📍नई दिल्ली/कोच्चि | 31 Mar, 2026, 7:53 PM
INS Malwan: भारतीय नौसेना को एक और स्वदेशी युद्धपोत मिला है। कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड में तैयार किया गया माहे क्लास कैटेगरी का एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट आईएनएस मालवान नौसेना को सौंपा गया। इस कैटेगरी के आठ जहाज बनाए जाने हैं, जिनमें यह दूसरा जहाज है, जिसे खास तौर पर समुद्र के उथले इलाकों में पनडुब्बियों से निपटने के लिए तैयार किया गया है।
यह जहाज पूरी तरह भारत में डिजाइन और निर्मित किया गया है और इसे नौसेना की जरूरतों के अनुसार तैयार किया गया है।
INS Malwan: ‘मालवान’ नाम के पीछे की कहानी
इस जहाज का नाम महाराष्ट्र के एतिहासिक तटीय शहर मालवान के नाम पर रखा गया है। यह इलाका छत्रपति शिवाजी महाराज की समुद्री ताकत और रणनीति से जुड़ा रहा है। समुद्र में उनकी मजबूत पकड़ और किलों के नेटवर्क के कारण मालवान का खास महत्व रहा है।
इसके साथ ही यह नाम भारतीय नौसेना के पुराने जहाज आईएनएस मालवान की परंपरा को भी आगे बढ़ाता है, जो पहले माइंसवीपर के रूप में सर्विस में था और 2003 तक नौसेना का हिस्सा रहा। इस तरह पुराने गौरवशाली नामों को नए जहाजों में जीवित रखने की परंपरा जारी रखी गई है। (INS Malwan)
किस तरह का जहाज है ‘मालवान’
‘मालवान’ को एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट कहा जाता है। इसका मतलब है कि यह जहाज खास तौर पर समुद्र के कम गहराई वाले हिस्सों में काम करने के लिए बनाया गया है, जहां पनडुब्बियों का पता लगाना मुश्किल होता है।
इसकी लंबाई करीब 78 मीटर के आसपास है, जबकि चौड़ाई लगभग 11.3 से 11.36 मीटर तक है। जहाज का ड्रॉट यानी पानी में डूबने की गहराई अधिकतम 2.7 मीटर है, जिससे यह उथले पानी में भी आसानी से ऑपरेशन कर सकता है। इसका कुल वजन करीब 900 से 1100 टन के बीच है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह तेजी से मूव कर सके और जरूरत पड़ने पर तुरंत प्रतिक्रिया दे सके।
🚢⚓ Indian Navy gets stronger with ‘Malwan’!
Another boost to India’s maritime power as the Indian Navy receives ‘Malwan’, the second Anti-Submarine Warfare Shallow Water Craft, built by Cochin Shipyard Limited, Kochi on 31 March 2026. 🇮🇳
Named after the historic coastal town of… pic.twitter.com/uwrUdBqL60— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) March 31, 2026
यह जहाज अधिकतम 25 नॉट्स की रफ्तार से चल सकता है, जो समुद्र में तेज गति मानी जाती है। अगर इसे सामान्य गति यानी 14 नॉट्स पर चलाया जाए, तो यह करीब 1800 नॉटिकल मील तक बिना रुके सफर कर सकता है। इसमें कुल 57 लोग तैनात रहते हैं, जिनमें 7 अधिकारी और 50 नाविक शामिल होते हैं।
इस जहाज में तीन डीजल इंजन लगे हैं, जो वॉटरजेट प्रोपल्शन सिस्टम के जरिए इसे आगे बढ़ाते हैं। इसका मतलब यह है कि जहाज पानी को पीछे की ओर तेजी से फेंककर आगे बढ़ता है, जिससे इसकी दिशा बदलने की क्षमता बेहतर होती है और यह कम आवाज के साथ चलता है। यही वजह है कि दुश्मन पनडुब्बियों के लिए इसे पहचानना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा इसमें स्टीथ और सिग्नेचर रिडक्शन तकनीक भी दी गई है, जिससे यह रडार और सोनार पर आसानी से नजर नहीं आता। (INS Malwan)
पनडुब्बियों से मुकाबले की खास तैयारी
इस जहाज की सबसे बड़ी खासियत इसकी पनडुब्बी रोधी क्षमता है। इसमें ऐसे आधुनिक सिस्टम लगाए गए हैं, जो पानी के नीचे छिपे दुश्मन का पता लगाने में मदद करते हैं।
इसमें अभय हल-माउंटेड सोनार लगाया गया है, जो पानी के अंदर छिपे टारगेट्स का पता लगाने में मदद करता है। इसके साथ ही लो फ्रीक्वेंसी वेरिएबल डेप्थ सोनार भी है, जिसे पानी में नीचे उतारकर गहराई में मौजूद पनडुब्बियों का पता लगाया जा सकता है।
