📍विशाखापत्तनम | 18 Feb, 2026, 11:13 PM
IFR-Milan 2026: बुधवार को विशाखापत्तनम भारतीय नौसेना की ब्लू वॉटर ताकत का सबसे बड़ा गवाह बना। विशाखापत्तनम के तट पर आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (आईएफआर) 2026 सिर्फ एक नौसैनिक परेड नहीं थी, बल्कि यह भारत की समुद्री ताकत और रणनीतिक आत्मविश्वास का खुला प्रदर्शन था। ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह पहला मौका था जब भारतीय नौसेना के कई अहम और स्ट्रेटेजिक वॉरशिप एक साथ कतार में दुनिया के सामने दिखाई दिए। ऐसे मौके कई सालों में कभी कभार ही देखने को मिलते हैं।
आईएफआर का निरीक्षण तीनों सेनाओं की सुप्रीम कमांडर और देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया। वह स्वदेशी ऑफशोर पेट्रोल वेसल आईएनएस सुमेधा पर सवार होकर फ्लीट का रिव्यू करती नजर आईं। समुद्र में कतारबद्ध खड़े भारतीय और विदेशी जहाजों ने यह साफ संदेश दिया कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत अब सिर्फ एक तटीय ताकत नहीं, बल्कि एक सशक्त ब्लू वॉटर नेवी बन चुका है। (IFR-Milan 2026)
IFR-Milan 2026: क्या होता है फ्लीट रिव्यू?
फ्लीट रिव्यू एक ऐसा कार्यक्रम होता है, जिसमें देश का सर्वोच्च कमांडर समुद्र में तैनात नौसेना के जहाजों का निरीक्षण करता है। इसमें दोस्त देशों की नौसेनाएं भी हिस्सा लेती हैं। भारत में इससे पहले 2001 में मुंबई और 2016 में विशाखापत्तनम में आईएफआर आयोजित हो चुका है। 2026 का आयोजन सबसे बड़ा माना जा रहा है, क्योंकि इसमें मिलन एक्सरसाइज और आईओएनएस कॉन्क्लेव भी शामिल हैं।
इस बार आईएफआर में करीब 70 से ज्यादा देशों की नौसेनाएं शामिल हुईं। भारतीय नौसेना के 50 से अधिक युद्धपोत, पनडुब्बियां और सपोर्ट शिप इसमें दिखाई दिए। साथ ही विदेशी नौसेनाओं के भी कई जहाज समुद्र में मौजूद रहे। (IFR-Milan 2026)
ऑपरेशन सिंदूर की यादें हुईं ताजा
पिछले साल हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय मंच था, जहां भारतीय नौसेना की स्ट्रेटेजिक ताकत खुले तौर पर सामने आई। उस ऑपरेशन के दौरान भारत के स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत ने अपने कैरियर बैटल ग्रुप के साथ अरब सागर में अहम भूमिका निभाई थी।
आईएफआर 2026 में आईएनएस विक्रांत मुख्य आकर्षण रहा। यह भारत का पहला पूरी तरह स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर है, जिसे कोचीन शिपयार्ड में बनाया गया है। लगभग 40 हजार टन से ज्यादा वजन वाला यह विशाल जहाज भारत की समुद्री शक्ति का प्रतीक बन चुका है।
इस पर मिग-29के फाइटर जेट, कामोव हेलीकॉप्टर और एडवांस लाइट हेलीकॉप्टर ध्रुव जैसे एयरक्राफ्ट तैनात किए जा सकते हैं। आईएफआर के दौरान समुद्र में एंकर डाले खड़े विक्रांत को देखकर साफ लगा कि भारत अब दूर समुद्रों में भी अपनी एयर पॉवर को प्रोजेक्ट करने की क्षमता रखता है। (IFR-Milan 2026)
स्वदेशी डिस्ट्रॉयर और फ्रिगेट ने भी दिखाया दम
आईएफआर में प्रोजेक्ट 15बी के तहत बने विशाखापत्तनम क्लास गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर भी शामिल थे। आईएनएस विशाखापत्तनम, आईएनएस मोरमुगाओ और अन्य जहाज आधुनिक रडार, ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और लंबी दूरी के एयर डिफेंस सिस्टम से लैस हैं।
