Home Blog Page 56

Civil-Military Fusion: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बोले- सिविल-मिलिट्री फ्यूजन ही भारत की डिफेंस पावर की असली नींव

civil military fusion book launch
Book release function for Lt. General (Retd) Raj Shukla’s book titled ‘Civil- Military Fusion As A Metric Of National Power And Comprehensive Security’

Civil-Military Fusion: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ तीनों सेनाओं के बीच अभूतपूर्व जॉइंटनेस और समन्वय देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन ने यह साबित किया कि भारत अब पारंपरिक युद्ध की सोच से आगे बढ़कर संयुक्त, अनुकूलनशील और पूर्व-नियोजित रणनीतियों से काम कर रहा है।

Bhairav-Ashni: इस बार पाकिस्तान ने की कोई हिमाकत तो काल बनेंगी भैरव बटालियन और अश्नि प्लाटून, ऑपरेशनल हुईं भारतीय इन्फैंट्री की नई स्ट्राइक और ड्रोन यूनिट्स

राजधानी दिल्ली में रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल राज शुक्ला की नई किताब “CIVIL-MILITARY FUSION AS A METRIC OF NATIONAL POWER AND COMPREHENSIVE SECURITY” के बुक लॉन्च के मौके पर रक्षा मंत्री ने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में युद्ध की प्रकृति लगातार बदल रही है। अब युद्ध सिर्फ सीमाओं पर नहीं, बल्कि हाइब्रिड और असिमेट्रिक रूपों में लड़े जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर सशस्त्र बलों को “फ्यूचर-रेडी” बनाने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं।

रक्षा मंत्री ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर ने यह दिखाया कि जब तीनों सेनाएं थल, नौसेना और वायुसेना एक साथ तालमेल से काम करती हैं, तो परिणाम ऐतिहासिक होते हैं। उन्होंने कहा पाकिस्तान आज भी उस रणनीतिक झटके से उबर नहीं पाया है।

civil military fusion book launch
Lt. General (Retd) Raj Shukla

Civil-Military Fusion को बताया राष्ट्रीय शक्ति का नया आधार

इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) राज शुक्ला की पुस्तक ‘Civil-Military Fusion as a Metric of National Power & Comprehensive Security’ का विमोचन किया। उन्होंने कहा कि सिविल-मिलिट्री फ्यूजन केवल “इंटीग्रेशन” नहीं है, बल्कि एक ऐसा “स्ट्रैटेजिक एनेबलर” है जो इनोवेशन, टेलेंट और तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देता है।

राजनाथ सिंह ने कहा, “सिविल और मिलिट्री सेक्टर को जोड़ना केवल रणनीति नहीं, बल्कि यह एक राष्ट्रीय मिशन है। जब हमारी इंडस्ट्री, अकादमिक संस्थान और डिफेंस सेक्टर एक साथ काम करते हैं, तो देश की आर्थिक उत्पादकता और सामरिक क्षमता दोनों बढ़ती हैं।”

उन्होंने यह भी कहा कि भारत अब “डिविजन ऑफ लेबर” से आगे बढ़कर “इंटीग्रेशन ऑफ पर्पज” की दिशा में काम कर रहा है। यानी अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारियां भले अलग हों, लेकिन लक्ष्य एक ही है- राष्ट्रीय सुरक्षा और तकनीकी ताकत का समन्वय।

Civil-Military Fusion: जरूरी हो गया है सिविल-मिलिट्री तालमेल

रक्षा मंत्री ने कहा कि आज की तकनीकी दुनिया में रक्षा और नागरिक क्षेत्रों के बीच की सीमाएं लगभग समाप्त हो गई हैं।
उन्होंने कहा, “आज सूचना, सप्लाई चेन, व्यापार, रेयर मिनरल्स और अत्याधुनिक तकनीक– ये सब दोनों क्षेत्रों के लिए समान रूप से जरूरी हो गए हैं। ऐसे में सिविल-मिलिट्री फ्यूजन कोई फैशन नहीं, बल्कि समय की मांग है।”

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि भारत की कई तकनीकें केवल नागरिक इस्तेमाल तक सीमित रहती हैं, जबकि अगर इन्हें ‘डुअल-यूज कॉन्सेप्ट’ के तहत सैन्य क्षेत्र में लाया जाए, तो देश की सामरिक क्षमता कई गुना बढ़ सकती है।

रक्षा मंत्री ने बताया कि सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में रक्षा उद्योग और सेना के बीच साझेदारी को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि भारत अब दुनिया के सबसे बड़े रक्षा आयातक देशों में नहीं, बल्कि एक उभरता हुआ मैन्युफैक्चरिंग हब बन चुका है।

रक्षा उत्पादन 1.51 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा

राजनाथ सिंह ने कहा कि “देश का रक्षा उत्पादन पिछले दशक में 46,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 1.51 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसमें लगभग 33,000 करोड़ रुपये का योगदान निजी क्षेत्र का है।” उन्होंने बताया कि यह परिवर्तन सरकार, सशस्त्र बलों, उद्योग, स्टार्टअप, और रिसर्च संस्थानों के साझा प्रयास से संभव हुआ है।

सीडीएस की भूमिका को बताया ऐतिहासिक

रक्षा मंत्री ने तीनों सेनाओं के बीच समन्वय बढ़ाने के लिए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की स्थापना को एक ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि सीडीएस की भूमिका से अब नीति निर्धारण, ऑपरेशनल योजना और तकनीकी तालमेल में एक समान दृष्टिकोण विकसित हुआ है।

उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य सिर्फ रक्षा तैयारियों को मजबूत करना नहीं, बल्कि “राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ रणनीतिक स्वायत्तता” सुनिश्चित करना भी है।

Close Quarter Battle Carbine: भारतीय सेना को मिलेंगी लेटेस्ट सीक्यूबी कार्बाइन्स, 4.25 लाख राइफलें होंगी सप्लाई

Defence Stocks Bharat Forge Defence Order
Close Quarter Battle Carbine

Close Quarter Battle Carbine: भारतीय सेना की इन्फैंट्री को अब आधुनिक और स्वदेशी तकनीक से बनी क्लोज क्वार्टर बैटल (सीक्यूबी) कार्बाइन्स मिलने जा रही हैं। रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में 4.25 लाख कार्बाइन राइफलें खरीदने के लिए दो भारतीय कंपनियों भारत फोर्ज लिमिटेड और पीएलआर सिस्टम्स के साथ एक बड़ा कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है। इस डील की कुल लागत लगभग 2770 करोड़ रुपये बताई गई है।

Indian Army Rudra Brigades: पूर्वी लद्दाख और सिक्किम में तैनात होंगी भारतीय सेना की नई ‘रुद्र’ ब्रिगेड्स

वहीं, इन कार्बाइन्स की डिलीवरी आने वाले महीनों में शुरू होगी, जिससे सैनिकों की नजदीकी युद्ध क्षमता में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी। यह डील भारतीय सेना की ‘बाय (इंडियन)’ कैटेगरी के तहत की गई है, जिसमें कम-से-कम 50 से 60 फीसदी तक इंडीजिनियस कंटेंट होना जरूरी है। जिसका उद्देश्य है, भारतीय रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देना और विदेशों पर निर्भरता को घटाना है।

Close Quarter Battle Carbine: दो भारतीय कंपनियां बनाएंगी नई कार्बाइन

कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक, भारत फोर्ज की यूनिट ‘कल्यााणी स्ट्रैटेजिक सिस्टम्स लिमिटेड’ कुल उत्पादन का 60 फीसदी हिस्सा संभालेगी, जबकि बाकी 40 फीसदी हिस्से की सप्लाई पीएलआर सिस्टम्स करेगी, जो अदाणी ग्रुप और इजराइल वेपन इंडस्ट्री मिल कर बनाएंगी। यह तावोर राइफल फैमिली का हिस्सा है और विशेष रूप से क्लोज क्वार्टर बैटल ऑपरेशंस के लिए डिजाइन की गई है।

