📍चंडीगढ़ | 10 Jan, 2026, 10:23 PM
Aatmanirbharta in Defence: रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह का कहना है कि भारत की रक्षा तैयारियों और औद्योगिक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में आत्मनिर्भरता अब सिर्फ एक नीति नहीं, बल्कि देश की जरूरत बन चुकी है। चंडीगढ़ में आयोजित डिफेंस स्किलिंग कॉन्क्लेव के उद्घाटन के दौरान उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भरता भारत की लॉन्ग टर्म स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी यानी दीर्घकालिक रणनीतिक स्वतंत्रता के लिए बेहद जरूरी है।
Aatmanirbharta in Defence: देश में बन मजबूत डिफेंस इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम
रक्षा सचिव ने कहा कि भारत इस समय अपने रक्षा और औद्योगिक सफर के एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। बीते एक दशक में डिफेंस प्रोडक्शन के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पहले जहां भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर था, वहीं अब देश में एक मजबूत डिफेंस इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम खड़ा हो चुका है। इस इकोसिस्टम में डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स, प्राइवेट इंडस्ट्री, एमएसएमई और स्टार्टअप्स मिलकर काम कर रहे हैं। यह कॉन्क्लेव पंजाब सरकार, सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स और कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री के सहयोग से आयोजित किया गया। (Aatmanirbharta in Defence)
उन्होंने बताया कि आत्मनिर्भर भारत के विजन के तहत सरकार ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और नीतिगत सुधारों पर खास ध्यान दिया है। इसका नतीजा यह हुआ है कि देश में स्वदेशी डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग को जबरदस्त बढ़ावा मिला है। आज भारत में यूएवी, सेंसर्स जैसे प्लेटफॉर्म से लेकर आर्टिलरी गन्स, आर्मर्ड व्हीकल्स और मिसाइल सिस्टम जैसे जटिल हथियार सिस्टम तक देश में ही बनाए जा रहे हैं। (Aatmanirbharta in Defence)
राजेश कुमार सिंह ने बताया कि अब तक 462 कंपनियों को 788 से ज्यादा इंडस्ट्रियल लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं। इससे डिफेंस प्रोडक्शन में प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी तेजी से बढ़ी है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत के रक्षा निर्यात को भी ऐतिहासिक उछाल मिला है। साल 2025 में रक्षा निर्यात 23,162 करोड़ रुपये को पार कर गया, जो 2014 की तुलना में करीब 35 गुना बढ़ोतरी को दर्शाता है। (Aatmanirbharta in Defence)
रक्षा सचिव ने स्वदेशी प्लेटफॉर्म्स के उदाहरण देते हुए कहा कि एलसीए तेजस, अस्त्र बियॉन्ड विजुअल रेंज मिसाइल, धनुष आर्टिलरी गन और आईएनएस विक्रांत जैसे प्लेटफॉर्म बताते हैं कि भारत में इंडस्ट्री, रिसर्च और स्किल्ड मैनपावर के बीच तालमेल लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने दोहराया कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक लक्ष्य नहीं है, बल्कि यह भारत को रणनीतिक रूप से स्वतंत्र बनाने की दिशा में जरूरी कदम है। (Aatmanirbharta in Defence)
उन्होंने यह भी कहा कि बदलती ग्लोबल सप्लाई चेन और तेजी से आगे बढ़ती टेक्नोलॉजी भारत के लिए बड़ी चुनौती के साथ-साथ बड़े मौके भी लेकर आई है। अगर भारत सही समय पर सही निवेश करता है, तो वह डिफेंस प्रोडक्शन में ग्लोबल हब बन सकता है।
मानव संसाधन की भूमिका पर जोर देते हुए रक्षा सचिव ने कहा कि असली रणनीतिक स्वतंत्रता सिर्फ हथियार बनाने से नहीं आती। इसके लिए स्किल्स, टेक्नोलॉजी और इंटेलेक्चुअल कैपिटल पर भी देश का नियंत्रण होना जरूरी है। उन्होंने बताया कि स्किल इंडिया मिशन के तहत नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन और डायरेक्टरेट जनरल ऑफ ट्रेनिंग जैसी संस्थाएं रक्षा और एयरोस्पेस सेक्टर की मौजूदा और भविष्य की स्किल जरूरतों की मैपिंग कर रही हैं। (Aatmanirbharta in Defence)
उन्होंने पीएम-सेतु प्रोग्राम का भी जिक्र किया, जिसका उद्देश्य अकादमिक संस्थानों, इंडस्ट्री और डिफेंस आरएंडडी के बीच की दूरी को खत्म करना है। पांच साल में 60,000 करोड़ रुपये के बजट वाले इस प्रोग्राम के तहत सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस, ड्यूल अप्रेंटिसशिप, एआई आधारित ट्रेनिंग टूल्स और अग्निवीरों व वेटरन्स को स्किलिंग से जोड़ने की योजना है।
राजेश कुमार सिंह ने पंजाब की भूमिका पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि पंजाब में रक्षा उत्पादन की बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं। अगर यहां एमएसएमई नेटवर्क, डिफेंस आरएंडडी से जुड़ाव और स्किल व टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जाए, तो राज्य एक बड़ा डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब बन सकता है। (Aatmanirbharta in Defence)
अग्निपथ स्कीम का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अग्निवीरों के रूप में देश को अनुशासित और तकनीकी रूप से ट्रेंड युवा मिल रहे हैं, जिन्हें डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और स्ट्रैटेजिक सेक्टर में आसानी से शामिल किया जा सकता है। (Aatmanirbharta in Defence)


