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यूएस-ईरान तनाव के बीच भारत का बड़ा कदम, गुआम में अमेरिका संग सबमरीन हंट का करेगा अभ्यास

यह अभ्यास 9 मार्च से शुरू हो चुका है, जो 24 मार्च तक चलेगा। इसमें क्वॉड देशों अमेरिका, भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान के अलावा न्यूजीलैंड जैसे देशों की भागीदारी है। यह क्वाड+ फॉर्मेट में आती है। इन सभी देशों के समुद्री गश्ती विमान इस अभ्यास में शामिल हैं...

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📍नई दिल्ली | 17 Mar, 2026, 11:01 AM

Sea Dragon Exercise 2026: एक तरफ जहां यूएस-ईरान वॉर में फंसे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप हॉर्मुज में फंसे जहाजों की सुरक्षा के लिए नाटो देशों की नौसेनाओं का सहयोग मांग रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ भारतीय नौसेना ने अमेरिका के नेतृत्व में आयोजित होने वाले बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास सी ड्रैगन एक्सरसाइज (Sea Dragon Exercise 2026) में हिस्सा लेने के लिए अपने अत्याधुनिक P-8I समुद्री निगरानी विमान को गुआम भेजा है। यह अभ्यास इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ते समुद्री खतरों के बीच एंटी-सबमरीन वॉरफेयर क्षमता को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। खास बात यह है कि क्वॉड में शमिल ऑस्ट्रेलिया, जापान ने अमेरिका के होर्मुज मिशन से इनकार किया है।

यह अभ्यास 9 मार्च से शुरू हो चुका है, जो 24 मार्च तक चलेगा। इसमें क्वॉड देशों अमेरिका, भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान के अलावा न्यूजीलैंड जैसे देशों की भागीदारी है। यह क्वाड+ फॉर्मेट में आती है। इन सभी देशों के समुद्री गश्ती विमान इस अभ्यास में शामिल हैं। यह एक्सरसाइज इंडो-पैसिफिक में बढ़ते सबमरीन थ्रेट्स (खासकर चीन की पीएलए नेवी) के खिलाफ एंटी-सबमरीन वॉरफेयर स्किल्स को मजबूत करने के लिए की जाती है। (Sea Dragon Exercise 2026)

Sea Dragon Exercise 2026: गुआम में आयोजित हो रहा है अभ्यास

सी ड्रैगन एक्सरसाइज का आयोजन हर साल गुआम के एंडरसन एयर फोर्स बेस पर किया जाता है। यह क्षेत्र पश्चिमी प्रशांत महासागर में रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। अमेरिका की सातवीं फ्लीट भी इसी क्षेत्र में एक्टिव रहती है।

इस अभ्यास की शुरुआत साल 2019 में अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के बीच द्विपक्षीय स्तर पर हुई थी। इसके बाद धीरे-धीरे इसमें अन्य देशों को भी शामिल किया गया और अब यह एक बहुराष्ट्रीय अभ्यास बन चुका है। (Sea Dragon Exercise 2026)

किन देशों की भागीदारी

इस अभ्यास में अमेरिका की नौसेना के दो पी-8ए पोसाइडन विमान, भारत का एक पी-8आई विमान, ऑस्ट्रेलिया के दो पी-8ए, न्यूजीलैंड का एक पी-8ए और जापान का पी-1 समुद्री निगरानी विमान शामिल है।

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इन सभी विमानों की खास बात यह है कि इनके मिशन सिस्टम, सेंसर और डेटा लिंक काफी हद तक एक जैसे हैं। इससे अलग-अलग देशों के बीच बेहतर तालमेल और रीयल टाइम जानकारी शेयर करना आसान हो जाता है। (Sea Dragon Exercise 2026)

P-8I विमान की खूबियां

भारतीय नौसेना का पी-8आई विमान लंबी दूरी तक समुद्र की निगरानी करने में सक्षम है। यह विमान बोइंग 737 प्लेटफॉर्म पर आधारित है और इसमें आधुनिक सेंसर और हथियार सिस्टम लगाए गए हैं।

इस विमान में मैग्नेटिक एनोमली डिटेक्टर, एडवांस रडार सिस्टम, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इंफ्रारेड कैमरा जैसे उपकरण लगे होते हैं। यह समुद्र के अंदर मौजूद पनडुब्बियों का पता लगाने में मदद करता है।

इसके अलावा इसमें टॉरपीडो और एंटी-शिप मिसाइल जैसे हथियार भी लगाए जा सकते हैं, जिससे यह केवल निगरानी ही नहीं, बल्कि कार्रवाई करने में भी सक्षम होता है। (Sea Dragon Exercise 2026)

कैसे होती है ट्रेनिंग

इस अभ्यास के दौरान पायलट और एयरक्रू पहले क्लासरूम में बैठकर जॉइंट स्ट्रेटेजी पर चर्चा करते हैं। इसके बाद सिमुलेशन के जरिए अभ्यास किया जाता है।

फिर वास्तविक समुद्री परिस्थितियों में पनडुब्बियों को खोजने और ट्रैक करने का अभ्यास किया जाता है। इस पूरे अभ्यास के दौरान करीब 200 घंटे से ज्यादा उड़ान प्रशिक्षण किया जाता है।