Close Quarter Battle Carbine: दो साल के भीतर सप्लाई

डायरेक्टर जनरल इन्फैंट्री लेफ्टिनेंट जनरल अजय कुमार ने बताया, “भारतीय इन्फैंट्री अब ‘शूट टू किल’ फिलॉसफी की दिशा में आगे बढ़ चुकी है। पुराने हथियारों की जगह अब 7.62 मिमी कैलिबर वाले एडवांस्ड राइफल और सीक्यूबी कार्बाइन लाई जा रही हैं, जो अधिक घातक, सटीक और भरोसेमंद हैं।”

उन्होंने बताया, “कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक कंपनियों को दो साल के भीतर पूरी कार्बाइन खेप की सप्लाई करनी होगी। यह सेना के आधुनिकीकरण कार्यक्रम का एक प्रमुख हिस्सा है।” जनरल कुमार ने कहा कि नई सीक्यूबी कार्बाइनें नजदीकी युद्ध यानी क्योज कॉम्बैट, काउंटर टेररिज्म ऑपरेशंस, और शहरी मिशनों में इन्फैंट्री की मारक क्षमता को कई गुना बढ़ा देंगी।

Close Quarter Battle Carbine: क्या हैं नई सीक्यूबी की खूबियां

सेना द्वारा खरीदी जा रही सीक्यूबी कार्बाइनें 5.56×45 मिमी कैलिबर की हैं। इनका वजन तीन किलोग्राम से अधिक नहीं होगा। इन हथियारों की इफेक्टिव रेंज 200 मीटर से अधिक होगी, और इन्हें बेयॉनेट के साथ इस्तेमाल किया जा सकेगा, जिसके ब्लेड लंबाई कम से कम 120 मिमी होगी।

इन कार्बाइन राइफलों में शॉर्ट बर्स्ट फायरिंग, फुल ऑटो फायर मोड, नाइट विजन साइट्स, हाइब्रिड टैक्टिकल ग्रिप और साइलेंसर कम्पैटिबिलिटी जैसी सुविधाएं मिलेंगी। ये हथियार पुराने स्टर्लिंग सबमशीन गन को रिप्लेस करेंगे, जो पिछले दो दशकों से सेना में सेवा में थीं।

इंसास और स्टर्लिंग को किया जाएगा चरणबद्ध तरीके से रिप्लेस

इंसास राइफल और 9×19 मिमी स्टर्लिंग कार्बाइन 1990 के दशक से सेवा में थीं, लेकिन अब तकनीकी रूप से पुरानी हो चुकी हैं। स्टर्लिंग गन मूल रूप से 1940 के दशक की डिजाइन पर आधारित है और आज के शहरी व आतंकवाद-रोधी अभियानों के लिए नाकाफी है। लेकिन समय के साथ बदलती तकनीक और नए युद्धक्षेत्र की चुनौतियों को देखते हुए सेना ने छोटे, तेज और सटीक हथियारों की जरूरत महसूस की। सीक्यूबी कार्बाइन इन्हीं जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार की गई है। यह उन हालात में सबसे ज्यादा प्रभावी है जहां लड़ाई शहरी इलाकों, इमारतों या सीमित दूरी पर होती है।

लेफ्टिनेंट जनरल अजय कुमार ने बताया कि “इंसास राइफलें अपने समय में काफी प्रभावी थीं, लेकिन अब आधुनिक मेटलर्जी और निर्माण तकनीकों के चलते कम वजनी, अधिक टिकाऊ और घातक हथियारों की आवश्यकता है।”

डिलीवरी का पहला चरण सितंबर 2026 से

रक्षा मंत्रालय ने इस प्रोजेक्ट के लिए 2022 में स्वीकृति (एक्सेप्टेंस ओएफ नेसेसिटी – एओएन) दी थी, जिसमें 4,25,213 सीक्यूबी कार्बाइन खरीदने का प्रावधान था। यह सभी हथियार ‘बॉय (इंडियन)’ कैटेगरी में शामिल हैं, जिसका अर्थ है कि इन्हें या तो भारत में डिजाइन और निर्मित किया गया हो या इनमें 60 प्रतिशत से अधिक भारतीय सामग्री हो। सेना के अधिकारियों के अनुसार, डिलीवरी का पहला चरण सितंबर 2026 में शुरू होगा और पूरा बैच दो वर्षों में सेना को सौंप दिया जाएगा।

आधुनिक युद्ध के लिए तैयार सैनिक

सेना के आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तहत इन्फैंट्री को नई सीक्यबूी कार्बाइन के अलावा एके-203 राइफलें, .338 स्नाइपर राइफलें, और चौथी पीढ़ी के एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम भी मिल रहे हैं। डीजी इन्फैंट्री ने बताया कि “सभी स्तरों पर सैनिकों और अधिकारियों को नई तकनीकों की ट्रेनिंग दी जा रही है।” उन्होंने जोड़ा कि हर साल प्रशिक्षण पाठ्यक्रम की समीक्षा की जाती है ताकि सैनिक नई हथियार प्रणालियों को संभालने और ऑपरेट करने में सक्षम रहें।

भारतीय उद्योग से जुड़ा आत्मनिर्भरता मिशन

लेफ्टिनेंट जनरल अजय कुमार ने कहा कि सीक्यूबी कार्बाइन प्रोजेक्ट (Close Quarter Battle Carbine) पूरी तरह से मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा, “हम घरेलू उद्योगों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं ताकि भविष्य में सभी वेपन सिस्टम भारत में ही बनाए जा सकें।”

इन्फैंट्री के आधुनिकीकरण में निजी कंपनियों और रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों (डीपीएसयू) की भूमिका बेहद अहम हो गई है। इसके तहत सेना सॉफ्टवेयर-डिफाइंड रेडियो, थर्मल इमेजिंग साइट्स, और ड्रोन सर्विलांस सिस्टम्स जैसे कई सिस्टम भी देश में डेवलप करवा रही है।

Bhairav-Ashni: इस बार पाकिस्तान ने की कोई हिमाकत तो ‘काल’ बनेंगी भैरव बटालियन और अश्नि प्लाटून, ऑपरेशनल हुईं भारतीय इन्फैंट्री की नई स्ट्राइक और ड्रोन यूनिट्स

Indian Army Ashni Platoon

Bhairav-Ashni: भारतीय सेना ने अपनी नई दो फॉरमेशंस भैरव बटालियन और अश्नि प्लाटून को ऑपरेशनल कर दिया है। ये दोनों यूनिट्स मॉडर्न बैटलफील्ड की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई हैं। सेना अब तक 5 भैरव बटालियनें खड़ी कर चुकी है, जिन्हें अलग-अलग फॉरवर्ड एरिया में तैनात किया जा चुका है। ये बटालियनें ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना के आधुनिकीकरण और “फ्यूचर रेडी फोर्स” विजन का हिस्सा हैं।

Bhairav Vs Ghatak Platoon: क्या भैरव फोर्स के आने के बाद खत्म हो जाएगी बटालियन में घातक प्लाटून? जानिए क्या है सेना का असली प्लान?

डायरेक्टर जनरल इन्फैंट्री लेफ्टिनेंट जनरल अजय कुमार ने बातचीत में बताया कि “भैरव बटालियन को पारंपरिक इन्फैंट्री और स्पेशल फोर्सेज के बीच की खाई को भरने के लिए तैयार किया गया है। ये बटालियनें छोटे स्तर पर लेकिन अत्यधिक प्रशिक्षित सैनिकों से बनी हैं, जो तेजी से और निर्णायक कार्रवाई करने में सक्षम हैं।”

Bhairav-Ashni: 25 बटालियन तैयार करने की योजना

जनरल कुमार ने बताया कि पहले चरण में पांच भैरव बटालियन तैयार की गई हैं, जिनकी ट्रेनिंग 1 अक्टूबर से शुरू हो चुकी है और 30 अक्टूबर तक चलेगी। छह महीने के भीतर इनकी संख्या बढ़ाकर 25 बटालियन करने की योजना है। उन्होंने बताया कि इन इकाइयों को पहले ही “इंटेंडेड एरिया ऑफ आपरेशंस” में तैनात कर दिया गया है और “ओन-द-जॉब ट्रेनिंग” के बाद ये यूनिट्स रियल मिशंस के लिए तैयार होंगी।

