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Defence Production: रक्षा मंत्री की उद्योग जगत से अपील- डिफेंस प्रोडक्शन में बढ़ाएं योगदान, ऑपरेशन सिंदूर में स्वदेशी रक्षा उपकरणों से बढ़ी भारत की साख

Defence Production- Rajnath SIngh
Raksha Mantri Rajnath Singh addressed the SIDM Annual Session 2025 in New Delhi.

Defence Production: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जिस तरह से भारतीय सेनाओं ने प्रभावी ढंग से ‘मेक इन इंडिया’ डिफेंस इक्विपमेंट्स का इस्तेमाल किया उससे क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की प्रतिष्ठता मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुनिया ने भारत की आकाश मिसाइल प्रणाली, ब्रह्मोस मिसाइल और आकाशतीर एयर डिफेंस कंट्रोल सिस्टम जैसी स्वदेशी तकनीकों की क्षमताओं को देखा है।

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नई दिल्ली में आयोजित सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स के वार्षिक सम्मेलन में बोलते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि इन उपकरणों की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि भारत अब केवल उपयोगकर्ता नहीं, बल्कि एक उत्पादक देश बन चुका है। उन्होंने कहा कि यह सफलता भारतीय सशस्त्र बलों के साथ-साथ देश के डिफेंस इंडस्ट्री वॉरियर्स की भी है, जिन्होंने इनोवेशन, डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग में अग्रणी भूमिका निभाई है।

Defence Production- Rajnath SIngh

रक्षा उत्पादन में अपना योगदान बढ़ाए उद्योग जगत

राजनाथ सिंह ने कहा कि 2014 से पहले भारत अपनी सुरक्षा जरूरतों के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर था। लेकिन अब देश में 1.51 लाख करोड़ रुपये का डिफेंस प्रोडक्शन हो रहा है, जिसमें से 33,000 करोड़ रुपये का योगदान निजी क्षेत्र से है।

उन्होंने बताया कि रक्षा निर्यात भी ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच चुका है। 10 साल पहले जहां यह 1,000 करोड़ रुपये से कम था, वहीं अब यह 24,000 करोड़ रुपये के करीब पहुंच गया है और मार्च 2026 तक 30,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है।

रक्षा मंत्री ने उद्योग जगत से अपील करते हुए कहा कि वे रक्षा उत्पादन में अपने योगदान को मौजूदा 25 फीसदी से बढ़ाकर 50 फीसदी तक पहुंचाने की योजना पर काम करें।

‘हमारी मिट्टी, हमारी ढाल’

राजनाथ सिंह ने कहा कि जब भारत किसी विदेशी डिफेंस इक्विपमेंट को खरीदता है तो उसके रखरखाव और स्पेयर पार्ट्स की लागत बहुत अधिक होती है। उन्होंने उद्योग जगत से आग्रह किया कि वे सबसिस्टम्स और कंपोनेंट्स के स्वदेशी निर्माण पर ध्यान दें, ताकि सप्लाई और रिपेयमेंट में भारत आत्मनिर्भर बन सके। उन्होंने कहा कि भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि ‘हमारी मिट्टी, हमारी ढाल’ उसकी पहली पसंद बने।

रक्षा मंत्री ने कहा कि आईडेक्स और अदिति जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं और उद्योगों को नई तकनीक विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भारत को पूरी तरह स्वदेशी रक्षा तकनीक वाले उत्पाद विकसित करने होंगे ताकि देश की सुरक्षा सेल्फ सर्पोटिंग बन सके।

Zen Technologies defence stock: सात फीसदी गिरा शेयर, 675 करोड़ रुपये की ऑर्डर बुक के बावजूद निवेशक निराश

Zen Technologies defence stock

Zen Technologies defence stock: भारतीय डिफेंस कंपनी जेन टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के शेयर शुक्रवार को करीब 6.54 फीसदी गिर गए। कंपनी के दूसरे तिमाही के नतीजे मिले-जुले रहे। मुनाफे में थोड़ी बढ़त दिखी, वहीं साल-दर-साल रेवेन्यू में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

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शेयर बाजार में कंपनी का स्टॉक शुक्रवार को 1,329.05 रुपये पर खुला और दिन के दौरान 1,305.60 रुपये के निचले स्तर तक गया। गुरुवार को यह शेयर 1,397.05 रुपये पर बंद हुआ था। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन अब 12,000 करोड़ रुपये से थोड़ा ऊपर है।

जेन टेक्नोलॉजीज ने तिमाही के दौरान 174 करोड़ रुपये का रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 28.1 फीसदी कम रहा। हालांकि, पिछली तिमाही की तुलना में रेवेन्यू 10.1 फीसदी बढ़ा है।

कंपनी का नेट प्रॉफिट इस तिमाही में 62 करोड़ रुपये रहा, जो पिछली तिमाही के 53 करोड़ से 17 रुपये ज्यादा है। हालांकि, पिछले साल की समान अवधि में यह 63 करोड़ रुपये था, यानी साल-दर-साल आधार पर 1.6 फीसदी की गिरावट रही।

कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन 41 फीसदी से घटकर 37 फीसदी रह गई, लेकिन ईबीआईटीडीए मार्जिन में सुधार हुआ और यह 51.88 फीसदी पर पहुंचा गया। कंपनी ने बताया कि मुनाफे में 26 करोड़ रुपये की “अन्य आय” शामिल थी।

जेन टेक्नोलॉजीज कंपनी का टर्नओवर पिछले साल की तुलना में कम रहा, लेकिन मजबूत ईबीआईटीडीए मार्जिन ने प्रॉफिटेबिलिटी बनाए रखी। कंपनी की दूसरी यूनिट्स एप्लाइड रिसर्च इंटरनेशनल और यूनिस्ट्रिंग टेक सोल्यूशन्स ने अच्छे रिजल्ट दिए हैं।

कंपनी के पास सितंबर 2025 तक 1,100 करोड़ रुपये से अधिक की लिक्विडिटी है और यह रिसर्च एंड डेवलपमेंट में लगातार निवेश कर रही है।
वहीं, “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद सरकार की आपातकालीन रक्षा खरीद प्रक्रियाओं के कारण कुछ सामान्य टेंडर की मंजूरी में देरी हुई है, लेकिन ऑर्डर बुक पर इसका कोई असर नहीं पड़ा है।

कंपनी ने तिमाही के दौरान रक्षा तकनीक के चार अहम सेक्टर रोबोटिक्स, ड्रोन, नेवल सिस्टम्स और लोइटरिंग म्यूनिशन में स्ट्रेटेजिक एक्विजिशन्स पूरे किए। इन सौदों में एप्लाइड रिसर्च इंटरनेशनल, भैरव रोबोटिक्स, वेक्टर टेक्निक्स और टिसा एयरोस्पेस शामिल हैं।

