📍नई दिल्ली | 17 Feb, 2026, 4:58 PM
Next Generation Survey Vessels: कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड यानी सीएसएल भारतीय नौसेना के लिए पांच नेक्स्ट जेनरेशन सर्वे वेसल्स बनाने की तैयारी कर रही है। देश की सरकारी शिपयार्ड कंपनी कोचीन शिपयार्ड को रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के लिए बनने वाले पांच नेक्स्ट जेनरेशन सर्वे वेसल्स (एनजीएसवी) प्रोजेक्ट में एल-वन बोलीदाता घोषित किया है। हालांकि अभी तक कंपनी को आधिकारिक तौर पर कॉन्ट्रैक्ट नहीं दिया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि कॉन्ट्रैक्ट उसे ही मिल सकता है। इस प्रोजेक्ट की अनुमानित कुल कीमत करीब 5,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
16 फरवरी रक्षा मंत्रालय में हुई बैठक में कंपनी को एल-वन बिडर घोषित किया गया। बाद में सीएसएल ने स्टॉक एक्सचेंज को इसकी आधिकारिक जानकारी दी। हालांकि अभी अंतिम अनुबंध पर दस्तखत होना बाकी है। जरूरी प्रक्रियाएं और औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही कॉन्ट्रैक्ट अवार्ड किया जाएगा, लेकिन आम तौर पर एल–वन घोषित कंपनी को ही काम सौंपा जाता है। बता दें कि एल–वन यानी वह कंपनी जिसने सबसे कम बोली लगाई और कॉन्ट्रैक्ट पाने की दौड़ में सबसे आगे होती है। (Next Generation Survey Vessels)
क्या हैं Next Generation Survey Vessels?
नेक्स्ट जेनरेशन सर्वे वेसल्स यानी एनजीएसवी ऐसे विशेष जहाज होंगे जिनका मुख्य काम समुद्र की गहराई, समुद्र तल की बनावट और समुद्री मार्गों का सटीक सर्वे करना होगा। इसे हाइड्रोग्राफिक सर्वे कहा जाता है। आसान शब्दों में कहें तो ये जहाज समुद्र की गहराई, तल की बनावट और वहां मौजूद चट्टानों, ढलानों या बाधाओं का नक्शा तैयार करेंगे। (Next Generation Survey Vessels)
समुद्र के नीचे क्या है, यह जानना बहुत जरूरी होता है। अगर सही जानकारी न हो तो जहाज दुर्घटनाग्रस्त हो सकते हैं या समुद्री रास्ते असुरक्षित हो सकते हैं। इसलिए एनजीएसवी सबसे पहले सुरक्षित नेविगेशन चार्ट तैयार करने में मदद करेंगे। इन चार्ट्स का इस्तेमाल सिर्फ भारतीय नौसेना ही नहीं, बल्कि व्यापारी जहाज भी करते हैं।
दूसरा बड़ा काम होगा समुद्र के नीचे बिछाई जाने वाली केबल और पाइपलाइन की योजना बनाना। आज इंटरनेट के लिए समुद्र के नीचे केबल बिछाई जाती हैं। तेल और गैस की पाइपलाइन भी समुद्र के रास्ते गुजरती हैं। इन सबके लिए समुद्र तल की सटीक जानकारी जरूरी होती है। (Next Generation Survey Vessels)
एनजीएसवी भारत की मैरिटाइम डोमेन अवेयरनेस यानी समुद्री क्षेत्र की निगरानी क्षमता भी बढ़ाएंगे। इससे नौसेना को रणनीतिक ऑपरेशन की बेहतर तैयारी करने में मदद मिलेगी। ये जहाज पुराने सर्वे जहाजों, जैसे संध्यायक क्लास की जगह लेंगे या उन्हें आधुनिक तकनीक से अपग्रेड करने का काम करेंगे। खासकर हिंद महासागर क्षेत्र में जहां गतिविधियां बढ़ रही हैं, वहां ऐसी आधुनिक सर्वे क्षमता बेहद महत्वपूर्ण है। (Next Generation Survey Vessels)
इन खूबियों से होंगे लैस
हालांकि आधिकारिक जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं हुई है, लेकिन अनुमान के मुताबिक एनजीएसवी बड़े और आधुनिक सर्वे जहाज होंगे। भारतीय नौसेना के पास पहले से ऐसे सर्वे जहाज मौजूद हैं, लेकिन एनजीएसवी अधिक आधुनिक और तकनीकी रूप से एडवांस होंगे। माना जा रहा है कि इनमें मल्टी–बीम इको साउंडर, एडवांस सोनार सिस्टम, आधुनिक डेटा प्रोसेसिंग लैब और हेलीकॉप्टर ऑपरेशन की सुविधा जैसी क्षमताएं हो सकती हैं।
