📍नई दिल्ली | 23 Aug, 2025, 10:25 PM
Project 75I submarine deal: केंद्र सरकार ने रक्षा मंत्रालय और मझगांव डॉकयार्ड्स लिमिटेड को 70,000 करोड़ रुपये की लागत वाले सबमरीन सौदे के लिए बातचीत शुरू करने की मंजूरी दे दी है। यह फैसला छह महीने से ज्यादा समय से अटका हुआ था, लेकिन अब हरी झंडी मिलने से प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। इस सौदे के तहत प्रोजेक्ट 75 इंडिया नाम से छह सबमरीन भारत में ही बनाई जाएंगी, जिसमें जर्मनी की मदद ली जाएगी।
रक्षा अधिकारियों ने बताया कि जनवरी में रक्षा मंत्रालय ने सरकारी कंपनी मझगांव डॉकयार्ड्स को इन सबमरीन के निर्माण के लिए चुना था, और उनके साथी के रूप में जर्मन कंपनी थाइसेनक्रुप मैरीन सिस्टम्स को शामिल किया गया है। इन सबमरीन में एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन यानी AIP तकनीक लगाई जाएगी, जो उन्हें पानी के नीचे ज्यादा समय तक रहने की क्षमता देगी।
अधिकारियों ने कहा कि केंद्र ने यह मंजूरी एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद दी, जिसमें रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा के शीर्ष अधिकारी शामिल थे। इस बैठक में देश की सबमरीन बेड़े की मौजूदा स्थिति और आगे की योजना पर चर्चा हुई। रक्षा मंत्रालय और भारतीय नौसेना को उम्मीद है कि अगले छह महीनों में कॉन्टैक्ट पर बातचीत पूरी हो जाएगी और अंतिम मंजूरी मिल जाएगी। इस सौदे का मुख्य उद्देश्य देश में ही पारंपरिक सबमरीन के डिजाइन और निर्माण की स्वदेशी क्षमता विकसित करना है।
🚢 Historic First for Indian Navy!
On 26 Aug 2025, two cutting-edge stealth frigates INS Udaygiri (F35) from MDL Mumbai & INS Himgiri (F34) from GRSE Kolkata will be commissioned together in Visakhapatnam for the first time ever!
⚓ Bigger, stealthier & 100% Made in India these… pic.twitter.com/Auw9wGhaxO— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) August 10, 2025
सरकार सबमरीन बनाने की प्रक्रिया को तेज करने के तरीके भी तलाश रही है। भारतीय नौसेना छह ऐसी एडवांस सबमरीन खरीदना चाहती है, जो पानी के नीचे तीन हफ्तों तक रह सकें, और जर्मन प्रणाली से यह संभव हो पाएगा। भारतीय उद्योग भी दो न्यूक्लियर अटैक सबमरीन बनाने पर काम कर रहा है, जिसमें निजी क्षेत्र की बड़ी कंपनी लार्सन एंड टुब्रो महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, साथ ही सबमरीन मैन्युफैक्चरिंग सेंटर भी शामिल होगा।
चीन की नौसेना के तेज आधुनिकीकरण के बीच, भारतीय सरकार ने कई सबमरीन परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिसमें परमाणु और पारंपरिक दोनों शामिल हैं। भारत को चीन और पाकिस्तान दोनों का मुकाबला करने के लिए जरूरी क्षमताएं विकसित करनी हैं। भारतीय नौसेना अगले दशक में अपनी करीब दस सबमरीन को रिटायर करने वाली है, और उनके स्थान पर नई सबमरीन की जरूरत पड़ेगी।

इस फैसले से मझगांव डॉकयार्ड्स की क्षमता में भी बढ़ोतरी होगी। कंपनी पहले से ही कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम कर रही है। कंपनी मुंबई में स्थित है और भारत की नौसेना के लिए जहाज बनाने का लंबा अनुभव रखती है। इससे मझगांव डॉक्स लिमिटेड की जहाज और सबमरीन बनाने की क्षमता दोगुनी हो जाएगी। अभी जहां कंपनी 40,000 टन वजन तक के जहाज बना पाती है, वहीं जल्द यह क्षमता 80,000 टन तक पहुंच जाएगी और आगे चलकर इसे दो लाख टन तक बढ़ाने का लक्ष्य है। Project 75I के साथ यह क्षमता भारत को आत्मनिर्भर बनाएगी। अब MDL एक साथ 10 युद्धपोत और 11 सबमरीन पर काम कर सकेगा। यह किसी भी एशियाई देश के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी।
यही नहीं, MDL ने हाल ही में श्रीलंका के कोलंबो डॉकयार्ड पर 53 मिलियन डॉलर की डील कर नियंत्रण हासिल किया है। इसका मतलब है कि अब भारत सिर्फ अपने लिए ही नहीं बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भी जहाज और पनडुब्बी निर्माण का अहम केंद्र बन सकता है।
प्रोजेक्ट 75 इंडिया (Project 75I) के तहत बनने वाली ये सबमरीन आधुनिक तकनीक से लैस होंगी, जो नौसेना की ताकत को बढ़ाएंगी। जर्मन साझेदारी से भारत को नई तकनीक मिलेगी, जो स्वदेशी निर्माण को मजबूत करेगी।
रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि बातचीत इस महीने के अंत तक शुरू हो जाएगी, और सभी पक्ष इस पर सक्रियता से काम कर रहे हैं। यह सौदा भारत की रक्षा नीति का हिस्सा है, जो आत्मनिर्भर भारत पर जोर देती है। सबमरीन निर्माण में स्वदेशी क्षमता विकसित होने से भविष्य में विदेशी निर्भरता कम होगी। नौसेना की मौजूदा सबमरीन बेड़े में रूसी और फ्रांसीसी तकनीक वाली सबमरीन शामिल हैं, लेकिन अब जर्मन सहयोग से विविधता आएगी।
मझगांव डॉकयार्ड्स ने पहले कलवरी क्लास की सबमरीन बनाई हैं, जो प्रोजेक्ट 75 का हिस्सा थीं। इस नई परियोजना से कंपनी की क्षमता और बढ़ेगी। उच्च स्तरीय बैठक में सबमरीन बेड़े की रोडमैप पर विस्तार से चर्चा हुई, जिसमें मौजूदा चुनौतियां और समाधान शामिल थे। भारत की समुद्री सीमाएं लंबी हैं, और पानी के नीचे की सुरक्षा महत्वपूर्ण है। इस सौदे से नौसेना की क्षमता में इजाफा होगा। अधिकारियों ने कहा कि अनुबंध पर बातचीत में सभी तकनीकी और वित्तीय पहलुओं पर ध्यान दिया जाएगा।