ये जहाज एंटी-एयर, एंटी-सर्फेस और एंटी-सबमरीन वारफेयर में सक्षम हैं। इनकी स्टेल्थ डिजाइन से इन्हें दुश्मन के रडार से बचने में मदद करती है।
इसी तरह प्रोजेक्ट 17ए के तहत बने नीलगिरी क्लास स्टेल्थ फ्रिगेट भी आकर्षण का केंद्र रहे। ये जहाज अधिक ऑटोमेशन, कम क्रू और आधुनिक सेंसर से लैस हैं। इनका डिजाइन पूरी तरह भारतीय नौसेना के डायरेक्टोरेट ऑफ नेवल डिजाइन द्वारा तैयार किया गया है। (IFR-Milan 2026)
पनडुब्बियों और एंटी सबमरीन वॉरशिप भी दिखे कतार में
आईएफआर में तीन भारतीय पनडुब्बियां भी दिखाई गईं। इनमें शिशु क्लास की शंकुल, सिंधु क्लास की आईएनएस सिंधुकेसरी और आईएनएस सिंधुकीर्ति शामिल थीं। ये पनडुब्बियां साइलेंट वॉरियर, लंबी दूरी की क्षमता और डीप स्ट्राइक के लिए जानी जाती हैं।
इसके अलावा अर्नाला क्लास एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट भी मौजूद रहे। इनका मकसद तटीय इलाकों में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाना और उन्हें निष्क्रिय करना है। हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती पनडुब्बी गतिविधियों को देखते हुए यह क्षमता बेहद अहम मानी जा रही है। ये जहाज सोनार, टॉरपीडो और एएसडब्ल्यू हेलीकॉप्टर से लैस हैं। हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती पनडुब्बी गतिविधियों को देखते हुए इनकी भूमिका बहुत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। (IFR-Milan 2026)
आईएनएस निस्तार की दिखी झलक
आईएफआर में डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू व्हीकल यानी डीएसआरवी और डाइविंग सपोर्ट वेसल आईएनएस निस्तार भी देखने को मिला। इनका काम समुद्र में फंसी पनडुब्बियों के नाविकों को बचाना है। यह भारत की मानवीय और तकनीकी क्षमता दोनों को दिखाता है। नया स्वदेशी निस्तार भारतीय शिपयार्ड में बना है और यह भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता को दिखाता है। (IFR-Milan 2026)
पहली बार दिखा आईएनएस अन्वेष
आईएफआर में भारतीय नौसना ने पहली बार अपने स्ट्रेटेजिक शिप आईएनएस अन्वेष (A41) को भी शोकेस किया। यह भारतीय नौसेना का एक बेहद खास और रणनीतिक जहाज है। इसे बैलास्टिक मिसाइल रेंज इंस्ट्रूमेंटेशन शिप कहा जाता है। आसान शब्दों में समझें तो यह समुद्र में तैरती हुई टेस्टिंग लैब है, जहां से लंबी दूरी की मिसाइलों का परीक्षण और ट्रैकिंग की जाती है। इसी वजह से इसे फ्लोटिंग टेस्ट रेंज भी कहा जाता है।
“अन्वेष” का मतलब होता है खोज। यह नाम इसके काम को सही तरीके से दर्शाता है, क्योंकि यह जहाज मिसाइलों को ट्रैक करता है, उनका डेटा इकट्ठा करता है और परीक्षण की पूरी प्रक्रिया को मॉनिटर करता है। (IFR-Milan 2026)
INS Anvesh, India’s strategic ballistic missile range instrumentation ship, marks a powerful presence at #IFR2026 in Visakhapatnam — underscoring the Indian Navy’s growing technological edge and strategic deterrence capabilities.#InternationalFleetReview #IndianNavy #INSAnvesh… pic.twitter.com/6nqpGAtOQz
— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) February 18, 2026
