📍बकलोह (हिमाचल प्रदेश) | 24 Feb, 2026, 9:51 PM
Exercise Vajra Prahar 2026: भारत और अमेरिका के बीच सैन्य सहयोग को और मजबूत करने के लिए जॉइंट एक्सरसाइज ‘वज्र प्रहार’ शुरू हो गई है। यह इस अभ्यास का 16वां संस्करण है, जो हिमाचल प्रदेश के बकलोह स्थित स्पेशल फोर्सेस ट्रेनिंग स्कूल में आयोजित किया जा रहा है। यह अभ्यास 24 फरवरी से 16 मार्च तक चलेगा, यानी करीब तीन हफ्तों तक दोनों देशों की स्पेशल फोर्सेस साथ मिलकर ट्रेनिंग करेंगी।
यह अभ्यास आम सैन्य ड्रिल जैसा नहीं होता, बल्कि इसमें दुनिया की सबसे चुनिंदा और प्रशिक्षित सैनिक टुकड़ियां हिस्सा लेती हैं। इसका मकसद है कठिन परिस्थितियों में मिलकर ऑपरेशन करना और आधुनिक खतरों से निपटने की तैयारी को मजबूत करना है। (Exercise Vajra Prahar 2026)
Exercise Vajra Prahar 2026: कौन ले रहा है हिस्सा?
इस अभ्यास में भारत और अमेरिका दोनों तरफ से छोटी लेकिन बेहद खास टीम शामिल है। भारतीय सेना की तरफ से करीब 45 स्पेशल फोर्सेस कमांडो हिस्सा ले रहे हैं। ये जवान आमतौर पर पैराशूट रेजिमेंट जैसी यूनिट्स से होते हैं, जो देश के सबसे कठिन ऑपरेशंस को अंजाम देते हैं।
वहीं अमेरिका की तरफ से यूएस आर्मी के ग्रीन बेरेट्स के करीब 12 कमांडो इस अभ्यास में शामिल हुए हैं। ग्रीन बेरेट्स दुनिया की सबसे प्रोफेशनल स्पेशल फोर्सेस में गिने जाते हैं।
स्पेशल फोर्सेस की खासियत यह होती है कि वे कम तादाद में होते हुए भी बेहद सटीक और खतरनाक ऑपरेशन कर सकते हैं। इसलिए इस अभ्यास में बड़ी सेना नहीं, बल्कि छोटे-छोटे एलिट ग्रुप्स ही भाग लेते हैं। (Exercise Vajra Prahar 2026)
कहां और क्यों हो रहा है अभ्यास?
यह अभ्यास हिमाचल प्रदेश के बकलोह में हो रहा है, जो पहाड़ी और जंगल वाले इलाके में आता है। इस तरह का इलाका ट्रेनिंग के लिए इसलिए चुना जाता है क्योंकि यहां ऊंचाई, ठंड, ऊबड़-खाबड़ जमीन और सीमित संसाधन जैसी कठिन हालात होते हैं।
ऐसी जगहों पर ऑपरेशन करना आसान नहीं होता, लेकिन आज के समय में कई सैन्य ऑपरेशन इसी तरह के इलाकों में होते हैं। इसलिए सैनिकों को यहां ट्रेनिंग दी जाती है, ताकि वे हर तरह की चुनौती के लिए तैयार रहें। (Exercise Vajra Prahar 2026)
क्या सीखेंगे सैनिक?
इस अभ्यास में सैनिकों को कई तरह की ट्रेनिंग दी जाएगी, जो असली ऑपरेशन जैसी होती है। सबसे पहले उन्हें जॉइंट मिशन प्लानिंग सिखाई जाएगी, यानी दोनों देशों के सैनिक मिलकर कैसे ऑपरेशन की योजना बनाते हैं।
इसके बाद वे अलग-अलग तरह की टैक्टिकल ड्रिल्स जैसे- किसी इलाके में घुसकर दुश्मन को पकड़ना या खत्म करना, बंधकों को छुड़ाने का ऑपरेशन, गुप्त तरीके से जानकारी जुटाना, और जरूरत पड़ने पर अचानक हमला करना जैसे ऑपरेशन करेंगे।
इन सबके अलावा सैनिकों को माउंटेन वारफेयर यानी पहाड़ों में लड़ाई की खास ट्रेनिंग दी जाएगी। इसमें यह सिखाया जाता है कि ऊंचाई पर सांस की कमी, ठंड और सीमित संसाधनों के बीच कैसे ऑपरेशन किया जाए। (Exercise Vajra Prahar 2026)
इस अभ्यास की एक बड़ी खासियत यह है कि इसमें सिर्फ ट्रेनिंग ही नहीं होती, बल्कि दोनों देशों के सैनिक अपने-अपने अनुभव भी साझा करते हैं। भारतीय सेना को पहाड़ी और काउंटर-टेरर ऑपरेशन्स का अच्छा अनुभव है, जबकि अमेरिकी सेना के पास दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में ऑपरेशन करने का अनुभव है। (Exercise Vajra Prahar 2026)
‘वज्र प्रहार’ नाम का मतलब
इस अभ्यास का नाम भी अपने आप में खास है। ‘वज्र’ का मतलब होता है बहुत शक्तिशाली हथियार, और ‘प्रहार’ का मतलब है हमला। यानी ‘वज्र प्रहार’ का अर्थ हुआ, जिसका मतलब तेज, सटीक और जबरदस्त हमला है।
यह नाम स्पेशल फोर्सेस के काम करने को पूरी तरह से दर्शाता है, जहां कम समय में सटीक और निर्णायक कार्रवाई की जाती है। (Exercise Vajra Prahar 2026)
क्यों जरूरी है यह अभ्यास?
आज का युद्ध पारंपरिक युद्ध से काफी अलग हो चुका है। अब खतरे सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं हैं। आतंकवाद, हाइब्रिड वॉरफेयर, ड्रोन अटैक और गुप्त ऑपरेशन जैसे नए खतरे सामने आ रहे हैं।
ऐसे में स्पेशल फोर्सेस की भूमिका बहुत अहम हो जाती है। ‘वज्र प्रहार’ जैसे अभ्यास सैनिकों को इन नए खतरों से निपटने के लिए तैयार करते हैं। (Exercise Vajra Prahar 2026)
इसके अलावा यह अभ्यास भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग को भी मजबूत करता है। दोनों देश पहले से ही कई बड़े समझौतों और साझेदारियों के जरिए एक-दूसरे के करीब आए हैं। यह अभ्यास उसी दिशा में एक और कदम है।
इससे पहले ‘वज्र प्रहार’ का 15वां संस्करण अमेरिका के आइडाहो में आयोजित किया गया था। हर साल यह अभ्यास भारत और अमेरिका में बारी-बारी से होता है, जिससे दोनों सेनाओं को अलग-अलग तरह के इलाकों में ट्रेनिंग का मौका मिलता है। (Exercise Vajra Prahar 2026)