Bhairav-Ashni: डिस्पोजेबल हथियार सिस्टम से लैस

भैरव बटालियनें लगभग 250 सैनिकों की यूनिट होती हैं, जो पारंपरिक इन्फैंट्री बटालियन (800-900 सैनिकों) की तुलना में छोटी हैं। इनमें आर्टिलरी, सिग्नल और एयर डिफेंस के प्रशिक्षित जवानों को भी शामिल किया गया है। इन इकाइयों को पर्सनल एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल्स, लॉइटरिंग म्यूनिशन्स और विभिन्न प्रकार के ड्रोन से लैस किया गया है। इनके पास डिस्पोजेबल हथियार सिस्टम होंगे जिन्हें फायर करने के बाद तुरंत छोड़ा जा सकता है, जिससे सैनिक तेजी से आगे बढ़ सकें।

ये लाइट कमांडो बटालियनें तुरंत हमले, सीमा सुरक्षा, काउंटर-इंसर्जेंसी और दुश्मन की गतिविधियों में बाधा डालने के लिए डिजाइन की गई हैं। इन्हें “सेव एंड रेज” मॉडल के तहत बिना कोई नई भर्ती किए मौजूदा इन्फैंट्री बटालियनों से सैनिकों को रीलोकेट करके बनाया जा रहा है। यह पहल ऑपरेशन सिंदूर के बाद थलसेना की आधुनिकीकरण योजना का हिस्सा है।

लेफ्टिनेंट जनरल अजय कुमार ने कहा, “भैरव बटालियन दुश्मन की संवेदनशील और हाई-वैल्यू टारगेट्स पर तेज, असरदार कार्रवाई करने के लिए तैयार की गई हैं। यह यूनिट्स लीन एंड मीन होंगी- यानी कम संख्या में अधिक प्रभावशाली मारक क्षमता। ये छोटे आकार की लेकिन अत्यंत प्रभावी यूनिट्स हैं, जो अपने सीमित आकार के बावजूद अनुपात से अधिक परिणाम देने में सक्षम होंगी।”

उन्होंने बताया कि ये बटालियनें सेना के आधुनिकीकरण अभियान के तहत डिकेड ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन का हिस्सा हैं। भैरव यूनिट्स को ऐसे इलाकों में तैनात किया जा रहा है जहां तुरंत जवाबी कार्रवाई, सटीक वार और सीमित समय में निर्णायक कार्रवाई की जरूरत होती है।

यहां हुईं तैनात

सूत्रों के अनुसार सेना की पांच भैरव बटालियनों को में से पहली बटालियन लद्दाख में नॉर्दर्न कमांड के तहत रेकॉनिसेंस और क्रॉस-बॉर्डर ऑपरेशंस के लिए तैनात है। दूसरी और तीसरी बटालियनें श्रीनगर और नगरोटा 15वीं 16वीं कोर के तहत एलओसी पर काउंटर-टेरर मिशनों के लिए तैयार हैं। चौथी बटालियन पश्चिमी कमांड के तहत राजस्थान/पंजाब के रेगिस्तानी इलाके में और पांचवीं बटालियन पूर्वी कमांड के तहत अरुणाचल प्रदेश में चीन सीमा पर तैनात है।

Bhairav-Ashni: अश्नि प्लाटून: बैटलफील्ड में ड्रोन की ताकत

इन्फैंट्री के डीजी लेफ्टिनेंट जनरल अजय कुमार के मुताबिक भैरव बटालियन के समानांतर, भारतीय सेना ने प्रत्येक इन्फैंट्री बटालियन में एक ‘अश्नि प्लाटून’ बनाई है। अश्नि” का अर्थ है ‘अग्नि’ या ‘ऊर्जा’, जिसके तहत बैटलफील्ड में ड्रोन आधारित युद्धक क्षमता को इन्फैंट्री की ताकत में शामिल करना है।

डीजी इन्फैंट्री ने बताया कि “380 से अधिक इन्फैंट्री बटालियनों में अश्नि प्लाटून तैयार की गई हैं। ये प्लाटून दो कैटेगरी में काम करती हैं, पहली सर्विलांस और दूसरी लॉइटर म्युनिशन।” अश्नि प्लाटून को “ईगल ऑन आर्म्स” कॉन्सेप्ट के तहत बनाया गया है, जिसमें हर सैनिक अपने प्लेटफॉर्म के साथ ड्रोन ऑपरेट करने में कैपेबल होगा। पहले प्रकार की प्लाटून ड्रोन दुश्मन की गतिविधियों की निगरानी करते हैं, जबकि दूसरे प्रकार की प्लाटून ड्रोन से सटीक हमले करेगी।

Bhairav-Ashni: एफपीवी ड्रोन की ट्रेनिंग

लेफ्टिनेंट जनरल कुमार के मुताबिक अश्नि यूनिट्स को भारतीय उद्योगों द्वारा निर्मित उपकरणों से लैस करने के लिए 9 कैटेगरी के ड्रोन का ट्रायल चल रहा है। इनमें इन्फॉर्मेशन, सर्वेलेंस, रिकॉनिसेंस (आईएसआर) और कामीकाजी ड्रोन शामिल हैं। उन्होंने बताया कि अश्नि प्लाटून के सैनिकों को फर्स्ट पर्सन व्यू (एफपीवी) ड्रोन ऑपरेशन की विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है, जिससे वे रियल टाइम इमेजरी, लक्ष्य निर्धारण और सटीक हमला करने में सक्षम बन सकें।

काउंटर-यूएएस सिस्टम तैनात

प्रत्येक इन्फैंट्री बटालियन में 16 ड्रोन प्लाटून होंगी, जिनमें से कुछ लंबी दूरी की और कुछ नजदीकी मिशनों के लिए सक्षम होंगी। सेना के अनुसार, ये यूनिट्स दुश्मन के इलाके में अंदर तक जाकर सटीक प्रहार करने की क्षमता रखती हैं।

उन्होंने बताया कि ड्रोन के साथ-साथ, सेना ने काउंटर-यूएएस सिस्टम (काउंटर-अनमैनड एरियल सिस्टम्स) भी तैनात किए हैं ताकि दुश्मन के ड्रोन हमलों से सैनिकों की रक्षा की जा सके।

आत्मनिर्भर भारत पहल का हिस्सा

सेना की ये दोनों नई इकाइयां भैरव और अश्नि ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल का हिस्सा हैं। इनके लिए जरूरी हथियार और उपकरण घरेलू रक्षा उद्योग और डीपीएसयू (डिफेंस पब्लिक सेक्टर यूनिट्स) के सहयोग से तैयार किए जा रहे हैं।

लेफ्टिनेंट जनरल अजय कुमार ने कहा, “भारतीय इन्फैंट्री अब भविष्य के युद्धक्षेत्र के लिए तैयार है। ड्रोन, स्मार्ट हथियार और विशेष रूप से प्रशिक्षित सैनिक हमारी रणनीतिक क्षमताओं को नए स्तर पर ले जा रहे हैं।”

JAIMEX-2025: योकोसुका में खत्म हुआ भारत-जापान नौसैनिक समुद्री अभ्यास, आईएनएस सह्याद्री ने इंडो-पैसिफिक में कायम की साझेदारी की नई मिसाल

JAIMEX-2025

JAIMEX-2025: भारत और जापान की नौसेनाओं के बीच चल रहा समुद्री अभ्यास जैमेक्स-2025 सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। इस अभ्यास में भारतीय नौसेना के आईएनएस सह्याद्री और जापान मेरीटाइम सेल्फ डिफेंस फोर्स के जहाज जेएस आसाही, जेएस ओमी और सबमरीन जिन्रू ने हिस्सा लिया।

Indian Navy Commanders Conference 2025: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद नौसेना की पहली बड़ी कॉन्फ्रेंस, रणनीतिक तैयारियों पर रहेगा फोकस

भारतीय नौसेना के स्वदेशी शिवालिक-क्लास गाइडेड मिसाइल स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस सह्याद्री ने समुद्री चरण के दौरान कई एडवांस नौसैनिक अभियानों में हिस्सा लिया। इस दौरान एंटी-सबमरीन वारफेयर, मिसाइल डिफेंस ड्रिल, फ्लाइंग ऑपरेशंस और अंडरवे रीप्लेनिशमेंट जैसे ऑपरेशन किए गए। इस अभ्यास से दोनों नौसेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी और संयुक्त मिशनों में सहयोग की क्षमता को मजबूती मिली है।

