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India China Arunachal Issue: शंघाई एयरपोर्ट विवाद पर बोला चीन- “अरुणाचल को बताया चीन का हिस्सा”, भारत ने दिया करारा जवाब

India China Arunachal Issue

India China Arunachal Issue: चीन की विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने जांगनान (अरुणाचल प्रदेश) को चीन का इलाका बताया है। चीनी प्रवक्ता ने कहा कि भारत ने अरुणाचल प्रदेश पर अवैध रूप से कब्जा किया हुआ है। बता दें कि 1950 के बाद से ही चीन इसे “दक्षिण तिब्बत” यानी जांगनान कहता है और अपना दावा जताता है। वहीं, भारत ने चीन के इस दावे को पुरजोर से खारिज किया है।

चीन ने यह बयान मंगलवार को जारी किया, जब उनसे शंघाई पुडोंग एयरपोर्ट पर अरुणाचल प्रदेश की एक भारतीय महिला के साथ कथित बदसलूकी पर सवाल पूछा गया था। यह बयान ऐसे समय पर आया है जब इस घटना ने भारत-चीन संबंधों में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। (India China Arunachal Issue)

India China Arunachal Issue: चीन ने जांच को “कानूनी” करार दिया

चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा, “जांगनान चीन का क्षेत्र है। चीन ने भारत द्वारा अवैध रूप से स्थापित किए गए तथाकथित ‘अरुणाचल प्रदेश’ को कभी स्वीकार नहीं किया है।” चीन ने साफ तौर पर कहा कि वह अरुणाचल प्रदेश को भारत का हिस्सा नहीं मानता, और इस आधार पर एयरपोर्ट पर हुई जांच को “कानूनी” करार दिया। माओ निंग ने दावा किया कि चीनी अधिकारियों ने “किसी तरह की हिरासत या उत्पीड़न नहीं किया” और महिला के “सभी अधिकार सुरक्षित थे”। उन्होंने कहा कि एयरलाइन ने यात्री को आराम और भोजन की सुविधा भी दी। (India China Arunachal Issue)

चीन का यह बयान पीड़ित महिला प्रेमा वांगजम थोंगडोक के आरोपों के ठीक उलट है। प्रेमा ने सोशल मीडियो पर एक पोस्ट जारी करके बताया था कि शंघाई एयरपोर्ट पर उन्हें लगभग 18 घंटे रोके रखा गया और इमिग्रेशन अधिकारी बार-बार उनका मजाक उड़ाते रहे। उनके मुताबिक, अधिकारियों ने उनसे कहा, “अरुणाचल इंडिया का हिस्सा नहीं है, तुम चीनी हो… भारतीय पासपोर्ट मान्य नहीं।” प्रेमा पिछले 14 वर्षों से यूके में रहती हैं और लंदन से जापान यात्रा कर रही थीं। उन्होंने बताया कि चीन में ट्रांजिट उनके लिए एक “अपमानजनक अनुभव” बन गया। (India China Arunachal Issue)

प्रेमा के अनुसार, चीन ईस्टर्न एयरलाइंस के कर्मचारियों ने भी इमिग्रेशन अधिकारियों की तरह व्यवहार किया और हंसते हुए कहा कि “तुम्हें चीनी पासपोर्ट बनवाना चाहिए।” उन्होंने दावा किया कि अधिकारी उनकी बात सुनने को भी तैयार नहीं थे और लगातार “अरुणाचल चाइना” कहते रहे। वह अपने परिवार से भी बहुत देर तक संपर्क नहीं कर सकीं। अंततः उन्होंने शंघाई और बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास से मदद मांगी, जिसके बाद भारतीय अधिकारी एयरपोर्ट पहुंचे, उन्हें भोजन दिया और 18 घंटे बाद समस्या का समाधान कराया गया। (India China Arunachal Issue)

वहीं, भारत सरकार ने इस घटना पर बेहद कड़ी प्रतिक्रिया दी है। नई दिल्ली और बीजिंग दोनों जगह भारत ने चीन को सख्त डिमार्शे (औपचारिक विरोध) सौंपा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा, हमने चीन के विदेश मंत्रालय द्वारा दिए गए उन बयानों को देखा है, जो एक भारतीय नागरिक अरुणाचल प्रदेश की निवासी के मनमाने ढंग से हिरासत में लिए जाने से संबंधित हैं। उन्होंने कहा कि वह एक वैध भारतीय पासपोर्ट रखती थीं और जापान की यात्रा पर थीं, जिसके दौरान वे शंघाई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से ट्रांजिट कर रही थीं। (India China Arunachal Issue)

वहीं, अरुणाचल प्रदेश को लेकर आए चीन के बयान पर उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। यह एक स्वयंसिद्ध तथ्य है। चीन की ओर से कितनी भी बार इनकार किया जाए, यह निर्विवाद सच्चाई बदल नहीं सकती। भारत ने इस अवैध हिरासत के मुद्दे को चीनी पक्ष के समक्ष कड़े शब्दों में उठाया है। अब तक चीनी अधिकारियों ने अपने उस व्यवहार की कोई विश्वसनीय व्याख्या नहीं दी है, जो अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा से संबंधित कई कन्वेंशनों का उल्लंघन है। चीनी अधिकारियों की कार्रवाई उनके अपने उन नियमों के भी विरुद्ध है, जिनमें सभी देशों के नागरिकों को 24 घंटे तक वीजा-फ्री ट्रांजिट की अनुमति दी गई है। (India China Arunachal Issue)

यह घटना ऐसे समय हुई है जब भारत-चीन रिश्तों में हल्की नरमी के संकेत मिल रहे थे। लेकिन चीन द्वारा अरुणाचल पर पुराना दावा दोहराने और प्रेमा के आरोपों ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव को फिर बढ़ा दिया है। भारत लगातार कहता रहा है कि चीन का कोई दावा या नाम बदलने की कोशिश वास्तविकता को नहीं बदल सकती। (India China Arunachal Issue)

Army Chief Sri Lanka Visit: 2021 के बाद श्रीलंका दौरे पर जाएंगे सेना प्रमुख, पहली बार दी ‘ऑपरेशन पवन’ के शहीदों को आधिकारिक श्रद्धांजलि

Army Chief Sri Lanka Visit
In a solemn ceremony, General Upendra Dwivedi, COAS, laid a wreath at the National War Memorial, New Delhi, paying homage to the Bravehearts who made the supreme sacrifice during Operation Pawan.

Army Chief Sri Lanka Visit: भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी दो दिन के श्रीलंका के आधिकारिक दौरे पर जाएंगे। यह यात्रा भारत–श्रीलंका रक्षा सहयोग में एक नया अध्याय जोड़ने वाली मानी जा रही है, क्योंकि हाल के सालों में दोनों देशों के बीच सैन्य स्तर पर लगातार हाई-लेवल एंगेजमेंट बढ़े हैं। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत क्षेत्रीय स्थिरता, साझेदारी और पड़ोसी देशों के साथ सुरक्षा सहयोग को मजबूती देना चाहता है।

Army Chief Sikkim Visit: दो दिन के दौरे पर सिक्किम पहुंचे सेना प्रमुख, एक दिन पहले ही चीन पर कही थी ये बात

दौरे से पहले 25 नवंबर को नई दिल्ली राष्ट्रीय युद्ध स्मारक, नई दिल्ली में एक बेहद महत्वपूर्ण क्षण देखने को मिला, जब सेना प्रमुख ने पहली बार ‘ऑपरेशन पवन’ में शहीद हुए सैनिकों को आधिकारिक श्रद्धांजलि दी। यह वही ऑपरेशन था जिसमें इंडियन पीस कीपिंग फोर्स ने श्रीलंका में तैनात होकर आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई की थी। इस ऑपरेशन में 1,171 भारतीय जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था और 3,500 से अधिक घायल हुए थे।

Army Chief Sri Lanka Visit: पहली बार ‘ऑपरेशन पवन’ की आधिकारिक कमेमोरेशन

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर हुए कार्यक्रम में जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मेजर आर. परमेश्वरन सहित सभी वीर जवानों को श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर मरणोपरांत परम वीर चक्र से सम्मानित मेजर रामास्वामी परमेश्वरन की पत्नी उमा परमेश्वरन भी मौजूद थीं। मेजर परमेश्वरन उन इंडियन पीस कीपिंग फोर्स के एकमात्र सैनिक थे जिन्हें विदेशी धरती पर किसी ऑपरेशन में परम वीर चक्र मिला। यह पहला मौका था जब सेना की ओर से आधिकारिक कमेमोरेशन आयोजित की गई। अब तक यह सम्मान केवल वेटरंस और उनके परिवार निजी तौर पर निभाते आ रहे थे।