इनका वजन यानी डिस्प्लेसमेंट लगभग 2,500 से 4,000 टन के बीच हो सकता है। लंबाई करीब 90 से 110 मीटर तक हो सकती है। ये जहाज लगभग 18 से 22 नॉट्स की रफ्तार से चल सकेंगे और एक बार में 4 से 6 सप्ताह तक समुद्र में लगातार काम कर सकेंगे। (Next Generation Survey Vessels)
इनमें मल्टी-बीम इको साउंडर जैसे आधुनिक उपकरण होंगे, जो समुद्र की गहराई को बहुत सटीक तरीके से मापते हैं। साइड स्कैन सोनार और सब-बॉटम प्रोफाइलर जैसे सिस्टम समुद्र तल की बनावट और नीचे की परतों की जानकारी देंगे।
इन जहाजों से ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल और रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल भी छोड़े जा सकेंगे, जो समुद्र के नीचे जाकर डेटा इकट्ठा करेंगे। इसमें जीपीएस, आधुनिक नेविगेशन सिस्टम और डेटा प्रोसेसिंग लैब भी होंगी, जहां सर्वे की जानकारी तुरंत प्रोसेस की जा सकेगी। (Next Generation Survey Vessels)
संभव है कि इनमें हेलीकॉप्टर ऑपरेशंस के लिए हेली डेक भी हो। जहाज पर लगभग 80 से 120 लोग तैनात रह सकते हैं, जिनमें नौसेना के अधिकारी, वैज्ञानिक और तकनीकी स्टाफ शामिल होंगे।
इन जहाजों की खास बात होगी कम शोर और कम कंपन वाली डिजाइन, ताकि सर्वे के दौरान माप सटीक मिल सके। कोशिश होगी कि इनमें अधिक से अधिक स्वदेशी सिस्टम लगाए जाएं। (Next Generation Survey Vessels)
मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत को मजबूती
कंपनी अगर भारतीय नौसेना के लिए ये जहाज बनाती है, तो इससे ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को भी बूस्ट मिलेगा। रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में यह एक और बड़ा कदम माना जा रहा है।
सीएसएल पहले ही भारतीय नौसेना के लिए देश का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत बना चुका है। इसके अलावा कंपनी ने नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल वेसल्स और अन्य डिफेंस शिप्स पर भी काम किया है। हाल ही में कंपनी ने छह नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल वेसल्स (एनजीएमवी) बनाने का भी बड़ा कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया था। ऐसे में एनजीएसवी प्रोजेक्ट मिलने से सीएसएल की डिफेंस ऑर्डर बुक और मजबूत होगी। (Next Generation Survey Vessels)
इस प्रोजेक्ट से न केवल हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा, बल्कि एमएसएमई सेक्टर और सप्लाई चेन को भी बड़ा फायदा होगा, क्योंकि जहाज निर्माण में बड़ी संख्या में छोटे और मध्यम उद्योगों की भागीदारी होती है।
शेयर बाजार में सकारात्मक असर
एल–वन घोषित होने की खबर का असर कंपनी के शेयरों पर भी दिखा। 17 फरवरी को सीएसएल के शेयरों में 4 से 7 प्रतिशत तक की तेजी देखी गई। निवेशकों ने इसे कंपनी के लिए सकारात्मक संकेत माना।
समुद्री क्षेत्र में भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है। हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए सटीक सर्वे और मैरीन मैपिंग बेहद जरूरी है। ऐसे जहाज नौसेना को बेहतर रणनीतिक तैयारी और समुद्री सुरक्षा में मदद करेंगे।
एनजीएसवी प्रोजेक्ट भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा है। सरकार घरेलू शिपयार्ड्स को बड़े प्रोजेक्ट देकर देश में रक्षा उत्पादन क्षमता को मजबूत करना चाहती है। (Next Generation Survey Vessels)

