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भारतीय नेवल डिप्लोमेसी का कमाल, जब विशाखापत्तनम में एक साथ दिखेंगे 75 देश और उनके 90 से ज्यादा जंगी जहाज

फरवरी 2026 में आयोजित IFR और मिलन अभ्यास में इस साल में ऐसा पहली बार होगा, जब कई देश अपनी युद्धपोतों के साथ भारतीय नौसेना के बुलावे पर एक ही समुद्र में एक साथ अभ्यास करेंगे, एक-दूसरे को सलामी देंगे और साझा सुरक्षा पर बातचीत करेंगे...

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📍नई दिल्ली | 9 Feb, 2026, 12:15 PM

IFR Milan 2026: एक तरफ जहां पश्चिमी एशिया में ईरान और अमेरिका तनावपूर्ण संबंध बने हुए हैं, तो वहीं रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते पूरी दुनिया दो धड़ों में बंटी हुई है। लेकिन इसी दुनिया में, पश्चिमी एशिया से तकरीबन तीन हजार किलोमीटर दूर, हिंद महासागर के किनारे बसे भारत के विशाखापत्तनम में एक बिल्कुल अलग तस्वीर देखने को मिलने वाली है। यहां दुनिया के 75 देश एक साथ एक ही मंच पर दिखने वाले हैं। जहां दुनिया के कई धुरविरोधी देश कुछ दिन ही सही, लेकिन एक-दूसरे के ‘दोस्त’ बन कर रहेंगे। यह सब संभव हुआ है भारतीय नौसेना की डिप्लोमेसी के चलते।

फरवरी 2026 में आयोजित IFR और मिलन अभ्यास में इस साल में ऐसा पहली बार होगा, जब कई देश अपनी युद्धपोतों के साथ भारतीय नौसेना के बुलावे पर एक ही समुद्र में एक साथ अभ्यास करेंगे, एक-दूसरे को सलामी देंगे और साझा सुरक्षा पर बातचीत करेंगे। भारत ने इन इवेंट्स में उन देशों को आमंत्रित किया है, जो मुख्य रूप से इंडियन ओशन और इंडो-पैसिफिक में भारत के सहयोगी हैं। देखा जाए तो यह केवल एक मिलिट्री प्रोग्राम नहीं है, बल्कि भारत की मजबूत और संतुलित नेवल डिप्लोमेसी की सबसे बड़ी मिसाल है। (IFR Milan 2026)

हिंद महासागर से सटे विशाखापत्तनम में 15 फरवरी से 25 फरवरी तक तीन बड़े मेगा इवेंट इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (आईएफआर) 2026, मल्टीलेटरल नेवल एक्सरसाइज मिलन 2026, और इंडियन ओशन नेवल सिंपोजियम (आईओएनएस) कॉन्क्लेव ऑफ चीफ्स का आयोजन हो रहा है। ये तीनों कार्यक्रम एक ही शहर, एक ही समय और एक ही उद्देश्य के साथ आयोजित हो रहे हैं। (IFR Milan 2026)

IFR Milan 2026: विशाखापत्तनम से पूरी दुनिया के लिए संदेश

फरवरी 2026 में विशाखापत्तनम सिर्फ एक बंदरगाह शहर नहीं रहेगा। यह भारत की समुद्री कूटनीति की राजधानी बन जाएगा। यही वह शहर है, जहां भारतीय नौसेना का ईस्टर्न नेवल कमांड स्थित है और जहां से बंगाल की खाड़ी से लेकर पूरे हिंद महासागर पर नजर रखी जाती है।

15 फरवरी से 25 फरवरी तक चलने वाले इन कार्यक्रमों में दुनिया के दर्जनों देशों के युद्धपोत, हजारों नौसैनिक अधिकारी और सैकड़ों डिफेंस एक्सपर्ट्स एक साथ जुटेंगे। समुद्र में युद्धपोतों की कतारें होंगी, तो जमीन पर कूटनीतिक बैठकों और सेमिनारों का दौर चलेगा। (IFR Milan 2026)

इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू 2026: महासागरों के माध्यम से एकजुटता

