📍उमरोई, मेघालय | 11 Sep, 2025, 8:45 PM
MAITREE-XIV and Siyom Prahar: भारत के पूर्वोत्तर इलाके में मेघालय के उमरोई में भारतीय सेना और रॉयल थाई आर्मी का संयुक्त अभ्यास मैत्री-XIV (Maitree-XIV) चल रहा है। वहीं दूसरी ओर अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना ने सियोम प्रहार (Siyom Prahar) अभ्यास के जरिए बैटलफील्ड में ड्रोन टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल की नई स्ट्रैटेजी का ट्रायल किया है। ये दोनों एक्सरसाइज भारत की बढ़ती सैन्य तैयारियों और रणनीतिक दृष्टिकोण का उदाहरण पेश करती हैं।
मेघालय में चल रही Maitree-XIV अभ्यास भारत और थाईलैंड की सेनाओं के बीच चल रहा है, जो 14 सितंबर तक जारी रहेगा और इसमें दोनों देशों के सैनिक एक-दूसरे की कार्यशैली, तकनीक और अनुभव साझा कर रहे हैं। इस एक्सरसाइज का मुख्य उद्देश्य इंटरऑपरेबिलिटी यानी आपसी तालमेल को बढ़ाना और संयुक्त ऑपरेशनों की क्षमता को और मजबूत करना है।
इस अभ्यास में सैनिकों ने कॉम्बैट कंडीशनिंग के जरिए शारीरिक क्षमता और युद्धक तैयारी को बढ़ाने पर फोकस किया। साथ ही, भारतीय सेना की इन्फैंट्री बटालियन के हथियारों और उपकरणों से परिचित कराने के लिए ओरिएंटेशन कराया गया। क्लोज कॉम्बैट यानी नजदीकी लड़ाई की तकनीकों को विशेष मार्शल आर्ट्स ट्रेनिंग से और प्रभावी बनाया गया।
अभ्यास के दौरान सेमी-शहरी इलाके में कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन और आतंकवादियों को खत्म करने के लिए सर्च एंड डेस्ट्रॉय मिशन भी कराए गए। इसके अलावा, एडवांस फायरिंग प्रैक्टिस में सैनिकों ने एंबिडेक्स्ट्रस यानी दोनों हाथों से फायरिंग करने की क्षमता और सटीक स्नाइपर ट्रेनिंग का प्रदर्शन किया। हाई-रिस्क मिशनों के लिए स्लिदरिंग ड्रिल्स का अभ्यास कराया गया, जिससे सैनिक तेजी से किसी क्षेत्र में उतर सकें और दुश्मन पर तुरंत कार्रवाई कर सकें।
इसके अलावा बस इंटरवेंशन और होस्टेज रेस्क्यू (बंधक मुक्ति) के हालात को भी अभ्यास का हिस्सा बनाया गया। कमरे में घुसकर खतरे को खत्म करने और सुरक्षित क्षेत्र बनाने के लिए रूम इंटरवेंशन ड्रिल्स का आयोजन किया गया। इसके साथ ही, सैनिकों ने रॉक क्राफ्ट ट्रेनिंग के जरिए कठिन इलाकों में चढ़ाई भी की। जंगल में जिंदा रहने के लिए सरवाइवल ड्रिल्स कराए गए, ताकि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी ऑपरेशन सफलतापूर्वक चलाए जा सकें।
सिर्फ कॉम्बैट ट्रेनिंग ही नहीं, बल्कि स्पोर्ट्स और टीम बिल्डिंग गतिविधियों को भी अभ्यास का हिस्सा बनाया गया। इनसे दोनों देशों की सेनाओं के बीच भाईचारा और आपसी विश्वास मजबूत हुआ। Maitree-XIV ने दिखा दिया कि भारतीय सेना और रॉयल थाई आर्मी संयुक्त रूप से किसी भी परिस्थिति में प्रभावी ढंग से काम कर सकती हैं।
एक्सरसाइज सियोम प्रहार
वहीं, दूसरी ओर अरुणाचल प्रदेश में 8 से 10 सितंबर के बीच आयोजित एक्सरसाइज सियोम प्रहार ने भारतीय सेना के भविष्य के बैटल फील्ड की झलक दिखाई। इस अभ्यास का मकसद युद्ध में ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल की रणनीतियों को परखना था। इसे रिटल टाइम वॉर जैसी परिस्थितियों में आयोजित किया गया और इसमें ड्रोन को टैक्टिकल और ऑपरेशनल दोनों स्तरों पर तैनात किया गया।
ड्रोन का इस्तेमाल निरंतर निगरानी, दुश्मन की स्थिति की जानकारी जुटाने, टारगेट हासिल करने और सटीक हमले करने के लिए किया गया। इस अभ्यास ने दिखाया कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन सिर्फ एक सहायक उपकरण नहीं बल्कि युद्ध की दिशा बदलने वाला निर्णायक हथियार साबित हो सकते हैं।

इस अभ्यास का मुख्य फोकस नए टैक्टिक्स, टेक्नीक और प्रोसिजर्स यानी TTPs डेवलप करना था। इसमें ड्रोन से मिलने वाली जानकारी को पारंपरिक हथियारों और तोपखाने की मारक क्षमता के साथ जोड़ने के तरीकों को परखा गया। इससे जॉइंट टारगेटिंग की प्रक्रिया और तेज निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत किया गया।
सियोम प्रहार ने यह भी साबित किया कि युद्ध के मैदान में परंपरागत हथियारों और नई तकनीकों के बीच तालमेल जरूरी है। भारतीय सेना ने ड्रोन तकनीक और पारंपरिक युद्धक कौशल को एक साथ मिलाकर यह दिखाया कि भविष्य की लड़ाई में कैसे तकनीक निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
इस अभ्यास में ड्रोन की लॉक-ऑन क्षमता, गाइडेंस सटीकता, उड़ान स्थिरता और आर्मर पेनेट्रेशन जैसी खूबियों को अलग-अलग परिस्थितियों में परखा गया। रेगिस्तानी धूल, उच्च तापमान और दुर्गम इलाकों जैसी चुनौतियों में भी इनके प्रदर्शन को जांचा गया।
भारतीय सेना ने इस अभ्यास के जरिए यह भी संदेश दिया कि वह लगातार इनोवेशन कर रही है और आने वाले समय की चुनौतियों के लिए तैयार है। अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स यानी ड्रोन को पारंपरिक युद्धक रणनीतियों के साथ मिलाकर सेना ने दिखाया कि भविष्य के युद्ध में तकनीक ही सफलता की कुंजी होगी।


