्यक्रम के मुताबिक है, जिसमें युद्ध के सभी डाइमेंशंस में टेक्निकल सुपीरियोरिटी और इंडीजीनस इनोवेशन पर जोर दिया गया है।

Australia-India Defence Ministers: भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा मंत्रियों की पहली वार्ता में हुए तीन अहम समझौते, नवंबर में नेवी के साथ होगी एक्सरसाइज मालाबार

Australia–India Defence Ministers Dialogue: India, Australia Sign 3 Key Defence MoUs in Canberra
Australia Deputy Prime Minister and Minister for Defence, the Hon Richard Marles MP, welcomed Minister of Defence of India, Rajnath Singh

Australia-India Defence Ministers: भारत और ऑस्ट्रेलिया ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को नए स्तर पर ले जाने के मकसद से गुरुवार को ऑस्ट्रेलिया की राजधानी कैनबरा में अपना पहला ‘आस्ट्रेलिया-इंडिया डिफेंस मिनिस्टर्स’ डायलॉग का आयोजन किया। इस दौरान दोनों देशों के बीच तीन महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें इनफॉरमेशन शेयरिंग, सबमरीन रेस्क्यू और संयुक्त स्टाफ स्तर की वार्ता की शुरुआत से जुड़े समझौते शामिल हैं।

Rajnath Singh on Terrorism: रक्षा मंत्री बोले- ऑपरेशन सिंदूर में हमने आतंकियों का धर्म नहीं पूछा, बल्कि आतंक को बनाया निशाना

भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इन दिनों दो दिवसीय दौरे पर ऑस्ट्रेलिया में हैं। उन्होंने अपने ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष रिचर्ड मार्ल्स के साथ द्विपक्षीय रक्षा संबंधों और समान विचारधारा वाले देशों के साथ साझेदारी को और मजबूत करने पर विस्तृत चर्चा की। यह वार्ता 2020 में दोनों देशों (Australia-India Defence Ministers) के बीच कॉम्प्रीहेंसिव स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप के दर्जे को बढ़ाए जाने के बाद हो रही चार उच्चस्तरीय बैठकों के बाद आयोजित की गई, जिसे दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग में “अभूतपूर्व प्रगति” के तौर पर देखा जा रहा है।

Australia-India Defence Ministers

वार्ता के दौरान भारत ने ऑस्ट्रेलियाई नौसेना के जहाजों को भारतीय शिपयार्ड में तैनाती के दौरान मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल (ऍम्‌आर्‌ओ) सर्विसेज देने का प्रस्ताव रखा। दोनों रक्षा मंत्रियों ने हर साल रक्षा मंत्रियों की वार्ता आयोजित करने पर सहमति जताई, जिससे द्विपक्षीय सिक्योरिटी स्ट्रक्चर को और विस्तार दिया जा सके और आपसी परामर्श तथा सहयोग को बढ़ाया जा सके।

कैनबरा में हुई इस बैठक में दोनों पक्षों ने म्यूचुअल सबमरीन रेस्क्यू सपोर्ट एंड कोआपरेशन पर ऑस्ट्रेलिया–भारत समझौते (Australia-India Defence Ministers) के क्रियान्वयन व्यवस्था पर दस्तखत का स्वागत किया। इसके अलावा संयुक्त स्टाफ स्तर की वार्ता की स्थापना को भी मंजूरी दी गई, जो संयुक्त अभ्यासों, ऑपरेशनों और सभी क्षेत्रों में इंटरऑपरेबिलिटी को आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बनेगा।

Australia–India Defence Ministers Dialogue: India, Australia Sign 3 Key Defence MoUs in Canberra

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और रिचर्ड मार्ल्स ने 2024 में हस्ताक्षरित एआईआर-टीओ-एआईआर रिफ्यूलिंग व्यवस्था को लागू करने में हुई प्रगति की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच डिफेंस एक्सरसाइजेज और सहयोग की फ्रिक्वेंसी तथा कॉम्प्लेक्सिटी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसके साथ ही म्यूचुअल लॉजिस्टिक्स सपोर्ट अरेंजमेंट (एमएलएसए) के तहत बढ़ती इंटरऑपरेबिलिटी को भी बढ़ाया गया है।

ऑस्ट्रेलिया ने भारतीय नौसेना को 2027 में होने वाले सबमरीन रेस्क्यू एक्सरसाइज ब्लैक कैरिलॉन में हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित किया है। साथ ही भारतीय वायुसेना को 2027 में होने वाले एक्सरसाइज तालिस्मान सबरे का भी बुलावा दिया गया है। यह अभ्यास इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक समन्वय को और मजबूती देंगे।

दोनों देशों ने 2026 में ऑस्ट्रेलियन डिफेंस कॉलेज में अतिरिक्त भारतीय छात्रों को शामिल करने और 2027 में पहली बार आस्ट्रेलियन डिफेंस फोर्स अकादमी में भारतीय प्रतिनिधि के लिए स्थान तय करने का भी स्वागत किया।

बैठक में दोनों पक्षों (Australia-India Defence Ministers) ने समकालीन तकनीक में रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। इसमें जॉइंट वर्किंग ग्रुप ओन डिफेंस इंडस्ट्री, रिसर्च एंड मटेरियल के जरिए से सहयोग पर जोर दिया गया। इस कदम का उद्देश्य रक्षा उद्योग और अनुसंधान में साझेदारी को मजबूत करना है।