इस जहाज को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ ने डिजाइन किया है और कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड में बनाया गया है। यह पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित है और ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की बड़ी मिसाल माना जाता है।
आईएनएस अन्वेष को 11 मार्च 2022 को गुप्त समारोह में कमीशन किया गया था। यह जहाज डीआरडीओ के स्वामित्व में है, लेकिन इसे भारतीय नौसेना संचालित करती है। यानी इस पर नौसेना के अधिकारी और जवान तैनात रहते हैं, जबकि इसके मिशन डीआरडीओ के कार्यक्रमों से जुड़े होते हैं। (IFR-Milan 2026)
यह जहाज करीब 118 मीटर लंबा और 20 मीटर चौड़ा है। इसका कुल वजन लगभग 11,300 टन है। यह 18 नॉट्स से ज्यादा की रफ्तार से चल सकता है और बिना दोबारा सप्लाई लिए करीब 45 दिन तक समुद्र में रह सकता है। इस पर लगभग 165 लोग तैनात रहते हैं। इनमें नौसेना के अधिकारी, तकनीकी स्टाफ और वैज्ञानिक शामिल होते हैं।
आईएनएस अन्वेष की सबसे बड़ी तकनीकी खासियत इसका इंटीग्रेटेड फुल इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम है। यह भारतीय नौसेना का पहला जहाज है जिसमें इस तरह की तकनीक लगी है। (IFR-Milan 2026)
इस सिस्टम से जहाज कम शोर करता है, ज्यादा स्थिर रहता है और लंबे समय तक लगातार काम कर सकता है। मिसाइल टेस्टिंग के दौरान स्थिरता बहुत जरूरी होती है, क्योंकि हल्की सी कंपन भी डेटा को प्रभावित कर सकती है।
आईएनएस अन्वेष पर लंबी दूरी का मल्टी-फंक्शन रडार लगाया गया है। यह रडार बैलिस्टिक मिसाइल को ट्रैक करने में सक्षम है। इसके अलावा इसमें इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम, टेलीमेट्री उपकरण और डेटा प्रोसेसिंग सेंटर भी हैं। जब कोई मिसाइल छोड़ी जाती है, तो यह जहाज उसकी उड़ान का पूरा डेटा रिकॉर्ड करता है।
इस पर मिसाइल लॉन्च सिस्टम भी मौजूद हैं। यानी जरूरत पड़ने पर यह जहाज खुद भी इंटरसेप्टर मिसाइल टेस्टिंग में हिस्सा ले सकता है। आईएनएस अन्वेष भारत के बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस कार्यक्रम के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। भारत दो चरणों में अपनी मिसाइल डिफेंस सिस्टम डेवलप कर रहा है। इस जहाज की मदद से समुद्र में गहराई तक जाकर मिसाइल इंटरसेप्टर का परीक्षण किया जा सकता है। (IFR-Milan 2026)
21 अप्रैल 2023 को इस जहाज से एक महत्वपूर्ण इंटरसेप्टर मिसाइल टेस्ट किया गया था। यह भारत के लिए बड़ी उपलब्धि थी, क्योंकि इससे साबित हुआ कि देश समुद्र आधारित मिसाइल रक्षा क्षमता विकसित कर रहा है। आईएनएस अन्वेष हिंद महासागर में काफी दूर तक जाकर परीक्षण कर सकता है। इससे 1500 किलोमीटर तक की रेंज वाली मिसाइलों की टेस्टिंग संभव हो जाती है। (IFR-Milan 2026)
आसमान में भी दिखा शक्ति प्रदर्शन
समुद्र के साथ-साथ आसमान में भी शक्ति प्रदर्शन हुआ। मिग-29के फाइटर जेट, पी-8आई मैरीटाइम पेट्रोल एयरक्राफ्ट, डोर्नियर और भारतीय नौसेना की रीढ़ कहे जाने वाले चीता, एएलएच, सी किंग, कोमोव और एमएच 60 आर रोमियो हेलीकॉप्टरों ने फ्लाईपास्ट किया। हॉक जेट्स ने एरियल मैन्यूवर दिखाए। (IFR-Milan 2026)
“बिल्डर नेवी” की पहचान
