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BrahMos Lucknow Facility: “मिसाइल कैपिटल” से रवाना हुआ ब्रह्मोस का पहला बैच, रक्षा मंत्री बोले– अब पाकिस्तान का हर इंच हमारी पहुंच में

BrahMos Lucknow Facility
Rajnath Singh and CM Yogi flag off first batch of Lucknow-made BrahMos missiles

BrahMos Lucknow Facility: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने धनतेरस पर शनिवार को ब्रह्मोस इंटीग्रेशन एंड टेस्टिंग फैसिलिटी सेंटर से बनी पहली खेप की ब्रह्मोस मिसाइलों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। लखनऊ के सरोजिनी नगर स्थित ब्रह्मोस एयरोस्पेस यूनिट उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का सबसे अहम प्रोजेक्ट है।

BrahMos Lucknow Unit: शनिवार को लखनऊ से रवाना होगी ब्रह्मोस मिसाइल की पहली खेप, रक्षा मंत्री और यूपी के सीएम करेंगे फ्लैग-ऑफ

11 मई 2025 को रक्षा मंत्री ने इसका वर्चुअली उद्घाटन किया था, सिर्फ पांच महीने के भीतर यह प्रोडक्शन के लिए तैयार हो गया। इस मौके पर राजनाथ सिंह ने कहा कि “ब्रह्मोस सिर्फ एक मिसाइल नहीं है, बल्कि यह भारत की बढ़ती स्वदेशी तकनीकी क्षमता का प्रतीक है।” उन्होंने कहा कि यह मिसाइल पारंपरिक वारहेड, एडवांस गाइडेड सिस्टम और सुपरसोनिक स्पीड के के चलते दुनिया की सबसे ताकतवर मिसाइलों में से एक है।

BrahMos Lucknow Facility: ऑपरेशन सिंदूर का किया जिक्र, पाकिस्तान को चेतावनी

रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि इस ऑपरेशन ने यह साबित कर दिया कि भारत अब “ट्रायल” नहीं कर रहा, बल्कि निर्णायक कार्रवाई करने में सक्षम है। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान का हर इंच अब ब्रह्मोस की पहुंच में है। ऑपरेशन सिंदूर हमारी जीत की आदत का प्रमाण है, और अब हमें अपनी क्षमताओं को और बढ़ाना है। यह ऑपरेशन सिर्फ एक ट्रेलर था, जिससे पाकिस्तान को समझ आ गया कि अगर जरूरत पड़ी तो क्या हो सकता है।”

उन्होंने कहा कि भारत आज न केवल अपनी सुरक्षा को मजबूत कर रहा है बल्कि दुनिया को यह संदेश भी दे रहा है कि वह रक्षा और तकनीक के क्षेत्र में एक विश्वसनीय भागीदार है।

 Rajnath SinghSingh and CM Yogi flag off first batch of Lucknow-made BrahMos missiles
Four BrahMos missiles delivered on Dhanteras

‘मेक इन इंडिया’ से ‘मेड फॉर द वर्ल्ड’ तक

राजनाथ सिंह ने कहा कि ब्रह्मोस मिसाइल आज “मेड इन इंडिया” की सफलता की सबसे बड़ी मिसाल है। उन्होंने कहा, “आज भारत लेने वाला नहीं, बल्कि देने वाला देश बन गया है। फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइल की सप्लाई इसका प्रमाण है, और कई अन्य देश भी इस दिशा में भारत से सहयोग कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “आत्मनिर्भर भारत” की दृष्टि अब वास्तविकता में बदल चुकी है और रक्षा क्षेत्र इस परिवर्तन का निर्णायक स्तंभ बन चुका है।

रक्षा मंत्री ने बताया कि पिछले एक महीने में ब्रह्मोस टीम ने लगभग 4,000 करोड़ रुपये के दो अंतरराष्ट्रीय कॉन्ट्रैक्ट साइन किए हैं। उन्होंने कहा, “आने वाले सालों में लखनऊ डिफेंस टेक्नोलॉजी का ज्ञान केंद्र बनेगा। यहां न सिर्फ प्रोडक्शन होगा, बल्कि दुनिया भर के विशेषज्ञ यहां अध्ययन और साझेदारी के लिए आएंगे।”

उन्होंने बताया कि लखनऊ स्थित इस यूनिट का टर्नओवर अगले वित्त वर्ष से लगभग 3,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा और इससे 500 करोड़ रुपये का जीएसटी भी मिलेगा।

200 एकड़ में फैली अत्याधुनिक ब्रह्मोस यूनिट

लखनऊ में स्थित यह यूनिट 200 एकड़ के क्षेत्र में बनी है और इसकी कुल लागत 380 करोड़ रुपये है। यह सिर्फ एक मिसाइल निर्माण केंद्र नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के विकास और रोजगार का भी नया द्वार है। इस फैसिलिटी में हर साल लगभग 100 मिसाइल सिस्टम्स के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि “यह सिर्फ एक रक्षा परियोजना नहीं है, बल्कि यह रोजगार और औद्योगिक विकास का भी प्रतीक है। उत्तर प्रदेश में आ रहे निवेशों के चलते यह इलाका आने वाले समय में रक्षा और विकास दोनों क्षेत्रों में एक नया युग शुरू करेगा।”

BrahMos Lucknow Facility

सप्लाई चेन में आत्मनिर्भरता पर जोर

रक्षा मंत्री ने ग्लोबल सप्लाई चेन की चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत को अब ऐसी स्थिति में आना होगा कि किसी भी हिस्से या कंपोनेंट के लिए उसे किसी विदेशी कंपनी पर निर्भर न रहना पड़े। उन्होंने कहा, “हमें अपने छोटे उद्योगों को इतना मजबूत बनाना है कि चाहे वह एडवांस सीकर्स हों या रैमजेट इंजन, सब कुछ भारत में ही बने। हमारी पूरी सप्लाई चेन भारत के भीतर रहनी चाहिए।”

उन्होंने कहा कि यूपी डिफेंस कॉरिडोर तभी पूरी तरह सफल होगा, जब बड़ी कंपनियों के साथ छोटे उद्योग भी जुड़ेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि “छोटे उद्यमियों को डिफेंस इकोसिस्टम में शामिल करने के लिए हमें स्पष्ट प्रोजेक्ट रोडमैप तैयार करना होगा।”

रक्षा और अर्थव्यवस्था- दोनों के लिए फायदेमंद

राजनाथ सिंह ने कहा कि ब्रह्मोस जैसी परियोजनाएं न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करती हैं बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी रफ्तार देती हैं। उन्होंने कहा कि “हर एक मिसाइल के उत्पादन से जो टैक्स सरकार को मिलता है, उससे कई स्कूल, अस्पताल और सामाजिक योजनाएं चलाई जा सकती हैं।”

उन्होंने कहा कि भारत की हर रक्षा परियोजना अब दोहरा लाभ दे रही है, एक तरफ सुरक्षा को मजबूत कर रही है और दूसरी ओर आर्थिक विकास को बढ़ावा दे रही है।

BrahMos Lucknow Facility

सीएम योगी बोले- 15,000 से अधिक युवाओं को मिला रोजगार

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि “ब्रह्मोस मिसाइल आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक है। यह न केवल देश की डिफेंस जरूरतों को पूरा कर रही है बल्कि उत्तर प्रदेश को डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग का केंद्र भी बना रही है।” उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का धन्यवाद करते हुए कहा कि “लखनऊ आज देश की रक्षा आत्मनिर्भरता यात्रा का हिस्सा बनकर गौरवान्वित है।”

मुख्यमंत्री ने बताया कि यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के सभी छह नोड्स में तेजी से विकास हो रहा है और अब तक 15,000 से अधिक युवाओं को रोजगार मिल चुका है। उन्होंने कहा कि लखनऊ से निर्मित ब्रह्मोस मिसाइलें न केवल भारत की सुरक्षा का भरोसा हैं, बल्कि देश की समृद्धि का भी प्रतीक हैं।

