📍नई दिल्ली | 17 Nov, 2025, 10:02 AM
Cold Strike Doctrine: भारतीय सेना अपनी युद्ध रणनीति में एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। हाल ही में पाकिस्तान से सटी पश्चिमी सीमा पर ट्राई सर्विसेज एक्सरसाइज त्रिशूल में सेना की हााल ही में गठित नई रुद्र ऑल-आर्म्स ब्रिगेड ने भी अपना कौशल दिखाया था। इसके बाद सेना अब अपनी पुरानी कोल्ड स्टार्ट रणनीति को आगे बढ़ाकर कोल्ड स्ट्राइक डॉक्ट्रिन बनाने की सोच रही है।
इसके संकेत हाल ही में दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने दिए। उन्होंने कहा कि रुद्र ब्रिगेड का प्रदर्शन पूरी तरह सफल रहा और इसने बड़े स्तर पर अपनी ऑपरेशनल क्षमता साबित की है। यह ब्रिगेड कोनार्क कॉर्प्स के तहत बनाई गई है और इसे ‘अखंड प्रहार’ एक्सरसाइज में परखा गया था।
लेफ्टिनेंट जनरल सेठ के मुताबिक, अब सेना ऐसे समय में पहुंच चुकी है कि कोल्ड स्टार्ट रणनीति से आगे बढ़कर कोल्ड स्ट्राइक रणनीति (Cold Strike Doctrine) को अपनाने के बारे में सोच रही है। उनका कहना था कि रुद्र ब्रिगेड आने वाले समय में मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और दुश्मन के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करेगी।
कोल्ड स्टार्ट रणनीति की शुरुआत 2001 में संसद पर हुए आतंकी हमले के बाद सेना ने की थी। उसी समय सेना की स्ट्राइक फोर्मेशन को पाकिस्तान सीमा तक पहुंचने में लगभग एक महीना लग गया था, जिससे भारत के तुरंत जवाबी कार्रवाई करने में देरी हुई थी। इस देरी के दौरान पाकिस्तान ने अपने डिफेंस मजबूत कर लिया था। इसके बाद सेना ने यह महसूस किया कि सीमा पर तुरंत कार्रवाई के लिए नई रणनीति की जरूरत है।
Cold Strike Doctrine
पाकिस्तान ने समय-समय पर भारत की कोल्ड स्टार्ट रणनीति (Cold Strike Doctrine) का जवाब अपने नसर शॉर्ट-रेंज न्यूक्लियर मिसाइल के माध्यम से देने की कोशिश की। लेकिन भारत लगातार अपनी क्षमता बढ़ाता रहा और अब रुद्र ब्रिगेड इस दिशा में बड़ा कदम है।
रुद्र ब्रिगेड की खासियत यह है कि इसमें युद्ध के लिए जरूरी हर ब्रांच शामिल है। जैसे इन्फैंट्री, मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री, आर्मर्ड यूनिट्स (टैंक), आर्टिलरी, एयर डिफेंस, इंजीनियर्स, सिग्नल्स, ड्रोन यूनिट्स, सपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सब एक ही छतरी के नीचे काम करती हैं।
इस वजह से रुद्र ब्रिगेड हमेशा तैयार रहती है और युद्ध के हालात में बहुत तेजी से आगे बढ़ सकती है। इसका मतलब है कि अब सेना को अलग-अलग यूनिट्स के एक जगह आने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। पूरी ब्रिगेड एक जॉइंट कॉम्बैट यूनिट के तौर पर पहले से तैनात रहेगी।
रिपोर्ट्स के अनुसार, रुद्र ब्रिगेड का मॉडल पहले चीन सीमा के लिए बनाया गया था। सेना की दो रुद्र ब्रिगेड पहले ही पूर्वी लद्दाख और सिक्किम में तैनात हैं। अब पाकिस्तान मोर्चे के लिए भी रुद्र ब्रिगेड तैयार की गई है, जो त्रिशूल एक्सरसाइज में पहली बार बड़े पैमाने पर शामिल हुई।
इस अभ्यास में रुद्र ब्रिगेड ने मैकेनाइज्ड और इन्फैंट्री मूवमेंट, आर्टिलरी फायरिंग, हेलिबोर्न ऑपरेशन, अटैक हेलिकॉप्टर मिशन और वायुसेना के साथ जॉइंट एक्सरसाइज की। भारतीय वायुसेना के फाइटर ग्राउंड अटैक मिशन भी सेना के इस अभ्यास का हिस्सा थे।
सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, हर रुद्र ब्रिगेड उस इलाके के हिसाब से बनाई जाएगी, जिसमें उसे तैनात किया जाना है। उसके क्षेत्र, भूगोल और ऑपरेशनल जरूरतों को देखकर यूनिट्स को एडजस्ट किया जाएगा। यह ब्रिगेड शांति के समय भी पूरी तरह तैयार रहती है और युद्ध की स्थिति में तुरंत कार्रवाई कर सकती है।
रुद्र ब्रिगेड (Cold Strike Doctrine) को सेना की न्यू जनरेशन फॉर्मेशन बताया जा रहा है। यह अपने साथ भारतीय सेना के भविष्य की रणनीति का रास्ता भी तैयार कर रही है।