आईएफआर 2026 ने एक और महत्वपूर्ण संदेश दिया कि भारत अब “बायर नेवी” नहीं, बल्कि “बिल्डर नेवी” बन चुका है। पहले भारत बड़े युद्धपोत विदेशों से खरीदता था। आज एयरक्राफ्ट कैरियर से लेकर डिस्ट्रॉयर, फ्रिगेट और सबमरीन तक देश में डिजाइन और निर्माण हो रहे हैं। मझगांव डॉक, गार्डन रीच शिपबिल्डर्स, कोचीन शिपयार्ड और हिंदुस्तान शिपयार्ड जैसे संस्थान अब विश्वस्तरीय युद्धपोत बना रहे हैं। (IFR-Milan 2026)
मैरीटाइम डिप्लोमेसी की दिखी पावर
आईएफआर-मिलन एक्सरसाइज में ईरान, अमेरिका, रूस, बांग्लादेश जापान, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों की भागीदारी ने यह भी दिखाया कि भारत रणनीतिक संतुलन बनाए रखते हुए सबके साथ संबंध मजबूत कर रहा है। यह कार्यक्रम ऐसे समय में हुआ जब दुनिया कई खेमों में बंटी हुई है। इसके बावजूद विभिन्न देशों की नौसेनाएं एक ही मंच पर दिखीं।
नौसेना के प्रवक्ता कैप्टन विवेक मधवाल ने बताया कि इन आयोजनों में लगभग 72 देशों के प्रतिनिधिमंडल हिस्सा ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह भागीदारी दिखाती है कि अलग-अलग देशों के बीच सहयोग कितना मजबूत हो रहा है। समुद्री सुरक्षा अब सिर्फ एक देश का मुद्दा नहीं है, बल्कि सबकी साझा जिम्मेदारी है, क्योंकि समुद्र पूरी दुनिया की साझा संपत्ति हैं। (IFR-Milan 2026)
उन्होंने यह भी कहा कि विदेशी युद्धपोतों की मौजूदगी भारत की समुद्री पहुंच और सहयोग की नीति को दर्शाती है। वहीं भारतीय नौसेना के जहाजों की संख्या और संरचना इस बात का संकेत है कि अब बेड़े में स्वदेशी जहाजों की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है।
कैप्टन मधवाल के अनुसार, पहली बार स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत की भागीदारी, भारत में बनी कलवरी श्रेणी की पनडुब्बी की मौजूदगी और बड़ी संख्या में देश में डिजाइन और निर्मित प्लेटफॉर्म्स यह साबित करते हैं कि भारतीय नौसेना अब स्वदेशी क्षमता के मामले में काफी मजबूत हो चुकी है। (IFR-Milan 2026)
वहीं इन तीनों बड़े आयोजनों में क्वाड समूह के चारों देश भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया विशाखापत्तनम में मौजूद थे। हालांकि अमेरिका इस कार्यक्रम के लिए अपना एक डेस्ट्रॉयर वॉरशिप भेजने वाला था, लेकिन ऑपरेशनल जरूरतों के कारण वह जहाज शामिल नहीं हो सका। हालांकि, अमेरिका की बाकी भागीदारी में कोई बदलाव नहीं हुआ। अमेरिकी पी-8 मैरीटाइम पेट्रोलिंग एय़रक्राफ्ट ने आईएफआर के फ्लाईपास्ट में हिस्सा लिया और वह एक्सरसाइज मिलन में भी शामिल होने वाला है। वहीं, भारत में अमेरिकी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा कि आपात जरूरतों के कारण यूएसएस पिनकनी इस साल इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में शामिल नहीं हो पाया। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका भारत के साथ अपनी मजबूत साझेदारी को महत्व देता है और इस आयोजन की सफलता की कामना करता है। (IFR-Milan 2026)
ब्लू वॉटर में भारत का आत्मविश्वास
ब्लू वॉटर नेवी का मतलब है ऐसी नौसेना जो अपने तट से दूर, खुले महासागरों में भी लंबे समय तक अभियान चला सके। आईएफआर 2026 में दिखी जहाजों की विविधता और ताकत ने साफ किया कि भारत अब इस श्रेणी में मजबूती से खड़ा है। (IFR-Milan 2026)