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते आक्रामक रुख के बीच दोनों मंत्रियों ने क्षेत्र में साझेदारों के साथ सहयोग को बढ़ाने की महत्ता दोहराई। उन्होंने एक स्वतंत्र, खुला, शांतिपूर्ण, स्थिर और समृद्ध हिंद-प्रशांत की अवधारणा को समर्थन दिया और क्षेत्र में नेविगेशन और ओवरफ़्लाइट की स्वतंत्रता तथा निर्बाध व्यापार पर बल दिया। उन्होंने 1982 के समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (यूएनसीएलओएस) के प्रावधानों के अनुरूप समुद्र के इस्तेमाल पर भी जोर दिया।

भारत और ऑस्ट्रेलिया (Australia-India Defence Ministers) ने एक-दूसरे के क्षेत्रों से विमानों की तैनाती जारी रखने और ऑपरेशनल परिचय को बढ़ाने पर भी सहमति जताई। इसके अलावा उन्होंने आस्ट्रेलिया–इंडिया–इंडोनेशिया ट्राइलेटरल फॉर्मैट के तहत सहयोग को जारी रखने पर सहमति जताई, ताकि साझा चुनौतियों का समाधान किया जा सके।

दोनों देशों ने ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और अमेरिका के बीच क्वाड डिफेंस कोआपरेशन की प्रगति का भी स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इन चारों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग तेजी से बढ़ रहा है। बैठक में समुद्री क्षेत्र की निगरानी को मजबूत करने पर जोर दिया गया और नवंबर 2025 में होने वाली एक्सरसाइज मालाबार के दौरान दूसरी संयुक्त गतिविधि आयोजित करने की घोषणा की गई।

भारत और ऑस्ट्रेलिया (Australia-India Defence Ministers) ने चारों देशों के बीच समुद्री निगरानी सहयोग को और करीब लाने वाले प्रयासों का समर्थन किया। इस वार्ता ने दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को नई दिशा दी है और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम साबित हुई है।

Jaish-e-Mohammed women brigade: आतंकी मसूद अजहर बना रहा है महिला ब्रिगेड, बहन को सौंपी कमान, शुरू की भर्ती

Jaish-e-Mohammed women’s brigade: Masood Azhar’s sister leads Jamaat-ul-Mominaat, recruitment begins in Bahawalpur

Jaish-e-Mohammed women brigade: आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए पहली बार एक महिला ब्रिगेड बनाई है। इस नए विंग का नाम ‘जमात-उल-मोमिनात’ रखा गया है और इसकी भर्ती 8 अक्टूबर 2025 से बहावलपुर में शुरू कर दी गई है। संगठन ने इस फैसले की घोषणा एक पत्र के जरिए की है। इस पत्र को जैश-ए-मोहम्मद के सरगना और संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकवादी मौलाना मसूद अजहर के नाम से जारी किया गया है।

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खुफिया सूत्रों के मुताबिक यह भर्ती पाकिस्तान के बहावलपुर स्थित मरकज उस्मान-ओ-अली में शुरू की गई है, जहां से जैश-ए-मोहम्मद ने महिलाओं को अपने नेटवर्क में शामिल करने की मुहिम छेड़ी है। इस महिला ब्रिगेड (Jaish-e-Mohammed women brigade) की कमान मसूद अजहर की बहन सादिया अजहर के पास है। सादिया के पति यूसुफ अजहर की मौत मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुई थी, जब भारतीय सेनाओं ने बहावलपुर में जैश के मुख्यालय मरकज सुब्हानअल्लाह पर हवाई हमले किए थे।

जैश के प्रचार मंच अल-कलम मीडिया के जरिए जारी पत्र में इस महिला ब्रिगेड का नाम और भर्ती की तिथि सार्वजनिक की गई। खुफिया सूत्रों के अनुसार, संगठन ने अपनी भर्ती प्रक्रिया में सबसे पहले अपने वरिष्ठ कमांडरों की पत्नियों को शामिल किया है। इसके अलावा, बहावलपुर, कराची, मुझफ्फराबाद, कोटली, हरीपुर और मंसेहरा में मौजूद अपने मदरसों में पढ़ रही आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को भी इस ब्रिगेड में जोड़ा जा रहा है।

देवबंदी विचारधारा से प्रभावित यह आतंकी संगठन अब तक महिलाओं को आतंकी अभियानों या जिहाद में शामिल करने से बचता रहा है। लेकिन अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद जैश ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। सूत्रों का कहना है कि मसूद अजहर और उसके भाई तल्हा अल-सैफ ने मिलकर महिलाओं को संगठन की कार्यवाही में शामिल करने का फैसला किया। इसी के बाद ‘जमात-उल-मोमिनात’ (Jaish-e-Mohammed women brigade) नामक महिला ब्रिगेड की नींव रखी गई।

आतंकी संगठनों के इतिहास में महिलाओं की भूमिका नई नहीं है। आईएसआईएस, बोको हराम, हमास और एलटीटीई जैसे संगठनों ने पहले भी महिला आत्मघाती हमलावरों को तैनात किया है। लेकिन जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिद्दीन जैसे संगठनों ने अब तक इस रणनीति से दूरी बनाए रखी थी। अब माना जा रहा है कि जमात-उल-मोमिनात की स्थापना, जैश के भविष्य में महिला आत्मघाती हमलावरों को प्रशिक्षण और हमलों में शामिल करने की दिशा में एक संकेत है।