ब्रह्मोस फैसिलिटी, यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का सबसे अहम हिस्सा है। यहां मिसाइल के असेंबली, इंटीग्रेशन और टेस्टिंग की पूरी प्रक्रिया की जा रही है, जो पहले रूस में होती थी। इस यूनिट से पहली खेप के रवाना होने के साथ ही उत्तर प्रदेश अब “मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड” पहल का अग्रणी राज्य बन गया है।

कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री ने बूस्टर बिल्डिंग का उद्घाटन किया और बूस्टर डॉकिंग प्रक्रिया का लाइव प्रदर्शन देखा। इसके अलावा उन्होंने एयरफ्रेम, एवियोनिक्स, वॉरहेड और सिमुलेशन इकाइयों का निरीक्षण किया। कार्यक्रम में ब्रह्मोस का मोबाइल ऑटोनोमस लॉन्चर भी प्रदर्शित किया गया।

इस अवसर पर ब्रह्मोस एयरोस्पेस के डीजी डॉ. जयतीर्थ आर. जोशी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 40 करोड़ रुपये का जीएसटी चेक सौंपा। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और डीआरडीओ प्रमुख डॉ. समीर वी. कामत भी मौजूद रहे।

Mahindra Embraer C-390: महिंद्रा और ब्राजील की एम्ब्रेयर IAF के लिए बनाएंगी C-390 मिलेनियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, जानें कैसे IL-76 और AN-32 से है बेहतर

Mahindra Embraer C-390
Mahindra Group and Brazil’s Embraer Sign Pact to Offer C-390 Millennium Aircraft to Indian Air Force

Mahindra Embraer C-390: महिंद्रा ग्रुप और ब्राजील की एम्ब्रेयर डिफेंस एंड सिक्योरिटी ने बड़े रणनीतिक समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता भारतीय वायुसेना के मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट प्रोग्राम के तहत सी-390 मिलेनियम विमान को भारत में बनाने के लिए किया गया है।

इस समझौते का उद्देश्य भारत में लोकल मैन्युफैक्चरिंग, असेंबली, मेंटेनेंस और रिपेयर फैसिलिटी तैयार करना है, जिससे सी-390 विमान का प्रोडक्शन और ऑपरेशन पूरी तरह भारतीय रक्षा उद्योग के माध्यम से किया जा सके। यह करार “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” अभियानों को मजबूत करेगा और भारत को ग्लोबल एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करेगा।

यह समझौता (Mahindra Embraer C-390) फरवरी 2024 में साइन किए गए एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग का अगला फेज है, जिसमें दोनों कंपनियों ने प्रारंभिक सहयोग की रूपरेखा तय की थी। नया समझौता में एक कदम आगे बढ़ते हुए जॉइंट मार्केटिंग, इंडस्ट्रियलाइजेशन और सप्लाई चेन डेवलपमेंट की जिम्मेदारी तय होगी।

एम्ब्रेयर और महिंद्रा (Mahindra Embraer C-390) का यह सहयोग भारतीय वायुसेना की ट्रांसपोर्ट क्षमता को आधुनिक बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। वर्तमान में वायुसेना के पास पुराने एएन-32 और आईएल-76 जैसे ट्रांसपोर्ट विमान हैं, जिन्हें धीरे-धीरे बदलने की योजना है। सी-390 मिलेनियम विमान 26 टन तक का पेलोड ले जा सकता है और ट्रूप ट्रांसपोर्ट, मेडिकल इवैक्यूएशन, कार्गो, और ह्यूमैनिटेरियन मिशनों में इस्तेमाल किया जा सकता है।

सी-390 की खास बात यह है कि यह अनपेव्ड या शॉर्ट रनवे से भी उड़ान भर सकता है, जिससे यह हिमालयी और सीमावर्ती इलाकों में भी ऑपरेट किया जा सकता है। यह विमान 870 किमी/घंटा की स्पीड से उड़ान भर सकता है और फुल लोड के साथ 2,800 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकता है।

महिंद्रा ग्रुप (Mahindra Embraer C-390) भारत में लोकल प्रोडक्शन, असेंबली और सप्लाई चेन की जिम्मेदारी निभाएगा। महिंद्रा डिफेंस सिस्टम्स पहले से ही भारतीय सेनाओं के लिए आर्मर्ड और टैक्टिकल व्हीकल बनाती है। हाल ही में महिंद्रा एयरोस्ट्रक्चर्स को एयरबस एच125 हेलीकॉप्टर के मेन फ्यूजलेज बनाने का कॉन्ट्रैक्ट भी मिला है।

एम्ब्रेयर अपनी तरफ से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, डिजाइन सपोर्ट और ट्रेनिंग मुहैया कराएगी। कंपनी ने अब तक विश्वभर में 9,000 से अधिक विमान डिलीवर किए हैं, जिनमें से सी-390 मॉडल ब्राजील, पुर्तगाल, हंगरी और नीदरलैंड्स की वायु सेनाओं में तैनात हैं।

महिंद्रा ग्रुप के एक्जीक्यूटिव बोर्ड मेंबर विनोद सहाय ने कहा, “सी-390 मिलेनियम विमान भारतीय वायुसेना की आधुनिक जरूरतों को पूरा करने में पूरी तरह सक्षम है। इसका प्रदर्शन और वर्सटाइलिटी इसे ग्लोबल स्टैंडर्ड पर खरा साबित करती है।”

एम्ब्रेयर डिफेंस एंड सिक्योरिटी (Mahindra Embraer C-390) के सीईओ बोस्को दा कोस्टा जूनियर ने कहा, “भारत के साथ हमारी साझेदारी हमारे वैश्विक डिफेंस नेटवर्क के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। सी-390 न केवल भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाएगा, बल्कि भारत के आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग यात्रा में भी योगदान देगा।”

Mahindra Embraer C-390: जानें C-390 मिलेनियम की खूबियां

दोनों देशों ने हाल के वर्षों में एयरोस्पेस और मिलिट्री टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में कई समझौते किए हैं। भारत ने ब्राजील को अपने आकाश मिसाइल सिस्टम की पेशकश की थी, जबकि ब्राजील अब भारत को अपने सी-390 मिलेनियम विमान के माध्यम से तकनीकी सहयोग दे रहा है।

C-390 मिलेनियम (Mahindra Embraer C-390) न केवल तेज और ताकतवर है, बल्कि इसमें खूबियां इसे एक “5-इन-1 मल्टी-रोल प्लेटफॉर्म” बनाती हैं। इस विमान की सबसे बड़ी ताकत इसका पेलोड कैपेसिटी है। यह लगभग 26 टन वजन तक कार्गो, ट्रूप्स, व्हीकल्स या हेलीकॉप्टर तक ले जा सकता है, जो भारतीय वायुसेना के एन-32 विमान की तुलना में करीब 60 फीसदी अधिक है। लंबी दूरी के मिशनों में भी यह विमान शानदार प्रदर्शन करता है। यह फुल लोड के साथ 2,800 किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है और एयर रिफ्यूलिंग सिस्टम से इसकी रेंज 6,000 किलोमीटर तक बढ़ाई जा सकती है। यानी यह लद्दाख से लेकर अंडमान तक एक ही उड़ान में पहुंच सकता है।

क्रूजिंग स्पीड 870 किलोमीटर प्रति घंटा

सी-390 की क्रूजिंग स्पीड 870 किलोमीटर प्रति घंटा है, जो आईएल-76 जैसे पारंपरिक ट्रांसपोर्ट विमानों से भी तेज है। यह विमान सिर्फ 1,000 मीटर लंबे रनवे से टेकऑफ कर सकता है। विमान का अधिकतम टेकऑफ वेट 86 टन है। यह ऊंचाई वाले एयरफील्ड्स, जैसे लेह (10,000 फीट) जैसे बेस पर भी बिना किसी दिक्कत के उड़ान भर सकता है। इसकी एक और बड़ी विशेषता है कि यह एक ही प्लेटफॉर्म पर पांच भूमिकाएं निभा सकता है, ट्रांसपोर्ट, एयर टैंकर, मेडिकल इवैक्यूएशन, सर्च एंड रेस्क्यू और मानवीय सहायता।