इन एक्विजिशन्स से कंपनी के पास 121 से अधिक बौद्धिक संपद और तैयार आर एंड डी प्रोटोटाइप्स आए हैं। इससे प्रोडक्शन डेलपमेंट की रफ्तार करीब दो साल तक बढ़ जाएगी और क्रॉस-सेलिंग के मौके भी बढ़ेंगे।

सितंबर 2025 तक कंपनी की कुल ऑर्डर बुक 675.04 करोड़ रुपये रही। इसमें 190.53 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी सहायक कंपनियों की है। घरेलू ऑर्डर 554.12 करोड़ रुपये और अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर 120.92 करोड़ रुपये के हैं।

डिस्क्लेमर: शेयरों में निवेश करने से वित्तीय नुकसान का जोखिम होता है। इसलिए, निवेशकों को शेयरों में निवेश या ट्रेडिंग करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। निवेश करने से पहले कृपया अपने निवेश सलाहकार से सलाह लें।

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Defence Stocks: रक्षा क्षेत्र की जानी-मानी कंपनी सोलर इंडस्ट्रीज इंडिया लिमिटेड एक बार फिर निवेशकों के बीच चर्चा में है। इस शेयर ने पिछले पांच साल में करीब 1,263 फीसदी का शानदार रिटर्न दिया है और इसके पास करीब 17,000 करोड़ रुपये की मजबूत ऑर्डर बुक है।

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शुक्रवार को शेयर मामूली बदलाव के साथ 14,031 रुपये पर बंद हुआ, जबकि पिछले दिन यह 14,024 रुपये पर था। कंपनी का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग 1.26 लाख करोड़ रुपये है। ट्रेडिंग के दौरान करीब 2,200 शेयरों की खरीद-बिक्री हुई, जिससे कुल टर्नओवर 3.10 करोड़ रुपये रहा।

ग्लोबल ब्रोकरेज कंपनी गोल्डमैन सैक्स ने इस शेयर को अपनी “टॉप पिक” लिस्ट में शामिल किया है और 18,215 रुपये का प्राइस टारगेट तय किया है। ब्रोकरेज के अनुसार, हाल ही में रक्षा मंत्रालय की डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल ने 79,000 करोड़ रुपये के रक्षा प्रस्तावों को मंजूरी दी है, जो घरेलू डिफेंस कंपनियों के लिए बड़ा मौका है।

गोल्डमैन सैक्स का कहना है कि सोलर इंडस्ट्रीज की मजबूत उत्पादन क्षमता, बढ़ते एक्सपोर्ट ऑर्डर और “हाई-टेक्नोलॉजी” सेक्टर में एंट्री के चलते इस कंपनी के लिए काफी संभावनाएं हैं।

आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज ने भी इस डिफेंस स्टॉक का टारगेट 17,200 रुपये तय किया है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी की आय में वित्त वर्ष 25 से 28 के बीच औसतन 27 फीसदी की सालाना बढ़ोतरी की संभावना है। इसी तरह, फिलिप्स कैपिटल ने भी 15,900 रुपये का लक्ष्य रखा है और कहा है कि रक्षा क्षेत्र अब पॉलिसी-बेस्ड से इम्प्लीमेंटेशन-बेस्ड इनकम वाले दौर में प्रवेश कर चुका है, जिसमें सोलर इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियां आगे रहेंगी।

सोलर इंडस्ट्रीज इंडिया लिमिटेड भारतीय कंपनी है, जो नागपुर बेस्ड है। यह कंपनी माइनिंग और इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के लिए इंडस्ट्रियल एक्सप्लोसिव बनाती है। बीते कुछ सालों में इसने डिफेंस प्रोडक्ट्स और एम्युनिशन सेक्टर में भी तेजी से ग्रोथ हासिल की है। कंपनी अब एम्युनिशन और एनर्जेटिक मैटेरियल सेगमेंट में तेजी से आगे बढ़ रही है।

गोल्डमैन सैक्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कंपनी के पास तेजी से बढ़ती रक्षा मांग के अनुरूप प्रोडक्शन कैपेबिलिटी है। साथ ही, इसका “नॉन-डिफेंस बिजनेस” भी काफी मजबूत है।

इस साल 30 जून को सोलर इंडस्ट्रीज का शेयर 17,805 रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। दो साल में इसने 171 फीसदी और पांच साल में 1263 फीसदी का रिटर्न दिया है। शेयर का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स 47.6 है, जो बताता है कि यह न तो ओवरबॉट और न ही ओवर्सोल्ड जोन में है। कंपनी के शेयर 5, 10, 20, 30, 50, 100 और 150 दिन के मूविंग एवरेज से नीचे, लेकिन 200 दिन के मूविंग एवरेज से ऊपर ट्रेड कर रहे हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले सालों में कंपनी की कमाई में 25 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी हो सकती है। इसकी कैश फ्लो और एसेट टर्नओवर इंडस्ट्री में सबसे बेहतर हैं। कंपनी अपने डिफेंस और नॉन-डिफेंस दोनों सेगमेंट में विस्तार कर रही है, जिससे इसके वैल्यूएशन को पूरी तरह सपोर्ट मिल रहा है।

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Astra Mk3 Gandiva missile: ‘अर्जुन’ का ‘गांडीव’ करेगा पाकिस्तान के फाइटर जेट्स का शिकार! भारतीय वायुसेना 350 किमी दूर से ही करेगी वार

Astra Mk3 Gandiva missile
Astra Mk3 Gandiva missile

Astra Mk3 Gandiva missile: आने वाले कुछ ही सालों में भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता में जबरदस्त बढ़ोतरी होने वाली है। डीआरडीओ अब देश की नई पीढ़ी की एयर-टू-एयर मिसाइल अस्त्र एमके-3 गांडीव तैयार कर रहा है। यह मिसाइल 350 किलोमीटर की दूरी से भी दुश्मन के लक्ष्य को नष्ट करने में सक्षम होगी। यह मिसाइल 2030 तक भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल हो सकती है।

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इस मिसाइल को पूरी तरह भारत में मेक इन इंडिया पहल के तहत डेवलप किया जा रहा है। इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन भारत डायनेमिक्स लिमिटेड द्वारा किया जाएगा, लेकिन उससे पहले इसका ट्रायल और फाइनल अप्रूवल 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

Astra Mk3 Gandiva missile: अस्त्र एमके-3 की तकनीक और क्षमता

गांडीव मिसाइल बियॉन्ड विजुअल रेंज कैटेगरी की है। यानी यह ऐसे लक्ष्य को मार सकती है, जो पायलट की आंखों से दिखाई नहीं देता और सैकड़ों किलोमीटर दूर होता है। विमान के रडार और सेंसर सिस्टम की मदद से पायलट टारगेट को लॉक करता है और मिसाइल को लॉन्च करता है।