खुफिया सूत्रों के अनुसार, बहावलपुर में भर्ती के लिए विशेष सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें महिलाओं (Jaish-e-Mohammed women brigade) को वैचारिक प्रशिक्षण, धार्मिक शिक्षण और संगठन के प्रोपेगेंडा से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई है। संगठन की कोशिश है कि इन महिलाओं को संगठन के अंदरूनी नेटवर्क में अहम भूमिकाएं दी जाएं और आगे चलकर इन्हें आतंकवादी अभियानों में शामिल किया जाए।

भारत के सुरक्षा एजेंसियों ने इस कदम पर नजर रखी हुई है। बहावलपुर पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammed women brigade) का पारंपरिक गढ़ रहा है। यहीं से संगठन ने कई बार भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम दिया है, जिनमें 2016 का पठानकोट एयरबेस हमला और 2019 का पुलवामा हमला प्रमुख हैं। अब उसी शहर से महिला ब्रिगेड की भर्ती शुरू होना सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक अहम संकेत माना जा रहा है।

यह भी उल्लेखनीय है कि सादिया अजहर का परिवार जैश की गतिविधियों में वर्षों से सक्रिय रहा है। यूसुफ अजहर की मौत के बाद सादिया को संगठन में एक महत्वपूर्ण चेहरा माना जा रहा है। वह महिलाओं के बीच संगठन के संदेश को फैलाने और उन्हें वैचारिक रूप से तैयार करने में केंद्रीय भूमिका निभा रही है।

जैश-ए-मोहम्मद ने इस महिला ब्रिगेड (Jaish-e-Mohammed women brigade) की घोषणा ऐसे समय की है, जब पाकिस्तान में आतंकी संगठनों पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा है और संयुक्त राष्ट्र की निगरानी भी तेज हुई है। इसके बावजूद संगठन द्वारा खुले तौर पर महिलाओं की भर्ती शुरू करना बताते है कि अंदर ही अंदर जैश कोई बड़ी आतंकी वारदात की तैयारी कर रहा है।

Tejas Mk1A fighter jet: HAL से आई खुशखबरी! जानें किस दिन मिलेगी भारतीय वायुसेना को तेजस मार्क1ए फाइटर जेट्स की चाबी?

Tejas Mk1A Delivery
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Tejas Mk1A fighter jet: भारतीय वायुसेना को जल्द ही स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस एमके1ए (Tejas Mk1A fighter jet) की पहली डिलीवरी मिलने जा रही है। 17 अक्टूबर को नासिक में आयोजित एक विशेष समारोह में वायुसेना को पहले तेजस एमके1ए विमान औपचारिक रूप से सौंपे जाएंगे।

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रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, नासिक में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की फैसिलिटी में आयोजित समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मौजूद रहेंगे। इस मौके पर दो तेजस एमके1ए (Tejas Mk1A fighter jet) विमान वायुसेना को सौंपे जाएंगे। राजनाथ सिंह फैसिलिटी का दौरा करेंगे और विमान निर्माण में शामिल इंजीनियरों और कर्मचारियों से मुलाकात भी करेंगे।

तेजस एमके1ए विमानों (Tejas Mk1A fighter jet) की डिलीवरी में देरी की मुख्य वजह अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस की ओर से इंजन की सप्लाई में देरी रही है। एचएएल को फरवरी 2024 से डिलीवरी शुरू करनी थी, लेकिन इंजन की सप्लाई में दिक्कत रही। फिलहाल हर महीने दो इंजन की डिलीवरी का वादा किया गया है। एचएएल का लक्ष्य अगले चार साल में 83 विमानों की डिलीवरी पूरी करना है। रक्षा मंत्रालय और जीई एयरोस्पेस के बीच 97 अतिरिक्त तेजस एमके1ए विमानों की खरीद पर बातचीत आखिरी चरण में है।

वर्तमान में मिग-21 की दो स्क्वाड्रन खत्म होने के बाद भारतीय वायुसेना के पास केवल 29 स्क्वाड्रन हैं, जबकि मौजूदा जरूरत 42 स्क्वाड्रन की है। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने हाल में एक बयान में इस पर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था, “भूखे मुंह तैयार हैं, हम सिर्फ भोजन का इंतजार कर रहे हैं।” उनका इशारा तेजस विमानों के जल्दी प्रोडक्शन और डिलीवरी की तरफ था। उन्होंने कहा कि वायुसेना की क्षमता बनाए रखने के लिए हर साल 30 से 40 विमान तैयार होने चाहिए, यानी दो स्क्वाड्रन हर साल तैयार होनी चाहिए।

इस बीच, भारतीय वायुसेना की 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) खरीदने की भी योजना बना रही है। रक्षा मंत्रालय “मेड इन इंडिया” राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद पर विचार कर रहा है। योजना के तहत कम से कम 18 राफेल विमानों की तुरंत सप्लाई की जा सकती है, जबकि बाकी जहाजों को भारत में ही बनाया जाएगा।