कार्यक्रम में वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टॉफ लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह भी मौजूद रहे, जो खुद ‘ऑपरेशन पवन’ में एक युवा अधिकारी के रूप में हिस्सा ले चुके हैं। यह समारोह वेटरंस के लिए वर्षों से लंबित एक सम्मान का प्रतीक माना जा रहा है और इसे भारतीय सेना द्वारा इतिहास को औपचारिक रूप से सम्मान देने के बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।

Army Chief Sri Lanka Visit: श्रीलंका दौरे से मजबूत होगा रक्षा सहयोग

आर्मी चीफ का 01 से 02 दिसंबर तक होने वाला श्रीलंका दौरा दोनों देशों के बीच बढ़ते भरोसे और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करेगा। इससे पहले भी भारतीय सेना प्रमुखों ने श्रीलंका का दौरा किया है। आखिरी बार 2021 में जनरल एमएम नरवणे ने श्रीसंका का दौरा किया था, जिसके बाद से दोनों सेनाओं के बीच ट्रेनिंग, एक्सरसाइज और ऑपरेशनल इंटरैक्शन का दायरा बढ़ता गया।

इसी साल सितंबर में भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी भी श्रीलंका के दौरे पर गए थे। वहीं श्रीलंका आर्मी के कई शीर्ष अधिकारी भी हाल के वर्षों में भारत का दौरा कर चुके हैं। श्रीलंका आर्मी चीफ लेफ्टिनेंट जनरल बीकेजीएम लसांथा रोड्रिगो भी इसी साल 11-14 जून तक भारत की 4-दिवसीय यात्रा पर आए थे। उन्होंने इंडियन मिलिट्री अकादमी (आईएमए) में पासिंग आउट परेड की समीक्षा की थी, हालांकि वे खुद भी 1990 में आईएमए से कमीशंड रह चुके हैं। उस दौरान उनकी आर्मी चीफ, नेवी चीफ और एयर चीफ से मुलाकात की थी। इसकी बाद अक्टूबर में श्रीलंका आर्मी चीफ ने नई दिल्ली में यूनाइटेड नेशंस ट्रूप कंट्रीब्यूटिंग कंट्रीज चीफ्स कॉनक्लेव में हिस्सा भी लिया था। इसके अलावा नवंबर में द्विपक्षीय रक्षा सहयोग की समीक्षा के लिए 11वीं आर्मी-टू-आर्मी स्टाफ टॉक्स (AAST) हुईं थी।

वहीं भारत और श्रीलंका की सेनाओं के बीच मित्र शक्ति अभ्यास का 11वां संस्करण इस साल 10 नवंबर से 23 नवंबर तक कर्नाटक के बेलगावी (फॉरेन ट्रेनिंग नोड) में हुआ है।

सेना प्रमुख की यह यात्रा “पड़ोसी पहले” नीति के तहत भारत का संदेश दोहराती है कि श्रीलंका भारत का भरोसेमंद साझेदार और करीबी मित्र है। इस दौरान दोनों देशों के सैन्य नेतृत्व क्षेत्रीय सुरक्षा, इंडो-पैसिफिक स्थिति, समुद्री चुनौतियों और आतंकवाद विरोधी प्रयासों पर व्यापक चर्चा करेंगे।

Army Chief Sri Lanka Visit: ट्रेनिंग, एक्सरसाइज और क्षमता निर्माण पर फोकस

दौरे के दौरान दोनों सेनाएं ट्रेनिंग, जॉइंट एक्सरसाइज और कैपेसिटी बिल्डिंग पर अपने सहयोग को और व्यापक बनाएंगी। साथ ही, आधुनिक युद्ध की जरूरतों, मल्टी-डोमेन ऑपरेशन्स, इंटेलिजेंस-शेयरिंग और मानवीय सहायता में सहयोग पर भी विस्तार से बातचीत होगी। भारत पिछले कई वर्षों से श्रीलंका को उपकरण, ट्रेनिंग स्लॉट और विशेष मिलिटरी कोर्स उपलब्ध कराता आ रहा है।

भारत और श्रीलंका के बीच रक्षा संबंध सिर्फ भौगोलिक निकटता के चलते नहीं हैं, बल्कि सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और सुरक्षा हितों पर भी टिके हैं। दोनों देश आतंकवाद विरोधी सहयोग में एक-दूसरे के मजबूत रणनीतिक साझेदार हैं। श्रीलंका ने भारत के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के दावे का समर्थन किया है, जबकि भारत श्रीलंका को ब्रिक्स जैसे समूहों में महत्वपूर्ण भूमिका दिलाने में मदद कर रहा है।

वेटरंस के लिए ऐतिहासिक क्षण

ऑपरेशन पवन की आधिकारिक कमेमोरेशन को वेटरंस लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे थे। अब तक हर साल वे खुद एक “साइलेंट” अनौपचारिक सभा में शहीदों को श्रद्धांजलि देते थे। इस बार पहली बार भारतीय सेना प्रमुख ने आधिकारिक तौर पर नेतृत्व किया।

इस आयोजन के साथ भारतीय सेना ने यह संदेश दिया कि बलिदान कभी भूला नहीं जाता, और इतिहास के उन अध्यायों को भी सम्मान मिलेगा जिन्हें अब तक आधिकारिक मान्यता नहीं मिली थी।

Samudra Utkarsh: रक्षा मंत्री बोले- भारत बन रहा ग्लोबल शिपबिल्डिंग हब, स्वदेशी क्षमता से दुनिया भी हुई प्रभावित

Samudra Utkarsh
Raksha Mantri Rajnath Singh

Samudra Utkarsh: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि दुनिया के देशों को भारत की तेजी से बढ़ती शिपबिल्डिंग इंडस्ट्री की क्षमता को समझना चाहिए और भविष्य की समुद्री तकनीकों को मिलकर विकसित करना चाहिए। वे मंगलवार को दिल्ली में आयोजित समुद्र उत्कर्ष सेमिनार में उद्योग प्रतिनिधियों, विदेशी पार्टनर्स और सैन्य अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे।

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत का शिपबिल्डिंग सेक्टर आज उन कुछ देशों में शामिल है जो कॉन्सेप्ट डिजाइन, मॉड्यूलर कंस्ट्रक्शन, आउटफिटिंग, रिफिट, रिपेयर, और लाइफ-साइक्ल सपोर्ट जैसी सभी प्रक्रियाएं खुद करने में पूरी तरह सक्षम है। उन्होंने कहा कि यह क्षमता भारत को न सिर्फ आत्मनिर्भर बनाती है बल्कि वैश्विक स्तर पर एक भरोसेमंद मरीटाइम हब के रूप में स्थापित करती है। उन्होंने बताया कि देश के सार्वजनिक और निजी शिपयार्ड, और हजारों एमएसएमई मिलकर एक मजबूत वैल्यू-चेन तैयार करते हैं जो स्टील, प्रोपल्शन, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर और एडवांस्ड कॉम्बैट सिस्टम जैसे सेक्टर्स को सपोर्ट करती है।

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अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की समुद्री क्षमता अब ठोस उदाहरणों के रूप में दुनिया के सामने है। भारत का पहला स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत, कलवरी-क्लास सबमरीन, और स्टेल्थ फ्रिगेट्स व डेस्ट्रॉयर्स न सिर्फ नौसेना की ताकत को बढ़ाते हैं, बल्कि यह भी दिखाते हैं कि भारत बड़े युद्धपोतों का डिजाइन और निर्माण दोनों करने की क्षमता रखता है।

रक्षा मंत्री मे कहा, “हमारे शिपयार्ड एयरक्राफ्ट कैरियर से लेकर रिसर्च वेसल और कमर्शियल शिप तक बनाने में सक्षम हैं। यही क्षमता भारत को शिपबिल्डिंग, शिप रिपेयर और मैरीटाइम इनोवेशन का ग्लोबल हब बना सकती है।” उन्होंने कहा कि भारतीय शिपयार्ड हमारे उभरती हुए ब्लू इकॉनमी के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।

रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सेमिनार का थीम ‘2500 बीसीई-2025 सीई सेलिब्रेटिंग 4,524 ईयर्स ऑफ शिपबिल्डिंग एक्सीलेंस’ केवल एक औद्योगिक लक्ष्य नहीं, बल्कि एक सभ्यता की निरंतर यात्रा को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि लोथल के प्राचीन बंदरगाहों से लेकर मुंबई, गोवा, विशाखापत्तनम, कोलकाता और कोच्चि के आधुनिक शिपयार्ड तक भारत की समुद्री यात्रा लगातार प्रगति और मजबूती की कहानी है। रक्षा मंत्री ने कहा कि खोज, इनोवेशन और समुद्री जुड़ाव की यह सदियों पुरानी भावना आज भी उतनी ही जीवंत है और भारत इसे नई दिशा दे रहा है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि आज भारतीय नौसेना और कोस्ट गार्ड के हर जहाज का निर्माण भारत में ही हो रहा है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत विजन का सबसे बड़ा प्रमाण है। उन्होंने कहा कि भारत की मैरीटाइम पॉलिसी मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 और मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047 ने उद्योग को नई दिशा दी है। रक्षा उत्पादन एवं निर्यात प्रोत्साहन नीति और डिफेंस प्रोक्योरमेंट मैनुअल 2025 ने भी घरेलू उत्पादन को मजबूत आधार दिया है।