यह मिसाइल लगभग 220 किलोग्राम वजनी और चार मीटर लंबी है। इसमें दिन और रात दोनों समय हमले की क्षमता है। मिसाइल को इनर्शियल गाइडेंस सिस्टम और एक्टिव रडार होमिंग से लैस किया गया है, जिससे यह किसी भी तेजी से चलते हुए टारगेट पर सटीक वार कर सकती है।

अस्त्र एमके-3 का सबसे बड़ा फीचर इसका 350 किलोमीटर तक का रेंज है। इतनी लंबी दूरी से वार करने की क्षमता दुनिया की कुछ ही मिसाइलों में होती है। इसकी ताकत का मुख्य कारण इसका एडवांस इंजन है, जिसे सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट तकनीक कहा जाता है।

इस तकनीक की खासियत यह है कि यह हवा में मौजूद ऑक्सीजन का उपयोग करती है, जिससे मिसाइल को अतिरिक्त ऑक्सीडाइजर की जरूरत नहीं होती। इससे वजन हल्का रहता है और मिसाइल की रफ्तार और दूरी दोनों बढ़ जाती हैं। इस तकनीक से मिसाइल को बहुत अधिक ऊंचाई पर और तेज गति से उड़ने की क्षमता मिलती है।

Astra Mk3 Gandiva missile: मिसाइल दागने के बाद बदल सकती है दिशा

रिपोर्ट के अनुसार, डीआरडीओ इस मिसाइल को खास तौर पर उन हालात के लिए डेवलप कर रहा है, जहां भारतीय वायुसेना के पायलटों को दुश्मन के एयरबोर्न वॉर्निंग सिस्टम और मिड-एयर रिफ्यूलिंग टैंकरों को निशाना बनाना होगा। इस तरह के टारगेट आमतौर पर वायु क्षेत्र की अंदर में होते हैं और सीधे हमले के लिए मुश्किल माने जाते हैं।

इस मिसाइल में लगने वाला गैलियम नाइट्राइड आधारित एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड अरे रडार सीकर इसे और भी सटीक बनाता है। एईएसए तकनीक के कारण यह मिसाइल इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से बची रहती है और लॉक-ऑन-आफ्टर-लॉन्च क्षमता से लैस होती है। यानी पायलट मिसाइल दागने के बाद दिशा बदल सकता है और मिसाइल टारगेट को अपने रडार से ट्रैक करती रहेगी।

Astra Mk3 Gandiva missile

Astra Mk3 Gandiva missile: मीटियोर को करेगी रिप्लेस!

अस्त्र मिसाइल कार्यक्रम भारत की रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन चुका है। इसकी पहली पीढ़ी की मिसाइलें, अस्त्र एमके-1 और एमके-2, पहले ही भारतीय वायुसेना में शामिल की जा चुकी हैं। इन मिसाइलों का निर्माण भी डीआरडीओ और बीडीएल ने मिलकर किया था।

एमके-3 संस्करण यानी गांडीव इस श्रृंखला का सबसे एडवांस मॉडल होगा। इसकी रेंज, रफ्तार और सटीक वार, तीनों पिछले वर्जन से कहीं अधिक होंगी। एमके-3 आने के बाद भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल होगा जो खुद लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें बनाते हैं। अभी भारत के पास यूरोपीय संघ (एमबीडीए) की बनाई मीटियोर बियोंड विजुअल रेंज एयर टू एयर मिसाइल है, जो यूरोफाइटर टाइफून, राफेल और ग्रिपेन जैसे लड़ाकू विमानों पर तैनात है। गांडीव के बनने के बाद भारत की मीटियोर से आयात निर्भरता कम होगी।

रिपोर्ट के अनुसार, इस मिसाइल का निर्माण चरणबद्ध तरीके से होगा। पहले इसके इंजनों और गाइडेंस सिस्टम के परीक्षण किए जाएंगे। इसके बाद भारतीय वायुसेना के सुखोई-30 एमकेआई और तेजस जैसे विमानों पर इसके ट्रायल किए जाएंगे।

भारत ने राफेल डील के साथ कुछ मीटियोर मिसाइलें भी खरीदी थीं। अनुमान के मुताबिक भारतीय वायुसेना के पास लगभग 250 मीटियोर मिसाइलें हैं। वहीं इन मिसाइल की कीमत लगभग 25 करोड़ रुपये या 3.2 मिलियन डॉलर प्रति युनिट है। इसके मुकाबले गांडीव की कीमत प्रति यूनिट 18 करोड़ रुपये के आसपास पड़ेगी। सूत्रों के मुताबिक एमके-3 प्रोग्राम में देरी के चलते भारत ने 26 राफेल मरीन डील के साथ अतिरिक्त मीटियोर भी ऑर्डर की हैं।

Astra Mk3 Gandiva missile: Astra MK3 Missile vs Meteor

भारत की अस्त्र एमके-3 (गांडीव) मिसाइल और यूरोप की मीटियोर मिसाइल दोनों ही आधुनिक बियॉन्ड-विजुअल-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल हैं। दोनों में रैमजेट इंजन तकनीक है। अस्त्र एमके-3 की रेंज 350 किलोमीटर तक है, जो मीटियोर की लगभग 200 किलोमीटर रेंज से थोड़ी अधिक है। इसमें सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट तकनीक और एईएसए रडार सीकर लगे हैं, जिससे यह इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से सुरक्षित रहती है।

अस्त्र एमके-3 की लंबाई लगभग 4 मीटर और वजन 220 किलोग्राम है, जबकि मीटियोर 3.7 मीटर लंबी और 190 किलोग्राम वजनी है। अस्त्र एमके-3 की गति मैक 4+ है, जो मीटियोर की मैक 4 के आसपास है।

दोनों मिसाइलें रैमजेट प्रोपल्सन पर आधारित हैं, लेकिन अस्त्र एमके-3 में सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट इंजन है, जो लगभग 18 फीसदी अधिक बर्न टाइम और 20 फीसदी ज्यादा थ्रस्ट देता है। इस वजह से इसका नो-एस्केप जोन यानी वह दायरा जिसमें लक्ष्य बच नहीं सकता, मीटियोर से बड़ा है।

रेंज के मामले में अस्त्र एमके-3 की मारक दूरी 300 से 350 किलोमीटर तक मानी जा रही है, जबकि मीटियोर की रेंज 200 किलोमीटर । वारहेड के मामले में दोनों मिसाइलें हाई-एक्सप्लोसिव फ्रैगमेंटेशन वारहेड का इस्तेमाल करती हैं। अस्त्र एमके-3 में लगभग 15 किलो, जबकि मीटियोर में करीब 20 किलो है।