विमान में बूम और प्रोब-एंड-ड्रोग सिस्टम दोनों उपलब्ध हैं, जिससे यह अन्य विमानों को हवा में ही ईंधन भर सकता है। इसके पिछले हिस्से में एक फुल-साइज रियर रैंप दिया गया है, जिससे जीप, 155 मिमी की तोप या टैक्टिकल व्हीकल को केवल कुछ सेकंड में लोड और अनलोड किया जा सकता है।

खराब मौसम में भी लैंडिंग

सी-390 में अत्याधुनिक फ्लाई-बाय-वायर टेक्नोलॉजी और 4डी हेड-अप डिस्प्ले सिस्टम लगे हैं, जिससे यह विमान खराब मौसम या रात के मिशनों में भी सुरक्षित लैंडिंग कर सकता है। इसकी फ्यूल एफिशिएंसी 25 से 30 प्रतिशत तक बेहतर है, जिससे भारतीय वायुसेना को सालाना करोड़ों रुपये की बचत हो सकती है।

यह विमान (Mahindra Embraer C-390) हॉट-एंड-हाई परफॉर्मेंस के लिए भी डिजाइन किया गया है, यानी यह 50 डिग्री सेल्सियस तापमान और 5,000 फीट ऊंचाई पर भी 23 टन लोड के साथ ऑपरेट कर सकता है। मेडिकल मिशनों के दौरान यह 64 स्ट्रेचर और आईसीयू सेटअप के साथ घायलों को 2 घंटे में बेस हॉस्पिटल पहुंचा सकता है। वहीं, सर्च एंड रेस्क्यू मिशनों के लिए इसमें रडार और FLIR सेंसर लगे हैं जो हिमालय या समुद्री इलाकों में गुमशुदा व्यक्तियों को खोजने में मदद करते हैं।

90 प्रतिशत पार्ट्स भारत में बनेंगे

मेंटेनेंस के लिहाज से भी यह विमान बेहद आसान है। इसकी 90 प्रतिशत पार्ट्स भारत में बनने की योजना है और इसे एक घंटे के भीतर अगले मिशन के लिए तैयार किया जा सकता है। सुरक्षा रिकॉर्ड की बात करें तो अब तक सी-390 ने 50,000 से ज्यादा फ्लाइट ऑवर्स पूरे किए हैं और इसका सेफ्टी रिकॉर्ड 100 प्रतिशत है।

कॉस्ट की दृष्टि से भी यह विमान बेहद किफायती है। एक यूनिट की कीमत लगभग 85 मिलियन अमेरिकी डॉलर है, जो अमेरिकी सी-17 ग्लोबमास्टर से लगभग 60 प्रतिशत सस्ता है। इसकी यही विशेषता इसे भारतीय रक्षा बजट के अनुरूप बनाती है।

यह विमान भविष्य के लिए भी तैयार है, इसमें ड्रोन लॉन्चर और मिसाइल कैरिंग सिस्टम जैसे अपग्रेड जोड़े जा सकते हैं। फिलहाल यह विमान ब्राजील, पुर्तगाल, हंगरी और नीदरलैंड्स में ऑपरेट किया जा रहा है और इसे नाटो मानकों के अनुरूप सर्टिफाइड किया गया है।

DRDO PL-15 Missile: ऑपरेशन सिंदूर में बरामद चीनी मिसाइल है वाकई घटिया! डीआरडीओ ने बताया इनमें नहीं था ये जरूरी फीचर

DRDO PL-15 Missile: India Incorporates Chinese PL-15 Missile Tech After Recovery During Operation Sindoor

DRDO PL-15 Missile: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बरामद हुई चीमी मिसाइल पीएल-15ई को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक डीआरडीओ ने इस मिसाइल का टेक्निकल एनालिसिस पूरा कर लिया है। वहीं इस मिसाइल के कुछ फीचर बड़े एडवास हैं, जिन्हें डीआरडीओ अपनी आने वाली मिसाइलों में शामिल करेगा। बता दें कि ये पाकिस्तानी जेट्स जेएफ-17 से ये मिसाइलें छोड़े जाने के बाद पठ नहीं पाई थीं, और बिना सुरक्षित ही भारतीय इलाकों में आ गिरी थीं। जिसके बाद चीन की इन मिसाइलों की क्वॉलिटी को लेकर सवाल उठने लगे थे।

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DRDO PL-15 Missile: पंजाब से बरामद हुई थी चीनी मिसाइल

सूत्रों के अनुसार, यह मिसाइल 9 मई 2025 को पंजाब के होशियारपुर जिले के पास एक खेत में मिली थी। यह वही समय था जब भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तानी आतंकी संगठनों के खिलाफ बड़े स्तर मिलिट्री कार्रवाई की थी। यह पीएल-15 मिसाइल पाकिस्तान एयरफोर्स के जेएफ-17 या जे-10सी फाइटर जेट से दागी गई थी, लेकिन यह अपने टारगेट तक नहीं पहुंच सकी और भारतीय क्षेत्र में लगभग 100 किलोमीटर अंदर गिर गई थी।

सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तानी फाइटर्स जेट्स ने पीएल-15 दागी, लेकिन भारतीय वायुसेना के इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम्स ने इसे जाम कर दिया था। जिससे ये टारगेट तक नहीं पहुंच पाई और रास्ता भटक गई। पीएल-15 एडवांस्ड बियॉन्ड-विजुअल-रेंज (बीवीआर) मिसाइल है, जिसकी रेंज 145 किमी तक है।

DRDO PL-15 Missile: नहीं था सेल्फ-डिस्ट्रक्ट सिस्टम

विशेषज्ञों का कहना है कि यह पीएल-15ई (एक्सपोर्ट वर्जन) मिसाइल बिना सेल्फ-डिस्ट्रक्ट सिस्टम के बनी थी, जिसकी वजह से इसके कई क्रिटिकल कंपोनेंट सुरक्षित रह गए। डीआरडीओ की टीम ने मौके पर पहुंचकर मिसाइल को बरामद किया और इसे हैदराबाद स्थित मिसाइल कॉम्प्लेक्स में डिटेल एनालिसिस के लिए भेजा था।

सूत्रों ने बताया कि डीआरडीओ ने चीनी पीएल-15 एयर-टू-एयर मिसाइल का टेक्निकल एनालिसिस पूरा कर लिया है और अब उसकी एडवांस तकनीकी खूबियों को अपने स्वदेशी एस्ट्रा एमके-2 मिसाइल प्रोग्राम में शामिल करने का फैसला लिया है। सूत्रों के अनुसार, डीआरडीओ ने इस मिसाइल की रिवर्स इंजीनियरिंग की थी, और मिसाइल में मिनीएचर एईएसए रडार, डुअल-पल्स सॉलिड रॉकेट मोटर, डेटालिंक सिस्टम, होम-ऑन-जैम क्षमता और एडवांस इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटर मेजर्स सिस्टम जैसे जैसे क्रिटिकल कंपोनेंट्स लगे हुए थे।

DRDO PL-15 Missile: India Incorporates Chinese PL-15 Missile Tech After Recovery During Operation Sindoor

विश्लेषण में यह भी सामने आया कि मिसाइल में इस्तेमाल हुआ प्रोपेलेंट बहुत अधिक एनर्जेटिक है, जिसके चलते यह मिसाइल मैक-5 (लगभग 6,100 किमी प्रति घंटा) की रफ्तार हासिल कर लेती है। साथ ही, इसका रडार सीकर केयू-बैंड में काम करता है, जिससे यह दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग सिस्टम को भेद सकता है।

हालांकि, सूत्रों ने यह भी बताया कि इस मिसाइल में सेल्फ डेस्ट्रक्ट मैकेनिज्म नहीं था, यानी अगर यह टारगेट तक नहीं पहुंचती है, तो यह खुद को नष्ट नहीं कर पाती। जबकि भारतीय मिसाइलें जैसे एस्ट्रा या आकाश सीरीज सुरक्षा वजहों से इस सिस्टम से लैस हैं।