Samudra Utkarsh
Raksha Mantri released a coffee-table book ‘Shipyards of Bharat – Infrastructure, Capability, Capability, Outreach’ and two compendiums – ‘Samudra Navpravartan’ and 10-year AI roadmap for Indian shipyards

उन्होंने बताया कि भारतीय नौसेना के पास इस समय 262 स्वदेशी डिजाइन और डेवलपमेंट परियोजनाएं चल रही हैं, जिनमें कई एडवांस्ड स्टेज में हैं। कुछ शिपयार्ड तो अगले कुछ वर्षों में अपने उत्पादन में 100 फीसदी स्वदेशी कंटेंट हासिल करने की दिशा में बढ़ रहे हैं। इससे भारत से सप्लाई होने वाले जहाजों पर ग्लोबल सप्लाई-चेन की बाधाएं लगभग समाप्त हो जाएंगी। उन्होंने भरोसा जताया कि निकट भविष्य में भारत के वाणिज्यिक जहाज भी पूरी तरह देश में बनेंगे।

रक्षा मंत्री ने भारतीय शिपयार्ड्स को देश की उभरती ब्लू इकोनॉमी का महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय शिपयार्ड न सिर्फ डिफेंस प्लेटफॉर्म बना रहे हैं बल्कि समुद्री विज्ञान, मरीन इकोसिस्टम मॉनिटरिंग, मत्स्य संसाधन प्रबंधन और मरीटाइम लॉ-एन्फोर्समेंट जैसे क्षेत्रों के लिए भी एडवांस वेसल तैयार कर रहे हैं। उन्होंने पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों के इस्तेमाल पर भी जोर दिया, जिसे भारतीय शिपयार्ड अब तेजी से अपना रहे हैं।

अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने उन मानवीय मिशनों का भी जिक्र किया जिनमें भारतीय नौसेना के जहाजों ने उल्लेखनीय भूमिका निभाई। उन्होंने कोविड काल के ऑपरेशन समुद्र सेतु, म्यांमार भूकंप के दौरान ऑपरेशन ब्रह्मा और इस वर्ष आईएनएस विक्रांत द्वारा किए गए मेडिकल एवैक्यूएशन का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ऐसे मिशन दिखाते हैं कि भारत न सिर्फ युद्धपोत बनाता है, बल्कि वे जहाज भी बनाता है जो जान बचाते हैं और वैश्विक स्थिरता को मजबूत करते हैं।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि हाल के वर्षों में कई देशों ने अपने युद्धपोतों और बड़े जहाजों की मरम्मत के लिए भारतीय शिपयार्ड को चुना है। जो भारत की क्षमता और भरोसे को दिखाता है। उन्होंने कहा कि भारत पूरे हिंद महासागर क्षेत्र के लिए एक प्रमुख रीफिट और रिपेयर हब बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

इस मौके पर रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने कहा कि समुद्र उत्कर्ष भारतीय शिपबिल्डिंग की ताकत को दिखाने वाला एक महत्वपूर्ण आयोजन है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पिछले वर्षों में यह क्षेत्र कई गुना बढ़ा है। उन्होंने नवाचार, कौशल विकास और एक्सपोर्ट क्षमता पर लगातार ध्यान देने की जरूरत बताई।

Supreme Court Discipline Case: सुप्रीम कोर्ट बोला- सेना में अनुशासन पहले, खारिज की मंदिर में न जाने वाले अफसर की याचिका, जानें क्या है पूरा मामला

Supreme Court Discipline Case

Supreme Court Discipline Case: भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को भारतीय सेना से बर्खास्त किए गए एक क्रिश्चियन अधिकारी की याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि सेना में अनुशासन, एकजुटता और सामूहिक मनोबल सर्वोपरि होते हैं, और इन्हें किसी व्यक्तिगत धार्मिक मान्यता के नाम पर नहीं बदला जा सकता। यह फैसला लेफ्टिनेंट कर्नल सैमुअल कामलेसन की उस याचिका पर आया, जिसमें उन्होंने अपने टर्मिनेशन को चुनौती दी थी।

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टर्मिनेट किए गए अफसर ने याचिका में कहा था कि उन्हें अपने रेजिमेंट के मंदिर के गर्भगृह में जाकर पूजा करने में आपत्ति थी, क्योंकि यह उनकी धार्मिक आस्था के खिलाफ है। वे पंजाब स्थित ममून कैंट में अपनी यूनिट में तैनात थे।

सुप्रीम के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने साफ कहा कि सेना जैसी संस्था की नींव अनुशासन पर आधारित है और यहां कमांडिंग ऑफिसर्स को अपनी यूनिट के सामने उदाहरण प्पेश करना होता है।

Supreme Court Discipline Case: व्यवहार “गंभीर अनुशासनहीनता”

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने बहुत स्पष्ट टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि एक सेना अधिकारी द्वारा इस तरह का व्यवहार “गंभीर अनुशासनहीनता” है और ऐसा अधिकारी को शुरू में ही बाहर कर देना चाहिए था। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि अगर केवल मंदिर में प्रवेश करने की बात है तो इसमें किसी धार्मिक पूजा का सवाल नहीं उठता।

उन्होंने सवाल पूछा कि जब गुरुद्वारा में कोई विशेष पूजन अनुष्ठान नहीं होता, तब अधिकारी ने वहां जाने से भी इनकार क्यों किया। कोर्ट ने यह भी बताया कि अधिकारी को चर्च के पादरी ने स्पष्ट रूप से सलाह दी थी कि “सर्वधर्म स्थल” में प्रवेश उनकी धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ नहीं है, लेकिन फिर भी उन्होंने आदेश नहीं माना।

जस्टिस बागची ने भी कहा कि एक अधिकारी “अपनी निजी धार्मिक व्याख्या” सेना के अनुशासन से ऊपर नहीं रख सकता। उन्होंने कहा कि वर्दी में रहते हुए ऐसे निजी मत स्वीकार नहीं किए जा सकते।

Supreme Court Discipline Case: “मेरा धर्म मेरी ड्यूटी में आड़े नहीं आता”

अधिकारी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि उनके मुवक्किल ने कभी किसी त्यौहार की सामाजिक गतिविधियों में हिस्सा लेने से इंकार नहीं किया। वे दीपावली, लोहड़ी, होली जैसी उत्सव गतिविधियों में हमेशा शामिल रहे। उनकी समस्या केवल पूजा-पाठ जैसी धार्मिक प्रक्रियाओं से थी।

उन्होंने कहा कि अधिकारी का छह साल का सेवा रिकॉर्ड बेदाग था और उन्हें बिना उचित प्रक्रिया के कड़ी सजा दे दी गई। वकील ने कहा कि “संविधान का अनुच्छेद 25 प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार देता है, और किसी को पूजा करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।”

चीफ जस्टिस ने इस पर कहा कि इस फैसले एक मजबूत संदेश जाएगा, कि सेना में अनुशासन से समझौता नहीं किया जा सकता।

Supreme Court Discipline Case: बहुसंख्यक की आस्था का सम्मान भी जरूरी: कोर्ट

कोर्ट ने यह भी कहा कि अधिकारी को अपने अधीन जवानों की सामूहिक भावनाओं का भी सम्मान करना चाहिए था। जस्टिस बागची ने कहा कि अनुच्छेद 25 में “आवश्यक धार्मिक अभ्यास” की बात है, न कि प्रत्येक व्यक्तिगत धार्मिक भावना की। एक कमांडिंग अधिकारी के रूप में उनसे यह भी अपेक्षा थी कि वे अपनी यूनिट की एकता और मनोबल बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाएं।

अंत में बेंच ने कहा कि यह मामला सेना के अनुशासन से जुड़ा है, और धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार सेना के नियमों के अधीन होता है। कोर्ट ने कहा कि अधिकारी का व्यवहार उनकी कमान में मौजूद सैनिकों के मनोबल पर नकारात्मक प्रभाव डालता। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी और सेना के फैसले को बरकरार रखा।

HAMMER Weapon JV: अब भारत में बनेगा घातक स्मार्ट एयर-टू-ग्राउंड हैमर बम, बीईएल और साफरान ने किया बड़ा समझौता

