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Saturday, August 30, 2025
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HC judgement paramilitary: पूर्व सैनिक श्रेणी में पैरामिलिट्री कर्मियों को शामिल करने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

अदालत ने कहा कि यह पूरी तरह से राज्य सरकार पर निर्भर करता है कि वह इस मामले में कोई निर्णय लेती है या नहीं...

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हाईकोर्ट ने 18 अगस्त को दिए गए अपने आदेश में कहा, “यह अदालत यह तय नहीं कर सकती कि पैरामिलिट्री फोर्सेज के सेवानिवृत्त अधिकारियों को एक्स-सर्विसमैन की परिभाषा में शामिल किया जाए या नहीं। यह एक नीतिगत मामला है और राज्य को ही इसका फैसला करना है।”
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📍चंडीगढ़ | 21 Aug, 2025, 3:02 PM

HC judgement paramilitary:पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अहम आदेश में स्पष्ट कर दिया है कि पैरामिलिट्री फोर्सेज जैसे सीआरपीएफ, बीएसएफ और सीआईएसएफ से सेवानिवृत्त कर्मियों को एक्स-सर्विसमैन (ESM) की श्रेणी में शामिल करने का फैसला अदालत का नहीं बल्कि राज्य सरकार की नीति का विषय है। अदालत ने कहा कि यह पूरी तरह से राज्य सरकार पर निर्भर करता है कि वह इस मामले में कोई निर्णय लेती है या नहीं।

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हाईकोर्ट ने 18 अगस्त को दिए गए अपने आदेश में कहा, “यह अदालत यह तय नहीं कर सकती कि पैरामिलिट्री फोर्सेज के सेवानिवृत्त अधिकारियों को एक्स-सर्विसमैन की परिभाषा में शामिल किया जाए या नहीं। यह एक नीतिगत मामला है और राज्य को ही इसका फैसला करना है।”

यह आदेश न्यायमूर्ति जगमोहन बंसल ने उस याचिका को निपटाते हुए पारित किया, जो पंजाब के फाजिल्का निवासी मक्खन सिंह ने दायर की थी। मक्खन सिंह सीआरपीएफ से रिटायर होने के बाद पंजाब पुलिस में कांस्टेबल (ड्राइवर) के पद के लिए आवेदन किया था। लेकिन उन्हें एक्स-सर्विसमैन कोटे के तहत नियुक्ति नहीं मिली। इस पर उन्होंने कोर्ट में याचिका दायर कर पंजाब सरकार को निर्देश देने की मांग की थी कि उन्हें ईएसएम श्रेणी में माना जाए और पुलिस में नियुक्ति दी जाए।

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याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि सर्वोच्च न्यायालय ने 11 फरवरी 1981 को दिए गए एक फैसले (अखिलेश प्रसाद बनाम यूनियन टेरिटरी ऑफ मिजोरम) में सीआरपीएफ को सशस्त्र बल घोषित किया था। उस फैसले के तहत सीआरपीएफ को “आर्म्ड फोर्सेज ऑफ द यूनियन” की श्रेणी में रखा गया था। इसलिए, पैरामिलिट्री बलों के कर्मियों को भी एक्स-सर्विसमैन का दर्जा मिलना चाहिए।

हालांकि, हाईकोर्ट ने इस पर कोई सीधा आदेश पारित करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि यह मामला नीतिगत है और इसमें हस्तक्षेप करना न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। साथ ही, पंजाब सरकार को निर्देश दिया गया कि वह याचिकाकर्ता के इस प्रतिनिधित्व पर विचार करे और उचित निर्णय ले।

अदालत ने यह भी कहा कि राज्य सरकार छह माह के भीतर इस विषय पर कोई उपयुक्त आदेश पारित कर सकती है। इस तरह, याचिका का निस्तारण करते हुए अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि पैरामिलिट्री बलों को पूर्व सैनिक का दर्जा देने का सवाल अदालत के नहीं बल्कि सरकार के पाले में है।

इस फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि आने वाले समय में यदि सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ जैसे अर्धसैनिक बलों को पूर्व सैनिक की श्रेणी में शामिल करना है तो इसके लिए राज्य सरकार को नीतिगत फैसला लेना होगा। वहीं, पूर्व सैनिक संगठन लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि देश की सुरक्षा में समान भूमिका निभाने वाले पैरामिलिट्री बलों को भी सेना की तरह एक्स-सर्विसमैन का दर्जा मिले।

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