Bharat Forge CQB Carbine Deal: भारत फोर्ज ने दी सफाई, कहा– भारतीय सेना के साथ 4.25 लाख CQB कार्बाइन की सप्लाई का कॉन्ट्रैक्ट अभी नहीं हुआ साइन

Bharat Forge CQB Carbine Deal

Bharat Forge CQB Carbine Deal: देश की डिफेंस इक्विपमेंट्स मैन्युफैक्चरिंग कंपनी भारत फोर्ज लिमिटेड ने स्पष्ट किया है कि अभी तक भारतीय सेना के साथ क्लोज क्वार्टर बैटल यानी सीक्यूबी कार्बाइन की सप्लाई को लेकर कोई औपचारिक कॉन्ट्रैक्ट नहीं हुआ है। कंपनी ने यह बयान बीएसई और एनएसई को भेजे अपने स्पष्टीकरण पत्र में दिया है।

रक्षा समाचार डॉट कॉम ने डीजी इन्फैंट्री के हवाले से खबर छापी थी कि भारत फोर्ज और पीएलआर सिस्टम्स ने रक्षा मंत्रालय के साथ 4.25 लाख सीक्यूबी कार्बाइन की सप्लाई के लिए कॉन्ट्रैक्ट पर दस्तखत किए हैं। इन रिपोर्टों के बाद शेयर बाजारों ने कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा था।

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भारत फोर्ज (Bharat Forge CQB Carbine Deal) ने अपने जवाब में कहा कि कंपनी ने मार्च 2023 में इस प्रोजेक्ट के लिए बोली लगाई थी। इसके बाद भारतीय सेना ने कार्बाइन के कई चरणों में परीक्षण किए। जुलाई 2025 में कमर्शियल बिड्स खोली गईं, जिसमें भारत फोर्ज एल-1 बिडर घोषित हुआ, यानी उसने सबसे कम कीमत पर सप्लाई की पेशकश की थी।

कंपनी ने कहा कि उसे कुल ऑर्डर के 60 फीसदी हिस्से की सप्लाई के लिए चयनित किया गया है। हालांकि, अभी कॉन्ट्रैक्ट को अंतिम रूप नहीं दिया गया है और रक्षा मंत्रालय के साथ बातचीत जारी है। भारत फोर्ज ने कहा कि जैसे ही समझौते पर दस्तखत होंगे, उसकी जानकारी नियामक संस्थाओं को दी जाएगी।

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भारतीय सेना के इन्फैंट्री के डीजी लेफ्टिनेंट जनरल अजय कुमार ने 22 अक्टूबर को इस प्रोजेक्ट का जिक्र किया था और कहा था कि प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, यह सौदा ‘बॉय (इंडियन)’ कैटेगरी के तहत किया जा रहा है, जिसके तहत हथियार भारतीय कंपनियों से ही खरीदे जाते हैं और उनमें कम से कम 50 फीसदी स्वदेशी सामग्री का होनी जरूरी है। (Bharat Forge CQB Carbine Deal)

सेना की जरूरत के मुताबिक, इन नई 5.56×45 मिमी सीक्यूबी कार्बाइनों की संख्या 4,25,213 तय की गई है। ये हथियार शहरों में कम दूरी की मुठभेड़ों, आतंकवाद-रोधी अभियानों और विशेष बलों के ऑपरेशन में इस्तेमाल होंगे। इन कार्बाइनों की रेंज 200 मीटर से अधिक होगी और वजन लगभग 3 किलोग्राम रखा गया है।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह आधुनिक सीक्यूबी कार्बाइन (Bharat Forge CQB Carbine Deal) पुरानी 9×19 मिमी स्टर्लिंग सब-मशीन गन की जगह लेगी, जो सेना में दो दशकों से अधिक समय से इस्तेमाल हो रही है। 1940 के दशक में डिजाइन की गई स्टर्लिंग गन अब आधुनिक लड़ाई के लिए अनुपयुक्त मानी जाती है।

रक्षा मंत्रालय द्वारा तैयार योजना के अनुसार, कॉन्ट्रैट साइन होने के बाद दोनों कंपनियों को दो साल के भीतर सभी कार्बाइनों की सप्लाई करनी होगी। भारत फोर्ज को 60 फीसदी हिस्से की डिलीवरी करनी है, जबकि बाकी कार्बाइन पीएलआर सिस्टम्स देगी, जो अदाणी समूह और इजरायल वेपन इंडस्ट्रीज के बीच जॉइंट वेंचर है। (Bharat Forge CQB Carbine Deal)

कंपनी ने बताया कि वह रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है। भारत फोर्ज की मूल कंपनी कल्याणी स्ट्रैटेजिक सिस्टम्स पहले से ही भारतीय सेना के लिए तोपखाना और गोला-बारूद से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है।

इससे पहले भी भारत फोर्ज कई रक्षा उत्पादों जैसे आर्टिलरी गन, बख्तरबंद वाहन और मिसाइल कॉम्पोनेन्ट्स के निर्माण में अग्रणी रही है। अब सीक्यूबी कार्बाइन प्रोजेक्ट (Bharat Forge CQB Carbine Deal) के जरिये यह कंपनी छोटे हथियारों के क्षेत्र में भी बड़ा कदम रखने जा रही है।

HAL HTT-40: बेंगलुरु में पहले एचटीटी-40 ट्रेनर जेट ने भरी उड़ान, जल्द ही सूर्यकिरण की जगह इस पर ट्रेनिंग लेंगे नए IAF पायलट

HAL HTT-40 Trainer Jet Completes Maiden Flight in Bengaluru; Set to Replace Surya Kiran for IAF Pilot Training

HAL HTT-40: हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड के बेंगलुरु स्थित संयंत्र से देश में बने पहले हिंदुस्तान टर्बो ट्रेनर-40 (HTT-40) विमान के सीरीज प्रोडक्शन मॉडल ‘टीएच 4001’ (TH-4001) सफलतापूर्वक उड़ान भरी। यह उड़ान लगभग 30 मिनट तक चली और सभी तकनीकी पैरामीटर सामान्य रहे। यह विमान भारतीय वायुसेना के पायलटों की नई जनरेशन को ट्रेनिंग देने के लिए बनाया गया है।

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एचएएल अधिकारियों के अनुसार, यह उड़ान भारत की एविएशन टेक्नोलॉजी में एक बड़ा कदम है। उन्होंने बताया कि यह देश में निर्मित पहला बेसिक ट्रेनर विमान है, जिसे पूरी तरह भारतीय इंजीनियरों ने डिजाइन और तैयार किया है।