इस बार इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू की थीम है यूनाइटेड थ्रो ओशन्स यानी महासागरों के माध्यम से एकजुटता। यह किसी भी देश की नौसेना के लिए सबसे प्रतिष्ठित कार्यक्रमों में से एक माना जाता है। इसमें राष्ट्रपति या राष्ट्राध्यक्ष नौसेना के जहाजों का निरीक्षण करते हैं। लेकिन भारत के लिए यह सिर्फ ताकत दिखाने का मंच नहीं है, बल्कि भरोसा और पारदर्शिता दिखाने का जरिया भी है।

18 फरवरी को भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बंगाल की खाड़ी में भारतीय और विदेशी युद्धपोतों का निरीक्षण करेंगी। इस दौरान उन्हें गन सैल्यूट दिया जाएगा। भारत का स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत इस इवेंट का मुख्य आकर्षण होगा। यह भारत की “बिल्डर्स नेवी” यानी खुद बनाने वाली नौसेना की पहचान है।

खास बात यह है कि इस मेगा इवेंट में हिस्सा लेने वाला कोई भी देश दुश्मन या दोस्त के तौर पर नहीं, बल्कि एक समुद्री साझेदार के तौर पर मौजूद रहेगा।

बता दें कि भारत अब तक दो बार इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू की मेजबानी कर चुका है। पहला आयोजन साल 2001 में मुंबई में हुआ था। यह भारत के गणतंत्र की स्वर्ण जयंती के अवसर पर आयोजित किया गया था और देश का पहला आईएफआर था। इसमें 29 देशों की नौसेनाओं ने हिस्सा लिया था और कुल 97 जहाज इस आयोजन में शामिल हुए, जिनमें 20 देशों के जहाज थे और 24 विदेशी युद्धपोत भी शामिल थे। इसके अलावा 54 सैन्य विमान फ्लाईपास्ट में शामिल हुए थे। उस समय यह आयोजन भारत की बढ़ती समुद्री क्षमता और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी का बड़ा प्रदर्शन माना गया था।

इसके बाद दूसरा और अब तक का सबसे बड़ा आयोजन साल 2016 में विशाखापत्तनम में हुआ। इसमें लगभग 52 देशों की नौसेनाओं ने हिस्सा लिया था। इस आयोजन में करीब 95 से 100 जहाज शामिल हुए, जिनमें 24 विदेशी युद्धपोत और बाकी भारतीय नौसेना के जहाज थे। 50 से अधिक विदेशी नौसेनाओं के प्रतिनिधिमंडल भी इसमें पहुंचे थे। इसमें अमेरिका, रूस, चीन, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे कई बड़े देशों की नौसेनाएं शामिल हुई थीं। 2016 का आईएफआर अब तक का सबसे बड़ा आयोजन माना जाता है, जहां दुनिया भर से नौसेनाएं भारत के साथ समुद्री सहयोग के लिए एक मंच पर आई थीं। (IFR Milan 2026)

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मिलन 2026 में दिखेगा भाईचारा, सहयोग और तालमेल 

अगर आईएफआर को नौसेना की परेड कहा जाए, तो मिलन अभ्यास उसकी असली परीक्षा है। इस बार मिलन एक्सरसाइज की थीम है भाईचारा, सहयोग, तालमेल। इस अभ्यास की शुरुआत 1995 में पोर्ट ब्लेयर से हुई थी, जब इसमें सिर्फ चार-पांच देश शामिल थे। आज यह दुनिया के सबसे बड़े मल्टीलेटरल नेवल एक्सरसाइज में से एक बन चुकी है। मिलन 2026 के लिए 135 से अधिक देशों को निमंत्रण भेजा गया है।

मिलन 2026 में 40 से ज्यादा देशों की नौसेनाएं हिस्सा ले रही हैं। इस अभ्यास का मकसद सिर्फ वॉर एक्सरसाइज करना नहीं है, बल्कि यह देखना है कि अलग-अलग देशों की नौसेनाएं आपदा, समुद्री खतरे और मानवीय संकट के समय एक साथ कैसे काम कर सकती हैं। यह अभ्यास दो चरणों सी फेज और हार्बर फेज में होगा। हार्बर फेज में सेमिनार, प्रोफेशनल बातचीत, सांस्कृतिक कार्यक्रम और खेल होते हैं। जबकि सी फेज में संयुक्त नौसैनिक अभ्यास जैसे- एंटी-सबमरीन वॉरफेयर, एयर डिफेंस, सर्च एंड रेस्क्यू, और ह्यूमैनिटेरियन असिस्टेंस एंड डिजास्टर रिलीफ जैसे अभ्यास किए जाएंगे।