एस्ट्रा एके-2 दरअसल एस्ट्रा एमके-1 का एडवांस वर्जन है, जिसकी रेंज अब 160 किलोमीटर से अधिक होगी। इसमें होम-ऑन-जैम क्षमता जोड़ी जा रही है, जिससे यह दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम पर निशाना साध सकेगी। एस्ट्रा एमके2 में डुअल-पल्स मोटर टेक्नोलॉजी और मॉड्यूलर प्रोपेलेंट डिजाइन को भी शामिल कर रहा है, जिससे मिसाइल की रफ्तार और कंट्रोल दोनों बेहतर होंगे। इस प्रोजेक्ट पर काम पुणे और हैदराबाद के इंटीग्रेटेड मिसाइल सेंटर में किया जा रहा है।

DRDO PL-15 Missile: India Incorporates Chinese PL-15 Missile Tech After Recovery During Operation Sindoor

DRDO PL-15 Missile: पीएल-15 में कई देशों की रूचि

वहीं, पीएल-15 की बरामदगी ने सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों का भी ध्यान खींचा। जापान और अमेरिका के रक्षा विश्लेषकों ने डीआरडीओ के माध्यम से मिसाइल की कुछ टेक्निकल डिटेल्स की स्टडी की है। जापान के रक्षा विशेषज्ञों ने इसे “इनवैल्यूएबल इंटेलिजेंस सोर्स” बताया। अमेरिका ने इसी विश्लेषण के आधार पर अपनी एआईएम-260 जेएटीएम मिसाइल के डेवलपमेंट को और तेज करने का फैसला लिया है।

सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान अब चीन से पीएल-17 लंबी दूरी की मिसाइल और “वाईआईएचए” नामक 2,000 कामिकाजे ड्रोन खरीदने की कोशिश कर रहा है। यह कदम ऑपरेशन सिंदूर में हुए नुकसान के बाद उसकी सैन्य तैयारी का हिस्सा है। इसके अलावा, पाकिस्तान ने अमेरिका को भी अपने हाई टेक वेपंस की लिस्ट सौंपी है।

China Military Purge: चीनी सेना के डिप्टी चीफ समेत नौ टॉप मिलिट्री अफसर भ्रष्टाचार के आरोप में बर्खास्त

China Military Purge
Central Military Commission Vice Chairman He Weidong

China Military Purge: चीन की कम्युनिस्ट पार्टी और सेना में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। चीन के रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को एलान किया कि देश के दूसरे सबसे वरिष्ठ सैन्य अधिकारी जनरल हे वेइदोंग समेत आठ दूसरे टॉप शीर्ष मिलिट्री कमांडरों को कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।

China Stealth Drone: भारत की सीमा से 145 किमी दूर चीन की बड़ी तैयारी, जे-20 फाइटर जेट के साथ तैनात किया ये खास स्टील्थ ड्रोन

सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, 68 वर्षीय हे वेइदोंग सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के उपाध्यक्ष और पार्टी की 24 सदस्यीय पोलितब्यूरो के सदस्य थे। वे चीन के मिलिट्री स्ट्रक्चर में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बाद दूसरे सबसे ताकतवर अधिकारी माने जाते थे।

रिपोर्ट में बताया गया कि हे वेइदोंग के साथ सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के सदस्य मियाओ हुआ को भी पार्टी और सेना से निकाल दिया गया है। इसके अलावा, सात अन्य पूर्व वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को भी अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में निष्कासित किया गया है।

रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता झांग शियाओगांग ने बताया कि इन अधिकारियों पर “पार्टी अनुशासन के गंभीर उल्लंघन और बड़े वित्तीय अपराधों” के आरोप लगे हैं। जांच में सामने आया कि इन अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अत्यधिक धनराशि के लेनदेन में संलिप्तता दिखाई। प्रवक्ता के अनुसार, इन मामलों को अब सैन्य अभियोजन प्राधिकरण मिलिट्री प्रॉसिक्यूशन अथॉरिटीज को कानूनी समीक्षा और आगे की कार्रवाई के लिए सौंप दिया गया है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह पहली बार है जब 1966-1976 के कल्चरल रिवॉल्यूशन के बाद किसी मौजूदा सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के जनरल को बर्खास्त किया गया है। हे वेइदोंग मार्च 2025 से सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए थे, लेकिन उनकी जांच की जानकारी अब तक सार्वजनिक नहीं की गई थी।

यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब कम्युनिस्ट पार्टी की सेंट्रल कमिटी बीजिंग में अपना फोर्थ प्लेनम सत्र आयोजित करने जा रही है। माना जा रहा है कि इन अधिकारियों की बर्खास्तगी को औपचारिक मंजूरी इसी बैठक में दी जाएगी।

चीन में बीते कुछ वर्षों से राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व में सेना और प्रशासनिक ढांचे में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार-रोधी अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत पहले भी कई हाई रैंकिंग सैन्य अधिकारियों, रक्षा उद्योग से जुड़े अधिकारियों और पार्टी सदस्यों को कार्रवाई का सामना करना पड़ा है।

शिन्हुआ एजेंसी के मुताबिक, यह कार्रवाई चीन के रक्षा संस्थानों में “पॉलिटिकल करेक्टनेस एंड पार्टी लॉयल्टी” को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया एक कड़ा कदम है।

MULTI DOMAIN WARFARE: नॉर्दर्न कमांड ने शुरू की मॉडर्न वारफेयर की तैयारियां, मल्टी-डोमेन एक्सरसाइज में शामिल हुईं तीनों सेनाएं

Multi-Domain Warfare Exercise
Indian Army Northern Command: Multi-Domain Warfare Exercise Showcases India’s Future-Ready Military Force

MULTI DOMAIN WARFARE: भारतीय सेना की नॉर्दर्न कमांड ने मॉडर्न वारफेयर को देखते हुए एक महत्वपूर्ण मल्टी-डोमेन एक्सरसाइज आयोजित की। यह एक्सरसाइज चार दिनों तक चली। खास बात यह थी कि इसमें सेना के साथ नौसेना, वायुसेना और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों ने भी हिस्सा लिया। इस दौरान साइबर, स्पेस, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक और कॉग्निटिव डोमेन में भविष्य के खतरों की चुनौतियां पेश की गईं।

Future Wars: हाइब्रिड थ्रेट्स और ड्रोन वारफेयर से निपटने को तैयार हो रही भारतीय इन्फैंट्री, मॉर्डनाइजेशन में केवल हथियारों का अपग्रेडेशन काफी नहीं

अभ्यास का उद्देश्य था, तेजी से बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में भारतीय सशस्त्र बलों की तैयारी का मूल्यांकन करना और नई तकनीकों को सैन्य रणनीति में शामिल करना। इस युद्धाभ्यास में कई केंद्रीय सरकारी एजेंसियों और निजी रक्षा कंपनियों ने भी हिस्सा लिया, जिससे “व्होल ऑफ नेशन एप्रोच” यानी पूरे राष्ट्र की भागीदारी की भावना को मजबूती मिली।

इस दौरान फॉरवर्ड इलाकों में तैनात सैनिकों को साइबर घुसपैठ, इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग, स्पेक्ट्रम सैचुरेशन, स्पूफिंग और कॉग्निटिव अटैक जैसी परिस्थितियों से निपटने की ट्रेनिंग दी गई। सेना ने इन सिनारियो के जरिए यह सुनिश्चित किया कि सैनिक केवल फिजिकल वॉरफेयर नहीं, बल्कि डिजिटल और हाइब्रिड युद्ध के लिए भी तैयार रहें।

नॉर्दर्न कमांड के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने अभ्यास के दौरान सैनिकों से बातचीत करते हुए कहा, “आधुनिक युद्ध में विभिन्न क्षेत्रों के बीच की सीमाएं धुंधली हो गई हैं। ऐसे में हमें नई तकनीकों का लाभ उठाना होगा और निरंतर इनोवेशन करते रहना होगा। देश की सीमाओं और स्ट्रेटेजिक असेट्स की सुरक्षा के लिए पूरे राष्ट्र को एकजुट होकर कार्य करना चाहिए, और जरूरत पड़ने पर दुश्मन पर निर्णायक हमले के लिए तैयार रहना चाहिए।”

