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Indian Maritime Doctrine 2025: भारतीय नौसेना ने जारी की नई मैरीटाइम डॉक्ट्रिन, पहली बार “नो-वार, नो-पीस” की अलग कैटेगरी

डॉक्ट्रिन में बताया गया है कि समुद्री सुरक्षा अब केवल समुद्र तक सीमित नहीं है। नई रणनीति में स्पेस, साइबर और कॉग्निटिव डोमेन को भी महत्वपूर्ण माना गया है...

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📍नई दिल्ली | 2 Dec, 2025, 9:29 PM

Indian Maritime Doctrine 2025: भारतीय नौसेना ने 2 दिसंबर को अपनी नई इंडियन मैरीटाइम डॉक्ट्रिन 2025 जारी की। नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने नौसेना दिवस से पहले आयोजित वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह दस्तावेज जारी किया। यह डॉक्ट्रिन 2004 में पहली बार तैयार हुआ था, जिसे 2009 और 2015 में अपडेट किया गया। अब 2025 का संस्करण भारत के बदलते समुद्री माहौल और रणनीतिक सोच को ध्यान में रखते हुए पूरी तरह आधुनिक रूप में सामने आया है।

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नया मैरीटाइम डॉक्ट्रिन (Indian Maritime Doctrine 2025) नौसेना के लिए एक तरह की “गाइड बुक” है, जो यह समझाती है कि नौसेना क्या करती है, क्यों करती है और भविष्य में कैसे काम करेगी। यह पूरे कॉन्फ्लिक्ट स्पेक्ट्रम शांतिपूर्ण समय से लेकर संघर्ष की स्थिति तक नौसेना की भूमिकाओं को स्पष्ट करता है। इसमें भारत के समुद्री हितों को सुरक्षित रखने के लिए अपनाई जाने वाली रणनीति, ऑपरेशन और तकनीक के दिशा-निर्देश हैं।

डॉक्ट्रिन (Indian Maritime Doctrine 2025) में कहा गया है कि बीते एक दशक में भारत का समुद्री माहौल काफी बदल चुका है। हिंद महासागर क्षेत्र में भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा बढ़ी है और नई तकनीकों के चलते सुरक्षा की चुनौतियां भी ज्यादा जटिल हो गई हैं। इसी वजह से नए डॉक्ट्रिन में भारत के बड़े विजन विकसित भारत 2047 को मुख्य आधार बनाया गया है। यह डॉक्ट्रिन सरकार की प्रमुख योजनाओं जैसे सागरमाला, पीएम गति शक्ति, मैरीटाइम इंडिया विजन 2030, मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047 और महासागर विजन से भी जुड़ा हुआ है।

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नई डॉक्ट्रिन (Indian Maritime Doctrine 2025) की सबसे खास बात यह है कि इसमें पहली बार “नो-वार, नो-पीस” को एक अलग कैटेगरी के तौर में शामिल किया गया है। यह वह स्थिति होती है जब देश युद्ध में नहीं होता, लेकिन तनाव या धमकी की स्थिति बनी रहती है। यह आज के समय की सबसे आम स्थिति है, जिसमें ग्रे-जोन, हाइब्रिड वॉरफेयर और अनियमित युद्ध जैसी चुनौतियां शामिल हैं। नौसेना अब इन परिस्थितियों के लिए भी औपचारिक रूप से तैयार होगी।

इसके अलावा डॉक्ट्रिन (Indian Maritime Doctrine 2025) में बताया गया है कि समुद्री सुरक्षा अब केवल समुद्र तक सीमित नहीं है। नई रणनीति में स्पेस, साइबर और कॉग्निटिव डोमेन को भी महत्वपूर्ण माना गया है। नौसेना अब अनक्रूड सिस्टम्स, ऑटोनॉमस प्लेटफॉर्म्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, और क्वांटम तकनीक जैसी आधुनिक क्षमताओं को तेजी से अपनाएगी।

डॉक्ट्रिन का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा “ज्वाइंटनेस” है। इसमें कहा गया है कि सेना, नौसेना और वायुसेना अब भविष्य के ऑपरेशंस में और अधिक इंचटीग्रेटेड तरीके से काम करेंगे। यह नया स्ट्रक्चर ट्राई सर्विसेज जॉइंट डॉक्ट्रिन्स (Indian Maritime Doctrine 2025) के अनुरूप होगा, जिससे तीनों सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ेगी और ऑपरेशनल असर बेहतर होगा।

इंडियन मैरीटाइम डॉक्ट्रिन 2025 (Indian Maritime Doctrine 2025) का उद्देश्य भारत को समुद्री शक्ति के रूप में मजबूत स्थापित करना है। यह भारतीय नौसेना की प्राथमिकताएं भी स्पष्ट हैं, समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा, राष्ट्र के आर्थिक हितों की रक्षा और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की प्रभावी भूमिका सुनिश्चित करना शामिल है। डॉक्ट्रिन यह संदेश देती है कि समुद्र भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा का मुख्य स्तंभ है और भारत अब एक “मैरीटाइम-कॉन्शस” राष्ट्र बनेगा।

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डॉक्ट्रिन (Indian Maritime Doctrine 2025) यह भी बताती है कि नौसेना को रणनीति के अनुरूप अपनी क्षमताओं का विकास करना है। इसमें जहाजों, सबमरीनों, एयर असेट्स और नए तकनीकी प्लेटफॉर्म्स की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि भारत भविष्य की किसी भी समुद्री चुनौती का सामना प्रभावी और समयबद्ध तरीके से कर सके।

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