ऑस्ट्रेलियाई नौसेना के एक आधिकारिक बयान में कहा गया, “यह अभ्यास पनडुब्बी रोधी युद्ध में एयरक्रू की क्षमता को बेहतर बनाता है। इसमें प्रशिक्षण की शुरुआत ट्रैक-सिमुलेटेड लक्ष्यों से होती है और धीरे-धीरे वास्तविक पनडुब्बी का पता लगाने और उसे ट्रैक करने तक पहुंचती है। इस दौरान क्रू कुल मिलाकर 200 घंटे से अधिक उड़ान प्रशिक्षण में हिस्सा लेते हैं।”

इस प्रशिक्षण में शुरुआत आसान लक्ष्यों से होती है और धीरे-धीरे इसे असली पनडुब्बियों तक ले जाया जाता है। इससे एयरक्रू की क्षमता और कॉर्डिनेशन को परखा जाता है। (Sea Dragon Exercise 2026)

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कॉम्पिटिटिव फॉर्मेट भी शामिल

सी ड्रैगन एक्सरसाइज की एक खास बात यह भी है कि इसमें भाग लेने वाले देशों के प्रदर्शन को अंक दिए जाते हैं। जो देश सबसे बेहतर प्रदर्शन करता है उसे ड्रैगन बेल्ट अवॉर्ड दिया जाता है।

पिछले कुछ वर्षों में जापान और ऑस्ट्रेलिया ने इस अवॉर्ड को जीता है। इससे यह अभ्यास केवल प्रशिक्षण ही नहीं बल्कि एक प्रतिस्पर्धात्मक चुनौती भी बन जाता है। (Sea Dragon Exercise 2026)

गुआम ही क्यों?

इससे पहले मालाबार एक्सरसाइज भी नवंबर 2025 में गुआम के आसपास हुई थी। जो क्वॉड देशों (भारत, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया) की सबसे प्रमुख और स्पेसिफिक नेवल एक्सरसाइज है। यह क्वॉड का कोर मिलिट्री कोऑपरेशन है, जो 1992 में भारत-अमेरिका द्विपक्षीय से शुरू होकर अब पूर्ण क्वॉड फॉर्मेट में चलती है।

गुआम को इस अभ्यास के लिए चुनने के पीछे कई अहम रणनीतिक वजहें हैं। सबसे पहले इसकी लोकेशन की बात करें, तो गुआम पश्चिमी प्रशांत महासागर में अमेरिका का एक प्रमुख स्ट्रैटेजिक हब है, जहां एंडरसन एयर फोर्स बेस और नेवल बेस गुआम मौजूद हैं। यह इलाका “सेकंड आइलैंड चेन” का हिस्सा माना जाता है, जो चीन की पीएलए नेवी की बढ़ती गतिविधियों, खासकर ताइवान और साउथ चाइना सी के आसपास, को संतुलित करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। (Sea Dragon Exercise 2026)

इसके अलावा गुआम का लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर भी अहम है। यहां बड़े एयरफील्ड, पोर्ट और सपोर्ट सुविधाएं मौजूद हैं, जिससे पी-8 जैसे मैरीटाइम पेट्रोल एयरक्राफ्ट आसानी से ऑपरेट कर सकते हैं। वहीं नौसेना के जहाज अप्रा हार्बर में तैनात किए जा सकते हैं, जिससे ऑपरेशन को लगातार सपोर्ट मिलता रहता है।

ट्रेनिंग के लिहाज से भी गुआम के आसपास का खुला समुद्री क्षेत्र बेहद उपयुक्त है। यहां बड़े स्तर पर एंटी-सबमरीन वॉरफेयर, सतह और हवाई ऑपरेशन का अभ्यास किया जा सकता है। साथ ही यह अमेरिका की सातवीं फ्लीट का प्रमुख ऑपरेशनल बेस भी है। (Sea Dragon Exercise 2026)

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भारत की लगातार भागीदारी

भारत ने 2021-22 के बाद से इस अभ्यास में लगातार भाग लिया है। भारतीय नौसेना के पी-8आई विमान अरक्कोनम स्थित आईएनएस राजाली और गोवा के आईएनएस हंसा से ऑपरेट किए जाते हैं। यह अभ्यास भारतीय नौसेना को आधुनिक पनडुब्बी रोधी तकनीकों और संयुक्त ऑपरेशन की बेहतर समझ देता है। (Sea Dragon Exercise 2026)

इंडो-पैसिफिक में बढ़ीं सैन्य गतिविधियां

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में हाल के समय में सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं। चीन की नौसेना द्वारा ताइवान के आसपास बढ़ती गतिविधियां और अन्य देशों की तैनाती ने इस क्षेत्र को संवेदनशील बना दिया है। इसी के बीच अमेरिका और उसके सहयोगी देशों द्वारा इस तरह के अभ्यास आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि समुद्री सुरक्षा और निगरानी को मजबूत किया जा सके।

इस अभ्यास के साथ ही भारतीय नौसेना अरब सागर में भी सक्रिय है। हाल ही में नौसेना ने पश्चिम एशिया से आने वाले भारतीय जहाजों को एस्कॉर्ट करने का काम किया है। इसके अलावा भारतीय नौसेना ने हाल ही में एक सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन में भी हिस्सा लिया, जब एक विदेशी युद्धपोत को नुकसान पहुंचने के बाद मदद की जरूरत पड़ी थी। भारतीय नौसेना का पी-8आई विमान और युद्धपोत तुरंत मौके पर पहुंचकर राहत कार्य में शामिल हुए। (Sea Dragon Exercise 2026)

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