यह अभ्यास उस संवाद सत्र का विस्तार था, जिसकी शुरुआत 4 अक्टूबर को मथुरा में हुई थी। वहां से शुरू हुई चर्चाओं ने सेना के विभिन्न अंगों में बेहतर समन्वय और एकीकृत सोच की दिशा तय की थी।

अभ्यास के दौरान स्वदेशी रक्षा उद्योग की भागीदारी ने आत्मनिर्भर भारत की भावना को नई ऊंचाई दी। सेना ने इस अवसर पर यह भी प्रदर्शित किया कि कैसे आधुनिक युद्ध केवल बंदूकों और टैंकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब इसमें डेटा, सूचना और मेंटल डोमिनेंस भी शामिल है।

इस मल्टी-डोमेन के समापन के साथ भारतीय सेना की नॉर्दर्न कमांड ने यह संदेश दिया कि वह अब 21वीं सदी के हाई-टेक युद्ध के लिए तैयार है। जॉइंटनेस, इनोवेशन और आत्मनिर्भरता के इस नए दृष्टिकोण ने भारतीय सशस्त्र बलों की तैयारी को अगले स्तर पर पहुंचा दिया है।

Defence Stocks: छह माह में 62 फीसदी उछला यह डिफेंस शेयर, ब्रोकरेज हाउस ने क्यों बताया बुलिश? क्या लगाना चाहिए दांव?

MTAR Technologies: Defence stocks

Defence Stocks: हैदराबाद स्थित डिफेंस और एयरोस्पेस कंपनी एमटीएआर टेक्नोलॉजीज (MTAR Technologies) के शेयर ने पिछले छह महीनों में जोरदार बढ़त दर्ज की है। स्टॉक 62 फीसदी की छलांग लगाते हुए इस हफ्ते बीएसई पर 2,319.20 रुपये और एनएसई पर 2,318.80 रुपये के नए 52-सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गया।

BEML Defence MoU: बीईएमएल और किनेको ने डिफेंस और एयरोस्पेस के लिए मिलाया हाथ, शेयरों में तेजी

ब्रोकरेज हाउस एक्सिस डायरेक्ट ने अपने लेटेस्ट एनालिसिस में कहा है कि यह डिफेंस स्टॉक निकट भविष्य में और 36 प्रतिशत तक बढ़त दर्ज कर सकता है। कंपनी ने एमटीएआर टेक्नोलॉजीज का नया प्राइस टारगेट 2,155 से 2,380 रुपये के बीच तय किया है।

एक्सिस डायरेक्ट की रिपोर्ट के अनुसार, एमटीएआर का स्टॉक हाल ही में एक फॉलिंग चैनल पैटर्न से ब्रेकआउट कर चुका है, जो इसके मजबूती के संकेत दे रहा है। रिपोर्ट में कहा गया कि 1,200 से 1,250 रुपये का सपोर्ट जोन कई बार टेस्ट हुआ और वहां से मजबूत रिकवरी देखने को मिली है। ब्रोकरेज के अनुसार, स्टॉक का आरएसआई इंडिकेटर बुलिश पोजिशन दिखा रहा है, जो आगे और तेजी का संकेत है।

Defence Stocks – MTAR Share Price

मार्केट डेटा के अनुसार, एमटीएआर का शेयर इस समय अपने 5, 10, 20, 30, 50, 100 और 200-दिन के मूविंग एवरेज से ऊपर कारोबार कर रहा है। कंपनी का मार्केट कैप लगभग 8,973 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जबकि शुक्रवार को लगभग 1.51 लाख शेयरों का कारोबार 34.39 करोड़ रुपये के टर्नओवर के साथ हुआ।

एक रिपोर्ट के अनुसार, इस तेजी के पीछे कंपनी की संभावित साझेदारी की खबर मुख्य कारण है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एमटीएआर टेक्नोलॉजीज ने अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के साथ मिलकर भारत के पहले स्टेल्थ फाइटर जेट एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) प्रोजेक्ट के लिए बोली लगाने की तैयारी शुरू की है।

यह परियोजना लगभग 15,000 करोड़ रुपये की है और इसे भारत की रक्षा क्षमता को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है। यह साझेदारी अभी औपचारिक रूप से घोषित नहीं हुई है, लेकिन बाजार विश्लेषकों का कहना है कि यह खबर ही निवेशकों के लिए बड़ा सकारात्मक संकेत बनी।

कंपनी का यह कदम MTAR को भारत के डिफेंस इंडस्ट्री में एक मजबूत स्थान दिला सकता है, क्योंकि AMCA प्रोजेक्ट भारतीय वायुसेना के लिए सबसे महत्वाकांक्षी लड़ाकू विमान कार्यक्रमों में से एक है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि एमटीएआर टेक्नोलॉजीज आने वाले महीनों में न्यूक्लियर एनर्जी और एयरोस्पेस डिवीजन में बड़े ऑर्डर्स मिलने की उम्मीद कर रही है। कंपनी के मुताबिक, न्यूक्लियर सेगमेंट में लगभग 1,000 करोड़ रुपये के ऑर्डर्स अगले तीन से छह महीनों में बुक हो सकते हैं।

इसके अलावा, कंपनी की क्लीन एनर्जी यूनिट जो अमेरिकी कंपनी ब्लूम एनर्जी कॉरपोरेशन के साथ साझेदारी में काम करती है, आने वाले तिमाहियों में मजबूत ग्रोथ दे सकती है।

एमटीएआर टेक्नोलॉजीज भारत की एक अग्रणी इंजीनियरिंग और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कंपनी है, जिसके पास हैदराबाद में सात प्रोडक्शन यूनिट्स हैं। कंपनी पिछले चार दशकों से रक्षा, एयरोस्पेस और ऊर्जा क्षेत्रों में काम कर रही है। इसके प्रमुख क्लाइंट्स में इसरो, डीआरडीओ, एनपीसीआईएल, एचएएल, भारत डायनेमिक्स और अमेरिका की ब्लूम एनर्जी कॉर्प शामिल हैं।

डिस्क्लेमर: शेयरों में निवेश करने से वित्तीय नुकसान का जोखिम होता है। इसलिए, निवेशकों को शेयरों में निवेश या ट्रेडिंग करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। निवेश करने से पहले कृपया अपने निवेश सलाहकार से सलाह लें।

LCA Mark 1A Nashik: HAL चेयरमैन बोले- कई देश तेजस खरीदने के उत्सुक, बताया- चीन के JF-17 के मुकाबले क्यों है बेहतर

LCA Mark 1A
HAL Chairman Dr DK Sunil

LCA Mark 1A Nashik: भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान एलसीए तेजस मार्क-1ए की नासिक से पहली उड़ान के बाद इस फाइटर जेट पर दुनियााभर की निगाहें हैं। दुनिया के कई देशों ने इस विमान को खरीदने में रुचि दिखाई है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक डॉ. डीके सुनील ने बताया कि कई देशों के साथ बातचीत प्रारंभिक स्तर पर चल रही है।

HAL Tejas MK-1A: तेजस की पहली उड़ान पर बोले रक्षा मंत्री- “अब हम खुद बना रहे हैं वो फाइटर जिन्हें कभी विदेश से खरीदते थे”

उन्होंने कहा, “हां, कई देशों ने तेजस मार्क-1ए में रुचि दिखाई है। यह बातचीत शुरुआती चरण में है, लेकिन यह देखकर संतोष होता है कि दुनिया भारत के विमान को एक विश्वस्तरीय प्लेटफॉर्म के रूप में देख रही है।”

शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एएचएल के नासिक परिसर में तेजस मार्क-1ए की तीसरी उत्पादन लाइन और स्वदेशी ट्रेनर विमान एचटीटी-40 की दूसरी प्रोडक्शन लाइन का उद्घाटन किया। तेजस मार्क-1ए इस प्रोडक्शन लाइन पर बना पहला विमान है जिसने शुक्रवार को सफल उड़ान भरी।