Amir Khan Muttaqi India visit: मुत्ताकी की भारत यात्रा में झंडे को लेकर क्यों टेंशन में है भारत? देवबंद और आगरा भी जाएंगे

Amir Khan Muttaqi India visit: Taliban flag sparks diplomatic dilemma
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Amir Khan Muttaqi India visit: अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी इन दिनों 8 दिन के भारत दौरे पर हैं। लेकिन इस दौरे को लेकर भारत सरकार एक अनोखी कूटनीतिक दुविधा का सामना कर रही है। सवाल यह है कि जब तालिबान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी नई दिल्ली में भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात करेंगे, तो क्या उस समय भारतीय तिरंगे के साथ तालिबान का झंडा लगाया जाएगा या नहीं।

Amir Khan Muttaqi visit India: अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी अगले हफ्ते आएंगे दिल्ली, तालिबान सरकार को सौंपा जा सकता है नई दिल्ली स्थित अफगान दूतावास

Amir Khan Muttaqi India visit:  तालिबान शासन को आधिकारिक मान्यता नहीं 

भारत ने अभी तक तालिबान शासन को आधिकारिक मान्यता नहीं दी है। इसी कारण उसने नई दिल्ली स्थित अफगान दूतावास में तालिबान को अपना झंडा लगाने की अनुमति नहीं दी है। वहां अब भी इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ अफगानिस्तान का तिरंगा लहराता है, जो पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी की सरकार का प्रतीक था। यही नीति अब तक सभी औपचारिक अवसरों पर अपनाई गई है। लेकिन मुत्ताकी की इस यात्रा के दौरान एक विशेष चुनौती सामने आई है।

आमतौर पर जब किसी देश का विदेश मंत्री भारत यात्रा पर आता है तो राजनयिक प्रोटोकॉल के अनुसार दोनों देशों के झंडे उनके पीछे और टेबल पर लगाए जाते हैं। लेकिन चूंकि भारत ने तालिबान (Amir Khan Muttaqi India visit) को मान्यता नहीं दी है, इसलिए अब यह तय करना मुश्किल हो गया है कि तालिबान के झंडे को कैसे और कहां प्रदर्शित किया जाए। सूत्रों के अनुसार, विदेश मंत्रालय इस असामान्य स्थिति को सावधानी से संभालने के लिए विकल्पों पर चर्चा कर रहा है।

इससे पहले जनवरी 2025 में दुबई में भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री और मुत्ताकी के बीच हुई बैठक में किसी भी झंडे का उपयोग नहीं किया गया था न भारतीय तिरंगा और न ही तालिबान का झंडा। हालांकि, जब बैठक भारत में हो रही है तो ऐसे में प्रोटोकॉल फॉलो करना जरूरी हो जाता है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने मुत्ताकी को 9 से 16 अक्टूबर के बीच नई दिल्ली की यात्रा की अनुमति दी है। मुत्ताकी यूएनएससी प्रस्ताव 1988 (2011) के तहत प्रतिबंधित व्यक्तियों की सूची में हैं, इसलिए यात्रा के लिए विशेष मंजूरी की जरूरत थी। सितंबर में उनकी यात्रा की योजना बनी थी लेकिन उस समय अनुमति नहीं मिल सकी थी।

मुत्ताकी की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत, रूस की मेजबानी में हुई मॉस्को फॉरमेट बैठक में तालिबान के साथ एक साझा बयान में शामिल हुआ था। इस बयान में अमेरिका के बग्राम एयरबेस को कब्जे में लेने के प्रयासों को “क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के खिलाफ” बताया गया था।

देवबंद और ताजमहल जाएंगे मुत्ताकी

मुत्ताकी (Amir Khan Muttaqi India visit) की छह दिवसीय भारत यात्रा के दौरान वे केवल राजनीतिक बैठकों में ही शामिल नहीं होंगे, बल्कि सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों का भी दौरा करेंगे। 11 अक्टूबर को वे सहारनपुर जिले में स्थित प्रसिद्ध दारुल उलूम देवबंद मदरसे का दौरा करेंगे। यह संस्था कई तालिबान नेताओं के लिए ऐतिहासिक रूप से प्रेरणा स्थल रही है। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में स्थित दारुल उलूम हक्कानिया इसी देवबंद के मॉडल पर स्थापित किया गया था, जहां से तालिबान के कई वरिष्ठ कमांडरों ने शिक्षा प्राप्त की थी।

12 अक्टूबर को मुत्ताकी आगरा में ताजमहल देखने जाएंगे। इसके बाद वे नई दिल्ली में एक प्रमुख चैंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा आयोजित उद्योग और व्यापार प्रतिनिधियों के कार्यक्रम में भी हिस्सा लेंगे।

हैदराबाद हाउस में मुलाकात

10 अक्टूबर को मुत्ताकी (Amir Khan Muttaqi India visit) और एस. जयशंकर के बीच हैदराबाद हाउस में औपचारिक बैठक होगी। यही वह जगह है जहां भारत विदेशी नेताओं से उच्च स्तरीय मुलाकातें करता है। मुत्ताकी को आधिकारिक विदेशी मंत्री के समान प्रोटोकॉल दिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, उनकी मुलाकात राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भी हो सकती है।

इस बैठक में सुरक्षा, आतंकवाद निरोध, मानवीय सहयोग और अफगान छात्रों तथा व्यापारियों के वीजा से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की जा सकती है। तालिबान प्रतिनिधिमंडल भारत में अपनी राजनयिक मौजूदगी बढ़ाने के मुद्दे को भी उठा सकता है।

क्या मान्यता देगा भारत?

