📍नई दिल्ली | 16 Mar, 2026, 8:24 PM
Strait of Hormuz Escort: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एस्कॉर्ट अभियान के तहत भारतीय नौसेना लगातार भारतीय ध्वज लगे जहाजों को सुरक्षित निकालने का काम कर रही है। सरकारी सूत्रों के अनुसार भारतीय नौसेना के युद्धपोत इस समय स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और आसपास के समुद्री इलाकों में सक्रिय रूप से तैनात हैं और भारतीय जहाजों को सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं।
हाल ही में भारतीय ध्वज वाला एक और जहाज सुरक्षित रूप से इस इलाके से निकलकर भारत के लिए रवाना हुआ है। इससे पहले भी दो भारतीय जहाजों को नौसेना के युद्धपोतों ने एस्कॉर्ट करते हुए सुरक्षित रास्ता दिया था। (Strait of Hormuz Escort)
Strait of Hormuz Escort: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से निकल रहे भारतीय जहाज
सरकारी सूत्रों के अनुसार एलपीजी कैरियर शिवालिक और नंदा देवी के बाद अब तीसरा भारतीय ध्वज वाला जहाज जग लाडकी भी सुरक्षित रूप से इस संवेदनशील समुद्री मार्ग से निकल चुका है। जग लाडकी फुजैराह ऑयल टर्मिनल पर हमले से बाल-बाल बचा था। बताया गया है कि यह जहाज पश्चिम एशिया के समुद्री क्षेत्र से भारत के लिए रवाना हुआ।
रिपोर्ट्स के अनुसार भारतीय नौसेना का एक युद्धपोत देर रात से इस जहाज को एस्कॉर्ट करते हुए सुरक्षित समुद्री इलाके तक लेकर गया। इससे पहले भी भारतीय नौसेना के जहाजों ने शिवालिक और नंदा देवी को इसी तरह सुरक्षा प्रदान की थी।
ये तीनों जहाज सफलतापूर्वक निकल चुके हैं, लेकिन अन्य 22 जहाज अभी भी क्षेत्र में हैं, जिनकी एस्कॉर्ट की तैयारी है। इन जहाजों के सुरक्षित निकलने को भारतीय नौसेना के सक्रिय समुद्री निगरानी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। (Strait of Hormuz Escort)
मिशन बेस्ड डिप्लॉयमेंट के तहत तैनाती
भारतीय नौसेना वर्ष 2017 से मिशन बेस्ड डिप्लॉयमेंट रणनीति के तहत दुनिया के कई महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्रों में अपने युद्धपोत तैनात कर रही है। इस रणनीति का उद्देश्य समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देना है।
इस मिशन के तहत भारतीय नौसेना के युद्धपोत लगातार अलग-अलग समुद्री क्षेत्रों में तैनात रहते हैं और वहां की गतिविधियों पर नजर रखते हैं। (Strait of Hormuz Escort)
ऑपरेशन संकल्प और एंटी पायरेसी ऑपरेशन
ओमान की खाड़ी के पास भारतीय नौसेना ऑपरेशन संकल्प चला रही है। इस ऑपरेशन का उद्देश्य क्षेत्र में मौजूद भारतीय जहाजों और समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा करना है।
इसके अलावा अदन की खाड़ी में भारतीय नौसेना एंटी पायरेसी ऑपरेशन भी चला रही है। इस क्षेत्र में सोमालिया और जिबूती के समुद्री डाकुओं की गतिविधियों को देखते हुए यह अभियान शुरू किया गया था।
सूत्रों के अनुसार अदन की खाड़ी के पास फिलहाल भारतीय नौसेना के तीन युद्धपोत ऑपरेट कर रहे हैं। ये जहाज समुद्री गतिविधियों की निगरानी के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर जहाजों को सुरक्षा भी प्रदान कर रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि ये तीनों शिप डेस्ट्रॉयर कैटेगरी के हैं और इन पर मार्कोस कमांडोज तैनात हैं। (Strait of Hormuz Escort)
ओमान की खाड़ी में तैनात आईएनएस सूरत
ओमान की खाड़ी के पास भारतीय नौसेना का आधुनिक गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर आईएनएस सूरत तैनात है। यह युद्धपोत क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों की निगरानी कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री ट्रैफिक प्रभावित होने के बाद से भारतीय नौसेना लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। नौसेना के युद्धपोत और निगरानी प्रणाली इस पूरे समुद्री इलाके की गतिविधियों को मॉनिटर कर रही है। (Strait of Hormuz Escort)
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की रणनीतिक अहमियत
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है। फारस की खाड़ी से ओमान की खाड़ी तक जाने वाला यह संकरा समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए बेहद अहम है।