आईएनएस सह्याद्री 21 अक्टूबर को जापान के योकोसुका पोर्ट पर पहुंचा, जहां हार्बर फेज के दौरान सांस्कृतिक और प्रोफेशनल गतिविधियां आयोजित की गईं। इस चरण में दोनों देशों के नौसैनिक दलों ने क्रॉस-डेक विजिट्स, जॉइंट आपरेशंस प्लान, एक्सपीरिएंस शेयरिंग सेशन और योगा सेशन में हिस्सा लिया। यह युद्धाभ्यास 16 स 18 अक्टूबर तक चला।

भारतीय नौसेना की तरफ से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, यह अभ्यास 2014 में स्थापित ‘स्पेशल स्ट्रैटेजिक एंड ग्लोबल पार्टनरशिप’ की मजबूती का प्रतीक है। इस साझेदारी का लक्ष्य इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और खुला समुद्री मार्ग बनाए रखना है।

JAIMEX-2025

आईएनएस सह्याद्री की तैनाती लॉन्ग रेंज डिप्लॉयमेंट का हिस्सा है, जिसके तहत भारतीय नौसेना इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोगी देशों के साथ नियमित अभ्यास करती है। 2012 में कमीशन हुआ यह युद्धपोत भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल का प्रतीक है, क्योंकि इसे पूरी तरह भारतीय शिपयार्ड में डिजाइन और निर्मित किया गया है।

Jaish Online Jihadi Course: पाकिस्तान में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने महिलाओं के लिए शुरू किया ऑनलाइन जिहादी कोर्स, देना होगा 500 रुपये ‘चंदा’

Jaish Online Jihadi Course

Jaish Online Jihadi Course: पाकिस्तान में स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने एक नया ऑनलाइन जिहादी कोर्स ‘तुफत अल-मूमिनात शुरू किया है। यह कोर्स संगठन की महिला शाखा ‘जमात उल-मूमिनात के तहत चलाया जा रहा है। जैश का मकसद महिलाओं को अपने आतंकवादी नेटवर्क में शामिल किया जाए और आर्थिक सहयोग जुटाया जाए।

Lashkar-e-Taiba in KPK: ऑपरेशन सिंदूर के बाद लश्कर ने बदला आतंकी ठिकाना, ISI की मदद से खैबर पख्तूनख्वा से ऑपरेट करेगा जान-ए-फिदाई

इस कोर्स की शुरुआत 8 नवंबर से होगी। इस कोर्स में शामिल होने के लिए हर प्रतिभागी महिला से 500 पाकिस्तानी रुपये का दान देना जरूरी होगा। यह राशि कथित रूप से संगठन की “धार्मिक शिक्षा गतिविधियों” के नाम पर ली जा रही है। इस कोर्स की खासियत यह है कि सभी सेशन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर 40-40 मिनट के होंगे, जिन्हें जैश के टॉप लीडर की महिलाएं चलाएंगी।

‘तुफत अल-मूमिनात’ नामक यह ऑनलाइन कोर्स धर्म और जिहाद के दृष्टिकोण से महिलाओं के कर्तव्यों की शिक्षा देने के नाम पर तैयार किया गया है। लेकिन खुफिया सूत्रों के मुताबिक, इस कार्यक्रम का वास्तविक मकसद कट्टरपंथी विचारधारा फैलाना और महिला आतंकियों की भर्ती करना है।

पाकिस्तान के आतंकी नेटवर्क में यह पहली बार है जब किसी संगठन ने महिलाओं को जोड़ने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया है। इस कोर्स के जरिए जैश ऐसी महिलाओं तक पहुंच बना रहा है जो धार्मिक शिक्षा के बहाने इसके नेटवर्क का हिस्सा बन सकती हैं।

Jaish Online Jihadi Course: अजहर के परिवार की महिलाएं संभालेंगी कमान

इस कोर्स की कमान खुद मसूद अजहर के परिवार की महिलाओं को सौंपी गई है। मसूद अजहर की बहनों सादिया अजहर और समीरा अजहर को ट्रेनिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इनके अलावा पुलवामा हमले (2019) के मास्टरमाइंड उमर फारूक की पत्नी अफरीरा फारूक को भी अहम भूमिका दी गई है।

सादिया अजहर का पति यूसुफ अजहर ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना की कार्रवाई में मारा गया था। जैश ने इस घटना के बाद महिलाओं को “जिहाद में योगदान” के लिए प्रेरित करने का नया अभियान शुरू किया है।

Jaish Online Jihadi Course

धन जुटाने का नया तरीका

जैश-ए-मोहम्मद का यह ऑनलाइन कोर्स न केवल भर्ती का माध्यम है, बल्कि यह संगठन के लिए चंटा जुटाने का नया रास्ता भी बन गया है। प्रत्येक महिला से ली जा रही 500 रुपये की राशि को “दान” कहा जा रहा है, लेकिन यह स्पष्ट है कि यह रकम आतंकी गतिविधियों के वित्तपोषण के लिए इस्तेमाल की जाएगी।

27 सितंबर को बहावलपुर के मार्कज उस्मान-ओ-अली में अपने भाषण में मसूद अजहर ने धन जुटाने की अपील की थी। अब वही अभियान इस ऑनलाइन कोर्स के रूप में आगे बढ़ाया गया है।

महिला विंग ‘जमात उल-मूमिनात’

8 अक्टूबर को जैश-ए-मोहम्मद ने अपनी महिला विंग ‘जमात उल-मूमिनात’ का एलान किया था। इसके बाद 19 अक्टूबर को पीओके के रावलकोट में दुख्तरान-ए-इस्लाम नाम से एक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें महिलाओं को संगठन से जुड़ने का आह्वान किया गया।

यह नया ऑनलाइन कोर्स उसी रणनीति का विस्तार है, जिसके तहत महिलाओं को जिहादी मानसिकता की ट्रेनिंग दे कर प्रचार, फंडिंग और फिदायीन मिशनों में इस्तेमाल करने की योजना है।

आईएसआई का है सपोर्ट

खुफिया एजेंसियों से मिली जानकारी के मुताबिक जैश का यह कदम पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस के इशारे पर चलाया जा रहा है। चूंकि पाकिस्तान में महिलाओं का अकेले सार्वजनिक स्थानों पर जाना सामाजिक रूप से अनुचित माना जाता है, इसलिए जैश ने अब ऑनलाइन भर्ती मॉडल अपनाया है।

यह रणनीति आईएसआईएस, हमास और लिट्टे जैसे संगठन भी अपना चुके हैं, जहां महिलाएं प्रचारक, फंडरेजर और आत्मघाती हमलावरों की भूमिका निभाती हैं।

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यह कोर्स केवल पाकिस्तान तक सीमित नहीं है। इसके प्रचार में ऐसे सोशल मीडिया चैनलों का इस्तेमाल किया जा रहा है जो भारत के जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश, केरल और तेलंगाना जैसे राज्यों में सक्रिय हैं।

खुफिया सूत्रों के मुताबिक, जैश अब डिजिटल कट्टरपंथ के जरिए महिलाओं को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। एजेंसियों ने इस कोर्स से जुड़ी वेबसाइट्स और मैसेजिंग चैनलों की निगरानी शुरू कर दी है।

वहीं, इस कदम ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि पाकिस्तान किस तरह से एफएटीएफ के नियमों की धज्जियां उड़ा रहा है। पाकिस्तान दावा करता है कि वह आतंकी फंडिंग पर कंट्रोल रखता है, लेकिन जैश जैसे प्रतिबंधित संगठन खुले तौर पर ऑनलाइन दान जुटा रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र पहले ही जैश को आतंकवादी संगठन घोषित कर चुका है। भारत ने 2001 संसद हमले, 2016 पठानकोट एयरबेस हमले और 2019 पुलवामा हमले में इसकी भूमिका को सबूतों साथ दुनिया के सामने उजागर किया था।

India-China Sweets Exchange: एलएसी पर भारतीय और चीनी सैनिकों ने दीपावली पर बांटी मिठाइयां, चीनी दूतावास ने दी जानकारी