मुत्ताकी (Amir Khan Muttaqi India visit) की इस यात्रा से दो दिन पहले भारत सरकार ने एक क्षेत्रीय समूह के तहत उन्हें पहली बार “सदस्य” के रूप में शामिल किया। यह कदम भारत को तालिबान को औपचारिक मान्यता देने के और करीब ले जाने वाला माना जा रहा है। मुत्ताकी संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची में होने के बावजूद भारत में पांच दिन के दौरे पर आएंगे, जिसके लिए विशेष अनुमति दी गई है।

मॉस्को फॉरमेट बैठक की तस्वीरों में मुत्ताकी को अन्य प्रतिनिधियों के बीच तालिबान के काले-सफेद झंडे के साथ देखा गया। यह वही झंडा है जिसे तालिबान शासन ने अपनाया है। संयुक्त राष्ट्र अब भी अफगानिस्तान के पूर्व गणराज्य के लाल-काले-हरे तिरंगे को मान्यता देता है। यही झंडा अभी भी नई दिल्ली में अफगान दूतावास पर लहरा रहा है।

तालिबान शासन को अब तक रूस को छोड़कर किसी ने औपचारिक मान्यता नहीं दी है। मुत्ताकी की यह यात्रा भारत की विदेश नीति के लिए एक संवेदनशील और प्रतीकात्मक क्षण है, जहां उसे प्रोटोकॉल और राजनीतिक संदेश के बीच संतुलन बनाना होगा।

ऑपरेशन सिंदूर का किया था समर्थन

मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम की घोषणा हुई थी। इसके कुछ ही दिन बाद 15 मई को मुत्ताकी (Amir Khan Muttaqi India visit) और एस. जयशंकर के बीच बातचीत हुई थी। यह तालिबान के काबुल पर कब्जे (अगस्त 2021) के बाद भारत और तालिबान के बीच पहला उच्च-स्तरीय राजनीतिक संपर्क था।

इस बार मुत्ताकी की यात्रा का मुख्य उद्देश्य नई दिल्ली में वरिष्ठ भारतीय नेताओं से मुलाकात करना और संबंधों को नए स्तर पर ले जाना है। मुत्ताकी रूस से यात्रा कर गुरुवार को भारत पहुंचेंगे। यह किसी वरिष्ठ तालिबान अधिकारी की भारत की पहली यात्रा होगी।

Air Force Day 2025 पर इस शानदार एतिहासिक कार से हिंडन एयर बेस पहुंचे एयरफोर्स चीफ, रजिस्ट्रेशन नंबर भी है बेहद खास

Indian Air Force Day 2025: IAF Chief AP Singh Arrives in Historic 1967 Ford Car
IAF Chief AP Singh Arrives in Historic 1967 Ford Car

Air Force Day 2025: भारतीय वायुसेना का 93वां स्थापना दिवस आज गाजियाबाद के हिंडन एयर बेस पर पूरे गौरव और परंपरा के साथ मनाया गया। यह दिन 8 अक्टूबर 1932 को वायुसेना की स्थापना की याद में हर वर्ष मनाया जाता है। इस बार का समारोह कई मायनों में खास रहा। एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने पूर्व एयर चीफ मार्शल प्रताप चंद्र लाल (पीसी लाल) की 1967 मॉडल की विंटेज फोर्ड सैलून कार में बैठ कर समारोह पहुंचे।

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Air Force Day 2025: 30 जुलाई 1969 को वायुसेना में हुई शामिल

क्रीम रंग की यह क्लासिक फोर्ड सैलून भारतीय वायुसेना की गौरवशाली विरासत का प्रतीक है। यह वही कार है जिसे 1969 में एयर चीफ मार्शल पीसी लाल ने पहली बार इस्तेमाल किया था। पीसी लाल 1971 के भारत-पाक युद्ध के हीरो थे और उन्होंने पाकिस्तान के ऑपरेशन ऑपरेशन चंगेज खान के जवाब में वायुसेना को निर्णायक जीत दिलाई थी। यह कार 30 जुलाई 1969 को वायुसेना में शामिल हुई थी। एयर चीफ मार्शल पीसी लाल थे 1969 से 1973 तक 7वें चीफ ऑफ एयर स्टाफ रहे। उन्हें पद्म भूषण, पद्म विभूषण और डिस्टिंग्विश्ड फ्लाइंग क्रॉस जैसे सम्मान भी मिले। रिटायरमेंट के बाद वे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के एमडी रहे थे।

Air Force Day 2025: 1967 फोर्ड सैलून कार

1967 की यह फोर्ड सैलून कार अमेरिकी फोर्ड मोटर कंपनी द्वारा बनाई गई एक लग्जरी सैलून थी। इसमें 390 वी8 इंजन लगा है, जो 8 सिलेंडर का है और 4600 आरपीएम पर 315 ब्रेक हॉर्सपावर की ताकत देता है। उस दौर में यह कार न सिर्फ आरामदायक थी बल्कि लंबी दूरी के सफर के लिए बेहतरीन थी। कार के डिजाइन की बात करें, तो सामने चार गोल हेलोजन हेडलाइट्स, क्रोम बंपर और फोर्ड का चमकता हुआ बैज इसे खास बनाते हैं।

