📍नई दिल्ली | 15 Nov, 2025, 4:57 PM
India-US Maritime Cooperation: भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी इन दिनों अमेरिका के आधिकारिक दौरे पर हैं। यह यात्रा दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। नौसेना की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि यह दौरा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में “मुक्त, समावेशी और नियम-आधारित” व्यवस्था को मजबूत बनाने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
भारत और अमेरिका लंबे समय से समुद्री सुरक्षा में एक-दूसरे के साझेदार रहे हैं। चीन के बढ़ते प्रभाव और उसके दावों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र को और संवेदनशील बना दिया है। ऐसे समय में यह यात्रा न केवल सामरिक दृष्टि से अहम है, बल्कि दोनों देशों के बीच बढ़ते भरोसे और समन्वय को भी दिखाती है।
एडमिरल त्रिपाठी की यह यात्रा 10 साल के उस फ्रेमवर्क के बाद हो रही है, जिसे भारत और अमेरिका ने 31 अक्टूबर 2025 को कुआलालंपुर में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उनके अमेरिकी समकक्ष पीट हगसेथ के बीच हुई बैठक में साइन किया था। यह नया फ्रेमवर्क दोनों देशों के रक्षा संबंधों को नई दिशा देने का काम करेगा।
India-US Maritime Cooperation
अमेरिका पहुंचने के बाद भारतीय नौसेना प्रमुख की मुलाकातें अमेरिकी शीर्ष सैन्य अधिकारियों के साथ हुईं। इनमें इंडो-पैसिफिक कमांड के कमांडर एडमिरल सैमुअल जे. पापारो, यूएस पैसिफिक फ्लीट के कमांडर एडमिरल स्टीफन टी. कोहलर और यूएस मरीन फोर्सेज पैसिफिक के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल जेम्स एफ. ग्लिन, शामिल हैं। इन बैठकों में मुख्य रूप से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते सामरिक सहयोग और समुद्री सुरक्षा पर चर्चा हुई।
India-US Maritime Cooperation दोनों पक्षों ने अपनी बातचीत में समुद्री सुरक्षा, समुद्री सहयोग, इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाने, और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में संयुक्त अभियानों को आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया। चर्चाओं में समुद्री सूचना साझा करने की व्यवस्था को और मजबूत करने पर भी सहमति बनी। आईपीएमडीए और हिंद महासागर क्षेत्र के इंफॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर जैसे प्लेटफॉर्म इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
एडमिरल त्रिपाठी और अमेरिकी अधिकारियों के बीच हुई बैठकों में समुद्री रास्तों की सुरक्षा, महत्वपूर्ण अंडरसी इन्फ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा, और मानवीय सहायता तथा राहत अभियानों में संयुक्त कार्रवाई जैसे मुद्दों पर भी गहन चर्चा हुई। इसके अलावा खोज एवं बचाव मिशन, समुद्री डकैती के खिलाफ संयुक्त प्रयास और समुद्र में अन्य गैर-पारंपरिक चुनौतियों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
इस यात्रा का एक बड़ा फोकस दोनों नौसेनाओं के बीच होने वाले द्विपक्षीय और बहुपक्षीय अभ्यासों को और मजबूत करना रहा। इनमें मालाबार, पासेक्स, सीएमएफ मिलन जैसे अभ्यास शामिल हैं। बातचीत में इन अभ्यासों को और कॉम्प्लेक्स, डायनामिक एंड हाई-लेवल बनाने पर भी जोर दिया गया ताकि दोनों सेनाओं की संयुक्त युद्ध क्षमता मजबूत हो सके।
India-US Maritime Cooperation इस दौरान एमर्जिंग टेक्नॉलॉजीज पर भी गहरी चर्चा हुई। दोनों देशों ने अन्मैन्ड, ISR यानी इंटेलिजेंस-सर्विलांस-रिकॉनेसेन्स टेक्नोलॉजी, साइबर और स्पेस-एनेबल्ड मैरिटाइम ऑपरेशंस में सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। यह क्षेत्र भविष्य की समुद्री सुरक्षा के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।
भारतीय नौसेना की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर भी बातचीत आगे बढ़ा रहा है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया था कि भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद कम करने के बाद अमेरिका भारत के निर्यात पर लगाई गई 50 फीसदी टैरिफ में कमी कर सकता है।


