📍भुज | 1 Oct, 2025, 10:21 PM
Raksha Mantri at Bhuj: विजयदशमी की पूर्व संध्या पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुजरात के भुज में सेना के जवानों के साथ परंपरागत ‘बराखाना’ में शामिल होकर उनके साथ बातचीत में शामिल हुए। इस मौके पर उन्होंने सैनिकों को संबोधित करते हुए बदलते समय और मुश्किल चुनौतियों पर पर चर्चा की और उनसे नई तकनीक को अपनाने, नियमित ट्रेनिंग को प्राथमिकता देने और हर परिस्थिति में तैयार रहने का आह्वान किया।
रक्षा मंत्री ने कहा कि आज की दुनिया बेहद तेजी से बदल रही है। तकनीक का स्वरूप लगातार बदल रहा है। जो चीज कुछ समय पहले आधुनिक लगती थी, वह आज अप्रासंगिक हो रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पारंपरिक खतरों के साथ-साथ आतंकवाद, साइबर हमले, ड्रोन युद्ध और सूचना युद्ध जैसे नए खतरे भी सामने आ रहे हैं। इन खतरों से केवल हथियारों के बल पर नहीं निपटा जा सकता। उन्होंने कहा कि मानसिक मजबूती, अपडेटेड जानकारी और परिस्थितियों के अनुसार तुरंत ढलने की क्षमता भी उतनी ही जरूरी है।
विजयदशमी की शुभकामनाएं देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि यह पर्व अच्छाई की बुराई पर, सत्य की असत्य पर और न्याय की अन्याय पर विजय का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस पावन अवसर पर भुज की धरती पर सैनिकों के साथ समय बिताना उनके लिए गर्व की बात है। Raksha Mantri at Bhuj धरती हमेशा से साहस और पराक्रम के लिए जानी जाती रही है।
सैनिकों को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा, “युद्ध केवल हथियारों से नहीं जीते जाते, बल्कि अनुशासन, मनोबल और निरंतर तैयारियों से जीते जाते हैं। नई तकनीकों को अपनाइए, ट्रेनिंग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाइए और हर परिस्थिति के लिए खुद को तैयार रखिए। आज की दुनिया में वही सेना अजेय रहती है, जो लगातार सीखती है और नई चुनौतियों के अनुसार खुद को ढालती है।”
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार सैनिकों के कल्याण, भारतीय सेनाओं के आधुनिकीकरण, वेटरंस के सम्मान और सैनिक परिवारों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उनके शब्दों में, “हमारे सैनिकों की भलाई किसी भी कीमत पर समझौते योग्य नहीं है।”
रक्षा मंत्री ने यह भी दोहराया कि एक मजबूत, आत्मनिर्भर और विकसित भारत का सपना हमारे सैनिकों के कंधों पर टिका है। उनकी निष्ठा और बलिदान के कारण ही यह सपना हर दिन साकार हो रहा है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी भारत की सदी है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। रक्षा मंत्री ने विश्वास जताया कि आर्म्ड फोर्सेस की प्रतिबद्धता के दम पर भारत जल्द ही दुनिया की सबसे सक्षम सेनाओं में शामिल होगा।
Raksha Mantri at Bhuj की धरती की वीरता को याद करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि यह केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि साहस और संघर्ष की गाथा है। उन्होंने 1971 के युद्ध, 1999 के कारगिल संघर्ष और 2001 के विनाशकारी भूकंप का जिक्र करते हुए कहा कि भुज ने हमेशा राख से उठने वाले पौराणिक फीनिक्स पक्षी की तरह खुद को साबित किया है। उन्होंने कहा, “कच्छ की मिट्टी के कणों में यहां के लोगों और सैनिकों का साहस और अदम्य जज्बा बसता है।”
इस अवसर पर चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल उपेन्द्र द्विवेदी, साउदर्न कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ और 12 कोर के कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल आदित्य विक्रम सिंह राठी भी मौजूद रहे।
Raksha Mantri at Bhuj की लगातार चर्चा हो रही है क्योंकि Bhuj की धरती हमेशा ही याद की जाती हैं।



