📍नई दिल्ली | 13 Jan, 2026, 10:41 PM
Zorawar Light Tank Trials: भारतीय सेना के स्वदेशी लाइट वेट टैंक जोरावर को लेकर सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने अहम जानकारी साझा की है। उन्होंने साफ किया कि जोरावर टैंक अभी ट्रायल और सुधार के चरण में है। सेना प्रमुख ने बताया कि जोरावर टैंक का पहला प्रोटोटाइप पहले ही हाई एल्टीट्यूड इलाके में तैनात किया जा चुका है, जहां इसके शुरुआती परीक्षण किए गए थे। वहीं सेना में यह 2029 तक ही शामिल हो सकता है।
Zorawar Light Tank Trials: टैंक में अभी भी हैं कई खामियां
रक्षा समाचार के पूछे गए सवाल के जवाब में सेना प्रमुख ने बताया कि यह पहली बार था जब किसी स्वदेशी लाइट टैंक को इतने अधिक ऊंचाई वाले इलाके में सीधे तैनात किया गया। हाई एल्टीट्यूड में तैनाती के दौरान कुछ तकनीकी कमियां सामने आईं, क्योंकि ऊंचाई पर मौसम, ऑक्सीजन की कमी और तापमान जैसे नए फैक्टर्स काम करते हैं। इन तकनीकी कमियों को दूर करने के लिए टैंक को नीचे लाना जरूरी होता है, लेकिन फिलहाल पहला प्रोटोटाइप नीचे लाना संभव नहीं है। (Zorawar Light Tank Trials)
What’s next for India’s battlefield tech? Responding to Raksha samachar, Army Chief General Upendra Dwivedi outlined developments on ramjet artillery shells and the Zorawar light tank at the annual press conference #armychief #indianarmy #COAS #ramjet #zorawartank @adgpi… pic.twitter.com/hE67IdtwDM
— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) January 13, 2026
इसी वजह से सेना और डीआरडीओ ने मिलकर जोरावर टैंक का दूसरा प्रोटोटाइप तैयार किया है। यह दूसरा प्रोटोटाइप गुजरात के हजीरा में बनाया गया है और इसे अब पश्चिमी सीमा की ओर ट्रायल के लिए भेजा जा रहा है। सेना प्रमुख ने कहा कि जोरावर टैंक का बेसिक प्रोटोटाइप काफी हद तक तैयार हो चुका है, लेकिन इसकी मेजर असेंबली से जुड़ी कुछ कमियों को ठीक करने में अभी समय लगेगा। (Zorawar Light Tank Trials)
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस वजह से जोरावर टैंक के लिए किसी सटीक टाइमलाइन को तय करना आसान नहीं है। हालांकि, सेना प्रमुख ने बताया कि अब तक जो प्रगति हुई है, वह संतोषजनक है और इस प्रोजेक्ट पर लगातार काम चल रहा है। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने उम्मीद जताई कि 2029 के आसपास टैंक को भारतीय सेना में शामिल किया जा सकता है। (Zorawar Light Tank Trials)
डीआरडीओ चीफ डॉ. समीर वी. कामत ने हाल ही में कहा था कि 2026 में इंडियन आर्मी के यूजर ट्रायल्स शुरू होंगे। ये ट्रायल्स 12-18 महीने तक चल सकते हैं, जिसमें समर, विंटर, हाई-एल्टीट्यूड और विभिन्न टेरेंस में टैंक की परफॉर्मेंस टेस्ट की जाएगी। डीआरडीओ का टारगेट है कि अगर यूजर ट्रायल्स सफल रहे, तो टैंक का इंडक्शन 2027 तक शुरू हो जाएगा। शुरुआती बैच में 59 टैंक्स बनाए जाएंगे। सेना को कुल जरूरत 354 टैंक्स की है, जिसमें बाकी 295 टैंक्स बाद में मेक-1 कैटेगरी के तहत कॉम्पिटिटिव टेंडर से बनाए जाएंगे। (Zorawar Light Tank Trials)
जोरावर टैंक को खासतौर पर हाई एल्टीट्यूड और पहाड़ी इलाकों के लिए डिजाइन किया गया है। यह टैंक उन इलाकों में तैनाती के लिए बनाया गया है, जहां भारी टैंक जैसे टी-72 और टी-90 को पहुंचाना मुश्किल होता है। इसका हल्का वजन और मजबूत सस्पेंशन सिस्टम इसे ऊंचे पहाड़ों, बर्फीले इलाकों और संकरे रास्तों पर काम करने में सक्षम बनाता है। (Zorawar Light Tank Trials)
जोरावर टैंक को डीआरडीओ और लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) ने मिलकर बनाया है। इसमें 105 मिलीमीटर की तोप, आधुनिक सेंसर, नाइट विजन सिस्टम और एडवांस इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम लगाए गए हैं। यह टैंक ड्रोन कनेक्टिविटी के साथ भी काम कर सकता है, जिससे इसे दुश्मन की गतिविधियों की रियल-टाइम जानकारी मिलती है। (Zorawar Light Tank Trials)
सेना प्रमुख ने कहा कि जोरावर टैंक के विकास में जो भी तकनीकी चुनौतियां सामने आ रही हैं, उन्हें चरणबद्ध तरीके से दूर किया जा रहा है। टैंक के दूसरे प्रोटोटाइप में इंजन, सस्पेंशन और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से जुड़े कई सुधार किए गए हैं, ताकि यह अलग-अलग मौसम और इलाकों में बेहतर प्रदर्शन कर सके।
भारतीय सेना के लिए जोरावर टैंक एक अहम स्वदेशी प्लेटफॉर्म है, जिसे देश की भौगोलिक जरूरतों के हिसाब से तैयार किया जा रहा है। (Zorawar Light Tank Trials)