मिलन 2024 भी विशाखापत्तनम में आयोजित हुआ था। इसमें लगभग 40 से ज्यादा ने हिस्सा लिया था। करीब 15 से 20 देशों ने अपने युद्धपोत या विमान भेजे, जबकि बाकी देशों ने अपने प्रतिनिधि या नौसेना प्रमुख भेजे। इस एडिशन में 35 से ज्यादा युद्धपोत और पनडुब्बियां तथा 50 से अधिक विमान शामिल हुए थे।

वहीं मिलन 2022 में करीब 39 से 42 देशों ने भाग लिया था। 13 देशों ने अपने युद्धपोत भेजे थे और कुल 39 विदेशी डेलीगेशन शामिल हुए थे। यह कोविड महामारी के बाद पहला बड़ा आयोजन था।

जबकि मिलन 2018 में 17 देश शामिल हुए थे। मिलन 2014 में भी 17 देशों ने भाग लिया था और उस समय तक वह सबसे बड़ा एडिशन माना गया था। 2010 और 2012 के संस्करणों में भी करीब 16 विदेशी देश शामिल हुए थे। (IFR Milan 2026)

IFR Milan 2026 Indian Naval Diplomacy
IONS Conclave (File Photo)

आईओएनएस कॉनक्लेव में कई देशों के नेवी चीफ शामिल

विशाखापत्तनम में 20 फरवरी को 9वें इंडियन ओशन नेवल सिंपोजियम कॉनक्लेव ऑफ चीफ्स का आयोजन होगा। इसमें 42 देशों के नौसेना प्रमुख शामिल होने की उम्मीद है। सूत्रों के मुताबिक इस आयोजन में ईरानी नौसेना के कमांडर रियर एडमिरल शाहराम ईरानी भी शामिल हो सकते हैं। हालांकि ईरान पिछले आईओएनएस इवेंट्स में नियमित रूप से भाग लेता रहा है।

आईओएनएस के 25 मुख्य सदस्य देश हिंद महासागर क्षेत्र के तटीय देश हैं। इन्हें चार हिस्सों में बांटा गया है-दक्षिण एशिया, पश्चिम एशिया, पूर्वी अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया व ऑस्ट्रेलिया क्षेत्र। इन सदस्य देशों में भारत, बांग्लादेश, मालदीव, श्रीलंका, सेशेल्स, ईरान, ओमान, सऊदी अरब, यूएई, केन्या, मॉरीशस, दक्षिण अफ्रीका, फ़्रांस (रीयूनियन), मोजाम्बिक, तंजानिया, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, सिंगापुर, थाईलैंड, तिमोर, कोमोरोस, जिबूती, मेडागास्कर और अन्य देश शामिल हैं। (IFR Milan 2026)

इसके अलावा कुछ देश ऑब्जर्वर के रूप में जुड़े हैं, इनमें जर्मनी, इटली, यूके, जापान, रूस, स्पेन, नीदरलैंड और दक्षिण कोरिया शामिल हैं। कुछ अन्य देशों को विशेष निमंत्रण दिया गया है। इनमें सदस्य और ऑब्जर्वर देशों में पाकिस्तान, चीन और तुर्किए भी शामिल हैं, लेकिन उन्हें इस मेगा इवेंट से बाहर रखा गया है।

इस बैठक में समुद्री सुरक्षा, मानवीय सहायता और आपदा राहत, समुद्री डकैती और साइबर हमलों जैसी चुनौतियों, सूचना साझा करने की व्यवस्था, ड्रोन और मानव रहित प्रणालियों के उपयोग और क्षेत्रीय सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा होगी। आईओएनएस का मुख्य उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में साझा चुनौतियों से मिलकर निपटना है। वहीं इस दौरान भारत 2026 से 2028 तक के लिए आईओएनएस की चेयरमैनशिप भी संभालेगा। हालांकि इससे पहले भारत 2008 से 2010 तक चेयरमैन रह चुका है। (IFR Milan 2026)