India-China Sweets Exchange
File Photo

India-China Sweets Exchange: भारत और चीन के सैनिकों ने इस बार भी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर दीपावली के मौके पर मिठाइयां बांटकर सद्भावना का संदेश दिया। रक्षा सूत्रों के अनुसार, यह आदान-प्रदान लद्दाख से लेकर सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश तक कई फॉरवर्ड पोस्टों पर हुआ। हालांकि भारतीय सेना या रक्षा मंत्रालय की तरफ से इस बार मिठाई एक्सचेंज के फोटो नहीं जारी किए गए हैं।

India China Sweets Exchange: स्वतंत्रता दिवस पर चीन को मिठाई, पाकिस्तान को ‘लाल आंख’, भारतीय सेना का सख्त संदेश

भारतीय सेना और चाइनीज़ पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के बीच यह परंपरा पिछले साल भी निभाई गई थी, जब दोनों सेनाओं ने पूर्वी लद्दाख के डेपसांग और डेमचोक इलाकों से सफलतापूर्वक डिसएंगेजमेंट यानी वापसी प्रक्रिया पूरी की थी। 2020 में हुई गलवान संघर्ष के दौरान इन इलाकों को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव रहा था।

चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “भारत और चीन के सैनिकों ने एलएसी पर दीपावली के अवसर पर मिठाइयों का आदान-प्रदान किया, जो दोनों पक्षों के बीच सौहार्द का प्रतीक है।”

गौरतलब है कि यह परंपरा 2020 में सीमा विवाद शुरू होने के बाद कुछ सालों तक बंद रही थी। लेकिन अब दोनों देशों के बीच सैन्य स्तर की बातचीत और सीमित विश्वास बहाली उपायों के तहत इसे फिर से शुरू किया गया है।

इससे पहले 15 अगस्त के मौके पर भी दोनों देशों के बीच मिठाइयों का आदान-प्रदान हुआ था। लेकिन उस दौरान भी फोटो नहीं जारी किए गए थे। वहीं इस बार भी फोटो जारी नहीं किए गए हैं। वहीं सेना या रक्षा मंत्रालय की तरफ से स्वीट एक्सचेंज को लेकर कोई आधिकारिक बयान भी जारी नहीं किया गया है।

सूत्रों का कहना है कि अमेरिका की टैरिफ वॉर को लेकर चल रहे गतिरोध के चलते इस बार फोटो नहीं जारी किए गए हैं।

भारतीय सेना ने पिछले साल डेमचोक और डेपसांग क्षेत्रों में लगभग चार साल बाद नियमित गश्त फिर शुरू की थी। इससे सीमा पर 2020 से पहले जैसी स्थिति बहाल हुई। वहीं, गोगरा-हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र से सैनिकों की चौथी चरण की वापसी सितंबर 2022 में पूरी हुई थी, जिसके बाद वार्ताएं कुछ समय के लिए रुकी थीं।

रक्षा मंत्रालय की 2024 की वार्षिक समीक्षा रिपोर्ट में कहा था कि एलएसी पर हालात “स्थिर लेकिन संवेदनशील” बने हुए हैं। इस वर्ष जून में भारत ने चीन के साथ हुई बैठक में सीमा निर्धारण पर स्थायी समाधान की आवश्यकता दोहराई और जटिल मुद्दों को लगातार संवाद और डी-एस्केलेशन रोडमैप के जरिए हल करने पर जोर दिया।

Operation Sindoor Gallantry Awards: सरकार ने जारी किए ऑपरेशन सिंदूर में बहादुरी दिखाने वाले जांबाजों के कारनामे, बताया कैसे घुटनों पर आया पाकिस्तान

Operation Sindoor Gallantry Awards

Operation Sindoor Gallantry Awards: भारत सरकार ने हाल ही में गजट नोटिफिकेशन जारी कर उन जवानों के शौर्य को विस्तार से बताया है, जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान असाधारण साहस का प्रदर्शन किया था। इस सूची में भारतीय वायुसेना और थलसेना के 15 जवानों को वीर चक्र से सम्मानित किया गया है, जिन्होंने मई 2025 में पाकिस्तान के खिलाफ निर्णायक भूमिका निभाई थी। भारतीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इन वीरों को 79वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर सम्मानित किया था।

IAF Day 2025 पर ऑपरेशन सिंदूर के लिए गोल्डन एरोज, S-400 और ब्रह्मोस स्क्वॉड्रन को मिला यूनिट साइटेशन

यह पहली बार है जब ऑपरेशन सिंदूर में मिले वीरता पुरस्कारों के साइटेशंस को सार्वजनिक किया गया है। सरकार की तरफ से जारी इस सूची में बताया गया है कि कैसे ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के एयरबेस और आतंकी ठिकानों को तबाह किया था।

ग्रुप कैप्टन रणजीत सिंह सिद्धू: दुश्मन के ‘दिल’ में वार करने वाले राफेल कमांडर

भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन रणजीत सिंह सिद्धू को ऑपरेशन सिंदूर में उनकी अभूतपूर्व नेतृत्व क्षमता और वीरता के लिए वीर चक्र से सम्मानित किया गया। सिद्धू ने राफेल स्क्वाड्रन का नेतृत्व करते हुए कई डीप-पेनीट्रेशन स्ट्राइक मिशन पूरे किए, जिनमें उन्होंने दुश्मन के ठिकानों को सर्जिकल प्रिसिजन के साथ नष्ट किया।

गजट में प्रकाशित उनकी साइटेशन में कहा गया है, “ग्रुप कैप्टन सिद्धू ने उस दौरान असाधारण नेतृत्व और साहस का प्रदर्शन किया। उन्होंने तीन अलग-अलग एयरबेस से स्ट्राइक मिशन ऑपरेट किए और लगातार पाकिस्तानी खतरों के बीच रियल टाइम फैसले लेते हुए मिशन को अंजाम दिया।”

उनकी स्क्वाड्रन ने पाकिस्तान के अंदर तक जाकर निशाना साधा और अपने फाइटर पायलटों के लिए एयर डिफेंस कवर भी दिया। उनके नेतृत्व में वायुसेना ने पाकिस्तान के डिफेंस लेयर को भेदते हुए कई अहम ठिकानों को नष्ट किया।

ग्रुप कैप्टन मनीष अरोड़ा: अंधेरे में किया सटीक वार

ग्रुप कैप्टन मनीष अरोड़ा को भी वीर चक्र से सम्मानित किया गया है। उन्होंने एक अनएस्कॉर्टेड स्ट्राइक पैकेज का नेतृत्व किया। उनका मिशन था, पाकिस्तानी सेना के सबसे सुरक्षित ठिकानों को निशाना बनाना।

उनकी साइटेशन में लिखा गया है, “उन्होंने अंधेरी रात में बेहद कम समय में लॉन्च विंडो में घुसपैठ की और सटीक हमले किए। उनकी आक्रामक उड़ान ने दुश्मन को भ्रम में डाल दिया और पाकिस्तानी एयर डिफेंस सिस्टम डिएक्टिवेट हो गया।”

उनका मिशन उस इलाके में हुआ जो 24 घंटे रडार कवरेज और बियोंड विजुअल रेंज मिसाइलों से सुरक्षित था। इसके बावजूद उन्होंने जोखिम उठाकर टारगेट नष्ट किया और अपने साथियों को सुरक्षित वापस लाए।

ग्रुप कैप्टन अनीमेश पटनी: सैम यूनिट के कमांडर

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ग्रुप कैप्टन अनीमेश पतनी ने फारवर्ड पोजिशन पर एक सर्फेस-टू-एयर मिसाइल (SAM) स्क्वाड्रन की कमान संभाली। उनके नेतृत्व में यूनिट ने दुश्मन के कई एरियल टारगेट्स को निशाना बनाया और बिना किसी नुकसान के मिशन पूरा किया।

उनके नेतृत्व में यूनिट ने बार-बार अपनी लोकेशन बदली ताकि दुश्मन भ्रमित रहे और अपनी ऑफेंसिव पोजिशन बनाए रखी। उनके निर्देशन में वायुसेना ने कई दुश्मन के कई हवाई हमलों को नाकाम किया।

