📍नई दिल्ली | 3 Nov, 2025, 4:59 PM
Exercise Poorvi Prachand Prahar: एक तरफ जहां पश्चिमी मोर्चे पर ट्राई सर्विसेज एक्सरसाइज त्रिशूल चल रही है, तो वहीं पूर्वी मोर्चे पर चीन से सटे उत्तरी अरुणाचल प्रदेश की दुर्गम पहाड़ियों में भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना मिलकर एक बड़ा संयुक्त सैन्य अभ्यास करने जा रही हैं। इस अभ्यास का नाम ‘पूर्वी प्रचंड प्रहार’ रखा गया है। यह एक्सरसाइज ईस्टर्न कमांड आयोजित कर रही है। यह अभ्यास नवंबर 2025 से शुरू हुआ है और इसका उद्देश्य तीनों सेनाओं के बीच समन्वय बढ़ाना और ऊंचाई वाले इलाकों में ऑपरेशन की तैयारी को परखना है।
यह अभ्यास मेचुका क्षेत्र में आयोजित किया जा रहा है, जो चीन की सीमा के पास बेहद संवेदनशील इलाका है। इस अभ्यास में सेना की स्पेशल फोर्सेस, ड्रोन सिस्टम, सटीक मारक हथियार और नेटवर्क-आधारित कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम का प्रयोग किया जा रहा है। यह अभ्यास 15 नवंबर तक चलेगा।
‘पूर्वी प्रचंड प्रहार’ का मुख्य उद्देश्य थलसेना, वायुसेना और नौसेना के बीच तालमेल को मजबूत करना है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तीनों सेनाएं एक साथ संयुक्त रूप से कार्रवाई कर सकें। इस संयुक्त युद्धाभ्यास में जमीनी, हवाई और समुद्री मोर्चों पर एक साथ अभियान चलाने की क्षमता को परखा जा रहा है।
🔥 #IndianArmy in Action!
The Sapta Shakti Command (South Western Command) successfully conducted a massive Integrated Fire & Manoeuvre Exercise — ‘Sentinel Strike’ from Oct 28–30 at the Mahajan Field Firing Ranges in Rajasthan’s Thar Desert.
💥 Showcasing precision, coordination… pic.twitter.com/amQiaqmsEI— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) November 3, 2025
अभ्यास के दौरान ऊंचे पहाड़ों और कठिन इलाकों में ऑपरेशन किए जाएंगे। ड्रोन सर्विलांस के जरिए दुश्मन की गतिविधियों पर निगरानी रखी जाएगी और सटीक स्ट्राइक सिस्टम के जरिए से टारगेट को निशाना बनाने का अभ्यास होगा। स्पेशल फोर्सेज के जवान भी ऊंचाई वाले इलाकों में छिपकर ऑपरेशन करने की रणनीतियों का प्रदर्शन करेंगे।
अभ्यास में भारतीय सेनाएं नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर का भी अभ्यास करेंगी। भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना एक साझा कमांड सेंटर से जुड़े रहेंगे। यह सिस्टम सुनिश्चित करेगा कि हर कार्रवाई रियल-टाइम में मॉनिटर और नियंत्रित की जा सके।
अभ्यास में ड्रोन सिस्टम, सैटेलाइट कम्युनिकेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कमांड मॉड्यूल और सटीक हथियार प्रणालियों का इस्तेमाल किया जाएगा। यह अभ्यास दिखाएगा कि सभी तकनीकों के जरिए भारतीय सेनाएं आधुनिक युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
मेचुका का इलाका समुद्र तल से लगभग 6,000 फीट की ऊंचाई पर है। यहां मौसम बेहद ठंडा रहता है औऱ इलाका बेहद दुर्गम है। ऐसे में तीनों सेनाओं का संयुक्त अभ्यास यह दिखाएगा है कि भारतीय सेनाएं हर भौगोलिक परिस्थिति में अभियान चलाने में सक्षम हैं।
रक्षा जनसंपर्क अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने बताया कि ‘पूर्वी प्रचंड प्रहार’ अभ्यास भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि इस अभ्यास का उद्देश्य सेनाओं के बीच समन्वय बढ़ाना, कमांड-कंट्रोल सिस्टम के असर की जांच करना और युद्ध के हालात तुरंत प्रतिक्रिया देना है।
रावत ने कहा कि इस अभ्यास की खास बात यह है कि यह पूरी तरह से ऊंचाई वाले इलाकों में आयोजित किया जा रहा है और इसमें स्पेशल फोर्सेज, ड्रोन सिस्टम और सटीक हथियारों का एक साथ इस्तेमाल हो रहा है।
इससे पहले भारतीय सेनाएं ‘भाला प्रहार’ (2023) और ‘पूर्वी प्रहार’ (2024) जैसे संयुक्त अभ्यास कर चुकी हैं। ‘पूर्वी प्रचंड प्रहार’ उसी सीरीज का अगला कदम है, जिसका उद्देश्य तीनों सेनाओं की संयुक्त युद्धक क्षमता को और मजबूत बनाना है।
