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Pahalgam Massacre: पहलगाम आतंकी हमले के बाद फिर उड़ान पर लौटे ‘ध्रुव’ हेलिकॉप्टर, कश्मीर में सुरक्षा बलों को मिली बड़ी राहत

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📍नई दिल्ली | 24 Apr, 2025, 1:05 PM

Pahalgam Massacre: पहलगाम में हुए हालिया आतंकी हमले के बाद, देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती देने के लिए एक अहम फैसला लिया गया है। भारतीय सशस्त्र बलों के स्वदेशी एडवांस लाइट हेलिकॉप्टर (ALH) ‘ध्रुव’ को एक बार फिर से अनंतनाग क्षेत्र में उड़ान की अनुमति मिल गई है। इस फैसले को सुरक्षा बलों की तत्परता और प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। जनवरी 2025 में गुजरात के पोरबंदर में हुए एक हादसे के बाद इन 330 हेलिकॉप्टरों की पूरी फ्लीट को सुरक्षा जांच के लिए रोक दिया गया था। लेकिन अब, पहलगाम हमले के बाद, रक्षा मंत्रालय ने अनंतनाग में इनके इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है।

Pahalgam Massacre: Dhruv Helicopters Back in Action, Boost Security Ops in Kashmir

Pahalgam Massacre: जनवरी में हुए हादसे के बाद से बंद थी उड़ान

5 जनवरी 2025 को गुजरात के पोरबंदर में भारतीय तटरक्षक बल के एक ध्रुव ALH-MkIII हेलिकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में दो पायलटों समेत तीन कर्मियों की मौत हो गई थी। जिसके बाद पूरे देश में इन हेलिकॉप्टरों की उड़ान पर रोक लगा दी गई थी। इसके बाद तकरीबन 300 से अधिक ALH हेलिकॉप्टरों को सुरक्षा जांच के लिए ग्राउंड कर दिया गया था। इसके चलते सेना, वायुसेना, नौसेना और तटरक्षक बलों की ऑपरेशनल परफॉरमेंस पर बड़ा असर पड़ रहा था।

Pahalgam Massacre: पहलगाम हमले के बाद रक्षा मंत्रालय की अनुमति

22 अप्रैल को अनंतनाग के पहलगाम क्षेत्र में हुए आतंकवादी हमले के बाद, जब हालात नियंत्रण में लाने के लिए तेज कार्रवाई की जरूरत महसूस हुई, तब जमीन पर तैनात ऑपरेशन कमांडर को रक्षा मंत्रालय से विशेष अनुमति दी गई कि जरूरत पड़ने पर ALH हेलिकॉप्टरों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके बाद अनंतनाग क्षेत्र में ALH हेलिकॉप्टरों की उड़ानें फिर से शुरू हो गईं। जम्मू-कश्मीर जैसे पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में ये हेलिकॉप्टर विशेष रूप से उपयोगी हैं, जहां सड़क मार्ग सीमित हैं और तुरंत कार्रवाई की जरूरत होती है।

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Pahalgam Massacre: कश्मीर में बढ़ी आतंकी गतिविधियां

रक्षा सूत्रों के मुताबिक, इस वक्त जम्मू-कश्मीर में लगभग 125 से 130 आतंकी सक्रिय हैं, जिनमें से 115 से 120 आतंकी पाकिस्तानी नागरिक हैं। पिछले दो सालों से अमरनाथ यात्रा और घाटी में सामान्य हालात को देखते हुए यह हमला एक सोची-समझी साजिश के तहत किया गया है। हमले का मकसद घाटी में शांति और सामान्य हालात को पटरी से उतारना था। पिछले दो सालों में अमरनाथ यात्रा और पर्यटन में भारी बढ़ोतरी हुई है, जिससे कश्मीर में हालात सामान्य हो रहे थे। लेकिन इस हमले ने साफ कर दिया कि आतंकी हालात बिगाड़ना बनाना चाहते हैं।

Pahalgam Massacre: सूचना तंत्र में चूक बनी चुनौती

इस हमले को लेकर एक बड़ी चूक इंटेलिजेंस सूचना के स्तर पर मानी जा रही है। सूत्रों के अनुसार, करीब दो हफ्ते पहले सामान्य विजिलेंस अलर्ट जारी किया गया था, जो जुलाई से शुरू होने वाली अमरनाथ यात्रा को लेकर था। लेकिन पहलगाम क्षेत्र में हमले की कोई ठोस जानकारी नहीं थी। साथ ही, जहां हमला हुआ, उस क्षेत्र के आस-पास लगभग दस स्थान ऐसे थे जहां पर सुरक्षा बलों की तैनाती नहीं थी और पर्यटक इलाकों में इलेक्ट्रॉनिक निगरानी भी नहीं थी। यह इलाका 3 राष्ट्रीय राइफल्स के तहत आता है और यहां सीआरपीएफ की 169 बटालियन तैयान है, जो यहां से कुछ दूरी पर है।

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ALH ‘ध्रुव’ सेनाओं का भरोसेमंद हेलिकॉप्टर

HAL निर्मित ALH ‘ध्रुव’ हेलिकॉप्टर भारतीय सशस्त्र बलों के लिए एक अहम संसाधन है। इसकी तैनाती पर्वतीय इलाकों, समुद्री सीमाओं और आपदा राहत जैसे कई अभियानों में की जाती है। यह हेलिकॉप्टर अब तक कई बार अपनी बहुउद्देशीय क्षमता और विश्वसनीयता साबित कर चुका है। इसके ऑपरेशन में ब्रेक आने से कश्मीर जैसे संवेदनशील इलाकों में विशेष अभियानों में मुश्किल हो रही थी।

अब फिर से तैयार हैं मिशन पर जाने को

अब जबकि पहलगाम जैसे बड़े हमले के बाद ALH हेलिकॉप्टरों की वापसी हो रही है, यह सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी राहत की बात है। हेलिकॉप्टरों की उपलब्धता से न केवल राहत और बचाव अभियानों में तेजी लाई जा सकती है, बल्कि आतंकवाद रोधी अभियानों में भी बहुत फायदा होगा। ध्रुव हेलिकॉप्टरों की मदद से आतंकी ठिकानों और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। पहाड़ी क्षेत्रों में ये हेलिकॉप्टर तेजी से सूचनाएं इकट्ठा कर सकते हैं। वहीं, हमले के बाद घायलों को अस्पताल पहुंचाने और सैन्य टुकड़ियों को तैनात करने में हेलिकॉप्टरों ने अहम भूमिका निभाई। साथ ही, हेलिकॉप्टरों की मौजूदगी आतंकियों के लिए एक चेतावनी है कि भारतीय सेना हर स्थिति के लिए तैयार है।

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शांति के दावों के बावजूद आतंक का खतरा बरकरार

पहलगाम हमले से साबित हो गया है घाटी में शांति के दावों के बावजूद आतंक का खतरा अभी भी बना हुआ है। वहीं, सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया एजेंसियों की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। खासकर पर्यटन क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार को नए सिरे से रणनीति बनाने की जरूरत है। अनंतनाग और पहलगाम में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) और अन्य अर्धसैनिक बलों की तैनाती बढ़ाई गई है। श्रीनगर और जम्मू में भी सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। इसके अलावा खुफिया एजेंसियों को और सक्रिय करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। साथ ही, पर्यटक स्थलों और भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में सीसीटीवी और ड्रोन जैसे उपकरणों की तैनाती पर जोर दिया जा रहा है। हमले के बाद 1,500 से अधिक संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है, और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने जांच शुरू कर दी है।

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