भारत की नेवल डिप्लोमेसी की बड़ी जीत

इस पूरे आयोजन की सबसे दिलचस्प तस्वीर तब बनेगी, जब कई धुर विरोधी देश रूस, ईरान और अमेरिका के युद्धपोत एक साथ एक ही जगह पर दिखाई देंगे। पश्चिमी एशिया में जहां ईरान और अमेरिका एक-दूसरे के धुरविरोधी हैं, तो यूक्रेन युद्ध के बाद रूस और अमेरिका दोनों देशों के रिश्ते बेहद खराब हैं। लेकिन विशाखापत्तनम में ये सभी देश भारत के मंच पर साथ होंगे।

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वहीं भारत के लिए सिर्फ बड़े देश ही अहम नहीं हैं। बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों की मौजूदगी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। बांग्लादेश नौसेना भी अपने फ्रिगेट के साथ इस आयोजन का हिस्सा बन रही है। भले ही भारत बांग्लादेश के बीच राजनीतिक और राजनयिक संबंध कितने खराब हों, लेकिन नेवल डिप्लोमेसी आज भी उतनी ही मजबूत है, जितनी पहले हुआ करती थी। बंगाल की खाड़ी में भारत और बांग्लादेश की साझा जिम्मेदारियां हैं, जिनमें चक्रवात, समुद्री डकैती, अवैध मछली पकड़ना और आपदा राहत शामिल हैं। ऐसे में मिलन और आईएफआर जैसे मंच दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करते हैं। (IFR Milan 2026)

इन तीनों कार्यक्रमों में ईरान और अमेरिका, रूस और अमेरिका, छोटे और बड़े देशों को लेकर एक साथ बुला कर भारत ने साफ कर दिया है कि वह किसी एक गुट का हिस्सा नहीं, बल्कि सभी के साथ मिलकर चलने वाला देश है। जहां दुनिया टकराव और ध्रुवीकरण की ओर बढ़ रही है, वहीं भारत समुद्र के रास्ते संवाद और सहयोग की राह दिखा रहा है। भारत ने यह दिखा दिया है कि उसकी नौसेना राजनीति से ऊपर उठकर साझा समुद्री सुरक्षा की बात करती है। यही भारत की सबसे बड़ी ताकत है। (IFR Milan 2026)

विशाखापत्तनम में होगा नेवी का एयर शो

इस मेगा इवेंट के दौरान 19 फरवरी को विशाखापत्तनम में ही आयोजित आरके बीच पर इंटरनेशल सिटी परेड में भारतीय नौसेना अपनी एयर पावर का डेमोन्स्ट्रेशन भी करेगी। जो मुख्य रूप से ऑपरेशनल डेमोन्स्ट्रेशन का हिस्सा है। भारतीय नौसेना के लगभग 45 एयरक्राफ्ट इस पूरे आयोजन में भाग ले रहे हैं, जो समुद्र और आसमान दोनों में उसकी तैयारियों और क्षमताओं को दिखाएंगे।

एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत से मिग-29के फाइटर जेट्स उड़ान भरेंगे। ये जेट फॉर्मेशन फ्लाइट्स और एयर डिफेंस डेमो में हिस्सा लेंगे, जिससे समुद्र के ऊपर नौसेना की मारक क्षमता का प्रदर्शन होगा।इसमें भारतीय नौसेना के एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर्स लाइव डिस्प्ले करेंगे। इस दौरान कुछ फॉर्मेशंस भी दिखाई जाएंगी। जिनमें एयरक्राफ्ट फॉर्मेशन जैसे एरोहेड और डायमंड, हेलीकॉप्टर मैन्यूवर्स, और सिमुलेटेड ऑपरेशन्स (जैसे एंटी-सबमरीन वारफेयर या सर्च एंड रेस्क्यू) शामिल हैं।

