📍नई दिल्ली | 30 Oct, 2025, 10:08 PM
Rafale Meteor missiles: भारतीय वायुसेना अब राफेल फाइटर जेट्स के लिए बड़ी संख्या में यूरोपीय मीटियोर एयर-टू-एयर मिसाइलें खरीदने की तैयारी कर रही है। इन मिसाइलों की रेंज करीब 200 किलोमीटर तक है। रक्षा सूत्रों के अनुसार, करीब 1,500 करोड़ रुपये की इस डील को रक्षा मंत्रालय के पास भेजा गया है और इसे जल्द मंजूरी मिल सकती है। यूरोप की मेत्रा बीएई डायनामिक्स अलेनिया (एमबीडीए) कंपनी की बनाई ये मीटियोर मिसाइलें बियोंड विजुअल रेंज हैं, जो राफेल फाइटर जेट्स की एरियल कॉम्बैट क्षमता को काफी बढ़ा देंगी।
एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय वायुसेना ने 2016 में फ्रांस से 36 राफेल विमानों के साथ पहली खेप में ही मीटियोर मिसाइलें खरीदी थीं। अब आने वाले सालों में नौसेना के लिए 26 नए राफेल विमानों की खेप में भी ये मिसाइलें शामिल की जाएंगी। अनुमान के मुताबिक भारतीय वायुसेना के पास लगभग 250 मीटियोर मिसाइलें हैं। वहीं इन मिसाइल की कीमत लगभग 25 करोड़ रुपये या 3.2 मिलियन डॉलर प्रति युनिट है। इसके मुकाबले स्वदेशी अस्त्र मार्क 3 गांडीव बीवीआर की कीमत प्रति यूनिट 18 करोड़ रुपये के आसपास पड़ेगी। सूत्रों के मुताबिक एमके-3 प्रोग्राम में देरी के चलते भारत ने 26 राफेल मरीन डील के साथ अतिरिक्त मीटियोर भी ऑर्डर की हैं।
मई में हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय लड़ाकू विमानों ने पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों पर लंबी दूरी के स्टैंड-ऑफ हथियारों से हमला किया था। जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान एयरफोर्स ने चीनी पीएलL-15 मिसाइलें दागीं, लेकिन वे अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकीं।
भारत अब अपनी सभी लड़ाकू बेड़ों को बियोंड विजुअल रेंज क्षमता से लैस करने की दिशा में काम कर रहा है। इस योजना के तहत करीब 700 स्वदेशी अस्त्र मार्क 2 मिसाइलें भी तैयार की जा रही हैं, जिन्हें सुखोई-30 और स्वदेशी फाइटर जेट तेजस विमानों पर लगाया जाएगा, जबकि राफेल बेड़ा मीटियोर मिसाइलों से लैस रहेगा।
भारत की अस्त्र एमके-3 (गांडीव) मिसाइल और यूरोप की मीटियोर मिसाइल दोनों ही आधुनिक बियॉन्ड-विजुअल-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल हैं। दोनों में रैमजेट इंजन तकनीक है। अस्त्र एमके-3 की रेंज 300 किलोमीटर तक है, जो मीटियोर की लगभग 200 किलोमीटर रेंज से ज्यादा है। इसमें सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट तकनीक और एईएसए रडार सीकर लगे हैं, जिससे यह इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से सुरक्षित रहती है।


