📍नई दिल्ली | 31 Oct, 2025, 3:46 PM
Exercise Milan 2026: साल 2026 भारतीय नौसेना के लिए बेहद खास रहने वाला है। इस साल की शुरुआत में भारतीय नौसेना तीन बड़े इवेंट करने जा रही है, जो अपने आप में रिकॉर्ड होगा। भारतीय नौसेना इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू, एक्सरसाइज मिलन 2026 और इंडियन ओसियन नेवल सिंपोजियम कॉन्क्लेव ऑफ चीफ्स का आयोजन करने जा रही है। इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू और एक्सरसाइज मिलन 2026 में दुनिया के कई देश शामिल होंगे। खास बात यह होगी कि इन इवेंट्स में अमेरिका और रूस भी शामिल होंगे। रूस-यूक्रेन वॉर के बाद यह पहली बार होगा जिसमें दोनों देश किसी एक्सरसाइज में हिस्सा लेंगे। हालांकि चीन, पाकिस्तान और तुर्किए इसमें हिस्सा नहीं ले रहे हैं।
Exercise Milan 2026: 55 से अधिक देशों की नौसेनाएं लेंगी हिस्सा
भारतीय नौसेना के उप प्रमुख वाइस एडमिरल संजय वात्सायन ने शुक्रवार को बताया कि भारत फरवरी 2026 में एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय समुद्री एक्सरसाइज की मेजबानी करने जा रहा है, जिसमें दुनिया के 55 से अधिक देशों की नौसेनाएं हिस्सा लेंगी। इस एक्सरसाइज का नाम ‘मिलन 2026’ रखा गया है। इस कार्यक्रम का आयोजन विशाखापट्टनम में 19 से 26 फरवरी तक होगा। उन्होंने बताया कि इस एक्सरसाइज में अमेरिका और रूस दोनों अपने वॉरशिप भेजेंगे। वहीं, जापान और ऑस्ट्रेलिया भी इसमें हिस्सा लेंगे।
Exercise Milan 2026: क्वॉड देश होंगे शामिल
वाइस एडमिरल वात्सायन के मुताबिक यह एक्सरसाइज अब तक की सबसे बड़ी बहुराष्ट्रीय समुद्री एक्सरसाइज होगी। उन्होंने कहा कि “अमेरिका और रूस दोनों ने इसमें शामिल होने की सहमति दे दी है और वे अपने जहाज भेजेंगे।” जबकि जापान और आस्ट्रेलिया भी इसमें शामिल होंगे। बता दें कि अमेरिका, भारत, जापान और आस्ट्रेलिया क्वॉड का हिस्सा हैं। वाइस एडमिरल ने बताया कि अब तक हमें 55 देशों से सकारात्मक जवाब मिला है, जो अपने जहाजों या उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजेंगे।”
इस आयोजन से पहले 18 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू आयोजित किया जाएगा। यह भारतीय नौसेना द्वारा तीसरी बार आयोजित किया जा रहा है। इससे पहले यह फ्लीट रिव्यू साल 2001 और 2016 में आयोजित हुआ था।
दो चरणों में होगी ‘मिलन 2026’
‘मिलन 2026’ के तहत यह समुद्री एक्सरसाइज दो चरणों में होगी। पहले दो दिन यानी 19 और 20 फरवरी को हार्बर फेज आयोजित होगा, जिसमें हिस्सा लेने वाली नौसेनाओं के बीच बैठकें, योजना और औपचारिक कार्यक्रम होंगे। इसके बाद 21 से 25 फरवरी तक सी फेज चलेगा, जिसमें रीयल टाइम नेवल ऑपरेशन की एक्सरसाइज की जाएगी।
सी फेज के दौरान एंटी-सबमरीन ड्रिल्स, एयर ऑपरेशंस और अन्य समुद्री अभियानों की एक्सरसाइज होगी। उन्होंने बताया कि यह फेज बेहद कॉम्प्लेक्स और डायनेमिक होगा, जिसमें विभिन्न देशों की नौसेनाएं संयुक्त रूप से अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन करेंगी।
भारतीय महासागर में हर गतिविधि पर नजर
मीडिया से बातचीत में वाइस एडमिरल वात्सायन ने कहा कि भारतीय नौसेना लगातार भारतीय महासागर क्षेत्र में मौजूद सभी विदेशी नौसेनिक जहाजों पर नजर रखती है। उन्होंने बताया कि किसी भी समय इस क्षेत्र में 40 से 50 विदेशी जहाज सक्रिय रहते हैं।
उन्होंने कहा, “हम हर जहाज की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं, वे क्या कर रहे हैं, कब आए, कब गए, सबकुछ मॉनिटर किया जाता है।” उन्होंने यह भी कहा कि यह क्षेत्र विश्व व्यापार और तेल परिवहन के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है, इसलिए इससे जुड़ी चुनौतियां हमेशा बनी रहती हैं।
वाइस एडमिरल ने बताया कि भारतीय नौसेना पारंपरिक और गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरों जैसे पाइरेसी, मानव तस्करी और ड्रग्स की तस्करी जैसी समस्याओं से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।
2026 में शामिल होंगे नए शिप
वाइस एडमिरल वात्सायन ने बताया कि इस साल 2025 में भारतीय नौसेना ने अब तक 10 नए जहाज और एक पनडुब्बी को अपने बेड़े में शामिल किया है। साल के आखिर तक चार और जहाज शामिल होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि अगले साल नौसेना में 19 नए जहाज शामिल किए जाएंगे, जिनमें से अधिकतर दिसंबर तक कमीशन कर दिए जाएंगे। इसके बाद अगले वर्ष लगभग 13 और जहाज नौसेना में शामिल होंगे।
ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी
वाइस एडमिरल वात्सायन ने यह भी कहा कि भारत की रणनीतिक गतिविधियां किसी भी हाल में रुकी नहीं हैं। उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है, लेकिन इसके बावजूद हमारी विदेशी साझेदारी, योजनाएं और एक्सरसाइज प्रभावित नहीं हुए हैं। हमारी तैयारियों में कोई रुकावट नहीं है।”
उन्होंने कहा कि भारत का यह स्पष्ट संदेश है कि देश अपनी रक्षा गतिविधियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग दोनों को साथ लेकर चल रहा है।
मैरीटाइम डिप्लोमेसी का उदाहरण है मिलन 2026
‘मिलन 2026’ एक्सरसाइज भारत की मैरीटाइम डिप्लोमेसी का एक बड़ा उदाहरण है। इस आयोजन से भारत एक ऐसे मंच के रूप में उभर रहा है, जो दुनिया की बड़ी नौसेनाओं जैसे अमेरिका, रूस, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अन्य 50 से अधिक देशों को एक साथ ला रहा है। इस एक्सरसाइज का मकसद समुद्री सहयोग को बढ़ाना और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना है।


