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INS Taragiri: भारत का नया स्वदेशी स्टेल्थ फ्रिगेट अप्रैल में होगा नौसेना में शामिल, ब्रह्मोस-बराक से है लैस

आईएनएस तारागिरी को मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) में बनाया गया है। यह प्रोजेक्ट 17ए के तहत बनने वाले सात फ्रिगेट्स में चौथा जहाज है। इसे 28 नवंबर 2025 को भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया था...

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📍नई दिल्ली | 14 Mar, 2026, 5:12 PM

INS Taragiri: भारतीय नौसेना को जल्द ही एक और आधुनिक युद्धपोत मिलने जा रहा है। स्वदेशी स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस तारागिरी अप्रैल के पहले सप्ताह में विशाखापत्तनम में नौसेना में औपचारिक रूप से शामिल की जाएगी। इस समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे। यह जहाज प्रोजेक्ट 17ए के तहत डेवलप नीलगिरी क्लास फ्रिगेट का हिस्सा है और भारतीय नौसेना के लिए एक महत्वपूर्ण युद्धपोत माना जा रहा है।

आईएनएस तारागिरी को मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) में बनाया गया है। यह प्रोजेक्ट 17ए के तहत बनने वाले सात फ्रिगेट्स में चौथा जहाज है। इसे 28 नवंबर 2025 को भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया था। इसके कमीशनिंग समारोह को पहले मार्च 2026 में आयोजित किया जाना था, लेकिन बाद में कार्यक्रम में थोड़ा बदलाव किया गया है और अब इसे अप्रैल के पहले सप्ताह में आयोजित करने की तैयारी की गई है। (INS Taragiri)

INS Taragiri: प्रोजेक्ट 17ए में एडवांस वॉरशिप

प्रोजेक्ट 17ए भारतीय नौसेना का एक महत्वपूर्ण युद्धपोत निर्माण कार्यक्रम है, जिसके तहत अत्याधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट्स डेवलप किए जा रहे हैं। इन जहाजों को नीलगिरी क्लास के नाम से जाना जाता है। इस परियोजना का उद्देश्य भारतीय नौसेना की समुद्री क्षमता को मजबूत करना और आधुनिक युद्ध की जरूरतों के अनुसार नई तकनीक से लैस युद्धपोत तैयार करना है।

इस श्रृंखला का पहला जहाज आईएनएस नीलगिरी जनवरी 2025 में नौसेना में शामिल किया गया था। इसके बाद आईएनएस उदयगिरि और आईएनएस हिमगिरि अगस्त 2025 में सेवा में आए। अब आईएनएस तारागिरी इस सीरीज का चौथी फ्रिगेट है, जो जल्द ही नौसेना के बेड़े में शामिल होगा। इसके बाद इस क्लास का पांचवां जहाज आईएनएस महेंद्रगिरि भी आने वाले समय में नौसेना में शामिल किया जाएगा। (INS Taragiri)

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आधुनिक डिजाइन और स्टेल्थ तकनीक

आईएनएस तारागिरी को आधुनिक स्टेल्थ डिजाइन के साथ तैयार किया गया है। इसका कुल डिस्प्लेसमेंट 6700 टन से अधिक है। इस जहाज में कम से कम 75 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जिससे भारत की रक्षा निर्माण क्षमता को भी मजबूती मिली है।

इस फ्रिगेट के डिजाइन में कई ऐसी तकनीकों का उपयोग किया गया है जो इसे दुश्मन के रडार और सेंसर से छिपाने में मदद करती हैं। जहाज का हल यानी बाहरी ढांचा अधिक स्मूद और स्लीकर बनाया गया है। इसके अलावा इसमें एनक्लोज्ड मूरिंग डेक और कम इन्फ्रारेड सिग्नेचर जैसी विशेषताएं दी गई हैं। इससे जहाज की हीट और रडार पहचान कम हो जाती है और युद्ध की स्थिति में इसे पहचानना मुश्किल हो जाता है। (INS Taragiri)

आधुनिक हथियारों से लैस युद्धपोत

आईएनएस तारागिरी और इसकी अन्य सिस्टर शिप्स को आधुनिक हथियार प्रणालियों से लैस किया गया है। इस जहाज में ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल प्रणाली लगाई गई है, जो समुद्र और जमीन पर मौजूद लक्ष्यों को तेजी से निशाना बना सकती है। इसके अलावा इसमें बराक-8 लॉन्ग-रेंज सर्फेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम भी लगाया गया है, जो हवाई खतरों से जहाज की सुरक्षा करता है।

जहाज में 76 मिलीमीटर की नौसैनिक गन भी लगाई गई है, जिसे लाइसेंस के तहत भारत में बनाया गया है। इसके अलावा इसमें टॉरपीडो और एंटी-सबमरीन हथियार भी मौजूद हैं, जिनका उपयोग समुद्र के अंदर मौजूद पनडुब्बियों के खिलाफ किया जा सकता है। इस युद्धपोत में आधुनिक रडार और सेंसर सिस्टम भी लगाए गए हैं, जो समुद्री क्षेत्र में निगरानी और लक्ष्य पहचान में मदद करते हैं। (INS Taragiri)

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निर्माण में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल

आईएनएस तारागिरी के निर्माण में इंटीग्रेटेड मॉड्यूलर कंस्ट्रक्शन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इस तकनीक के तहत जहाज के अलग-अलग हिस्सों को पहले अलग-अलग मॉड्यूल के रूप में तैयार किया जाता है और बाद में उन्हें जोड़कर पूरा जहाज बनाया जाता है। इससे निर्माण प्रक्रिया तेज होती है और गुणवत्ता भी बेहतर रहती है।

इस तकनीक के कारण प्रोजेक्ट 17ए के जहाजों के निर्माण का समय भी कम हुआ है। उदाहरण के तौर पर पहले जहाज आईएनएस नीलगिरी को बनाने में लगभग 93 महीने लगे थे, जबकि आईएनएस तारागिरी का निर्माण करीब 81 महीनों में पूरा किया गया। (INS Taragiri)

पूर्वी नौसेना कमान में होगी तैनाती

आईएनएस तारागिरी को भारतीय नौसेना की पूर्वी नौसेना कमान में शामिल किया जाएगा, जिसका मुख्यालय विशाखापत्तनम में है। यह कमान भारतीय महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और निगरानी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालती है। इस फ्रिगेट के शामिल होने के बाद पूर्वी फ्लीट की सतह युद्ध क्षमता और मजबूत होगी।

प्रोजेक्ट 17ए के तहत बनने वाले फ्रिगेट्स भारतीय नौसेना के आधुनिक युद्धपोतों में शामिल हैं। इन जहाजों के निर्माण में देश के विभिन्न हिस्सों से जुड़े 200 से अधिक एमएसएमई उद्योगों ने भी योगदान दिया है। इसके माध्यम से स्वदेशी रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर भी बने हैं। (INS Taragiri)

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