ग्रुप कैप्टन कुनाल कालरा: तकनीकी खराबी के बाद भी नहीं खोया साहस

ग्रुप कैप्टन कुनाल कालरा का मिशन बेहद चुनौतीपूर्ण था। उड़ान के दौरान उनके विमान में तकनीकी खराबी आ गई थी, लेकिन उन्होंने साहस नहीं छोड़ा। उन्होंने पहला टारगेट सफलतापूर्वक नष्ट किया और फिर सिस्टम रीसेट कर दूसरा टारगेट भी मार गिराया।

उनकी साइटेशन में लिखा है, “उन्होंने विपरीत मौसम, तकनीकी गड़बड़ी और दुश्मन के मजबूत डिफेंस के बीच अपनी स्क्वाड्रन का नेतृत्व किया। उनका दृढ़ निश्चय और नेतृत्व प्रेरणादायक रहा।”

विंग कमांडर जॉय चंद्र: रडार नेटवर्क को भेदा

विंग कमांडर जॉय चंद्र ने ऐसे इलाके में मिशन को अंजाम दिया जो नेटवर्क्ड एयर डिफेंस ग्रिड से घिरा था। उन्होंने लो-लेवल उड़ान भरते हुए रडार को धोखा दिया और सही समय पर टारेगट को निशाना बनाया। खास बात यह थी उस दौरान दुश्मन के सरफेस टू एय़र गाइडेड वेपंस एक्टिव थे।

स्क्वाड्रन लीडर सार्थक कुमार: दो दिनों में दुश्मन के दो ठिकाने तबाह

स्क्वाड्रन लीडर सार्थक कुमार ने लगातार दो दिनों तक दो स्ट्राइक मिशन उड़ाए और दोनों बार टारगेट को नष्ट किया। अगले दिन, कुमार को फिर से एक लंबी दूरी के स्ट्राइक मिशन को उड़ाने का काम सौंपा गया, जिसके चलते पाकिस्तान बुरी तरह से पंगु हो गया और उसकी ऑपरेशन क्षमता काफी घट गई।

स्क्वाड्रन लीडर सिद्धांत सिंह: ‘स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक’ के एक्सपर्ट

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, सिद्धांत सिंह को तीन विमानों की फॉर्मेशन का नेतृत्व करने का दायित्व सौंपा गया था। उनका कार्य एक पूर्व-निर्धारित टारगेट पर स्टैंड-ऑफ प्रिसिजन स्ट्राइक (दूर से सटीक हमला) करना था। दुश्मन के एयर डिफेंस नेटवर्क के बीच उन्होंने बिना किसी नुकसान के मिशन को अंजाम दिया।

स्क्वाड्रन लीडर रिजवान मलिक: बहावलपुर और मुरिदके रहा टारगेट

मणिपुर के इम्फाल ईस्ट जिले के कैखू गांव के रहने वाले स्क्वाड्रन लीडर रिजवान मलिक ने अपने सुखोई-30एमकेआई विमान से अंधेरे में उड़ान भरते हुए बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद के मुख्यालय को नष्ट किया, जिसमें अनुमानित 100 से अधिक आतंकवादी और उनके परिवारजन मारे गए। इसके अलावा, मुरिदके में लश्कर-ए-तैयबा के ठिकानों और पाकिस्तानी मिलिट्री इंस्टालेशंस पर भी हमले किए। उस दौरान दुश्मन के रडार और मिसाइल सिस्टम भी एक्टिव थे।

कर्नल कोशांक लंबा (302 मीडियम रेजिमेंट)

भारतीय थलसेना के अधिकारियों को भी वीरता पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। कर्नल कौशांक लांबा ने सीमावर्ती मोर्चों पर निर्णायक तोपखाने की कार्रवाई का नेतृत्व किया। कर्नल कोशांक लंबा ने पहली बार इतने कम समय में स्पेशिलाइज्ड इक्विपमेंट बैटरी की हवाई मोबिलाइजेशन का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया। उन्होंने पूरी गोपनीयता के साथ इंटर-कमांड इंडक्शन सुनिश्चित किया, जिससे ऑपरेशन के लिए समय पर संसाधन उपलब्ध हो सके। दुश्मन की तीव्र गोलाबारी और हमलों के बीच, उन्होंने अपनी यूनिट को तैनात किया और महत्वपूर्ण लक्ष्यों पर सटीक तोपखाने की आग से दुश्मन को भारी नुकसान पहुंचाया। कर्नल लांबा ने अपनी आर्टिलरी यूनिट के जवानों के साथ दुश्मन की बंकरों पर सटीक फायर मिशन ऑपरेट किए, जिससे कई आतंकवादी ठिकाने नष्ट हुए।

लेफ्टिनेंट कर्नल सुशील बिष्ट (1988 इंडिपेंडेंट मीडियम बैटरी)

लेफ्टिनेंट कर्नल सुशील बिष्ट ने अपनी आर्टिलरी यूनिट की कमांड संभालते हुए दुश्मन के आतंकी कैंपों को पूरी तरह नष्ट कर दिया। उन्होंने अपनी बैटरी से हाई वैल्यू टारगेट्स पर हमले किए। उनके नेतृत्व में यूनिट ने काउंटर-टेररिज्म ऑपरेशन में अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की। वहीं बिष्ट ने सैटेलाइट इमेजरी और नई तकनीकों का उपयोग कर सटीक लोकेशन तय की और रात के अंधेरे में ऑपरेशन को अंजाम दिया।

India Russia S-400 Deal: भारत-रूस के बीच 10,000 करोड़ रुपये के एस-400 सिस्टम सौदे को लेकर चल रही बातचीत, बुधवार को हो सकता है बड़ा फैसला

India Russia S-400 Deal

India Russia S-400 Deal: भारत और रूस के बीच करीब 10,000 करोड़ रुपये की एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की डील को लेकर बातचीत चल रही है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना के एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम (सुदर्शन चक्र) ने पाकिस्तान के फाइटर जेट्स और एयरबेस को नुकसान पहुंचाया था। वहीं भारत अब बड़ी संख्या में एस-400 सिस्टम खरीदने की तैयारी कर रहा है। रक्षा सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्ताव पर विचार 23 अक्टूबर को होने वाली डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल की बैठक में किया जा सकता है।

IAF Day 2025 पर ऑपरेशन सिंदूर के लिए गोल्डन एरोज, S-400 और ब्रह्मोस स्क्वॉड्रन को मिला यूनिट साइटेशन

जानकारी के मुताबिक, भारतीय वायुसेना रूस से बड़ी संख्या में नई मिसाइलें (India Russia S-400 Deal) खरीदने की योजना बना रही है। यह मिसाइलें उन एस-400 सिस्टम्स के लिए होंगी, जिन्होंने हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान पर जमकर कहर बरपाया था। चार दिनों तक चले इस ऑपरेशन में भारतीय वायुसेना के एस-400 सिस्टम ने पाकिस्तान के 6 से 7 फाइटर जेट और एक अवॉक्स विमान को 300 किलोमीटर की दूरी से मार गिराया था। वायुसेना प्रमुख ने इसे “गेम-चेंजर ऑपरेशन” बताते हुए या था, एस-400 की जमकर तारीफ की थी।

India Russia S-400 Deal

रक्षा सूत्रों के अनुसार, भारत रूस के साथ इस पर भी बातचीत कर रहा है कि बाकी बचे एस-400 (India Russia S-400 Deal) के दो स्क्वाड्रन की सप्लाई कब और कैसे की जाएगी। भारत ने 2018 में रूस के साथ पांच एस-400 स्क्वाड्रनों की डील की थी, जिसमें से तीन स्क्वाड्रन पहले ही भारत को मिल चुके हैं और वे ऑपरेशनल हैं। चौथे स्क्वाड्रन की डिलीवरी से पहले ही रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू हो गया था, जिससे डिलीवरी में देरी हुई। वहीं, अब दोनों देशों के बीच इस पर बातचीत फिर शुरू हो गई है।