HAMMER Weapon JV

HAMMER Weapon JV: भारत के आत्मनिर्भर रक्षा कार्यक्रम को बड़ी मजबूती मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल आत्मनिर्भर भारत पहल को आगे बढ़ाते हुए अब भारत में ही हैमर बम बनाए जाएंगे। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) और फ्रांस की रक्षा कंपनी साफरान इलेक्ट्रॉनिक्स एंड डिफेंस ने भारत में हैमर स्मार्ट प्रिसिजन गाइडेड एयर-टू-ग्राउंड वेपन के प्रोडक्शन के लिए एक बड़ा समझौता किया है।

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यह समझौता जॉइंट वेंचर कोऑपरेशन एग्रीमेंट के तौर पर 24 नवंबर को नई दिल्ली में साइन किया गया। इसके तहत हैमर वेपन सिस्टम का निर्माण, सप्लाई और मेंटेनेंस भारत में किया जाएगा। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इस वेपन सिस्टम के उत्पादन में इंडिजेनाइजेशन धीरे-धीरे बढ़ाकर 60 फीसदी तक ले जाया जाएगा। यानी बहुत सारे सब-असेंबली, मैकेनिकल पार्ट्स और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम भारत में ही बनाए जाएंगे।

HAMMER Weapon JV
Bharat Electronics Limited (BEL) and Safran Electronics and Defence (SED), France have signed a Joint Venture Cooperation Agreement (JVCA) for the production of Highly Agile Modular Munition Extended Range (HAMMER) Smart Precision Guided Air-to-Ground Weapon in India

HAMMER Weapon JV: दोनों की 50–50 हिस्सेदारी

इस दौरान दोनों कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों बीईएल की तरफ से सीएमडी मनोज जैन और साफरान के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट अलेक्ज़ांद्र जिगलर ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह जॉइंट वेंचर भारत में एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के रूप में बनाया जाएगा, जिसमें बीईएल और साफरान दोनों की 50–50 हिस्सेदारी होगी। बीईएल इस जॉइंट वेंचर के तहत फाइनल असेंबली, क्वालिटी चेक, और टेस्टिंग की जिम्मेदारी संभालेगा। हैमर का प्रोडक्शन चरणों में किया जाएगा ताकि टेक्नोलॉजी ट्रांसफर धीरे-धीरे भारतीय उद्योग में स्थापित हो सके।

इनके लिए आवश्यक सब-असेंबली और पार्ट्स भारत के विभिन्न उद्योगों, एमएसएमई और टेक्नोलॉजी कंपनियों द्वारा सप्लाई किए जाएंगे। इससे भारतीय रक्षा उद्योग को नए अवसर मिलेंगे और रोजगार भी पैदा होंगे।

बीईएल ने कहा कि यह जॉइंट वेंचर भारत में रक्षा उत्पादन के लिए एक अहम मील का पत्थर है। बीईएल के चेयरमैन मनोज जैन के अनुसार, यह साझेदारी भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को एक नई दिशा देगी और घरेलू उद्योग को ग्लोबल स्टैंडर्ड्स पर ले जाने में मदद करेगी। वहीं, साफरान ने कहा कि भारत के साथ यह सहयोग लंबे समय तक चलने वाला होगा और यह कंपनी भारत में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और को-डेवलपमेंट के लिए प्रतिबद्ध है।

इस दौरान रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार और साफरान के सीईओ ओलिवियर एंड्रियेस भी मौजूद रहे। यह समझौता भारत की रक्षा उद्योग क्षमता को तेजी से आगे बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है।

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HAMMER Weapon JV: क्या है हैमर बम

हैमर का पूरा नाम हाईली एजाइल मॉड्यूलर म्युनिशन एक्सटेंडेड रेंज है। यह एक स्मार्ट प्रिसिजन गाइडेड एयर-टू-ग्राउंड वेपन है। इसका इस्तेमाल हवाई जहाज से जमीन पर बेहद सटीक हमले के लिए किया जाता है। यह वेपन सिस्टम अपने मॉड्यूलर डिजाइन और हाई एक्यूरेसी के लिए जाना जाता है। इसमें जीपीएस और आईएनएस (इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम) बेस्ड गाइडेंस का इस्तेमाल होता है, जो टारगेट पर बेहद सटीक हमला करने में मदद करता है। यह वेपन 15 से 70 किलोमीटर की दूरी तक टारगेट को निशाना बना सकता है।

हैमर वेपन का पूरा स्ट्रक्चर दो मुख्य हिस्सों में बंटा होता है। इसका आगे वाला हिस्सा गाइडेंस किट कहलाता है, जिसे नोज सेक्शन कहा जाता है। यहां वे सारे इलेक्ट्रॉनिक्स लगे होते हैं, जो इसे टारगेट तक ले जाते हैं। वहीं, पीछे की तरफ रेंज एक्सटेंशन किट लगती है, जिसमें छोटे विंगलेट्स और एक सॉलिड रॉकेट मोटर होती है। यही मोटर इस बम को लंबी दूरी तक पहुंचने की ताकत देती है।

HAMMER Weapon JV: एंटी-टैंक और बंकर बस्टर का कर सकता है काम

यह सिस्टम किसी नए बम को पूरी तरह बनाने के बजाय, पहले से मौजूद स्टैंडर्ड बॉम्ब जैसे एमके-82, बीएलयू-111 या बैंग को स्मार्ट वेपन में बदल देता है। यही वजह है कि इसे मॉड्यूलर डिजाइन कहा जाता है। इसका वजन मिशन के हिसाब से बदल सकता है। इसे 125 किलो, 250 किलो, 500 किलो से लेकर 1,000 किलो तक बढ़ाया जा सकता है। फ्रेंच एयरफोर्स सबसे ज्यादा 250 किलो वाले वर्जन का इस्तेमाल करती है। इसकी कुल लंबाई करीब 3.3 मीटर होती है। 250 किलो वाला वर्जन एंटी-टैंक, बंकर बस्टर, या ब्रिज/बिल्डिंग टारगेट्स के लिए सूटेबल है।

इस डिजाइन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे कम ऊंचाई, ज्यादा ऊंचाई या विभिन्न स्पीड पर भी लॉन्च किया जा सकता है। इसे टेक्निकल भाषा में वाइड लॉन्च एक्सेप्टेबल रीजन (डब्ल्यूएलएआर) कहा जाता है।

HAMMER Weapon JV: 70 किलोमीटर तक मार

हैमर की मारक क्षमता लॉन्च की ऊंचाई पर निर्भर करती है। अगर एयरक्राफ्ट ज्यादा ऊंचाई से इसे गिराता है, तो इसकी रेंज 50 से 70 किलोमीटर तक पहुंच जाती है। वहीं कम ऊंचाई से लॉन्च करने पर इसकी रेंज करीब 15 किलोमीटर होती है।

लॉन्च के बाद यह वेपन लगभग मैक 0.9 की स्पीड (यानी ध्वनि की गति के करीब) से चलता है। इसकी एक्यूरेसी बेहद हाई लेवल की है। सिर्फ जीपीएस/आईएनएस गाइडेंस से यह लक्ष्य को 10 मीटर से भी कम पर निशाना लगा सकता है। लेजर या इन्फ्रारेड गाइडेंस वाले वेरिएंट में यह 1 मीटर से भी कम हो जाती है। वहीं, यह बारिश, धुंध, रात या खराब मौसम, किसी भी स्थिति में यह निशाना भेद सकता है। इसके अलावा जीपीएस जैमिंग से फुलप्रूफ है, क्योंकि इसके पास इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम यानी आईएनएस का बैकअप होता है।

2007 से इस्तेमाल कर रहा फ्रांस

फ्रांस की वायुसेना इस वेपन का लंबे समय से इस्तेमाल कर रही है। फ्रांस इस वेपन का 2007 से इस्तेमाल कर रहा है। यह लीबिया, अफगानिस्तान और यूक्रेन में युद्ध के दौरान भी इस्तेमाल हो चुका है। यह कई सैन्य अभियानों में अपनी क्षमता साबित कर चुका है। भारत में यह वेपन खास तौर पर राफेल फाइटर जेट और लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस के लिए बेहद अहम होगा। यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है यूनिवर्सल कंपैटिबिलिटी। तेजस पर हैमर को इंटीग्रेट करने से उसकी ग्राउंड अटैक क्षमताओं में काफी बढ़ोतरी होगी। भारतीय वायुसेना और भारतीय नौसेना दोनों के लिए इसका उत्पादन भारत में होगा।