एचएएल चेयरमैन ने कहा कि यह विमान दो साल से भी कम समय में तैयार हुआ है, जो एचएएल नासिक डिवीजन की एफिशिएंसी और टेक्निकल कंपीटेंस को दर्शाता है। उन्होंने कहा, “हमारी यह यूनिट पहले मिग-21, मिग-27 और सुखोई-30 जैसे लड़ाकू विमानों का उत्पादन करती थी। अब यहां स्वदेशी तेजस तैयार किया जा रहा है। दो और तेजस मार्क-1ए विमान बन रहे हैं जो आने वाले महीनों में तैयार हो जाएंगे।”

डॉ. सुनील ने बताया कि एचएएल के पास अब तीन एक्टिव प्रोडक्शन लाइनें हैं, दो बेंगलुरु में और एक नासिक में। उन्होंने कहा, “हमने उत्पादन क्षमता बढ़ाने का फैसला किया था और आज उसका परिणाम सबके सामने है। यह हमारे लिए गर्व का क्षण है कि तेजस अब नासिक से उड़ान भर चुका है।”

उन्होंने आगे कहा कि भारत सरकार ने एचएएल को 180 तेजस विमान बनाने का कार्य सौंपा है, जिसे 2032-33 तक पूरा करने का लक्ष्य है। उसके बाद इन्हीं प्रोडक्शन फैसिलिटी का इस्तेमाल एलसीए मार्क-2 के लिए किया जाएगा।

तेजस मार्क-1ए को चौथी और पांचवीं पीढ़ी के विमानों के बीच की तकनीक पर आधारित “4.5 जनरेशन” मल्टी-रोल फाइटर माना जाता है। यह एयर डिफेंस, ग्राउंड अटैक और मैरीटाइम मिशंस को भी अंजाम दे सकता है। इसमें एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग, डिजिटल फ्लाई-बाय-वायर सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट और एडवांस्ड रडार सिस्टम जैसी खूबियां हैं।

एलसीए मार्क-1ए की तुलना जब दुनिया के दूसरे लड़ाकू विमानों, जैसे जेएफ-17 से की जाती है, तो डॉ. सुनील ने कहा, “तेजस अब किसी भी आधुनिक विमान के बराबर है। इसमें लगे एवियोनिक्स और वेपन सिस्टम्स अत्याधुनिक हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह विमान पूरी तरह हमारे कंट्रोल में है, चाहे सॉफ्टवेयर हो या हार्डवेयर। हम इसमें नए हथियार और क्षमताएं खुद जोड़ सकते हैं, जो किसी विदेशी मदद पर निर्भर नहीं हैं।”

उन्होंने यह भी कहा कि तेजस मार्क-1ए की सबसे बड़ी ताकत उसकी मेंटेनेबिलिटी है। एचएएल इसे अपनी लैब में अपग्रेड और मेंटेन कर सकता है। उन्होंने कहा, “तेजस ऐसा विमान है जिसे हम खुद बनाएंगे, खुद उड़ाएंगे और खुद ही अपग्रेड भी करेंगे। यही आत्मनिर्भर भारत की असली परिभाषा है।”

एचटीटी-40 प्रोग्राम के बारे में उन्होंने बताया, “आज यहां नासिक में दूसरी उत्पादन लाइन शुरू की गई है। पहला विमान लगभग तैयार है और इंजन ग्राउंड टेस्टिंग के चरण में है। बेंगलुरु में भी पहला विमान लगभग लास्ट फेज में है। दोनों डिवीजन तेजस और एचटीटी-40 विमानों का प्रोडक्शन एक साथ करेंगे और प्रो़डक्शन प्रोसेस अच्छी गति से आगे बढ़ रही है।”

उन्होंने कहा, “हमें भरोसा है कि इस साल के भीतर कुछ विमान तैयार हो जाएंगे। हम लगातार काम कर रहे हैं ताकि इन विमानों को जल्द से जल्द परीक्षण और उड़ान के लिए तैयार किया जा सके।”

कार्यक्रम में मौजूद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी तेजस के प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने कहा, “यह भारत की नई रक्षा सोच और आत्मनिर्भरता की उड़ान है। तेजस यह साबित करता है कि अब भारत रक्षा तकनीक में किसी देश से पीछे नहीं है। आज जो विमान विदेशों से खरीदे जाते थे, वही अब भारत की धरती पर बन रहे हैं।”

राजनाथ सिंह ने तेजस उड़ाने वाले पायलटों को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने भारत के गर्व को आसमान तक पहुंचाया है। उन्होंने कहा, “नासिक के इंजीनियरों और तकनीशियनों ने जिस समर्पण से काम किया है, वह भारत की नई रक्षा क्षमता का आधार बनेगा।”

तेजस की उड़ान के बाद एक वरिष्ठ पायलट ने बताया कि विमान की हैंडलिंग और एवियोनिक्स सिस्टम बेहद एक्यूरेट हैं। उन्होंने कहा, “तेजस किसी भी मौजूदा लड़ाकू विमान से मुकाबला कर सकता है। यह हल्का, फुर्तीला और भरोसेमंद है, और सबसे बड़ी बात, यह पूरी तरह हमारा है।”

एएचएल अधिकारियों ने बताया कि नासिक की नई असेंबली लाइन 1.3 मिलियन वर्ग फीट में फैली हुई है और इसे तैयार करने में लगभग 500 करोड़ रुपये की लागत आई है। यहां तेजस के फ्रंट, सेंटर और रियर फ्यूजलाज, विंग्स और एयर इनटेक मॉड्यूल्स तैयार किए जाते हैं।

BrahMos Lucknow Unit: शनिवार को लखनऊ से रवाना होगी ब्रह्मोस मिसाइल की पहली खेप, रक्षा मंत्री और यूपी के सीएम करेंगे फ्लैग-ऑफ

BrahMos Lucknow Unit

BrahMos Lucknow Unit: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ शनिवार को देश के रक्षा इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने जा रही है। सरोजिनी नगर स्थित ब्रह्मोस एयरोस्पेस यूनिट से ब्रह्मोस मिसाइलों की पहली खेप रवाना की जाएगी। इस ऐतिहासिक मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संयुक्त रूप से फ्लैग-ऑफ करेंगे।

BrahMos supersonic cruise missiles: ऑपरेशन सिंदूर के बाद सबकी फेवरेट बनी ब्रह्मोस, एयरफोर्स और नेवी बड़ा ऑर्डर देने की तैयारी में

ब्रह्मोस एयरोस्पेस, दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस बनाती है। ब्रह्मोस एयरोस्पेस की लखनऊ यूनिट से मिसाइल सिस्टम का पहला उत्पादन पूरा कर लिया है। इस यूनिट का उद्घाटन इसी वर्ष 11 मई 2025 को किया गया था और तब से यह पूरी तरह से ऑपरेशन में आ चुकी है। यहां मिसाइलों का इंटीग्रेशन, टेस्टिंग और क्वालिटी वैलिडेशन पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से किया जा रहा है।

शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में रक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री ‘बूस्टर भवन’ का उद्घाटन करेंगे और मिसाइल बूस्टर डॉकिंग प्रक्रिया का सीधा प्रदर्शन देखेंगे। इसके साथ ही एयरफ्रेम, वारहेड और एवियोनिक्स भवन में प्री-डिस्पैच इंस्पेक्शन और ब्रह्मोस सिम्युलेटर उपकरणों का प्रदर्शन भी किया जाएगा। समारोह में वृक्षारोपण कार्यक्रम, स्टोरेज ट्रॉली डिस्प्ले, मोबाइल ऑटोनॉमस लॉन्चर और जीएसटी बिल प्रस्तुति भी शामिल होंगे।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पहले ही कहा था कि “लखनऊ यूनिट से निकलने वाली यह पहली खेप आत्मनिर्भर भारत की मिसाइल शक्ति का प्रतीक है। उत्तर प्रदेश अब केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता के रूप में उभर रहा है।”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि “ब्रह्मोस यूनिट से उत्पादन शुरू होना उत्तर प्रदेश के लिए गर्व का क्षण है। यह डिफेंस कॉरिडोर प्रदेश के युवाओं को रोजगार और भारत को रक्षा आत्मनिर्भरता प्रदान करेगा।”