भारत के लिए यह मार्ग और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत के कुल ऊर्जा आयात का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर आता है। अनुमान के अनुसार भारत के लगभग 80 फीसदी ऊर्जा व्यापार का संबंध इस समुद्री मार्ग से है।
इसी कारण इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की सुरक्षा चुनौती का असर सीधे भारत के एनर्जी सप्लाई सिस्टम पर पड़ सकता है। (Strait of Hormuz Escort)
अदन की खाड़ी में तैनाती
भारतीय नौसेना की दूसरी बड़ी तैनाती अदन की खाड़ी में है। यह क्षेत्र भी वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
भारत का लगभग 90 फीसदी समुद्री व्यापार इस मार्ग से होकर गुजरता है। यह व्यापार सुएज नहर, रेड सी और अदन की खाड़ी से होते हुए अरब सागर के रास्ते भारत तक पहुंचता है।
अदन की खाड़ी लंबे समय से समुद्री डकैती के लिए संवेदनशील क्षेत्र रही है। सोमालिया के समुद्री डाकू इस क्षेत्र में कई बार व्यापारी जहाजों को निशाना बना चुके हैं।
इसी खतरे को देखते हुए भारतीय नौसेना लंबे समय से इस क्षेत्र में एंटी पायरेसी मिशन चला रही है। (Strait of Hormuz Escort)
वैकल्पिक समुद्री मार्ग की चुनौती
अदन की खाड़ी का मार्ग अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए सबसे छोटा समुद्री रास्ता माना जाता है। इसलिए यहां जहाजों की आवाजाही भी अधिक रहती है।
यदि किसी कारण से यह मार्ग बाधित हो जाए, तो जहाजों को अफ्रीका के दक्षिणी छोर केप ऑफ गुड होप के रास्ते आना-जाना पड़ता है। यह मार्ग काफी लंबा है और इससे यात्रा का समय बढ़ जाता है।
इसके अलावा जहाजों की ऑपरेशनल लागत भी बढ़ जाती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित हो सकता है। (Strait of Hormuz Escort)
छह इलाकों में भारतीय नौसेना की तैनाती
मिशन बेस्ड डिप्लॉयमेंट के तहत भारतीय नौसेना दुनिया के छह अलग-अलग समुद्री क्षेत्रों में अपने युद्धपोत तैनात रखती है।
पहली तैनाती अरब सागर में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास है। दूसरी तैनाती अदन की खाड़ी में है। तीसरी तैनाती सेशेल्स के पास की जाती है, ताकि केप ऑफ गुड होप मार्ग से आने वाले जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
इसके अलावा चौथी तैनाती मालदीव के पास, पांचवीं अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के पास और छठी तैनाती बंगाल की खाड़ी में म्यांमार और बांग्लादेश सीमा के आसपास की जाती है। (Strait of Hormuz Escort)
समुद्री सुरक्षा और सहयोग
इन तैनातियों के दौरान भारतीय नौसेना के युद्धपोत कई अन्य देशों की नौसेनाओं के साथ संयुक्त अभ्यास भी करते हैं। इसके अलावा समुद्र में किसी दुर्घटना की स्थिति में राहत और बचाव अभियान भी चलाए जाते हैं।
समुद्री डकैती, जहाजों पर हमले या किसी आपात स्थिति में भारतीय नौसेना तेजी से कार्रवाई करने की क्षमता रखती है।
भारतीय नौसेना के अधिकारियों के अनुसार पश्चिम एशिया के समुद्री क्षेत्र में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और भारतीय ध्वज वाले जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। (Strait of Hormuz Escort)
भारत की क्या है रणनीति
यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह बंद हो जाता है, तो जहाजों को अफ्रीका के दक्षिणी सिरे (केप ऑफ गुड होप) से गुजरना पड़ेगा, जो 10-15 दिन अतिरिक्त समय और लाखों डॉलर अतिरिक्त लागत बढ़ सकती है। इससे भारत में ईंधन की कीमतें आसमान छू सकती हैं।
भारतीय नौसेना की यह सक्रिय भूमिका न केवल ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करती है, बल्कि भारत की बढ़ती नौसैनिक क्षमता और क्षेत्रीय स्थिरता में योगदान को भी दर्शाती है। सूत्रों के अनुसार, सभी भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। यह ऑपरेशन भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ और ‘सागरमाला’ जैसी नीतियों के साथ जुड़ा है, जहां समुद्री मार्गों की सुरक्षा राष्ट्रीय हितों का केंद्र है। (Strait of Hormuz Escort)