सूत्रों का कहना है कि भारत एस-400 सिस्टम (India Russia S-400 Deal) को देश के इंटीग्रेटिड एयर डिफेंस नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी कर रहा है। वायुसेना चाहती है कि मिसाइलों की संख्या बढ़ाई जाए ताकि ऑपरेशन सिंदूर जैसे हालात में लंबी दूरी से ही सटीक हमले किए जा सकें। वहीं, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के दिसंबर 2025 में भारत दौरे के दौरान इस डील को लेकर उच्चस्तरीय चर्चा होने की उम्मीद है।

इसके अलावा, भारत और रूस के बीच एस-500 सिस्टम और एयर-टू-एयर मिसाइल्स को लेकर भी बातचीत चल रही है। रूस की ओर से यह भी पेशकश की गई है कि भारत चाहे तो बियोंड विजुअल रेंज मिसाइलें भी ले सकता है, जिससे भारतीय वायुसेना की एयर स्ट्राइक कैपेबिलिटी में और इजाफा होगा।

सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के बीच ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के अपग्रेडेशन को लेकर भी चर्चाएं हुई हैं। भारत और रूस मिलकर अब इस मिसाइल के नए वेरिएंट्स पर काम कर रहे हैं, जिसकी रेंज न केवल ज्यादा होगी, बल्कि टारगेटिंग क्षमता भी जबरदस्त होगी।

रूस से मिले एस-400 सिस्टम (India Russia S-400 Deal) 300 किलोमीटर तक की दूरी पर दुश्मन के फाइटर जेट, मिसाइल और ड्रोन को एक साथ ट्रैक और नष्ट कर सकता है। भारतीय वायुसेना ने इसे ऑपरेशनल तौर पर देश के उत्तर और पश्चिमी मोर्चों पर तैनात किया हुआ है, जहां से यह पाकिस्तान और चीन की किसी भी हवाई गतिविधि की निगरानी कर सकता है।

भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने अगस्त 2025 में बेंगलुरु में एयर चीफ मार्शल एलएम कात्रे मेमोरियल लेक्चर के दौरान एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम (India Russia S-400 Deal) को गेम चेंजर करार दिया था। उन्होंने बताया था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस सिस्टम ने पाकिस्तानी विमानों के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया था। एस-400 ने 5 पाकिस्तानी फाइटर जेट्स और 1 एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल विमान को 300 किलोमीटर दूर से मार गिराया था, जो इतिहास का सबसे लंबा सरफेस-टू-एयर किल माना गया था।

वहीं, इस सिस्टम ने पाकिस्तानी लॉन्ग-रेंज ग्लाइड बॉम्ब्स को भारतीय सीमा से दूर रखा और दुश्मन विमानों को 300 किमी के दायरे में घुसने नहीं दिया। वायुसेना प्रमुख ने कहा कि एस-400 (India Russia S-400 Deal) ने “वंडरफुल जॉब” किया और यह दुनिया का सबसे सक्षम सिस्टम है, जिसमें विभिन्न प्रकार की मिसाइलें और रडार शामिल हैं।

Explainer: क्या हैं भारतीय नौसेना के R11 और R33? जानें इंडियन नेवी का डुअल कैरियर बैटल ग्रुप, जिससे कांपते हैं चीन और पाकिस्तान!

Explainer Indian Navy Aircraft Carriers R11 and R33: INS Vikrant and INS Vikramaditya Power India’s Maritime Strength

Explainer Indian Navy Aircraft Carriers: भारतीय नौसेना के दो विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत और आईएनएस विक्रमादित्य भारत की समुद्री शक्ति की पहचान हैं। 20 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दीपावली का त्यौहार भारतीय नौसेना के स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत पर जवानों के साथ मनाया। उस समय विक्रांत गोवा-करवार तट पर तैनात था। यह दौरा सैनिकों के साथ दीवाली मनाने की उनकी 12 साल पुरानी परंपरा का हिस्सा था। उनके इस दौरे के बाद आईएनएस विक्रांत की चर्चा चारों तरफ होने लगी। वहीं आईएनएस विक्रांत को R11 भी कहा जाता है।

PM Modi Diwali INS Vikrant: पीएम मोदी ने नौसेना के साथ INS विक्रांत पर मनाई दीपावली, कहा- ‘ऑपरेशन सिंदूर में उड़ाई थी पाकिस्तान की नींद’

Explainer Indian Navy Aircraft Carriers: आईएनएस विक्रांत- स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर

आईएनएस विक्रांत भारत का पहला स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर यानी विमानवाहक पोत है, जो पूर्वी तट (बे ऑफ बंगाल) पर तैनात है। इसे कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड ने डिजाइन और मैन्युफैक्चर किया है और इसे 2 सितंबर 2022 को कमीशन किया गया था। लगभग 45,000 टन वजन वाले इस युद्धपोत की लंबाई 262 मीटर है। इसमें चार जीई एलएम2500+ गैस टर्बाइन इंजन लगे हैं, जो इसे 28 नॉट्स (52 किमी/घंटा) की रफ्तार देते हैं।

यह वॉरशिप स्टोबर यानी शॉर्ट टेक-ओफ बट अरेस्टेड रिकवरी सिस्टम पर आधारित है और इस पर 26 से 30 विमान तैनात किए जा सकते हैं। इनमें मिग-29के लड़ाकू विमान, एचएएल ध्रुव, एडवांस मल्टी-रोल मैरीटाइम हेलीकॉप्टर रोमियो यानी एमएच-60आर सीहॉक शामिल हैं। साथ ही नौसेना में भविष्य में शामिल होने वाले राफेल-एम भी इसी एयरक्राफ्ट पर तैनात किए जाएंगे। इसके हथियारों की बात करें तो इनमें बराक-8 मिसाइल सिस्टम, एके-630 क्लोज-इन वेपन सिस्टम और एडवांस इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम शामिल हैं।

Explainer Indian Navy Aircraft Carriers

आईएनएस विक्रांत में लगभग 76 फीसदी स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल हुआ है, जिसमें बीईएल, बीएचईएल, एल एंड टी, और जीआरएसई जैसी भारतीय कंपनियों का बड़ा योगदान रहा। यह जहाज भारत की मैरिटाइम सिक्योरिटी, आत्मनिर्भरता और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक प्रभुत्व का प्रतीक है।

क्या है पेनेंट नंबर

वहीं, आईएनएस विक्रांत को भी एक पेनेंट नंबर मिला है। पेनेंट नंबर की बात करें, तो यह एक खास तरह का कोड होता है, जो नौसेना के जहाजों (विशेष रूप से युद्धपोतों, विमानवाहकों, पनडुब्बियों आदि) को पहचानने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसे हल नंबर या फ्लैग नंबर भी कहते हैं। यह नौसेना में जहाजों को अलग-अलग करने और उनकी क्लास (जैसे विमानवाहक, डिस्ट्रॉयर) को दर्शाने का तरीका है। पेनेंट नंबर में आमतौर पर एक अक्षर और संख्या होती है।

जैसे आर का मतलब विमानवाहक या एयरक्राफ्ट कैरियर होता है। वहीं, डी का मतलब डिस्ट्रॉयर और एफ का मतलब फ्रिगेट होता है।

आईएनएस विक्रांत का पेनेंट नंबर है R11

यहां “आर” का मतलब कॉमनवेल्थ नौसेनाओं में एयरक्राफ्ट कैरियर के लिए इस्तेमाल होता है। जबकि “11” इसकी पहचान संख्या है। यह नंबर पुराने आईएनएस विक्रांत (1961-1997) से प्रेरित है, जिसने 1971 के भारत-पाक युद्ध में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी। जिसकी वजह से इसे R11 भी कहा जाता है।

रूस से खरीदा था आईएनएस विक्रमादित्य

आईएनएस विक्रमादित्य को भारतीय नौसेना का दूसरा एक्टिव एयरक्राफ्ट कैरियर है। यह रूस के कीव-क्लास युद्धपोत एडमिरल गोर्शकोव का अपग्रेडेड वर्जन है, जिसे भारत ने 2013 में कमीशन किया था। इसका वजन भी लगभग 45,400 टन है और यह भी स्टोबार सिस्टम पर काम करता है।