कार्यक्रम के दौरान डीजी ब्रह्मोस डॉ. जयतीर्थ आर. जोशी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक चेक और जीएसटी बिल सौंपेंगे। इस पहल से न केवल राज्य सरकार को रेवेन्यू मिलेगा, बल्कि डिफेंस प्रोडक्शन से जुड़े उद्योगों को भी स्थायी आर्थिक लाभ मिलेगा। मिसाइल उत्पादन से उत्तर प्रदेश को नियमित जीएसटी आय और युवाओं के लिए हाई टेक जॉब्स भी मिलेंगी।

लखनऊ के सरोजिनी नगर के भटगांव क्षेत्र में स्थित यह ब्रह्मोस यूनिट उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर की सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में से एक है। यहां मिसाइलों की असेंबली और ट्रायल अत्याधुनिक मानकों के मुताबिक किया जाता है। यह पहली बार है जब प्रदेश में मिसाइल सिस्टम का पूरा निर्माण, असेंबली और टेस्टिंग एक ही परिसर में पूरी तरह देश के भीतर की जा रही है।

ब्रह्मोस एयरोस्पेस की लखनऊ यूनिट न केवल भारतीय सेनााओं की जरूरतों को पूरा करेगी, बल्कि भविष्य में अंतरराष्ट्रीय निर्यात के क्षेत्र में भी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। इस परियोजना से उत्तर प्रदेश न केवल देश का डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब बनेगा, बल्कि भारत के रणनीतिक स्वावलंबन को भी नई गति मिलेगी।

HAL Tejas MK-1A: तेजस की पहली उड़ान पर बोले रक्षा मंत्री- “अब हम खुद बना रहे हैं वो फाइटर जिन्हें कभी विदेश से खरीदते थे”

HAL Tejas MK-1A: Rajnath Singh
Defence Minister Rajnath Singh

HAL Tejas MK-1A: शुक्रवार का दिन भारत के डिफेंस सेक्टर के लिए बेहद खास रहा। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के नासिक प्लांट से भारत में निर्मित एलसीए तेजस एमके-1ए ने अपनी पहली सार्वजनिक उड़ान भरी। इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह स्वयं मौजूद रहे। उन्होंने तेजस की उड़ान को “भारत की आत्मा और आत्मविश्वास की उड़ान” बताया। उन्होंने कहा, “आज नासिक की यह धरती केवल विमान की उड़ान नहीं देख रही, बल्कि भारत की नई सोच, नई तकनीक और नए आत्मगौरव की उड़ान देख रही है।”

Tejas Mk1A Order: वायुसेना क्यों कर रही तेजस MK1A के नए ऑर्डर से तौबा? LCA मार्क2 को वर्कहॉर्स बनाने की तैयारी!

HAL Tejas MK-1A: तीसरी तेजस उत्पादन लाइन का उद्घाटन

कार्यक्रम की शुरुआत में रक्षा मंत्री ने तीसरी तेजस उत्पादन लाइन और दूसरी एचटीटी-40 ट्रेनर एयरक्राफ्ट उत्पादन लाइन का उद्घाटन किया। रक्षा मंत्री ने कहा कि छह दशक पहले यही नासिक प्लांट विदेशी लड़ाकू विमानों जैसे मिग-21, मिग-27 और सुखोई-30 के निर्माण के लिए जाना जाता था। लेकिन आज यही भूमि पूरी तरह भारतीय डिजाइन और तकनीक से निर्मित विमानों का केंद्र बन चुकी है। उन्होंने कहा, “यह परिवर्तन केवल औद्योगिक बदलाव नहीं, बल्कि भारत की मानसिकता में आए आत्मनिर्भरता के परिवर्तन का प्रतीक है।”

HAL Tejas MK-1A:

HAL Tejas MK-1A: 65 प्रतिशत रक्षा उपकरण खुद बना रहा भारत

राजनाथ सिंह ने कहा कि 2014 में जब केंद्र सरकार ने आत्मनिर्भर भारत की यात्रा शुरू की थी, तब भारत 70 फीसदी रक्षा उपकरण विदेशों से आयात करता था। “लेकिन आज भारत अपने 65 प्रतिशत रक्षा उपकरण खुद बना रहा है, और हमारा लक्ष्य है कि आने वाले समय में यह 100 प्रतिशत हो।” उन्होंने कहा कि भारत का रक्षा उत्पादन 2014-15 में 46,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 1.5 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जबकि रक्षा निर्यात 1,000 करोड़ से बढ़कर 25,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

रक्षा मंत्री ने बताया कि 2029 तक भारत का लक्ष्य 3 लाख करोड़ रुपये रक्षा उत्पादन और 50,000 करोड़ रुपये रक्षा निर्यात तक पहुंचने का है। उन्होंने कहा कि यह केवल सरकारी संस्थानों की नहीं, बल्कि भारतीय युवाओं, इंजीनियरों और वैज्ञानिकों की मेहनत का परिणाम है। उन्होंने कहा, “तेजस और एचटीटी-40 इन सबका संयुक्त सपना हैं, जिन्हें भारत की तकनीकी ताकत ने साकार किया है।”

HAL Tejas MK-1A: 10 तेजस बनाए जा सकेंगे नासिक में

एचएएल की नासिक डिवीजन को लगभग 500 करोड़ रुपये के निवेश से अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह आधुनिक बनाया गया है। अब यहां सालाना आठ तेजस एमके-1ए विमान बनाए जा सकते हैं, जिसे आगे बढ़ाकर दस विमान प्रति वर्ष तक किया जा सकेगा। एएचएल ने अब तक दस तेजस एमके-1ए विमान बनाए हैं, जिनमें जीई एफ404 इंजन लगाए गए हैं। दूसरा विमान दिसंबर 2025 तक और तीसरा जनवरी 2026 तक तैयार हो जाएगा। बेंगलुरु और अन्य यूनिट्स को मिलाकर एचएएल की कुल वार्षिक उत्पादन क्षमता 24 विमान तक होगी।

तेजस एमके-1ए के साथ ही नासिक प्लांट में एचटीटी-40 (HTT-40) ट्रेनर विमान की नई उत्पादन लाइन भी शुरू की गई। यह विमान भारतीय वायुसेना के प्रशिक्षण कार्यक्रम का हिस्सा बनेगा और पुराने पिलाटस पीसी-7 एमके II विमानों की जगह लेगा।

ऑपरेशन सिंदूर में एचएएल की भूमिका को सराहा

राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में ऑपरेशन सिंदूर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस मिशन ने यह साबित किया कि भारतीय सशस्त्र बलों को अब विदेशी हथियारों पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एएचएल की टीम ने 24 घंटे फाइटर जेट्स जैसे सुखोई, जैगुआर, मिराज और तेजस को ऑपरेशनल बनाए रखा। यह उस भरोसे का प्रमाण है जो हमारे सैनिकों को भारतीय तकनीक पर है।”

HAL Tejas MK-1A:

नासिक में अब सिविल और मिलिट्री एविएशन के लिए MRO

उन्होंने कहा कि नासिक में अब सिविल और मिलिट्री एविएशन के लिए संयुक्त मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल सुविधाएं भी स्थापित की गई हैं, जिससे हजारों लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा, “यह केवल विमानों का उत्पादन केंद्र नहीं, बल्कि महाराष्ट्र और आसपास के राज्यों के लिए रोजगार और औद्योगिक विकास का नया केंद्र बन जाएगा।”

रक्षा मंत्री ने कहा कि एचएएल अब इंडस्ट्री 4.0 और क्वालिटी 4.0 तकनीकों को अपनाकर पूरी तरह डिजिटल हो चुका है। उन्होंने कहा, “आज एचएएल केवल एक पब्लिक सेक्टर नहीं, बल्कि वैश्विक मानकों के साथ काम करने वाला आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक है।”