एचटीटी-40 विमान एक टैंडम-सीट टर्बोप्रॉप ट्रेनर है, जो बेसिक फ्लाइट ट्रेनिंग, एरोबेटिक्स, नाइट फ्लाइंग और इंस्ट्रूमेंट ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इसका इंजन 950 हॉर्सपावर की ताकत देता है। विमान में मॉडर्न एवियोनिक्स, एयर-कंडीशंड प्रेशराइज्ड कॉकपिट, जीरो-जीरो इजेक्शन सीट्स, और हॉट रिफ्यूलिंग सिस्टम जैसी आधुनिक सुविधाएं दी गई हैं।

एचएएल ने बताया कि यह विमान 70 फीसदी से अधिक स्वदेशी सामग्री से बना है और इसे “मेक इन इंडिया” मिशन के तहत तैयार किया गया है। कंपनी ने कहा कि टीएच 4001 की उड़ान पूरी तरह सफल रही और यह आने वाले महीनों में भारतीय वायुसेना को सौंपा जाएगा।

भारतीय वायुसेना ने एचएएल के साथ 70 विमानों की सप्लाई के लिए कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है। इन विमानों की डिलीवरी 15 सितंबर 2025 से 15 मार्च 2030 के बीच की जाएगी। पहले साल में 12 विमान दिए जाएंगे, जिनमें से 10 नासिक में तैयार होंगे और 2 बेंगलुरु से बनाए जाएंगे। नासिक में दूसरी उत्पादन लाइन का उद्घाटन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 17 अक्टूबर को किया था।

HAL HTT-40 Trainer Jet Completes Maiden Flight in Bengaluru; Set to Replace Surya Kiran for IAF Pilot Training

एचटीटी-40 विमान का डिजाइन खासतौर पर वायुसेना के किरण-क्लास ट्रेनर विमानों की जगह लेने के लिए किया गया है। यह हल्का, टिकाऊ और कम रखरखाव वाला ट्रेनर जेट है। इसकी स्पीड करीब 370 किलोमीटर प्रति घंटा और रेंज लगभग 1,000 किलोमीटर है। यह पूर्ण रूप से एरोबेटिक विमान है, जो ऊंचाई पर कलाबाजी और रात में उड़ान जैसी मुश्किल ट्रेनिंग एक्सरसाइजेज के लिए बनाया गया है।

एचएएल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस उड़ान के दौरान सभी सिस्टम सामान्य रूप से काम कर रहे थे। विमान का कंट्रोल स्टेबल था और सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया गया। उन्होंने कहा कि यह उड़ान भारतीय विमानन इतिहास में एक नया अध्याय है।

विमान का प्रोटोटाइप पहली बार 2016 में उड़ा था, जबकि इसे 2022 में सिस्टम-लेवल सर्टिफिकेशन मिला। अब सीरीज प्रोडक्शन की शुरुआत के साथ वायुसेना के बेसिक ट्रेनिंग सिस्टम को नई दिशा मिलेगी।

एचएएल ने बताया कि आने वाले महीनों में यह विमान वायुसेना के ट्रेनिंग कमांड में शामिल किया जाएगा। इसका इस्तेमाल एयर फोर्स अकादमी, दुंदिगल (हैदराबाद के पास) में पायलट ट्रेनिंग के लिए किया जाएगा।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि एचटीटी-40 (HAL HTT-40) भारतीय रक्षा क्षेत्र की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह विमान सस्ता, सुरक्षित और पूरी तरह भरोसेमंद ट्रेनर के रूप में वायुसेना को नई ताकत देगा।

Indian Army Digital Services: रक्षा मंत्री ने लॉन्च की सैनिक यात्रा मित्र एप और प्रोजेक्ट नमन फेज-2, अब जवानों का सफर और वेटरन सेवाएं होंगी डिजिटल

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Indian Army Digital Services: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को जैसलमेर में आयोजित आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस 2025 के दौरान भारतीय सेना के लिए तीन बड़े डिजिटल प्रोजेक्ट लॉन्च किए। इनमें ‘सैनिक यात्रा मित्र’ एप, ‘प्रोजेक्ट नमन फेज-2’, और नई ईक्विपमेंट हेल्पलाइन पोर्टल शामिल हैं। इन सभी पहलों का उद्देश्य भारतीय सेना में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को आगे बढ़ाना और सैनिकों व पूर्व सैनिकों को बेहतर सुविधाएं देना है।

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रक्षा मंत्री ने कहा कि ये प्रोजेक्ट भारत के “डिजिटल डिफेंस विजन” की दिशा में एक बड़ा कदम हैं, जो सेना को अधिक पारदर्शी, कुशल और तकनीकी रूप से सक्षम बनाएंगे।

क्या है ‘सैनिक यात्रा मित्र’ एप

‘सैनिक यात्रा मित्र’ एप सेना के कर्मचारियों के यात्रा आरक्षण को आसान बनाने के लिए बनाया गया है। इसे 21 मूवमेंट कंट्रोल ग्रुप (एमसीजी) ने भारतीय सेना की इन्फॉर्मेशन सिस्टम्स ब्रांच के सहयोग से पूरी तरह इन-हाउस डेवलप किया है। यह एप सेना के अरमान वेब एप्लिकेशन पर होस्ट किया गया है और इससे सैनिकों को रेल यात्रा के लिए सीट बुकिंग की पूरी प्रक्रिया डिजिटल रूप में मिलेगी।

पहले यह बुकिंग प्रक्रिया मैनुअल होती थी, जिससे काफी समय लगता था और सीटें खाली रह जाती थीं। अब यह एप पूरी तरह ऑटोमैटिक होगा। आवेदन से लेकर अंतिम स्वीकृति तक सब कुछ इस एप के जरिए किया जा सकेगा। सेना की 81 मूवमेंट कंट्रोल ऑफिस (एमसीओ) अब 1,232 ट्रेनों में उपलब्ध 6,151 डिफेंस ड्यूटी कोटा सीटों का अधिक प्रभावी तरीके से इस्तेमाल कर सकेंगे।

इस एप के जरिए बुकिंग में पारदर्शिता बढ़ेगी, रिकॉर्ड डिजिटल होंगे और सैनिकों को अपने मोबाइल फोन पर तुरंत अपडेट मिलेंगे। सेना के मुताबिक, इस एप से डिफेंस कोटा सीटों के उपयोग में 70 फीसदी तक बढ़ोतरी की उम्मीद है।

‘प्रोजेक्ट नमन फेज-2’ की शुरुआत

इसके बाद रक्षा मंत्री ने ‘प्रोजेक्ट नमन फेज-2’ की शुरुआत की। यह पूर्व सैनिकों, युद्ध विधवाओं और पेंशनरों के लिए एक डिजिटल सहायता योजना है। इस योजना के तहत 50वें नमन सेंटर का उद्घाटन किया गया, जो भारतीय सेना के पूर्व सैनिकों को तकनीकी और वित्तीय सेवाएं एक ही जगह पर प्रदान करेगा।