Air Force Day 2025: रजिस्ट्रेशन नंबर “IAF 1”

इस कार की रजिस्ट्रेशन प्लेट भी “IAF 1” है। यह लेफ्ट-हैंड ड्राइव मॉडल है, जिसमें एयर कंडीशनिंग, एएम रेडियो और पावर विंडोज जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। 1969 से लेकर 1992 तक यह कार कई वायुसेना प्रमुखों की आधिकारिक स्टाफ कार रही। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस कार में 10 से अधिक एयर चीफ मार्शल ने सफर किया है, जिनमें पीसी लाल के अलावा ओम प्रकाश मेहरा, लाल चंद्र धूत और इदरीस हसन लतिफ जैसे नाम शामिल हैं।

Indian Air Force Day 2025: IAF Chief AP Singh Arrives in Historic 1967 Ford Car
Historic 1967 Ford Car in Palam Museum.

Air Force Day 2025: पालम म्यूजियम में है यह कार

1992 के बाद इस कार को रिटायर कर दिल्ली स्थित पालम एयर फोर्स म्यूजियम में रख दिया गया। यह विंटेज कार अब रोजमर्रा के उपयोग में नहीं है। इसे विशेष अवसरों, जैसे वायुसेना दिवस या ऐतिहासिक आयोजनों के लिए ही बाहर निकाला जाता है। सामान्य तौर पर इसे पालम एयर फोर्स म्यूजियम, नई दिल्ली में रखा जाता है। म्यूजियम में वायुसेना के पुराने विमान, हथियार और वाहन भी शोकस हैं। इस कार की नियमित मेंटेनेंस की जाती है ताकि इसकी पुरानी मशीनरी सही स्थिति में बनी रहे। हिंडन एयर बेस जैसे इवेंट्स (Air Force Day 2025) के लिए इसे म्यूजियम से लाया जाता है।

Indian Air Force Day 2025: वायुसेना दिवस पर सीडीएस जनरल चौहान ने दी शुभकामनाएं, ऑपरेशन सिंदूर में एयरफोर्स की भूमिका को सराहा

Indian Air Force Day 2025: CDS Anil Chauhan Extends Greetings on 93rd IAF Anniversary
CDS Gen Anil Chauhan along with Army Chief General Upendra Dwivedi, Navy Chief Admiral Dinesh Tripathi and IAF Chief Air Chief Marshal AP Singh.

Indian Air Force Day 2025: भारतीय वायुसेना दिवस 2025 के 93वें समारोह के अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने भारतीय वायुसेना के सभी अधिकारियों, जवानों, पूर्व वायुसैनिकों उनके परिवारों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। अपने संदेश में उन्होंने भारतीय वायुसेना की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि वायुसेना ने कई बार यह साबित किया है कि एयर पावर किस प्रकार रणनीतिक नतीजों को प्रभावित कर सकती है।

IAF Day 2025 पर ऑपरेशन सिंदूर के लिए गोल्डन एरोज, S-400 और ब्रह्मोस स्क्वॉड्रन को मिला यूनिट साइटेशन

उन्होंने विशेष रूप से ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख किया, जिसमें भारतीय वायुसेना ने दुश्मन के इलाके में अंदर तक जाकर सटीक हमले किए। सीडीएस जनरल चौहान ने कहा कि भारतीय वायुसेना ने आधुनिक तकनीक और शानदार ट्रेनिंग के बल पर हर परिस्थिति में देश की सुरक्षा को मजबूत किया है।

सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना के प्रदर्शन की प्रशंसा की। उन्होंने वायुसेना के जटिल सेंसर और रडार नेटवर्क की सराहना की, जिसने दुश्मन के लड़ाकू विमानों, एरियल वेपन्स और ड्रोन को प्रभावी ढंग से ट्रैक और एंगेज किया।

उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन के दौरान सरफेस टू एयर मिसाइल (SAM) और काउंटर अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स (CUAS) ने भारतीय थलसेना की एयर डिफेंस यूनिट्स के साथ मिलकर इंटीग्रेटिड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (IACCS) के तहत बिना किसी रुकावट के काम किया। इन प्रयासों से ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार नतीजे हासिल किए गए।

सीडीएस ने भारतीय वायुसेना द्वारा आधुनिकीकरण के लिए किए जा रहे लगातार प्रयासों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना स्वदेशी प्लेटफॉर्म को शामिल कर, एडवांस वेपंस सिस्टम्स को अपनाकर और आधुनिक सिद्धांतों को विकसित कर एक सक्षम और तकनीकी रूप से सशक्त वायुसेना के रूप में उभरी है।

उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध की प्रकृति तेजी से बदल रही है। भविष्य के संघर्ष तकनीक-प्रधान, तेज और कई क्षेत्रों में एक साथ लड़े जाएंगे। इन परिस्थितियों में एयर पावर आधुनिक युद्ध का निर्णायक तत्व होगा।

जनरल अनिल चौहान ने भारतीय वायुसेना की मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) अभियानों में निभाई जा रही भूमिका को भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा, “भारतीय वायुसेना ने युद्धग्रस्त क्षेत्रों में फंसे नागरिकों को बचाकर और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान महत्वपूर्ण मदद प्रदान करके लगातार अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है।”