रक्षा उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यह समझौता भारत को एयर-टू-ग्राउंड वेपन के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाएगा। इस समय ऐसे कई वेपन भारत को आयात करने पड़ते हैं, जिससे बड़ी लागत आती है और आपातकालीन परिस्थितियों में सप्लाई जोखिम पैदा होता है। लेकिन जब उत्पादन भारत में होगा, तो न सिर्फ लागत कम होगी बल्कि सप्लाई भी सुनिश्चित होगी।

यह समझौता फरवरी 2025 में एरो इंडिया के दौरान साइन हुए एमओयू का विस्तार है। भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग पिछले कुछ वर्षों में काफी तेजी से बढ़ा है। राफेल सौदा, इंजन टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और अब हैमर वेपन का जॉइंट वेंचर इस रिश्ते को और मजबूत बना रहे हैं।

INS Mahe Commissioning: भारतीय नौसेना को मिला नया वॉरशिप, आर्मी चीफ बोले- राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा हैं भूमि, समुद्र और आकाश, स्वदेशी क्षमता पर जताया गर्व

INS Mahe Commissioning- Indian Army Chief General Upendra Dwivedi at INS Mahe Commissioning ceremony
INS Mahe Commissioning: Indian Army Chief General Upendra Dwivedi Attends Warship Induction Ceremony

INS Mahe Commissioning: भारतीय सेना के चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने आईएनएस माहे के कमीशनिंग समारोह में कहा कि “भूमि, समुद्र और आकाश, ये तीनों हमारे राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे के एक ही हिस्से हैं। जब तीनों सेनाएं एक साथ काम करती हैं, तभी देश की सुरक्षा सबसे मजबूत होती है।”

INS Mahe Commissioning: भारतीय नौसेना में 24 नवंबर को कमीशन होगी आईएनएस माहे एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट

उन्होंने आगे कहा कि आधुनिक युद्ध अब मल्टी-डोमेन हो चुके हैं, जहां जमीन से लेकर समुद्र, आकाश, सूचना क्षेत्र और साइबर स्पेस हर जगह एक साथ तैयार रहना जरूरी है। जनरल द्विवेदी ने इस बात पर जोर दिया कि ऑपरेशन सिंदूर में तीनों सेनाओं की संयुक्त कार्रवाई ने साबित कर दिया कि भारत की असली ताकत “जॉइंटनेस” यानी संयुक्त क्षमता में है।

INS Mahe Commissioning: मुंबई नेवल डॉकयार्ड में हुई कमीशनिंग

भारतीय नौसेना के लिए 24 नवंबर का दिन ऐतिहासिक रहा, जब पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से बना आईएनएस माहे (INS Mahe) आधिकारिक रूप से नौसेना में शामिल किया गया। यह माहे-क्लास एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC) का पहला वॉरशिप है, जिसे कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड ने डिजाइन और तैयार किया है। आठ स्वदेशी शैलो वॉटरक्राफ्ट का पहला जहाज है, जिसे कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड बनाया है। वॉरशिप का कमीशनिंग समारोह मुंबई नेवल डॉकयार्ड में हुआ, जिसमें भारतीय सेना के चीफ जनरल उपेन्द्र द्विवेदी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। (INS Mahe Commissioning)

INS Mahe Commissioning- Indian Army Chief General Upendra Dwivedi at INS Mahe Commissioning
INS Mahe

कमांड टीम को बोला “ब्रावो जूलू”

जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने आईएनएस माहे की कमांड टीम को संबोधित करते हुए “ब्रावो जूलू” कहा, जिसे नौसेना में किसी शानदार कार्य के लिए इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने कहा कि आईएनएस माहे का नौसेना में शामिल होना भारत की समुद्री शक्ति को मजबूत बनाता है और यह दिन पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है।

INS Mahe Commissioning: Indian Army Chief General Upendra Dwivedi Attends Warship Induction Ceremony
INS Mahe Commissioning: Indian Army Chief General Upendra Dwivedi Attends Warship Induction Ceremony

उन्होंने कहा कि आईएनएस माहे का कमीशन होना यह साबित करता है कि भारत अब अपनी जरूरतों के हिसाब से मुश्किल वॉरशिप्स को भी स्वदेशी तकनीक से डिजाइन और मैन्यूफैक्चर कर सकता है। वर्तमान में नौसेना की 75 फीसदी से अधिक पूंजीगत खरीदें देश में ही बन रही हैं, जिसमें वॉरशिप, सबमरीन, हाई-एंड सोनार और वेपंस सिस्टम शामिल हैं। (INS Mahe Commissioning)

INS Mahe Commissioning- Indian Army Chief General Upendra Dwivedi at INS Mahe Commissioning
INS Mahe Commissioning: Indian Army Chief General Upendra Dwivedi Attends Warship Induction Ceremony

“नौसेना के जांबाज समुद्र में हर वक्त तैयार रहते हैं”

जनरल द्विवेदी ने आईएनएस माहे के नाम के महत्व का जिक्र करते हुए कहा कि माहे एक ऐतिहासिक तटीय शहर है, जिसका समुद्री इतिहास बेहद समृद्ध है और जिसे देश की समुद्री विरासत का प्रतीक माना जाता है। वॉरशिप के क्रेस्ट पर बना “उरुमी”कलारीपयट्टू की लचीली तलवार-फुर्ती, सटीकता और युद्धक तैयारी का प्रतीक है। इसका मैस्कॉट “चीता” वॉरशिप की रफ्तार और फोकस का प्रतीक माना जाता है। जहाज का मोटो साइलेंट हंटर्स उसकी स्टील्थ क्षमता और सतर्कता को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि यह वॉरशिप नौसेना की कोस्टल सिक्योरिटी, एंटी–सबमरीन वॉरफेयर और लिटोरल (तटीय) ऑपरेशन में एक बड़ा योगदान देगा। इसके शामिल होने से भारतीय तटीय इलाकों की निगरानी और सुरक्षा ढांचा और मजबूत होगा। (INS Mahe Commissioning)

जनरल द्विवेदी ने वॉरशिप की कमांडिंग टीम को संबोधित करते हुए कहा कि अब इस वॉरशिप की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है। उन्होंने कहा, “एक जहाज उतना ही मजबूत होता है, जितने मजबूत और अनुशासित उसके नाविक होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि देश इसलिए चैन की नींद सोता है, क्योंकि नौसेना के जांबाज समुद्र में हर वक्त तैयार रहते हैं।

INS Mahe Commissioning: Indian Army Chief General Upendra Dwivedi Attends Warship Induction Ceremony
INS Mahe Commissioning: Indian Army Chief General Upendra Dwivedi Attends Warship Induction Ceremony

मल्टी-डोमेन हो रहे हैं आधुनिक युद्ध

उन्होंने हेलन केलर का उद्धरण देते हुए कहा, “अकेले हम थोड़ा करते हैं, साथ मिलकर बहुत कुछ करते हैं।” यही भावना भारत की तीनों सेनाओं आर्मी, नेवी और एयरफोर्स को जोड़ती है। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध अब मल्टी–डोमेन हो रहे हैं, और तीनों सेनाओं की साझा ताकत ही भारत की असली रणनीतिक क्षमता है। ऑपरेशन सिंदूर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि “जॉइंट ऑपरेशन ही भारत को सुरक्षा के हर मोर्चे पर मजबूत बनाते हैं।” उन्होंने कहा कि भारतीय सेना भी “डिकेड ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन” के अभियान के तहत कई सुधार कर रही है, जिसमें जॉइंटनेस और इंटीग्रेशन सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

उन्होंने कहा कि नौसेना न केवल समुद्र में सुरक्षा देती है, बल्कि पड़ोसी देशों के साथ संबंधों और वैश्विक मंच पर स्मार्ट डिप्लोमेसी में भी बड़ी भूमिका निभाती है और भविष्य में उसके विस्तार की योजनाएं भी बहुत बड़ी हैं। समारोह के अंत में उन्होंने आईएनएस माहे के कमांडिंग ऑफिसर और क्रू को शुभकामनाएं देते हुए कहा, “जब आप इस जहाज पर तिरंगा फहराएंगे, तो उसके साथ पूरे देश का विश्वास और गर्व भी आपके साथ खड़ा होगा। आपकी हर यात्रा सुरक्षित हो और हर मिशन सफल हो।” (INS Mahe Commissioning)

INS Mahe Commissioning: Indian Army Chief General Upendra Dwivedi Attends Warship Induction Ceremony
INS Mahe Commissioning: Indian Army Chief General Upendra Dwivedi Attends Warship Induction Ceremony