प्रोजेक्ट नमन को डायरेक्टरेट ऑफ इंडियन आर्मी वेटरंस ने सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विसेज और एचडीएफसी बैंक व एक्सिस बैंक के साथ मिलकर शुरू किया है। ये नमन सेंटर ग्रामीण क्षेत्रों में पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को स्पर्श पेंशन सेवाएं, सरकारी योजनाओं की जानकारी और बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं।

हर नमन सेंटर की जिम्मेदारी एक विलेज लेवल एंटरप्रेन्योर को दी जाती है, जो या तो कोई वेटरन होता है या शहीद सैनिक का परिजन। इससे ग्रामीण स्तर पर रोजगार भी बढ़ रहा है। अब तक प्रोजेक्ट नमन के तहत 73,000 से ज्यादा वेटरंस और उनके परिवारों को सेवाएं दी जा चुकी हैं।

नई ईक्विपमेंट हेल्पलाइन

वहीं रक्षा मंत्री ने तीसरे डिजिटल प्रोजेक्ट का भी उद्घाटन किया। नई ईक्विपमेंट हेल्पलाइन पोर्टल को कॉर्प्स ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स (ईएमई) ने डेवलप किया है। यह पोर्टल सेना के सभी उपकरणों और मशीनों से जुड़ी जानकारी, मरम्मत गाइड, तकनीकी डेटा और समस्या समाधान को डिजिटल रूप में उपलब्ध कराता है।

नया ईएचएल सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित है और आर्मी डेटा नेटवर्क से जुड़ा है। इसमें एआई-बेस्ड चैटबॉट, सर्चेबल फाइलें और लाइव डिफेक्ट रिपोर्टिंग जैसी सुविधाएं हैं। सैनिक इस पोर्टल पर किसी भी उपकरण से जुड़ी जानकारी, उपयोग के निर्देश, तेल या ग्रीस की जानकारी और रिपेयर सेंटर से सीधे संपर्क कर सकते हैं।

रक्षा मंत्री ने कहा कि यह सिस्टम हर सैनिक को फील्ड में तकनीकी सहायता देगा और किसी भी उपकरण की मरम्मत या उपयोग से जुड़ी जानकारी तुरंत उपलब्ध कराएगा। यह सेना को अधिक आत्मनिर्भर और आधुनिक बनाएगा।

इन तीनों प्रोजेक्ट्स सैनिक यात्रा मित्र, प्रोजेक्ट नमन फेज-2, और ईएचएल पोर्टल की शुरुआत भारतीय सेना के “डिकेड ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन” का प्रतीक है। इससे सेना के ऑपरेशन, एडमिनिस्ट्रेशन और कल्याण से जुड़े कार्यों को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी।

IAF Training: वायुसेना प्रमुख बोले- बदलते समय के साथ एयरफोर्स ट्रेनिंग को बनाना होगा आधुनिक, प्रशिक्षण में बड़े बदलाव की जरूरत

Training Command Commanders Conference 2025: Air Chief Marshal AP Singh stresses on modern, tech-based IAF training

IAF Training: भारतीय वायुसेना के मुख्यालय ट्रेनिंग कमांड में आयोजित ट्रेनिंग कमांड कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि आज के समय में युद्ध केवल मैदान में नहीं लड़े जाते, बल्कि अब साइबर, स्पेस और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर जैसे नए क्षेत्रों में भी तैयार रहना जरूरी है।

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23 और 24 अक्टूबर को ट्रेनिंग कमांड कमांडर्स कॉन्फ्रेंस 2025 का आयोजन हुआ। इस दो दिवसीय बैठक की अध्यक्षता चीफ ऑफ द एयर स्टाफ एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने की। इस दौरान वायुसेना के सभी ट्रेनिंग सेंटर्स के कमांडर मौजूद थे। इस कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य वायुसेना के ट्रेनिंग स्ट्रक्चर को आधुनिक तकनीक के अनुरूप बनाना और बदलते वैश्विक माहौल के हिसाब से ट्रेनिंग मेथड्स में सुधार करना था।

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एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में भारतीय वायुसेना को भी अपने ट्रेनिंग सिस्टम में बड़े बदलाव करने होंगे, ताकि हर वायुसैनिक नई तकनीक और आधुनिक हथियारों के साथ पूरी तरह सक्षम हो सके। उन्होंने ट्रेनिंग कमांड की मेहनत और उत्कृष्ट प्रदर्शन की तारीफ की और कहा कि यह कमांड भारतीय वायुसेना की रीढ़ है, जो आने वाले समय के लिए नई पीढ़ी के योद्धा तैयार कर रही है।

कॉन्फ्रेंस के दौरान वायुसेना के अधिकारियों ने ट्रेनिंग की गुणवत्ता, रखरखाव और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की समीक्षा की। सभी ट्रेनिंग प्रतिष्ठानों ने अपने कामकाज की जानकारी दी और भविष्य के लिए योजनाएं साझा कीं। इस दौरान यह भी चर्चा हुई कि अग्निवीर वायु को कैसे और प्रभावी प्रशिक्षण दिया जाए ताकि वे जल्दी ऑपरेशनल टीमों का हिस्सा बन सकें।

एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि अब प्रशिक्षण को केवल क्लासरूम तक सीमित नहीं रखा जा सकता। सैनिकों को अब वर्चुअल सिमुलेटर, ड्रोन सिस्टम, साइबर डिफेंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों की जानकारी दी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वायुसेना को ऐसे सैनिक चाहिए जो न सिर्फ तकनीकी रूप से मजबूत हों बल्कि मानसिक रूप से भी तेज और तैयार रहें।

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एयर चीफ ने इस बात पर भी जोर दिया कि ट्रेनिंग में अब टेक्नोलॉजी के साथ-साथ अनुशासन और टीमवर्क को भी उतना ही महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर प्रशिक्षक को सिर्फ पढ़ाना नहीं, बल्कि प्रेरित करना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वायुसेना के ट्रेनिंग सेंटर आने वाले समय के लिए उदाहरण बनें, जहां से ऐसे वायुसैनिक निकलें जो हर परिस्थिति में देश की रक्षा के लिए तैयार रहें।

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एयर चीफ मार्शल ने वायुसेना के कुछ प्रमुख ट्रेनिंग सेंटर्स को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए सम्मानित भी किया। एयर फोर्स अकादमी, दुंदिगल (हैदराबाद के पास) को इस साल की ‘प्राइड ऑफ द ट्रेनिंग कमांड’ ट्रॉफी से सम्मानित किया गया। यह ट्रॉफी ऑपरेशन, मैंटेनेंस और एडमिनिस्ट्रेशन में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए दी जाती है। एयर फोर्स अकादमी के कमांडेंट एयर मार्शल पीके वोहरा ने ट्रॉफी को रिसिव किया। एयर चीफ ने कहा कि यह सम्मान केवल एक संस्थान के लिए नहीं बल्कि पूरे ट्रेनिंग नेटवर्क के समर्पण का प्रतीक है।