उन्होंने कहा कि दशकों से भारतीय वायुसेना देश के आसमान की सुरक्षा का प्रतीक रही है और आपदाओं के समय सबसे पहले नागरिकों की मदद के लिए पहुंची है।

IAF Day 2025 पर ऑपरेशन सिंदूर के लिए गोल्डन एरोज, S-400 और ब्रह्मोस स्क्वॉड्रन को मिला यूनिट साइटेशन

Indian Air Force Unit Citation to Rafale Golden Arrows, S-400 & BrahMos Squadrons on IAF Day 2025

IAF Day 2025: 93वें भारतीय वायुसेना दिवस के मौके पर इस बार वायुसेना की कई यूनिट्स को विशेष सैन्य सम्मान दिए गए। कुल 97 पुरस्कार और 6 यूनिट को इस साल साइटेशन प्रदान किए गए, जिनमें देश के एयर डिफेंस और स्ट्राइकिंग क्षमता से जुड़ीं कई प्रमुख स्क्वॉड्रन शामिल हैं। खास बात यह है कि इन सभी यूनिट्स ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अभूतपूर्व पराक्रम दिखाते हुए पाकिस्तान को जबरदस्त चोट पहुंचाई थी।

Air force Day 2025: एयर चीफ बोले- ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाया कैसे एयर पॉवर बदल सकती है युद्ध की दिशा, अनुशासित ट्रेनिंग, सटीक योजना का है शानदार उदाहरण

IAF Day 2025: ऑपरेशन सिंदूर के लिए किया सम्मानित

कार्यक्रम में आईएएफ चीफ एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने गैलेंट्री अवॉर्ड्स और साइटेशंस (उल्लेखनीय सेवा के प्रमाण-पत्र) प्रदान किए। ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायुसेना के 9 वीर चक्र पाने वाले अधिकारियों को स्ट्राइक, इंटरसेप्शन और एयर सुपीरियरिटी के लिए साइटेशन दिया गया। इनमें ग्रुप कैप्टन रणजीत सिंह सिद्धू, ग्रुप कैप्टन मनीष अरोड़ा, ग्रुप कैप्टन अनिमेष पटनी, ग्रुप कैप्टन कुणाल कलरा, विंग कमांडर जॉय चंद्रा, स्क्वाड्रन लीडर सरथक कुमार, स्क्वाड्रन लीडर सिद्धांत सिंह, स्क्वाड्रन लीडर रिजवान मलिक और फ्लाइट लेफ्टिनेंट आर्शवीर सिंह ठाकुर शामिल थे। इन अधिकारियों ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एस-400 सिस्टम, राफेल स्ट्राइक्स और 5 पाकिस्तानी जेट्स गिराने में अहम भूमिका निभाई थी।

वहीं इस दौरान वायुसेना प्रमुख ने कुल 97 मेडल्स और 6 यूनिट साइटेशन वायुवीरों को प्रदान किए। साइटेशन मुख्य रूप से ऑपरेशन सिंदूर में बहादुरी और सेवा के लिए दिए गए। जिन स्क्वॉड्रनों को यूनिट साइटेशन दिया गया है, उनमें एस-400 एयर डिफेंस यूनिट, राफेल स्क्वॉड्रन नंबर 17 ‘गोल्डन एरोज’, सुखोई स्क्वॉड्रन, ब्रह्मोस से लैस 222 ‘टाइगरशार्क्स’ स्क्वॉड्रन और लोइटरिंग म्यूनिशन यूनिट शामिल हैं।

Indian Air Force Unit Citation to Rafale Golden Arrows, S-400 & BrahMos Squadrons on IAF Day 2025

IAF Day 2025: गोल्डन एरोज को यूनिट साइटेशन

हरियाणा के अंबाला में स्थित भारतीय वायुसेना की प्रसिद्ध नंबर 17 स्क्वॉड्रन, जिसे ‘गोल्डन एरोज’ के नाम से जाना जाता है। इस स्क्वॉड्रन को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बेहतरीन प्रदर्शन के लिए यूनिट साइटेशन प्रदान किया गया। ग्रुप कैप्टन अमित गेहानी के नेतृत्व में इस स्क्वॉड्रन ने 9 आतंकवादी ट्रेनिंग कैंपों और पाकिस्तानी वायुसेना के 11 प्रमुख एयरबेस पर सटीक हवाई हमले किए थे। बता दें कि यह स्क्वॉड्रन भारत के सबसे एडवांस 4.5 जेनरेशन फाइटर जेट्स राफेल से लैस है।

राफेल लड़ाकू विमानों से लैस गोल्डन एरोज ने ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान के भीतर तक जाकर स्ट्राइक की थी। यह स्क्वॉड्रन भारतीय वायुसेना की आधुनिक एयर पावर का प्रतीक मानी जाती है। वायुसेना प्रमुख की उपस्थिति में ग्रुप कैप्टन अमित गेहानी को यूनिट साइटेशन प्रमाण पत्र और प्रशस्ति प्रदान किया गया।

Indian Air Force Unit Citation to Rafale Golden Arrows, S-400 & BrahMos Squadrons on IAF Day 2025