200 नॉटिकल माइल के इलाके को करेगा कवर

आईएनएस माहे भारतीय नौसेना की तटीय सुरक्षा को मजबूत करने वाला एक महत्वपूर्ण वॉरशिप है। यह लिटलोरल जोन में एंटी-सबमरीन ऑपरेशंस के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें एडवांस्ड सोनार सिस्टम, मॉडर्न कम्युनिकेशन सूट, सर्च-एंड-अटैक क्षमता और स्टील्थ डिजाइन शामिल है। युद्धपोत में वॉटरजेट प्रोपल्शन है, जो उथले पानी में भी ऑपरेशन कर सकता है।

माहे-क्लास जहाज पुराने अभय-क्लास को रिप्लेस करेंगे और तटीय इलाकों में 200 नॉटिकल माइल (लगभग 370 किमी) के दायरे में सबमरीन और अंडरवॉटर खतरों को ट्रैक करने में मदद करेंगे। आईएनएस माहे आने वाले सालों में तटीय सुरक्षा की पहली पंक्ति बनेगा और बड़े वॉरशिप्स, एयरक्राफ्ट और सबमरीन के साथ मिलकर संयुक्त ऑपरेशंस में मदद करेगा। (INS Mahe Commissioning)

BvS10 Sindhu: भारतीय सेना ने खरीदे 18 खास ऑल-टेरेन व्हीकल, लद्दाख और भुज में होंगे तैनात

BvS10 Sindhu
BvS10 Sindhu

BvS10 Sindhu: भारतीय सेना ने हाई-एल्टीट्यूड और कठिन इलाकों में अपनी ऑपरेशन क्षमता को बढ़ाने के लिए BvS10 सिंधु एडवांस्ड आर्टिक्युलेटेड ऑल-टेरेन व्हीकल की खरीद का समझौता किया है। यह व्हीकल एलएंडटी भारत में स्वीडन की कंपनी बीएई सिस्टम्स की मदद से भारत में मैन्यूफैक्चर करेगी।

BvS10 Sindhu: कुल 18 वाहन मिलेंगे

एलएंडटी की तरफ से जारी आधिकारिक बयान में बताया गया है कि यह कॉन्ट्रैक्ट करीब 245 करोड़ रुपये का है, जिसके तहत सेना को कुल 18 वाहन मिलेंगे। मार्च 2022 में रक्षा मंत्रालय ने ऐसे 18 आर्टिक्युलेटेड ऑल-टेरेन व्हीकल (एएटीवी) की रिक्वायरमेंट जारी की थी। खरीद प्रक्रिया बॉय (इंडियन) कैटेगरी के तहत की गई है और इसमें 60 फीसदी से अधिक इंडिजिनस कंटेंट जरूरी था। इन व्हीकल्स को हजीरा (गुजरात) आर्मर्ड सिस्टम्स कॉम्प्लेक्स में तैयार किया जाएगा। (BvS10 Sindhu)ॉ

Sir Creek Indian Army: सर क्रीक में अपनी मौजूदगी मजबूत कर रहा भारत, सेना को चाहिए लैंडिंग क्राफ्ट असॉल्ट और फास्ट पेट्रोल बोट्स, जारी की RFP

इनमें से बारह व्हीकल लद्दाख में निमू में तैनात किए जाएंगे और छह व्हीकल भुज भेजे जाएंगे। रक्षा सूत्रों के अनुसार, सेना को ये 18 वाहन 2027 तक मिल जाएंगे। पारंपरिक व्हीकल्स जैसे BMP-2 या लाइट कमर्शियल स्नो व्हीकल्स जहां फेल हो जाते हैं, वहां लास्ट-माइल रिसप्लाई, कैजुअल्टी इवैक्यूएशन, और रैपिड रीइन्फोर्समेंट में यह मदद करेगा। ये लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर माउंटेन ब्रिगेड्स की ऑपरेशनल रेडीनेस बढ़ाएगा। (BvS10 Sindhu)

BvS10 सिंधु पहले से मौजूद BvS10 प्लेटफॉर्म का भारतीय जरूरतों के हिसाब से तैयार किया गया अपग्रेडेड वेरिएंट है। यह दो हिस्सों वाला आर्टिक्युलेटेड वाहन है, जो बर्फ, कीचड़, रेगिस्तान, दलदली जमीन और पहाड़ी चट्टानों जैसे बेहद कठिन इलाकों में भी आसानी से चल सकता है। एलएंडटी और बीएई के अनुसार, इस व्हीकल ने गुजरात के सी-लेवल और ऊंचे पर्वतीय इलाकों दोनों में भारतीय सेना के साथ बेहद कठिन ट्रायल्स पास किए हैं। (BvS10 Sindhu)

BvS10 सिंधु को भारतीय सेना की नई जरूरतों, खासकर उत्तरी और पश्चिमी मोर्चों पर ऑपरेशंस के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसे बर्फीले इलाकों में सैनिकों, हथियारों, रसद और संचार उपकरणों को पहुंचाने और तेज मूवमेंट के लिए डिजाइन किया गया है। सेना मानती है कि यह वाहन आने वाले समय में कठिन इलाकों में उसकी मोबिलिटी को मजबूत करेगा और ऑपरेशनल चुनौतियों को कम करेगा। (BvS10 Sindhu)

BvS10 मूल रूप से स्वीडिश आर्मी के लिए डिजाइन किया गया था, जो ऑस्ट्रिया, फ्रांस, नीदरलैंड्स, स्वीडन, यूक्रेन, यूके और जर्मनी में सर्विस में है। ये एक्सट्रीम एनवायरनमेंट्स के लिए प्रूवन है, और इसके आने से भारतीय सेना के मॉडर्नाइजेशन को मजबूती मिलेगी।

क्या है BvS10 Sindhu

BvS10 सिंधु को सेना की जरूरत के हिसाब से लद्दाख और भुज जैसे कठिन इलाकों में तैनात किया जाएगा, जहां बर्फ, कीचड़, दलदल और रेगिस्तानी जमीन पर सामान्य गाड़ियां आसानी से नहीं चल पातीं। BvS10 सिंधु दो हिस्सों वाला आर्टिक्युलेटेड वाहन है, जो अपने ट्रैक सिस्टम की वजह से न केवल ऊंचे पहाड़ों पर बल्कि दलदली और बर्फीली जमीन पर भी स्थिर होकर चल सकता है। सेना के अधिकारियों के मुताबिक यह व्हीकल वहां भी चल सकता है, जहां आम आर्मर्ड गाड़ियां फंस जाती हैं। इसी वजह से इसे “ऑल-टेरेन व्हीकल” कहा जाता है।

सुरक्षा के मामले में भी BvS10 सिंधु बेहद मजबूत है। इसकी बॉडी पूरी तरह आर्मर्ड है, जो सैनिकों को गोलियों और धमाकों से बचाती है। इसमें एनबीसी प्रोटेक्शन भी है यानी न्यूक्लियर, बायोलॉजिकल और केमिकल खतरों से बचाव मिलता है। इतना ही नहीं, यह वाहन -40° से +50° सेल्सियस तक के तापमान में भी काम कर सकता है।

BvS10 सिंधु में लगा हाई-एल्टीट्यूड डीजल इंजन इतना ताकतवर है कि यह वाहन 18,000 फीट (करीब 5,500 मीटर) की ऊंचाई पर भी आसानी से चल सकता है। यानी यह वहीं काम कर सकता है जहां ऑक्सीजन कम होती है और आम व्हीकल्स वाहन दम तोड़ देते हैं।

इस वाहन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह जमीन के साथ-साथ पानी में भी चल सकता है। यानी यह एक तरह से “एम्फीबियस” वाहन है। जमीन पर इसकी स्पीड 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटा तक रहती है, जबकि पानी में यह 5 से 10 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से आगे बढ़ सकता है। इसमें 10–12 सैनिक बैठ सकते हैं और जरूरत पड़ने पर इसे एम्बुलेंस, कमांड पोस्ट या वेपन कैरियर में भी बदला जा सकता है।

सेना के लिए यह वाहन इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सैनिकों, हथियारों और मेडिकल टीम को उन इलाकों तक पहुंचा सकता है, जहां सड़कें नहीं हैं या फिर हालात बहुत कठिन हैं।

Tejas Tragedy Lessons: दुबई हादसे से मिले कड़े सबक, लेकिन इससे भारत की एयरोस्पेस महत्वाकांक्षाओं नहीं पड़ेगा असर

Tejas Tragedy Lessons
Gopal Sutar former HAL Spokesperson

Tejas Tragedy Lessons: मैं सालों तक हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड का प्रवक्ता रहा हूं और तेजस प्रोग्राम को नजदीक से देखने का मौका मिला है। आज जब दुबई एयर शो में हुए तेजस एमके-1 हादसे पर लोग सवाल उठा रहे हैं, मैं अपने अनुभव के आधार पर कुछ बातें साफ करना चाहता हूं। यह घटना दुखद है, गहरी है, और देश के हर नागरिक को तकलीफ़ पहुंची है। लेकिन इस एक हादसे को तेजस के सफर पर सवाल उठाने का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए।