यह कॉन्फ्रेंस वायुसेना की रणनीतिक तैयारियों और “पीपल फर्स्ट, मिशन आल्वेज” पॉलिसी का हिस्सा थी। एयर चीफ ने सभी कमांडरों को धन्यवाद देते हुए कहा कि भारतीय वायुसेना ने हर क्षेत्र में उत्कृष्टता कायम रखी है और प्रशिक्षण उसका सबसे मजबूत स्तंभ है।

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Rajnath Singh Jaisalmer Visit: Defence Minister reviews Army preparedness, witnesses Bhairav Battalion drill and Operation Sindoor briefing

Rajnath Singh Jaisalmer Visit: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह दो दिवसीय दौरे पर राजस्थान के सीमा जिले जैसलमेर पहुंचे, जहां उन्होंने भारतीय सेना की सुरक्षा तैयारियों और ऑपरेशन सिंदूर की समीक्षा की। उन्होंने सीमा के अग्रिम इलाकों तनोट और लौंगेवाला का भी दौरा किया और वहां सेना के जवानों से मुलाकात की। यह दौरा ऐसे समय में हुआ जब भारतीय सेना नई स्ट्रेटेजिक कॉन्सेप्ट्स, ग्रे जोन वारफेयर और टेक्नोलॉजिकल इनोवेशंस पर फोकस कर रही है।

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Rajnath Singh Jaisalmer Visit: आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस को किया संबोधित

रक्षा मंत्री ने जैसलमेर में आयोजित आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस 2025 को संबोधित किया, जिसमें चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी, डिफेंस सेक्रेटरी राजेश कुमार सिंह, वाइस चीफ लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह और सभी आर्मी कमांडर मौजूद थे। इस सम्मेलन में सेना की मौजूदा तैयारी, सीमाओं की सुरक्षा स्थिति और आत्मनिर्भरता की दिशा में उठाए जा रहे कदमों पर विस्तार से चर्चा हुई।

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रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की सैन्य शक्ति, अनुशासन और राष्ट्रीय चरित्र का प्रतीक है। उन्होंने कहा, “यह केवल एक सैन्य अभियान नहीं, बल्कि राष्ट्र की बहादुरी और संयम का प्रतीक बन गया है। हमारे सैनिकों ने दिखाया है कि उनकी ताकत केवल हथियारों में नहीं, बल्कि उनके नैतिक अनुशासन और रणनीतिक स्पष्टता में है।”

आतंकवादी गतिविधि का जवाब अपनी शर्तों पर देता है भारत

राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि भारत अब किसी भी आतंकवादी गतिविधि का जवाब अपनी शर्तों पर देता है। यही नए भारत का रक्षा सिद्धांत है, जो दृढ़ निश्चय और साहस का प्रतीक है। उन्होंने सैनिकों को संदेश दिया कि वे अपने शत्रुओं को कभी कम न आंकें और हर समय सतर्क और तैयार रहें।

सेना सम्मेलन के दौरान रक्षा मंत्री को ग्रे जोन वारफेयर पर विस्तार से जानकारी दी गई। इस रणनीति में पारंपरिक युद्ध से हटकर साइबर अटैक, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और सूचना युद्ध जैसी आधुनिक रणनीतियों को शामिल किया जाता है। इसका उद्देश्य बिना फुल स्केल वॉर के दुश्मन को कमजोर करना और उसकी क्षमताओं को कम करना है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की सेना को अब “स्मार्ट वॉरफेयर” की दिशा में आगे बढ़ना होगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक युद्ध केवल मशीनों से नहीं, बल्कि सैनिकों की इच्छाशक्ति, साहस और तुरंत फैसले लेने की क्षमता से जीते जाते हैं। उन्होंने कहा, “टेक्नोलॉजी ताकत को कई गुना बढ़ाती है, लेकिन जीत मानव मनोबल से होती है।”

राजनाथ सिंह ने सेना के वरिष्ठ अधिकारियों से कहा कि उन्हें डिफेंस डिप्लोमेसी, आत्मनिर्भरता, सूचना युद्ध, रक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर और फोर्स मॉडर्नाइजेशन पर विशेष ध्यान देना चाहिए ताकि सेना भविष्य के युद्धों के लिए तैयार रहे।

उन्होंने जम्मू-कश्मीर में सेना की भूमिका की भी सराहना की। अनुच्छेद 370 हटने के बाद वहां शांति और विकास को लेकर उन्होंने कहा कि “आज कश्मीर की गलियों में निराशा नहीं, उम्मीद दिखती है। यह सेना के समर्पण और अनुशासन का परिणाम है।”

रक्षा मंत्री ने उत्तरी सीमा की स्थिति पर भी चर्चा की और कहा कि भारत की नीति स्पष्ट है, बातचीत भी होगी और सीमाओं पर पूरी तैयारी भी बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि भारत की विदेश नीति दृढ़ और संतुलित है, और यह भारत के आत्मविश्वास को दर्शाती है।

‘भैरव बटालियन’ और ‘अश्नि प्लाटून’ के शानदार प्रदर्शन को भी देखा

इस दौरान रक्षा मंत्री ने ‘भैरव बटालियन’ और ‘अश्नि प्लाटून’ के शानदार प्रदर्शन को भी देखा। ये दोनों नई मिलिट्री यूनिट हैं जिन्हें आधुनिक ग्रे जोन वारफेयर और ड्रोन आधारित ऑपरेशन के लिए तैयार किया गया है।

भैरव लाइट कमांडो बटालियन है, जो पैरा और घातक कमांडोज के बीच की कड़ी हैं। ये सीमावर्ती इलाकों में तेजी से कार्रवाई करने में सक्षम हैं। वहीं अश्नि प्लाटून को खास तौर पर ड्रोन ऑपरेशन, निगरानी और रिकॉनिसेंस मिशन के लिए तैयार किया गया है। अश्नि ने हाल ही में अरुणाचल प्रदेश में हुए अभ्यास युद्ध कौशल 3.0 में भी हिस्सा लिया था। सेना ने ड्रोन अभियानों के लिए 380 समर्पित अश्नि प्लाटून भी गठित की हैं।

वर्तमान में, देश भर में पांच भैरव लाइट कमांडो बटालियन कार्यरत हैं, जबकि चार के गठन की प्रक्रिया चल रही है। अगले छह महीनों में 16 और बटालियनों का गठन किया जाएगा। जैसा कि एक दिन पहले रक्षा समाचार डॉट कॉम ने बताया था।

