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सिडनी पहुंचा भारतीय नौसेना का स्टेल्थ फ्रिगेट INS नीलगिरी, ऑस्ट्रेलिया इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में लेगा हिस्सा

आईएनएस नीलगिरी ने सिडनी पहुंचने से पहले एक्सरसाइज काकाडू के पहले चरण को पूरा किया। यह एक बहुराष्ट्रीय समुद्री अभ्यास है, जिसमें कई देशों की नौसेनाएं शामिल होती हैं...

IFR-Milan 2026: ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार साथ दिखे भारत के स्ट्रेटेजिक वॉरशिप, INS विक्रांत से अन्वेष तक दुनिया ने देखा भारत का...

आईएफआर में भारतीय नौसना ने पहली बार अपने स्ट्रेटेजिक शिप आईएनएस अन्वेष (A41) को भी शोकेस किया। यह भारतीय नौसेना का एक बेहद खास और रणनीतिक जहाज है। इसे बैलास्टिक मिसाइल रेंज इंस्ट्रूमेंटेशन शिप कहा जाता है...

IFR-Milan 2026: विशाखापत्तनम में खुला मिलन विलेज, 70 से ज्यादा देशों की नौसेनाएं हो रहीं शामिल

मिलन विलेज में नौसेना से जुड़े स्मृति चिन्हों के स्टॉल भी लगाए गए हैं। इसके अलावा देशभर के हस्तशिल्प और हैंडलूम उत्पाद यहां प्रदर्शित किए गए हैं...

‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ से ग्लोबल डिप्लोमैट तक, कैसे IFR-Milan 2026 से भारतीय नौसेना लिख रही है मैरीटाइम डिप्लोमेसी की नई कहानी

इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (आईएफआर) 2026 और एक्सरसाइज मिलन इसी बदलती सोच की झलक हैं। इंडियन नेवी आज “फर्स्ट रिस्पॉन्डर” यानी संकट के समय सबसे पहले पहुंचने वाली ताकत भी है और “लास्टिंग एलाय” यानी भरोसेमंद साझेदार भी...

IFR 2026 में पहली बार पूरे ‘लाव-लश्कर’ के साथ दिखेगा INS विक्रांत, जानें कैरियर बैटल ग्रुप में कौन-कौन से जंगी जहाज होते हैं शामिल

18 फरवरी को होने वाले इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू के मुख्य कार्यक्रम में भारतीय सेनाओं की सुप्रीम कमांडर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू समुद्र में तैनात युद्धपोतों की समीक्षा करेंगी। इस अवसर पर आईएनएस विक्रांत भारतीय नौसेना के “सेंटर ऑफ अट्रैक्शन” के रूप में रहेगा...

भारतीय नेवल डिप्लोमेसी का कमाल, जब विशाखापत्तनम में एक साथ दिखेंगे 75 देश और उनके 90 से ज्यादा जंगी जहाज

फरवरी 2026 में आयोजित IFR और मिलन अभ्यास में इस साल में ऐसा पहली बार होगा, जब कई देश अपनी युद्धपोतों के साथ भारतीय नौसेना के बुलावे पर एक ही समुद्र में एक साथ अभ्यास करेंगे, एक-दूसरे को सलामी देंगे और साझा सुरक्षा पर बातचीत करेंगे...

Opinion: इंडो-पैसिफिक में दिखेगी भारत की समुद्री ताकत, विशाखापत्तनम में IFR और ‘मिलन’ कैसे बनेंगे गेम-चेंजर

भारत ने भी 1953 में पहला राष्ट्रपति बेड़ा निरीक्षण आयोजित कर यही संकेत दिया था कि स्वतंत्र देश की नौसेना अब किसी वायसराय नहीं, बल्कि अपने राष्ट्रपति को सलामी देगी...