Tejas Crash Dubai: भारतीय वायुसेना कैसे करती है विमान हादसे की जांच? तेजस क्रैश के बाद क्या है कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी की पूरी प्रक्रिया समझिए

मुझे याद है, 2016 में मैंने एक लेख लिखा था जिसमें बताया था कि कैसे तेजस ने पहली बार बहरीन इंटरनेशनल एयर शो में उड़ान भरकर दुनिया को चौंका दिया था। वह भारत के एयरोस्पेस कॉन्फिडेंस का एक बड़ा प्रदर्शन था। दो लिमिटेड सीरीज प्रोडक्शन एयरक्राफ्ट ने 8-जी पुल, वर्टिकल लूप, स्लो फ्लाईपास्ट और बैरल रोल जैसे मैन्यूवर किए थे। उस समय दुनिया ने पहली बार महसूस किया कि भारत सिर्फ रक्षा उपकरण खरीदने वाला देश नहीं है, बल्कि अपना फाइटर जेट बनाने की क्षमता भी रखता है।

इसके बाद तेजस का सफर लंबा रहा, चुनौतियों से भरा रहा, लेकिन लगातार आगे बढ़ता गया। एचएएल ने एमके1ए वर्जन को तैयार करने में काफी मेहनत की। अक्टूबर 2025 में नासिक में एमके1ए की पहली फ्लाइट देखना मेरे जैसे लोगों के लिए गर्व का क्षण था।

Tejas Mk1 Crash: तेजस में लगी थी मार्टिन बेकर की जीरो इजेक्शन सीट, फिर भी पायलट क्यों नहीं कर पाया इजेक्ट?

लेकिन ठीक कुछ ही हफ्तों बाद, 21 नवंबर 2025 को दुबई के अल मकतूम इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर तेजस एमके1 का क्रैश होना बेहद दुखद रहा। पायलट विंग कमांडर नमंश स्याल की जान चली गई। यह घटना लाइव देखने वाले कई लोगों के लिए भी बड़ा सदमा थी। इंडियन एयर फोर्स ने कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी का ऑर्डर दे दिया है और हर पहलू फ्लाई-बाय-वायर सिस्टम, इंजन, कंट्रोल सिस्टम या कोई अन्य तकनीकी कारणों की जांच होगी।

यह तेजस का दूसरा क्रैश था। पहला मार्च 2024 में जैसलमेर में हुआ था, जब इंजन सीज होने से विमान गिरा, लेकिन पायलट समय पर इजेक्ट कर गया। दुबई में ऐसा नहीं हो सका, और इस बार हादसा जानलेवा रहा। पायलट का इजेक्ट न कर पाना कई सवाल उठाता है, और यही इस जांच का सबसे अहम हिस्सा होगा।

मैं यह साफ कहना चाहता हूं कि इस हादसे का असर सिर्फ एक विमान के नुकसान तक सीमित नहीं है। यह भारत के मनोबल, आत्मनिर्भरता और भविष्य की एयरोस्पेस योजनाओं को भी प्रभावित कर सकता है। लेकिन मेरा अनुभव कहता है कि ऐसे समय में घबराने की नहीं, मजबूत और संतुलित प्रतिक्रिया देने की जरूरत होती है।

तेजस को लेकर कुछ बातें समझना बहुत जरूरी है। इसका सफर आसान नहीं रहा। 1990 के दशक में जब भारत पर पश्चिमी देशों ने तकनीकी प्रतिबंध लगाए, तब न तो कोई इंजन सपोर्ट था और न कोई एवियोनिक्स तकनीक। डीआरडीओ की गैस टरबाइन रिसर्च एस्टैब्लिशमेंट (जीटीआर) ने कावेरी इंजन बनाने की कोशिश की, लेकिन वह कामयाब न हो सकी। इसी दौरान, जीई एफ404 इंजन पर तेजस का डिजाइन आगे बढ़ाया गया। इस तरह तेजस प्रोग्राम ने मोटे तौर पर अपने दम पर आगे बढ़ना सीखा।

आज हालात बदल चुके हैं। तेजस ने 10,000 से ज्यादा सफल उड़ानें भरी हैं। भारतीय वायुसेना के पास 36 तेजस एमके1 हैं और 97 एमके1ए के लिए 62,400 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट साइन हो चुका है। भारत ने 220 से ज्यादा तेजस जेट ऑर्डर किए हैं। यह छोटी उपलब्धि नहीं है।

मुझे यह भी कहना होगा कि दुनिया की कोई भी एयर फोर्स बिना हादसों के नहीं चलती। अमेरीकी थंडरबर्ड्स से लेकर रूसी नाइट्स तक, सभी ने एयर शो के दौरान विमान खोए हैं। कुछ हादसे पायलट की गलती से हुए, कुछ मेकैनिकल फेलियर से, और कुछ अनियंत्रित परिस्थितियों से। कोई भी विमान सिर्फ एक हादसे के आधार पर जज नहीं किया जाता। तेजस कार्यक्रम इस दिशा में सबसे अहम कदम है। कई देशों ब्राजील, अर्जेंटीना, फिलीपींस ने तेजस में रुचि दिखाई है। लेकिन दुबई हादसे से भारत की एक्सपोर्ट महत्वाकांक्षाओं को झटका जरूर लगा है।

भारत को आज जरूरत है पारदर्शी जांच की, आत्मविश्वास की, और तेजस को बेहतर बनाने की। एचएएल, आईएएफ, डीआरडीओ, मंत्रालय सभी को इस हादसे से सीख लेकर विमान को और मजबूत करना होगा। लेकिन तेजस को छोड़ देना या उस पर अविश्वास जताना समाधान नहीं है। तेजस सिर्फ एक फाइटर जेट नहीं, भारत की एयरोस्पेस महत्वाकांक्षाओं का प्रतीक है।

दुबई की ये घटना एक कठिन पल जरूर है, लेकिन इसके बाद अगर हम सही तरीके से आगे बढ़ें, तो तेजस पहले से ज्यादा मजबूत बनकर उभरेगा। मैं इस प्रोग्राम में 20 साल से भी ज्यादा समय तक जुड़े रहने के बाद यही विश्वास रखता हूं।

(लेखक गोपाल सुतार कई सालों तक हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड के प्रवक्ता रह चुके हैं)

Exercise Ram Prahar: रैम प्रहार अभ्यास में शामिल हुई अशिनी प्लाटून, जीओसी बोले- पाकिस्तान में घुस कर जवाब देने के लिए तैयार है भारतीय सेना

Exercise Ram Prahar
Lt Gen Manoj Kumar Katiyar, PVSM, UYSM, AVSM, Army Commander, Western Command

Exercise Ram Prahar: उत्तराखंड के हरिद्वार के पास झिलमिल झील रिजर्व फॉरेस्ट में भारतीय सेना की वेस्टर्न कमांड ने अपने बड़े सैन्य अभ्यास रैम प्रहार का आयोजन किया। यह अभ्यास लगभग एक महीने तक चला और इसमें करीब 20,000 सैनिक शामिल हुए। इस पूरे सैन्य अभ्यास में पाकिस्तान सीमा से लगे पंजाब के इलाके जैसे मैदान और दरियाई इलाकों को ध्यान में रखते हुए ऑपरेशनल स्थितियों की रिहर्सल की गई।

Exercise RAM PRAHAR: हरिद्वार में जुटी भारतीय सेना, राम प्रहार में वेस्टर्न कमांड ने दिखाई युद्ध की तैयारियां

यह अभ्यास ऐसी जगह किया गया जो पंजाब की नदी घाटी जैसी भौगोलिक संरचना से मिलती-जुलती है। सेना के अधिकारियों ने बताया कि इस जगह का चुनाव इसलिए किया गया, ताकि पाकिस्तान सीमा के पास मिलने वाली जमीन जैसी परिस्थितियों को ठीक वैसा ही दोहराया जा सके। (Exercise Ram Prahar)

अभ्यास में खास तौर पर फाइटर जेट, रेकॉनिसेंस एयरक्राफ्ट, अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर, एंफिबियस आर्मर्ड व्हीकल, टैंक, ड्रोन-आधारित सर्विलांस और रात में पैरा-ट्रूपर तैनाती जैसी गतिविधियां शामिल थीं। यह पहली बार हुआ कि इतना बड़ा अभ्यास उत्तराखंड में किया गया, क्योंकि यहां का इलाका पंजाब क्षेत्र जैसे ऑपरेशन के लिए बिल्कुल अनुकूल माना जाता है। (Exercise Ram Prahar)