राजनाथ सिंह ने इन प्रदर्शन को देखकर कहा कि यह सेना की आधुनिकता और इनोवेशन का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना आज परंपरा और तकनीक का संगम बन चुकी है, एक ऐसी फोर्स जो न केवल सीमाओं की रक्षा करती है, बल्कि भारत के आत्मनिर्भर भविष्य की प्रतीक भी है।

‘चांदपुरी हॉल’ का उद्घाटन

दौरे के दौरान रक्षा मंत्री ने जैसलमेर में स्थित लौंगेवाला युद्ध स्थल पर जाकर 1971 के युद्ध में शहीद हुए वीर जवानों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने ‘चांदपुरी हॉल’ का उद्घाटन किया, जिसे मेजर (बाद में ब्रिगेडियर) कुलदीप सिंह चंदपुरी की याद में बनाया गया है, जिन्होंने 1971 के युद्ध में बहादुरी से पाकिस्तान की सेना का मुकाबला किया था।

इस अवसर पर उन्होंने उस युद्ध में शामिल पूर्व सैनिकों को सम्मानित किया और कहा कि “लौंगेवाला की लड़ाई भारतीय सेना के साहस और संकल्प की मिसाल है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।”

राजनाथ सिंह ने अपने दौरे के दौरान भारतीय सेना के कई नए तकनीकी प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन भी किया। इनमें कोणार्क और फायर एंड फ्यूरी कोर के एज डेटा सेंटर, सैनिक यात्री मित्र एप, इक्विपमेंट हेल्पलाइन, और डिफेंस मिलेट डिशेज कंपेंडियम शामिल हैं। इन प्रोजेक्ट्स का उद्देश्य सेना की तकनीकी दक्षता और जवानों की सुविधा को बढ़ाना है।

रक्षा मंत्री ने जैसलमेर में एक अनोखे पर्यावरणीय प्रोजेक्ट ‘शौर्य वन’ का भी उद्घाटन किया। यह एक विशेष कैक्टस गार्डन है जो राजस्थान के रेगिस्तानी पौधों की प्रजातियों को संरक्षित करने के लिए बनाया गया है। उन्होंने कहा कि यह पहल सेना की पर्यावरणीय जिम्मेदारी और स्थानीय पारिस्थितिकी के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाती है।

INS Mahe Delivery: कोचीन शिपयार्ड ने भारतीय नौसेना को सौंपी पहली एंटी-सबमरीन शैलो वॉटर क्राफ्ट ‘माहे’, करेगी पनडुब्बियों का शिकार

INS Mahe Delivery: Indian Navy receives first Anti-Submarine Shallow Water Craft built by Cochin Shipyard

INS Mahe Delivery: कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड ने भारतीय नौसेना को अपनी पहली एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट ‘माहे’ (INS Mahe) सौंप दी है। यह आठ क्राफ्ट सीरीज की पहली यूनिट है जिसे कोचीन शिपयार्ड बना रहा है। वहीं इसकी कमीशनिंग नवंबर के आखिर तक की जाएगी।

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‘माहे’ का नाम केंद्र शासित प्रदेश पुदुच्चेरी के ऐतिहासिक बंदरगाह माहे के नाम पर रखा गया है। माहे पूरी तरह से स्वदेशी डिजाइन और तकनीक से बनी है जो भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और बड़ा कदम है।

‘माहे’ की लंबाई लगभग 78 मीटर और वजन करीब 1,100 टन है। इसे तटीय इलाकों में पनडुब्बियों की निगरानी और उन्हें नष्ट करने के लिए तैयार किया गया है। यह जहाज समुद्र में कम गहराई वाले क्षेत्रों में एंटी-सबमरीन वॉरफेयर मिशन को अंजाम देगा। इसके साथ ही यह लो इंटेंसिटी मैरीटाइम आपरेशंस (लिमो) और माइन बिछाने जैसे अभियानों में भी इस्तेमाल की जा सकती है।

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इसमें एडवांस सोनार और रडार सिस्टम, हल्के टॉरपीडो, और मल्टी-फंक्शनल एंटी-सबमरीन रॉकेट्स लगे हैं। यह क्राफ्ट समुद्री निगरानी और तटीय सुरक्षा को मजबूत करेगी। यह पुराने अभय-क्लास कोरवेट्स की जगह लेगी। यह भारतीय नौसेना का ऐसा सबसे बड़ा शिप है। इसका साउंड सिग्नेचर भी कम होगा और यह पनडुब्बियों को आसानी से चकमा देगी। इस शिप को डेट नॉर्स्के वेरिटास नियमों के अनुसार बनाया गया है।

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‘माहे’ के निर्माण में 80 फीसदी से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है, जो भारत सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान का हिस्सा। इस प्रोजेक्ट को रक्षा मंत्रालय की डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल ने 2013 में मंजूरी दी थी। इसके तहत कुल 16 नावों का निर्माण किया जाना है, जिनमें से 8 कोचीन शिपयार्ड और बाकी 8 गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स कोलकाता बना रहा है। कोचिन शिपयार्ड (सीएसएल) के बनाए शिप्स की डिलीवरी जून 2028 तक चलेगी।


भारतीय नौसेना के पास फिलहाल दो एंटी-सबमरीन शैलो वॉटर क्राफ्ट (एएसडब्ल्यू-एसडब्ल्यूसी) कमीशन हो चुकी हैं। ये नावें तटीय इलाकों में पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए डिजाइन की गई हैं। ये दोनों नावें गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने बनाई हैं। पहली नाव आईएनएस अर्नाला को 18 जून 2025 को कमीशन किया गया। जबकि दूसरे शिप ‘अंद्रोथ’ पहले ही 13 सितंबर को डिलीवर किया जा चुका है। जिसकी कमीशनिंग 6 अक्टूबर को विशाखापत्तनम में हुई थी।

‘माहे’ की डिलीवरी कोच्चि में एक विशेष समारोह में हुई। इस अवसर पर कमांडर अमित चंद्र चौबे, जो ‘माहे’ के कमांडिंग ऑफिसर हैं, और एस. हरिकृष्णन, डायरेक्टर (ऑपरेशंस), कोचिन शिपयार्ड ने औपचारिक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। इस मौके पर रियर एडमिरल आर.के. पांडे और नौसेना के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि यह जहाज भारत की नौसैनिक क्षमता में नई ताकत जोड़ेगा।

इन शैलो वॉटर क्राफ्ट्स के आने से नौसेना को उन इलाकों में दुश्मन की पनडुब्बियों की खोज और निगरानी में मदद मिलेगी, जहां बड़े जहाज जैसे डिस्ट्रॉयर और फ्रिगेट्स वहां मुश्किल से जाते हैं। इससे भारत की तटीय रक्षा और समुद्री सीमा की सुरक्षा और अधिक मजबूत होगी।