वहीं, हेलीकॉप्टर श्रेणी में स्वदेशी एएलएच ध्रुव, एमएच-60आर सीहॉक भी भाग लेगा, जो एंटी-सबमरीन ऑपरेशन्स और मल्टी-रोल मिशनों के लिए इस्तेमाल होता है। वहीं कामोव केए-31 एयरबोर्न अर्ली वार्निंग की भूमिका निभाएगा और दूर से आने वाले खतरों की जानकारी देगा। इसके अलावा विमानों में लंबी दूरी की समुद्री गश्त के लिए बोइंद पी8आई पोसीडॉन, डोर्नियर 228, आईएआई सर्चर या आईएआई हेरॉन जैसे यूएवी भी शामिल हो सकते हैं। (IFR Milan 2026)

75 से ज्यादा देश ले रहे हैं हिस्सा

इन तीनों आयोजनों में 75 से ज्यादा देश और 4000 से ज्यादा डेलीगेट्स हिस्सा ले रहे हैं। जिनमें ईरान, अमेरिका, रूस और बांग्लादेश जैसे देश भी शामिल हैं। इस आयोजन में अभी तक भारत के अलावा 67 जहाजों के अलावा विदेशी देशों के 22 युद्धपोत और प्रतिनिधि भी हिस्सा ले रहे हैं। भारतीय नौसेना की ओर से एयरक्राफ्ट कैरियर, डिस्ट्रॉयर, फ्रिगेट, सबमरीन और अन्य युद्धपोत शामिल किए गए हैं। साथ ही कई मिलिट्री एयरक्राफ्ट भी इस कार्यक्रम का हिस्सा हैं।

भारत की तरफ से प्रमुख एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत (R11), डिस्ट्रॉयर आईएनएस चेन्नई (D65), आईएनएस विशाखापत्तनम (D66), आईएनएस मैसूर (D60), आईएनएस मुंबई (D62), आईएनएस राणा (D52) और आईएनएस रणविजय (D55) शामिल हैं। फ्रिगेट कैटेगरी में आईएनएस तरकश (F50), आईएनएस तमाल (F71) और आईएनएस नीलगिरि (F33) भी भाग ले रहे हैं। इनके अलावा कई अन्य युद्धपोत और पनडुब्बियां भी हैं। (IFR Milan 2026)

सबमरींस की बात करें, तो इन आयोजनों में भारत की तरफ से सिंधुघोष क्लास (प्रोजेक्ट 877EKM) यानी किलो क्लास की तीन पनडुब्बियां हिस्सा ले रही हैं। इनमें आईएनएस सिंधुकेसरी (S60), आईएनएस शंकुल (S47), आईएनएस सिंधुकीर्ति (S61) शामिल हैं।

इनमें आईएनएस सिंधुकेसरी 1989 में कमीशन हुई थी, जो हाल ही में रिफिट से गुजरी है। जिसमें नए सोनार और वेपन सिस्टम्स लगाए गए हैं। आईएफआर में फ्लीट रिव्यू के दौरान यह सबमर्ज्ड या सरफेस पोजीशन में हिस्सा लेगी, जो भारतीय नौसेना की अंडरवॉटर कैपेबिलिटी दिखाएगी। वहीं, मिलन के सी फेज में एंटी-सबमरीन एक्सरसाइज में यह शामिल होगी।

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वहीं, 1992 में कमीशन हुई आईएनएस शंकुल सबमरीन स्टेल्थ फीचर्स के लिए जानी जाती है और यह मिसाइल कैपेबल है। आईएफआर में 18 फरवरी को प्रेसिडेंशियल रिव्यू के दौरान यह फॉर्मेशन में रहेगी। जबकि मिलन में इंटरऑपरेबिलिटी ड्रिल्स (जैसे सर्च एंड रेस्क्यू या एंटी सबमरीन वॉरफेयर) में अपना जलवा बिखेरेगी।

आईएनएस सिंधुकीर्ति की बात करें, तो यह 1990 में कमीशन हुई थी। यह भारत की पहली सबमरीन है जो पूरी तरह से भारत में विशाखापत्तनम स्थित हिंदुस्तान शिपयार्ड में रिफिट हुई है। यह आईएफआर में डिस्प्ले का हिस्सा बनेगी, और मिलन अभ्यास के दौरान विदेशी नौसेनाओं के साथ कोऑर्डिनेटेड ऑपरेशंस में शामिल होगी। (IFR Milan 2026)

