HomeIndian Armyऑपरेशन सिंदूर ने बदली सेना की रणनीति, बनाई नई ‘साइकॉलॉजिकल डिफेंस यूनिट’

ऑपरेशन सिंदूर ने बदली सेना की रणनीति, बनाई नई ‘साइकॉलॉजिकल डिफेंस यूनिट’

आर्मी चीफ ने समझाया कि अब युद्ध को सिर्फ नक्शे पर एक लाइन की तरह नहीं देखा जा सकता। आज का युद्ध कई लेयर्स में चलता है। जमीन पर सैनिक लड़ रहे होते हैं, उसी समय साइबर अटैक चल रहे होते हैं, स्पेस से जानकारी मिल रही होती है...

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📍नई दिल्ली/बेंगलुरु | 9 Apr, 2026, 11:18 PM

Psychological Defence Unit Indian Army: बेंगलुरु में आयोजित ‘रण संवाद 2026’ कार्यक्रम में आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि अब सेना भविष्य के युद्ध के लिए मल्टी-डोमेन ऑपरेशन यानी एमडीओ की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने साफ कहा कि ऑपरेशन सिंदूर से मिली सीख अब भारतीय सेना की भविष्य की तैयारियों को बदल रही हैं। उन्होंने खास तौर पर इनफॉरमेशन वॉरफेयर का जिक्र करते हुए कहा कि आज का युद्ध सिर्फ मैदान में नहीं, बल्कि जानकारी और सोच के स्तर पर भी लड़ा जाता है।

Psychological Defence Unit Indian Army: ऑपरेशन सिंदूर से मिली सीख

आर्मी चीफ ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सिर्फ जमीन पर लड़ाई ही नहीं हुई, बल्कि जानकारी और अफवाहों से निपटना भी बड़ी चुनौती रही। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन में करीब 15 प्रतिशत प्रयास केवल इंफॉर्मेशन वॉरफेयर को संभालने में लगे। यानी यह समझना जरूरी हो गया है कि कौन-सी जानकारी सही है और कौन-सी गलत।

उन्होंने यह भी कहा कि आज सेना सिर्फ 12 लाख जवानों तक सीमित नहीं है, बल्कि अगर पूर्व सैनिक और उनके परिवारों को जोड़ लिया जाए, तो यह संख्या करीब 1.3 करोड़ तक पहुंचती है। उन्होंने बताया उनके परिवार भी इस सूचना के दायरे का हिस्सा बन जाते हैं। यानी युद्ध अब सिर्फ बॉर्डर पर नहीं, बल्कि जानकारी के स्तर पर भी लड़ा जा रहा है। (Psychological Defence Unit Indian Army)

बनाई नई साइकॉलॉजिकल डिफेंस डिवीजन

सेना प्रमुख ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर से एक बड़ी बात यह सामने आई कि कोई एक क्षेत्र यानी डोमेन युद्ध का फैसला नहीं करता। जमीन से मिली जानकारी, साइबर और इलेक्ट्रॉनिक इनपुट, एयरफोर्स की सटीक कार्रवाई और नेवी की रणनीतिक तैनाती, इन सबने मिलकर काम किया। हर हिस्से ने दूसरे को सपोर्ट किया और इसी तालमेल से सही नतीजे मिले।

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उन्होंने बताया कि इसी अनुभव के आधार पर सेना ने एक नई यूनिट बनाई है, जिसे साइकॉलॉजिकल डिफेंस डिवीजन कहा जाता है। इसका काम गलत जानकारी का मुकाबला करना और सही जानकारी को समय पर लोगों तक पहुंचाना है।

आर्मी चीफ ने बताया कि आज के समय में जानकारी का असर सीधे युद्ध के नतीजों पर पड़ता है, इसलिए इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। (Psychological Defence Unit Indian Army)

कई परतों में लड़े जा रहे हैं युद्ध

सेना प्रमुख का कहना है कि आज की दुनिया एक तरह से लगातार संघर्ष की स्थिति में है। यह कोई एक घोषित युद्ध नहीं है, बल्कि अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग तरीकों से टकराव चल रहा है। अब सवाल यह नहीं है कि अलग-अलग डोमेन आपस में जुड़े हैं या नहीं, बल्कि यह है कि उन्हें सही तरीके से मिलाकर कैसे इस्तेमाल किया जाए।

आर्मी चीफ ने समझाया कि अब युद्ध को सिर्फ नक्शे पर एक लाइन की तरह नहीं देखा जा सकता। आज का युद्ध कई लेयर्स में चलता है। जमीन पर सैनिक लड़ रहे होते हैं, उसी समय साइबर अटैक चल रहे होते हैं, स्पेस से जानकारी मिल रही होती है और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम दुश्मन के कम्युनिकेशन को प्रभावित कर रहे होते हैं। ऐसे में अगर कोई कमांडर सिर्फ अपने इलाके को देखेगा, तो वह पूरी लड़ाई नहीं समझ पाएगा। अब जरूरी है कि वह हर डोमेन को एक साथ समझे।

एमडीओ की तरफ बढ़ रही सेना

आर्मी चीफ ने कहा कि सेना धीरे-धीरे मल्टी-डोमेन ऑपरेशन की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसके लिए एक तय प्रक्रिया के तहत बदलाव किए जा रहे हैं। तीनों सेनाओं के लिए एक साझा सिद्धांत बनाया गया है, ताकि सब एक ही तरीके से काम कर सकें। 2024 से लगातार ऐसे अभ्यास भी किए जा रहे हैं, जिनमें अलग-अलग मंत्रालय और एजेंसियां भी शामिल हो रही हैं।

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उन्होंने कहा कि सेना के स्ट्रक्चर में भी बदलाव किया गया है। इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप बनाए गए हैं, नई ब्रिगेड और बटालियन जोड़ी गई हैं, ड्रोन यूनिट्स तैयार की गई हैं और साइबर व इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर की क्षमताएं बढ़ाई गई हैं। इसके साथ ही इनफॉरमेशन वॉरफेयर के लिए नई आर्गनाइजेशन बनाई गई हैं।

उन्होंने कहा कि अब सेना काफी हद तक मल्टी-डोमेन के लिए तैयार हो चुकी है। इसी दिशा में 2024 और 2025 को टेक्नोलॉजी अपनाने का साल रखा गया था, जबकि 2026 और 2027 को नेटवर्किंग और डेटा पर फोकस करने के लिए तय किया गया है। (Psychological Defence Unit Indian Army)

टेक्नोलॉजी की भूमिका पर जोर

आर्मी चीफ ने खास तौर पर टेक्नोलॉजी की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अब डेटा, नेटवर्क और जानकारी को जोड़ना बेहद जरूरी है, ताकि सही समय पर सही फैसला लिया जा सके। लेकिन उन्होंने यह भी साफ किया कि टेक्नोलॉजी सिर्फ एक साधन है, अंतिम निर्णय इंसान ही लेगा।

उन्होंने कहा कि अब कमांडरों की भूमिका भी बदल रही है। उन्हें सिर्फ युद्ध लड़ना ही नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी को समझकर उसका सही इस्तेमाल करना भी आना चाहिए। इसी सोच के तहत सेना ने पिछले सालों को टेक्नोलॉजी अपनाने के लिए और आने वाले सालों को नेटवर्क और डेटा पर फोकस करने के लिए तय किया है। (Psychological Defence Unit Indian Army)

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