इस अभ्यास (Exercise Ram Prahar) में हाल ही में बनी अशिनी प्लाटून भी शामिल हुई। यह प्लाटून भारतीय सेना की नई टेक्नोलॉजी-आधारित यूनिट है, जो रियल-टाइम टैक्टिकल रिकॉनिसेंस, सर्विलांस और मिनी-अनमैन्ड एरियल सिस्टम स्ट्राइक क्षमता देती है। अशिनी प्लाटून को सेना की थर्ड आई भी कहा जाता है, क्योंकि यह दुश्मन की गतिविधियों की तेजी से निगरानी कर सकती है और सटीक स्ट्राइक में सैनिकों की मदद करती है। रैम प्रहार अभ्यास में इस प्लाटून ने दिखाया कि आधुनिक युद्ध में सूचना, निगरानी और सटीक प्रहार कितने महत्वपूर्ण होते हैं।

वेस्टर्न कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार ने अभ्यास (Exercise Ram Prahar) के आखिरी चरण का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि यह पूरा अभ्यास पाकिस्तान की ओर से किसी बड़े उकसावे की स्थिति में सेना की प्रतिक्रिया की तैयारी को परखने के लिए किया गया था। उन्होंने कहा कि हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना ने पाकिस्तान को कड़ा जवाब दिया था और यदि पाकिस्तान दोबारा भविष्य में कोई और उकसावे वाली कार्रवाई करता है, तो सेना पूरी ताकत के साथ जवाब देने के लिए तैयार है। जिसमें पंजाब की तरफ से पाकिस्तान में प्रवेश करना भी शामिल है।

Exercise Ram Prahar
Lt Gen Manoj Kumar Katiyar, PVSM, UYSM, AVSM, Army Commander, Western Command

जनरल कटियार ने कहा कि यह स्थान इसलिए चुना गया क्योंकि यहां पंजाब जैसे नदी-नालों और प्राकृतिक बाधाओं का वास्तविक अभ्यास किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि सेना नियमित रूप से अलग-अलग इलाकों में युद्धाभ्यास करती है ताकि हर तरह की स्थिति में तत्परता बनी रहे।

अशिनी प्लाटून पर बात करते हुए अधिकारियों ने बताया कि यह यूनिट भविष्य के युद्धक्षेत्र के लिए बनाई गई है, जहां छोटे ड्रोन, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम सैनिकों को तुरंत जानकारी और टारगेटिंग मदद देते हैं। अभ्यास में इस प्लाटून की क्षमताओं को देखकर वरिष्ठ अधिकारियों ने इसे भारतीय सेना की “भविष्य-तैयार ताकत” का अहम हिस्सा बताया। (Exercise Ram Prahar)

Indian Army Social Outreach: भारतीय सेना GenZ पर किस तरह से कर रही है फोकस, इस तरह बदल रही है अपनी सोशल मीडिया स्ट्रेटेजी

Indian Army Social Outreach

Indian Army Social Outreach: भारतीय सेना अब नए दौर की जरूरतों के अनुसार अपनी पूरी कम्युनिकेशन रणनीति बदल रही है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना ने महसूस किया कि युद्ध का मोर्चा अब सिर्फ सिर्फ जमीन पर ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया की टाइमलाइन पर भी खुल चुका है। ऑपरेशन सिंदूर के कुछ मिनटों में ही इंटरनेट पर कई तरह की अफवाहें, एडिटेड वीडियो और भ्रामक पोस्ट वायरल हो गए थे। इससे साफ हो गया कि अब भारतीय सेना को युवाओं, खासकर जेन-जी, तक सीधे और तेज तरीके से पहुंचना होगा।

Smartphone Use in Army: सेना में स्मार्टफोन के इस्तेमाल लेकर कही ये बड़ी बात, कहा- रिएक्ट और रेस्पॉन्ड के बीच अंतर को समझना जरूरी

इसी बदलाव को ध्यान में रखते हुए भारतीय सेना ने अपनी सोशल मीडिया स्ट्रेटेजी को बिल्कुल नया रूप दिया है। अब सेना का कंटेंट केवल जानकारी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे युवाओं की भाषा, उनकी पसंद और उनके डिजिटल व्यवहार के हिसाब से तैयार किया जा रहा है। सेना की नई पोस्ट्स में साफ दिखता है कि यह पुरानी पारंपरिक शैली से हटकर, अधिक क्रिएटिव और सोच-समझकर लिखी गई हैं। (Indian Army Social Outreach)

हाल ही में भारतीय सेना के आधिकारिक एक्स हैंडल से 29 सेकंड का एक वीडियो जारी किया गया। इसमें टॉप-एंगल शॉट में सैनिक एक ऑपरेशन की प्लानिंग करते दिखते हैं। इसके साथ आवाज आती है “वी डोन’ट चेज टार्गेट्स, वी न्यूट्रलाइज देम”। हालांकि यह मैसेज छोटा, तेज और जेन जी की स्क्रॉल करने वाली आदत के बिल्कुल अनुकूल है। कई लोग इन वीडियोज को ऑपरेशन सिंदूर 2 से जोड़कर देख रहे थे, लेकिन सेना ने स्पष्ट किया कि यह एक खास सोशल मीडिया अभियान का हिस्सा है। (Indian Army Social Outreach)

सेना अब छोटे, साफ और भरोसेमंद कंटेंट पर फोकस कर रही है। इसके लिए ट्रेनिंग रेंज से रियल-टाइम क्लिप, फैक्ट-बेस्ड एक्सप्लेनर, क्लीन ग्राफिक्स और ग्राउंड से मिलने वाले तेजी के अपडेट शेयर किए जा रहे हैं। सेना अब नए डिजिटल फॉर्मेट्स भी आजमा रही है, इनमें आटोनोमस सेंसरी मेरिडियन रिस्पोंस-स्टाइल वीडियोज, स्लो-मोशन ड्रिल फुटेज, गो-प्रो फर्स्ट-पर्सन शॉट्स, छोटे डॉक्यूमेंट्री-स्टाइल रील्स और सिपाहियों के छोटे इंटरव्यूज शामिल हैं। यह वही फॉर्मेट है जिसे जेन जी सबसे ज्यादा पसंद करता है। (Indian Army Social Outreach)

इस बदलाव का एक अहम कारण यह भी है कि आज की पीढ़ी तेजी से स्क्रॉल करती है और लंबा कंटेंट कम पढ़ती है। इसलिए सेना अपने मैसेज को उसी शैली में पेश कर रही है जिस तरह आज का युवा डिजिटल कंटेंट देखता और समझता है। सेना के अंदर भी अब एक नई सोच विकसित हो रही है, जिसे कॉग्निटिव वॉरफेयर का नाम दिया गया है। इसका मकसद है बिना प्रचार की लड़ाई में उतरे हुए, युवा दिमागों तक सही जानकारी, सही संदर्भ और सही संदेश पहुंचाया जाए। (Indian Army Social Outreach)

भारतीय सेना का यह नया तरीका अब एकतरफा संवाद नहीं है। यह बातचीत पर आधारित है। युवा सीधे सेना के पोस्ट्स पर सवाल पूछते हैं, सुझाव देते हैं और कई बार फील्ड एरिया में तैनात सैनिकों के प्रति अपना सम्मान भी व्यक्त करते हैं। सेना इस बातचीत को गंभीरता से लेती है और इसका जवाब भी उसी गंभीरता से देती है। इससे एक भरोसे का पुल बन रहा है जो पहले दिखाई नहीं देता था। (Indian Army Social Outreach)

कई हालियां संघर्षों में यह देखा गया है कि गलत जानकारी सच से पहले पहुंचती है। ऐसे माहौल में प्रभावी कम्युनिकेशन खुद एक तरह का सुरक्षा कवच बन जाता है। सेना की यह नई सोशल मीडिया रणनीति सिर्फ दिखावा नहीं है, बल्कि युद्ध की बदलती प्रकृति के अनुसार खुद को ढालने का एक महत्वपूर्ण कदम है। यह भविष्य की सेना की तैयारियों का हिस्सा है, जिसमें फिजिकल वारफेयर, साइकोलॉजिकल वारफेयर एंड डिजिटल वारफेयर तीनों एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। (Indian Army Social Outreach)

भारत की युवा आबादी दुनिया की सबसे बड़ी है, और सेना चाहती है कि यह पीढ़ी सशक्त, जागरूक और सही जानकारी से लैस रहे। सेना की नई डिजिटल पहलों में यह बात लगातार दिखाई देती है कि वह युवाओं को संरक्षण नहीं, बल्कि जानकारी देकर सक्षम बनाना चाहती है। आधुनिक युद्ध में भरोसे की लड़ाई सबसे बड़ी होती है और सोशल मीडिया आज उस भरोसे की पहली लाइन बन चुका है। (Indian Army Social Outreach)