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उत्तराखंड में ‘धर्मा गार्डियन’ में दिखेगा भारत-जापान के बीच कॉम्बैट तालमेल, लद्दाख स्काउट्स लेगें हाई-टेक वॉर ड्रिल में हिस्सा

इस बार के अभ्यास में भारत और जापान दोनों तरफ से करीब 120-120 सैनिकों की टुकड़ी हिस्सा ले रही है...

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📍चौबट्टिया (उत्तराखंड) | 24 Feb, 2026, 6:47 PM

Exercise Dharma Guardian 2026: भारत और जापान के बीच रक्षा सहयोग को नई मजबूती देने के लिए संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘धर्मा गार्डियन’ एक बार फिर शुरू हो गया है। इस बार इसका आयोजन उत्तराखंड के चौबट्टिया स्थित फॉरेन ट्रेनिंग नोड में किया जा रहा है। यह अभ्यास 24 फरवरी से लेकर 9 मार्च तक चलेगा और करीब दो हफ्तों तक दोनों देशों के सैनिक साथ मिलकर ट्रेनिंग करेंगे।

यह अभ्यास केवल एक रूटीन एक्सरसाइज नहीं है, बल्कि यह भारत और जापान के बीच बढ़ते भरोसे और साझेदारी का बड़ा प्रतीक है। खास बात यह है कि यह अभ्यास हर साल बारी-बारी से भारत और जापान में होता है, जिससे दोनों सेनाएं एक-दूसरे के काम करने के तरीके को करीब से समझती हैं। (Exercise Dharma Guardian 2026)

Exercise Dharma Guardian 2026: दोनों देशों के सैनिक साथ-साथ

इस बार के अभ्यास में भारत और जापान- दोनों तरफ से करीब 120-120 सैनिकों की टुकड़ी हिस्सा ले रही है। भारतीय सेना की तरफ से लद्दाख स्काउट्स के जवान शामिल हैं, जो कठिन इलाकों में ऑपरेशन करने के लिए जाने जाते हैं। वहीं जापान की ओर से जापान ग्राउंड सेल्फ-डिफेंस फोर्स (JGSDF) की 32वीं इन्फैंट्री रेजिमेंट के सैनिक इसमें भाग ले रहे हैं।

जब अलग-अलग देशों के सैनिक एक साथ ट्रेनिंग करते हैं, तो वे न सिर्फ नई तकनीक सीखते हैं, बल्कि एक-दूसरे की रणनीति और काम करने के तरीके को भी समझते हैं। यही इस अभ्यास की सबसे बड़ी खासियत है। (Exercise Dharma Guardian 2026)

किस तरह की ट्रेनिंग होगी?

यह अभ्यास खास तौर पर सेमी-अर्बन एनवायरनमेंट यानी ऐसे इलाकों के लिए किया जा रहा है, जहां शहर और गांव दोनों जैसी परिस्थितियां होती हैं। आज के समय में ज्यादातर ऑपरेशन ऐसे ही इलाकों में होते हैं, इसलिए यह ट्रेनिंग बेहद जरूरी मानी जाती है।

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अभ्यास के दौरान सैनिक कई तरह की ड्रिल्स करेंगे। जैसे, अस्थायी ऑपरेटिंग बेस बनाना, जहां से ऑपरेशन चलाया जा सके। इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस यानी आईएसआर ग्रिड तैयार करना, जिससे दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। मोबाइल चेक पोस्ट लगाना, ताकि आने-जाने वाले वाहनों की जांच की जा सके और दुश्मन वाले इलाके में घेराबंदी और सर्च ऑपरेशन चलाना, शामिल है।

इसके अलावा सैनिक हेलिबोर्न ऑपरेशन भी करेंगे, जिसमें हेलीकॉप्टर के जरिए सीधे ऑपरेशन एरिया में उतरकर कार्रवाई की जाती है। सबसे अहम हिस्सा होगा हाउस इंटरवेंशन ड्रिल, यानी किसी बिल्डिंग या घर के अंदर घुसकर ऑपरेशन करना। इसे क्लोज क्वार्टर बैटल भी कहा जाता है, जो काउंटर-टेरर ऑपरेशन में बेहद जरूरी होता है। (Exercise Dharma Guardian 2026)

आधुनिक युद्ध की तैयारी

आज का युद्ध पहले जैसा नहीं रहा। अब सिर्फ हथियारों की ताकत काफी नहीं होती, बल्कि जानकारी, तकनीक और तालमेल भी उतना ही जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए इस अभ्यास में मॉडर्न टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर भी जोर दिया जा रहा है।

सैनिकों को सिखाया जाएगा कि कैसे रियल टाइम जानकारी के आधार पर तुरंत फैसला लिया जाए, कैसे अलग-अलग यूनिट्स मिलकर काम करें और कैसे तेजी से ऑपरेशन को अंजाम दिया जाए। इसे ही आसान भाषा में इंटरऑपरेबिलिटी कहा जाता है, यानी अलग-अलग देशों की सेनाएं भी बिना किसी परेशानी के साथ काम कर सकें। (Exercise Dharma Guardian 2026)

क्यों खास है यह अभ्यास?

भारत और जापान के बीच यह अभ्यास सिर्फ सैन्य ट्रेनिंग तक सीमित नहीं है। इसका एक बड़ा रणनीतिक मतलब भी है। दोनों देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।

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पिछले कुछ सालों में भारत और जापान के रिश्ते काफी मजबूत हुए हैं। रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ा है और दोनों देश एक-दूसरे के साथ ज्यादा अभ्यास कर रहे हैं। ‘धर्मा गार्डियन’ इसी साझेदारी का अहम हिस्सा है।

इस अभ्यास की शुरुआत साल 2018 में हुई थी और अब यह इसका सातवां संस्करण है। हर साल इसे अलग-अलग जगहों पर आयोजित किया जाता है। पिछले संस्करण जापान और भारत के अलग-अलग इलाकों में हो चुके हैं।

हर बार इस अभ्यास का दायरा थोड़ा और बढ़ता है और नई तकनीकों को इसमें शामिल किया जाता है। इससे दोनों देशों की सेनाएं लगातार बेहतर होती जा रही हैं। (Exercise Dharma Guardian 2026)

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  • News Desk

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