तेजस एमके-1ए की पहली सार्वजनिक उड़ान भारतीय वायुसेना के अनुभवी टेस्ट पायलट ग्रुप कैप्टन ए. भट्टाचार्य (नाम प्रतीकात्मक) ने संचालित की। उड़ान के बाद उन्होंने कहा, “जब मैंने रनवे पर स्पीड बढ़ाई और तेजस को आसमान में उठते देखा, तो मुझे ऐसा लगा जैसे पूरा भारत मेरे साथ उड़ान भर रहा है। यह सिर्फ एक मशीन नहीं, यह एक भावना है — देश की क्षमता और आत्मविश्वास की प्रतीक।”

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उड़ान के बाद सुखोई-20, तेजस एमके1ए और एचटीटी-40 उड़ाने वाले सभी पायलटों ग्रुप कैप्टन केके वेणुगोपाल, ग्रुप कैप्टन प्रत्यूष अवस्थी और विंग कमांडर एमके रथ औऱ विंग कमांडर संजय वर्मा को मंच से बधाई दी और कहा, “आज आपने न केवल भारत के स्वदेशी विमान को उड़ाया है, बल्कि करोड़ों भारतीयों के सपनों को भी आसमान तक पहुंचाया है। आपके हाथों में आज भारत का गर्व उड़ान भर रहा था।”

कई मोर्चों पर एक साथ लड़ रहे हैं योद्धा

रक्षा मंत्री ने कहा, फाइटर एयरक्राफ्ट्स, मिसाइल, इंजन, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम… भारत ने इन सभी क्षेत्रों में जबरदस्त प्रगति की है। जब हम उच्च रक्षा प्रौद्योगिकी की बात करते हैं, तो यह केवल मशीन या हथियार की बात नहीं है, बल्कि यह हमारी सोच, हमारे सामर्थ्य और हमारे आत्मविश्वास की एक नई कहानी है।

उन्होंने कहा, आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर वारफेयर, ड्रोन सिस्टम्स और नेक्स्ट जनरेशन एयरक्राफ्ट्स भी भविष्य की दिशा तय कर रहे हैं। अब योद्धा केवल जमीन या आसमान में नहीं, बल्कि कई मोर्चों पर एक साथ लड़ रहे हैं। इस नई दौड़ में भारत को हमेशा आगे रहना है।

रक्षा मंत्री ने आगे कहा कि एलसीए तेजस और एचटीटी-40 विमानों का निर्माण हमारे विभिन्न औद्योगिक साझेदारों के सहयोग का भी परिणाम है। यह सहयोग इस बात का प्रमाण है कि जब सरकार, उद्योग और शिक्षाविद मिलकर काम करते हैं, तो कोई भी चुनौती अनुत्तरित नहीं रहती।

सुखोई-30 पर ब्रह्मोस मिसाइल का इंटीग्रेशन

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि कुछ दिन पहले हमने मिग-21 की प्री-कमीशनिंग की। मिग-21 ने लंबे समय तक इस देश की सेवा की, और इसकी ऑपरेशनल ज़रूरतों को पूरा करने में एचएएल का बहुत बड़ा योगदान रहा है।

उन्होने कहा, “मैं यह देखकर बहुत खुश हूं कि नासिक टीम ने सुखोई-30 पर ब्रह्मोस मिसाइल का इंटीग्रेशन करके महत्वपूर्ण काम किया है। और अब इस नई उत्पादन लाइन के उद्घाटन के साथ, ‘मेड इन इंडिया’ फाइटर और ट्रेनर के उत्पादन का एक नया युग भी शुरू हो रहा है।

HAL Tejas MK-1A: पायलट माइंडसेट: सफलता का सूत्र

रभा मंत्री ने इस दौरान छात्रों को भी प्रेरणा दी। उन्होंने कहा, “आप सभी एवियोनिक्स के विशेषज्ञ हैं, इसलिए मैं अधिक तकनीकी बातें नहीं करूंगा। मैं भी एक फिजिक्स का छात्र रहा हूं। जब भी एविएशन की बात आती है, तो मुझे इसमें केवल मशीनें ही नहीं, बल्कि जीवन के गहरे संदेश भी दिखाई देते हैं।”

उन्होंने कहा, “किसी भी विमान के लिए उसका नेविगेशन सिस्टम बहुत महत्वपूर्ण है। ठीक वैसे ही, हमें अपने जीवन में भी एक मोरल कम्पास रखना चाहिए।”

रक्षा मंत्री ने कहा, “मैं एक वरिष्ठ पायलट का कथन याद करता हूं कि ‘टेक-ऑफ आईएस आप्शनल, बट लैंडिंग इज मैंडेटरी.’ यानी किसी भी काम को शुरू करना बहुत आसान है, लेकिन उसे सफलता पूर्वक अंत तक पूरा करना एक जिम्मेदार काम है। हमें हर परियोजना को एक उड़ान की तरह प्रबंधित करना चाहिए: उत्साह के साथ शुरू करें, बीच में संतुलन बनाए रखें, और अंत में सुरक्षित रूप से पूरा करें।”

“हमारा हर प्रोजेक्ट, हर कार्य ऐसा ही होना चाहिए, जिसकी दिशा स्पष्ट हो, कम्युनिकेशन मजबूत हो, आदतें अनुशासित हों, मन हमेशा सतर्क रहे, और सकारात्मकता बनी रहे। इसी पायलट माइंडसेट से हम 2047 के लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।”

कार्यक्रम के अंत में रक्षा मंत्री ने कहा कि तेजस केवल एक विमान नहीं, बल्कि भारत की सोच, आत्मविश्वास और क्षमताओं का प्रतीक है। उन्होंने कहा, “यह भारत की नई तकनीकी उड़ान है, एक ऐसी उड़ान जो ‘मेक इन इंडिया’ से ‘फ्लाई विद इंडिया’ की दिशा में आगे बढ़ रही है।”

उन्होंने सभी एएचएल इंजीनियरों, एडीए, डीजीएक्यूए और औद्योगिक साझेदारों को बधाई देते हुए कहा कि तेजस और एचटीटी-40 भारतीय वायुसेना को नई शक्ति, नई आधुनिकता और नया आत्मविश्वास देंगे।

BEML Defence MoU: बीईएमएल और किनेको ने डिफेंस और एयरोस्पेस के लिए मिलाया हाथ, शेयरों में तेजी

BEML Defence MoU

BEML Defence MoU: भारत सरकार की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी बीईएमएल लिमिटेड ने किनेको लिमिटेड के साथ एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग पर दस्तखत किए हैं। जिसके तहत दोनों कंपनियां एडवांस्ड कंपोजिट मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में सहयोग करेंगी।

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यह साझेदारी रक्षा और एयरोस्पेस एप्लीकेशंस में इस्तेमाल होने वाली अत्याधुनिक तकनीकों के विकास और उत्पादन पर केंद्रित रहेगी। बीईएमएल ने इस समझौते की जानकारी स्टॉक एक्सचेंजों को दी, जिसके बाद कंपनी के शेयरों में 1.5 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। शुक्रवार के ट्रेडिंग सत्र में कंपनी के शेयर 4,490.80 रुपये तक पहुंच गए, जो पिछले बंद भाव 4,423.05 रुपये से अधिक था।

बीईएमएल लिमिटेड ने हाल ही में भारत फोर्ज लिमिटेड और डेटा पैटर्न्स इंडिया लिमिटेड के साथ भी एक ट्राईलेटरल समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। यह समझौता एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट प्रोग्राम को सपोर्ट करने के उद्देश्य से किया गया था, जो भारत का अगली पीढ़ी का फाइटर जेट प्रोजेक्ट है।

कंपनी के मुताबिक, इन साझेदारियों का मकसद देश में स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देना और आत्मनिर्भर भारत के विजन को साकार करना है। बीईएमएल का मार्केट कैप अब 18,600 करोड़ रुपये के करीब पहुंच चुका है और कंपनी के शेयर अपने 52-सप्ताह के न्यूनतम स्तर से करीब 91 फीसदी ऊपर हैं।

बीईएमएल और किनेको की यह साझेदारी भारत के रक्षा और एयरोस्पेस उद्योग में टेक्नोलॉजी को-डेवलपमेंट और लोकल मैन्युफैक्चरिंग को नई दिशा दे सकती है, जिससे देश की औद्योगिक क्षमता और तकनीकी आत्मनिर्भरता को और बल मिलेगा।