222 ‘टाइगरशार्क्स’ स्क्वॉड्रन को ब्रह्मोस के लिए सम्मान

‘टाइगरशार्क्स’ के नाम से मशहूर नंबर 222 स्क्वॉड्रन को भी सम्मानित किया। यह भारतीय वायुसेना की एकमात्र स्क्वॉड्रन है जो ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल से लैस है। इस स्क्वॉड्रन को भी इस वर्ष यूनिट साइटेशन प्रदान किया गया। यह स्क्वॉड्रन सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमानों से ब्रह्मोस मिसाइलें लॉन्च करने में सक्षम है।

222 स्क्वॉड्रन की कमान ग्रुप कैप्टन वरुण भोज के पास है और वारंट ऑफिसर धीरज कुमार सहित यूनिट के अन्य अधिकारियों को भी इस अवसर पर सम्मानित किया गया। इन स्क्वॉड्रन ने भारतीय वायुसेना की स्ट्राइक रेंज को कई गुना बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।

S-400 की स्क्वॉड्रन 2601  एयर डिफेंस यूनिट को भी मिला साइटेशन

भारतीय वायु सेना प्रमुख एसीएम एपी सिंह ने एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की स्क्वाड्रन संख्या 2601 ‘ट्रायंफ’ को भी यूनिट प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। इस यूनिट ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय के हवाई क्षेत्र की रक्षा में अहम भूमिका निभाई थी। एस-400 सिस्टम 400 किलोमीटर तक की दूरी पर दुश्मन के फाइटर जेट, मिसाइल और ड्रोन को इंटरसेप्ट कर सकता है।

अगस्त में आर्मी वॉर कॉलेज, महू में रण संवाद के दौरान, एसीएम एपी सिंह ने एस-400 लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल सिस्टम की तारीफ की थी और इसे “गेम-चेंजर” कहा। उन्होंने कहा कि एस-400 वायु रक्षा प्रणाली ने दुश्मन को अपनी सीमा के अंदर भी काम करने की आजादी नहीं दी।

लोइटरिंग म्यूनिशन 2232 केस्ट्रेल्स यूनिट को भी मिला सम्मान

वायुसेना की लोइटरिंग म्यूनिशन यूनिट 2232 केस्ट्रेल्स को भी इस वर्ष यूनिट साइटेशन प्रदान किया गया। यह यूनिट आधुनिक युद्ध में निगरानी और सटीक हमलों में अहम भूमिका निभा रही है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस यूनिट ने रियल टाइम में दुश्मन की गतिविधियों पर निगरानी रखते हुए भारतीय स्क्वॉड्रनों को अचूक टारगेटिंग में मदद की थी।

इसके अलावा उन्होंने यूनिट साइटेशन स्क्वॉड्रन नंबर 43 ‘आईबेक्सेस’ को प्रदान किया, जो एएन-32 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट ऑपरेट करती है। साथ ही 7 बीआरडी (BRD) को भी यूनिट साइटेशन दिया गया, जहां रडार और गाइडेड वेपन्स सिस्टम रखे और ऑपरेट किए जाते हैं।

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एमआई-17 हेलीकॉप्टरों का ‘ध्वज’ फॉर्मेशन

बुधवार को उत्तर प्रदेश के हिंडन एयर बेस (गाजियाबाद) पर आयोजित कार्यक्रम में एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के अलावा सीडीएस जनरल अनिल चौहान, आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी और नेवी चीफ एडमिरल दिनेश त्रिपाठी भी मौजूद थे। हालांकि इस बार फ्लाइपास्ट तो नहीं हुआ, लेकिन परेड का आयोजन किया गया था। सुबह 9 बजे से समारोह शुरू हुआ। परेड की शुरुआत प्रेसिडेंट्स कलर्स के मार्च-इन से हुई। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने परेड का निरीक्षण किया और गार्ड ऑफ ऑनर को सलामी दी। परेड में आईएएफ के मार्चिंग कंटिंजेंट्स शामिल थे। इसके बाद एमआई-17 हेलीकॉप्टरों ने ‘ध्वज’ फॉर्मेशन में उड़ान भरकर हवाई सलामी दी।

इस वायुसेना दिवस (IAF Day 2025) समारोह में हेरिटेज फ्लाइट का शानदार हवाई प्रदर्शन मुख्य आकर्षण रहा। इस प्रदर्शन में ऐतिहासिक ‘टाइगर मॉथ’ और ‘एचटी-2’ विमानों ने संयुक्त रूप से उड़ान भरी, जिसके बाद पुराने ‘हार्वर्ड’ विमान ने सोलो डिस्प्ले पेश किया। पारंपरिक फ्लाईपास्ट और एयर डिस्प्ले का आयोजन 9 नवंबर 2025 को गुवाहाटी में किया जाएगा।

वहीं, स्टैटिक डिस्प्ले में आधुनिक विमानों और उपकरणों को प्रदर्शित किया गया। इनमें सी-17 ग्लोबमास्टर, सुखोई-30 एमकेआई, अपाचे, मिग-29, मिग-21 बाइसन, राफेल, एचएलएच मार्क-3, एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल एयरक्राफ्ट, सी-130जे सुपर हरक्यूलिस, आकाश मिसाइल सिस्टम और रोहिणी रडार शामिल थे।