जहाज के हथियारों की बात करें तो ‘मालवान’ को खास तौर पर पनडुब्बियों से लड़ने के लिए तैयार किया गया है। इसमें आरबीयू-6000 एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर लगाया गया है, जो दुश्मन पनडुब्बियों पर रॉकेट से हमला करता है। इसके अलावा इसमें दो ट्रिपल लाइटवेट टॉरपीडो लॉन्चर हैं, जिनसे कुल छह टॉरपीडो दागे जा सकते हैं। ये टॉरपीडो खास तौर पर उथले पानी में पनडुब्बियों को नष्ट करने के लिए बनाए गए हैं।
इसके अलावा सतह पर मौजूद खतरों से निपटने के लिए इसमें 30 मिलीमीटर की नेवल सरफेस गन लगाई गई है, जो नजदीकी लक्ष्य पर हमला करने के काम आती है। इसके अलावा दो 12.7 मिलीमीटर की रिमोट कंट्रोल गन भी हैं, जिन्हें दूर से ऑपरेट किया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर तेज फायरिंग की जा सकती है। (INS Malwan)
कई तरह के ऑपरेशन में काम आने वाला जहाज
‘मालवान’ सिर्फ पनडुब्बियों से मुकाबले के लिए ही नहीं, बल्कि कई अन्य ऑपरेशन में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यह जहाज पानी के नीचे निगरानी करने के अलावा लो इंटेंसिटी मैरीटाइम ऑपरेशंस में भी काम आता है।
जहाज में माइन बिछाने की भी क्षमता है, जिससे समुद्र में दुश्मन के रास्ते को रोका जा सकता है। जरूरत पड़ने पर माइन वॉरफेयर यानी समुद्र में बिछे खतरों से निपटने का काम भी किया जा सकता है। साथ ही टॉरपीडो डिकॉय लॉन्चर भी लगाए गए हैं, जो दुश्मन के टॉरपीडो को भ्रमित कर जहाज को सुरक्षित रखते हैं। इसके जरिए समुद्र में संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है।
तटीय सुरक्षा और गश्त के दौरान यह जहाज लगातार निगरानी बनाए रखने में मदद करता है, जिससे किसी भी खतरे का समय रहते पता लगाया जा सके। (INS Malwan)
आधुनिक तकनीक से लैस
मालवान में आधुनिक रडार और सेंसर सिस्टम लगाए गए हैं, जो समुद्र में दूर तक निगरानी कर सकते हैं। इनकी मदद से जहाज आसपास की गतिविधियों पर नजर रख सकता है और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई कर सकता है।
ऑपरेशन को आसान और प्रभावी बनाए रखने के लिए जहाज के अंदर कई ऑटोमेटेड सिस्टम भी लगाए गए हैं, जिससे जहाज पर काम करने वाले क्रू को भी बेहतर सहायता मिलती है।
‘मालवान’ की एक बड़ी खूबी यह है कि इसमें 80 प्रतिशत से ज्यादा स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। जहाज पर लगे कई उपकरण और सिस्टम भारत में ही विकसित किए गए हैं। (INS Malwan)
क्या है माहे क्लास
यह जहाज माहे क्लास का हिस्सा है। इस क्लास के तहत कुल आठ जहाज बनाए जा रहे हैं, जिन्हें कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड, कोच्चि में तैयार किया जा रहा है। ‘मालवान’ इस पूरी सीरीज का दूसरा जहाज है। ‘माहे’ इस सीरीज का पहला यानी लीड शिप माना जाता है। इसे अक्टूबर 2025 में नौसेना को सौंपा गया था और बाद में नवंबर 2025 में इसे औपचारिक तौर पर नौसेना में शामिल किया गया। (INS Malwan)
इस पूरे प्रोजेक्ट के तहत कुल 16 ऐसे जहाज बनाए जा रहे हैं। इनमें से आठ कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड बना रहा है, जिन्हें माहे क्लास कहा जाता है, जबकि बाकी आठ जहाज कोलकाता की गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स बना रही है, जिन्हें अर्णाला क्लास के नाम से जाना जाता है। इस प्रोजेक्ट की शुरुआत अप्रैल 2019 में हुई थी, जब रक्षा मंत्रालय ने इन जहाजों के निर्माण का अनुबंध किया था। इसके बाद अलग-अलग चरणों में इन जहाजों का निर्माण और लॉन्चिंग शुरू हुई।
इस कैटेगरी के जहाजों का मुख्य काम तटीय इलाकों में निगरानी रखना, पानी के नीचे होने वाली गतिविधियों पर नजर रखना और जरूरत पड़ने पर पनडुब्बियों को निशाना बनाना होता है। इसके अलावा ये जहाज लो इंटेंसिटी मैरीटाइम ऑपरेशन, सर्च एंड रेस्क्यू और माइन वॉरफेयर जैसे कामों में भी इस्तेमाल किए जाते हैं। (INS Malwan)