इस वॉरशिप पर भी मिग-29के लड़ाकू विमान और रूसी कोअक्सियल-रोटर हेलीकॉप्टर कामोव केए-31 एयरबॉर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल हेलीकॉप्टर तैनात हैं। इस शिप पर बराक-8 मिसाइल सिस्टम, एके-630 क्लोज-इन वेपन सिस्टम, और आधुनिक नेविगेशन एवं रडार सिस्टम लगाए गए हैं। इसकी अधिकतम गति 30 नॉट्स (55 किमी/घंटा) है।

आईएनएस विक्रमादित्य का पेनेंट नंबर है R33

वहीं आईएनएस विक्रमादित्य का पेनेंट नंबर R33 है। यह पश्चिमी नौसैनिक कमान (अरब सागर) का हिस्सा है और अरब सागर में भारत की सामरिक मौजूदी को मजबूत बनाता है। अप्रैल 2025 में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान यह पाकिस्तान की नौसेना पर रणनीतिक दबाव बनाए रखने के लिए अरब सागर में सक्रिय तैनाती पर था।

डुअल कैरियर बैटल ग्रुप का हिस्सा

आईएनएस विक्रांत और आईएनएस विक्रमादित्य भारतीय नौसेना के डुअल कैरियर बैटल ग्रुप का हिस्सा हैं। दुनिया के केवल कुछ चुनिंदा देशों जैसे अमेरिका, चीन और ब्रिटेन के पास यह क्षमता है। इन्ही दोनों कैरियर्स की वजह से हिंद महासागर क्षेत्र में चौबीस घंटें भारत की मौजूदगी रहती है। 2024 में इन दोनों ने मिलकर पहली बार क्रॉस-डेक फ्लाइट आपरेशंस किए, जिसमें मिग-29के विमानों ने एक से दूसरे कैरियर पर उड़ान भरी और लैंडिंग की। इन जहाजों की संयुक्त तैनाती से भारतीय नौसेना अब इंडो-पैसिफिक कमांड स्ट्रक्चर में एक निर्णायक भूमिका निभा रही है।

पीएम मोदी ने देखी मिग-29के फाइटर जेट्स की सॉर्टी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आईएनएस विक्रांत पर दौरे के दौरान नौसेना की ताकत को नजदीक से देखा। इस दौरान उन्होंने न केवल मिग-29के फाइटर जेट्स की सॉर्टी देखी, बल्कि, बराक-8 मिसाइल लॉन्च और पनडुब्बी ऑपरेशंस का प्रदर्शन देखा। उन्होंने नौसैनिकों और अधिकारियों से मुलाकात कर उनकी तैयारियों की सराहना की। इस दौरान वे नौसैनिकों के साथ पारंपरिक ‘बड़ा खाना’ में भी शरीक हुए।

उन्होंने नौसेना कर्मियों से बातचीत करते हुए कहा कि यह जहाज “21वीं सदी के भारत की शक्ति, मेहनत और आत्मविश्वास का प्रतीक” है। पीएम ने यह भी कहा, “आईएनएस विक्रांत पर कल रात बिताई गई रात शब्दों में बयां नहीं की जा सकती। मैंने आप सभी में जो अपार ऊर्जा और उत्साह देखा, वह अद्भुत था। जब मैंने आपका देशभक्ति गीत सुना, जिसमें ऑपरेशन सिंदूर का वर्णन था, तो कोई शब्द जवान के युद्धक्षेत्र के अनुभव को पूरी तरह व्यक्त नहीं कर सकता। मेरा दीवाली आपके बीच बिताना विशेष रहा।”

पाकिस्तान को “नींद हराम” की थी आईएनएस विक्रांत ने

उन्होंने कहा कि आईएनएस विक्रांत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान को “नींद हराम” कर दी थी। और कुछ दिनों में उसे घुटनों पर ला दिया। ब्रह्मोस मिसाइल अकेले ही कुछ देशों को घबराहट में डाल देती है। उन्होंने आगे कहा, जिसका नाम ही दुश्मन के साहस का अंत कर दे, वह है आईएनएस विक्रांत। यह न केवल एक वॉरशिप है, बल्कि भारत की सेना की क्षमता का प्रतीक है। यह 21वीं सदी के भारत की मेहनत, प्रतिभा, प्रभाव और प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि 2022 में कमीशनिंग के दिन हमने औपनिवेशिक प्रतीक को अलविदा कहा था। हमारा लक्ष्य भारत को दुनिया के शीर्ष रक्षा निर्यातकों में शामिल करना है। 2014 से हर साल औसतन 40 नए युद्धपोत या पनडुब्बियां जुड़ी हैं।

स्ट्रीमपास्ट का हुआ आयोजन

वहीं, 20 अक्टूबर को पीएम नरेंद्र मोदी के आईएनएस विक्रांत के दौरे के दौरान स्ट्रीमपास्ट का आयोजन भी हुआ। जिसमें लगभग 10 जहाजों ने हिस्सा लिया। स्ट्रीमपास्ट एक नौसैनिक परंपरा है, जिसमें नौसेना के जहाज एक विशेष क्रम में, आमतौर पर एक सीधी रेखा में, किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति के सामने से गुजरते हैं। इसे नौसेना की ताकत, अनुशासन और समन्वय का प्रदर्शन करने के लिए आयोजित किया जाता है। यह एक तरह का औपचारिक ‘सैल्यूट’ या सम्मान है, जो समुद्री परेड की तरह होता है।

पीएम मोदी के सामने हुए स्ट्रीमपास्ट में इसमें आईएनएस विक्रमादित्य, डिस्ट्रॉयर्स आईएनएस कोलकाता, आईएनएस शिवालिक और पनडुब्बियां शामिल थीं। साथ ही मिग-29के और एमएच-60आर सीहॉक ने भी फ्लाईपास्ट किया।

AUSTRAHIND 2025: पर्थ में चल रही है भारत-ऑस्ट्रेलिया की सेनाओं के बीच जॉइंट मिलिट्री एक्सरसाइज ‘ऑस्ट्राहिंद 2025’, आतंकवाद-रोधी अभियानों पर फोकस

AUSTRAHIND 2025

AUSTRAHIND 2025: भारत और ऑस्ट्रेलिया की सेनाओं के बीच इन दिनों जॉइंट मिलिट्री एक्सरसाइज ‘ऑस्ट्राहिंद 2025’ चल रही है। यह इस एक्सरसाइज का चौथा संस्करण है, जो 13 अक्टूबर से 26 अक्टूबर तक ऑस्ट्रेलिया के पर्थ शहर में आयोजित किया जा रहा है। इस साल के अभ्यास का मुख्य उद्देश्य दोनों सेनाओं के बीच जॉइंट आतंकवाद-रोधी अभियानों और संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में सहयोग बढ़ाना है।

Exercise Konkan 2025: INS विक्रांत और HMS प्रिंस ऑफ वेल्स ने दिखाया दम, हिंद महासागर में भारत-ब्रिटेन के कैरियर स्ट्राइक ग्रुप पहली बार आए साथ

AUSTRAHIND 2025

यह एक्सरसाइज दिखाती है कि दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग तेजी से बढ़ रहा है। इसमें भारत और ऑस्ट्रेलिया की सेनाएं अर्बन और सेमी-अर्बन इलाकों में जॉइंट ट्रेनिंग कर रही हैं, ताकि वे आधुनिक युद्ध परिस्थितियों में मिलकर काम करने की क्षमता डेवलप कर सकें। इस दौरान सैनिकों ने कई टैक्टिकल ड्रिल्स और स्ट्रैटेजिक सिचुएशंस का अभ्यास किया।


‘ऑस्ट्राहिंद’ के दौरान दोनों सेनाओं ने संयुक्त रूप से काउंटर टेररिज्म, हाउस क्लियरिंग, होस्टेज रेस्क्यू और मल्टीनेशनल कोऑर्डिनेशन जैसे अभियान भी किए। इन अभियानों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में भारत और ऑस्ट्रेलिया किसी भी संयुक्त मिशन, जैसे मानवीय सहायता या शांति स्थापना, में एक साथ कुशलता से काम कर सकें। सैन्य अभ्यास के अलावा, दोनों देशों के जवानों ने सांस्कृतिक आदान-प्रदान किया। जवानों ने एक-दूसरे की परंपराओं और रीति-रिवाजों को साझा किया।