ये विदेशी जहाज बन रहे हैं हिस्सा

आईएफआर और मिलन एक्सरसाइज में ईरान के तीन शिप IRINS देना, बुशहर और लवन हिस्सा ले रहे हैं। इनमें देना माउज-क्लास की स्वदेशी फ्रिगेट है, जिसे ईरान ने अपने देश में डेवलप किया है, जो एंटी-शिप और एयर डिफेंस क्षमताओं से लैस है। यह फ्रिगेट आमतौर पर पर्शियन गल्फ और हिंद महासागर क्षेत्र में ऑपरेट करती है। वहीं, बुशहर कामन-क्लास की फास्ट अटैक क्राफ्ट या कोरवेट श्रेणी की मिसाइल बोट है। इसकी खासियत इसकी तेज रफ्तार है। यह छोटे आकार की होने के बावजूद एंटी-शिप मिसाइलों से लैस है। जबकि लवन एक ऑक्जिलियरी या सपोर्ट वेसल है। इसका मुख्य काम लॉजिस्टिक सपोर्ट देना होता है, जैसे समुद्र में ईंधन, रसद और अन्य जरूरी सामग्री की सप्लाई करना है। (IFR Milan 2026)

वहीं, रूस की नौसेना भी इस बार मिलन 2026 में सक्रिय भागीदारी कर रही है। रूसी पैसिफिक फ्लीट से आने वाला आरएफएस मार्शल शापोशनिकोव (543) एक उडालॉय-क्लास डेस्ट्रॉयर/फ्रिगेट है, जिसे पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता और लंबी दूरी के ऑपरेशन्स के लिए जाना जाता है। इसके साथ आरएफएस बोरिस बुटोमा (P234) भी शामिल है, जो एक ऑक्जिलियरी या रिप्लेनिशमेंट शिप है और समुद्र में तैनात युद्धपोतों को ईंधन, रसद और अन्य जरूरी सपोर्ट उपलब्ध कराने का काम करता है।

जबकि अमेरिकी नौसेना की तरफ से इस बार मिलन और इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में यूएसएस पिंकनी (DDG 91) हिस्सा ले रहा है। यह आर्ले बर्क-क्लास गाइडेड-मिसाइल डेस्ट्रॉयर है, जिसे आधुनिक हथियार प्रणालियों और मजबूत एयर डिफेंस क्षमता के लिए जाना जाता है। इसकी मौजूदगी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिका की सक्रिय भूमिका को दर्शाती है। जो भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती नौसैनिक साझेदारी और रणनीतिक सहयोग का मजबूत संदेश है। (IFR Milan 2026)

इसके अलावा बांग्लादेश नौसेना का प्रमुख युद्धपोत बीएनएस सोमुद्र अविजान (F29) इस बार विशाखापत्तनम में आयोजित आईएफआर और मिलन 2026 में हिस्सा ले रहा है। यह बांग्लादेश नेवी का एक अहम पेट्रोल फ्रिगेट है, जो लंबे समुद्री गश्त और सुरक्षा अभियानों के लिए तैनात किया जाता है। यह जहाज मूल रूप से अमेरिका के कोस्ट गार्ड का हाई एंड्यूरेंस कटर रूश था। इसे हैमिल्टन-क्लास कटर के रूप में बनाया गया था, जिसे बाद में बांग्लादेश नौसेना ने 2016 में पेट्रोल फ्रिगेट के तौर पर अपने बेड़े में शामिल किया था।

इन जहाजों के अलावा तो ऑस्ट्रेलिया से HMAS वाररामुंगा, इंडोनेशिया से केआरआई बंग तोमो, जापान की ओर से जेएस युदाची और मलेशिया की ओर से केडी श्री इंद्र शक्ति, मालदीव से सीजीएस हुरावी, म्यांमार से यूएमएस किंग आंग जेया, ओमान से आरएनओवी साध और फिलिपींस से बीआरपी मिगुएल मालवर, दक्षिण कोरिया की नौसेना ROKS गैंग गाम चान शिप के साथ पहुंच रही है। इसके अलावा सेशेल्स से एससीजीएस जोरोस्टर, दक्षिण अफ्रीका से एसएएस अमाटोला और श्रीलंका से एसएलएनएस सागर और एसएलएनएस नंदीमित्रा हिस्सा ले रहे हैं। इस कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं। (IFR Milan 2026)

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  • हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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