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सेना प्रमुख बोले- ऑपरेशन सिंदूर से बदली भारत की सुरक्षा रणनीति, भविष्य के युद्धों में एआई, ड्रोन और डेटा वारफेयर तय करेंगे जीत

जनरल द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर से मिले अनुभवों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर से यह साफ हुआ है कि भारत की सुरक्षा रणनीति अब धीरे-धीरे प्रतिक्रिया आधारित दृष्टिकोण से आगे बढ़कर सक्रिय रोकथाम यानी प्रोएक्टिव डिटरेंस की दिशा में जा रही है...

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📍सिकंदराबाद/नई दिल्ली | 10 Mar, 2026, 8:08 PM

Indian Army transformation: देश के विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य को देखते हुए सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का कहना है कि भारतीय सेना एक नए दौर के मुहाने पर खड़ी है, जहां तकनीकी प्रगति, संगठनात्मक लचीलापन और आत्मनिर्भरता भविष्य की सैन्य शक्ति की पहचान होंगे। सिकंदराबाद स्थित कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट में बोलते हुए उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल में भारतीय सेना को तेजी से बदलना होगा और नई तकनीकों, डेटा आधारित युद्ध और मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस को अपनाना समय की जरूरत बन चुका है।

मंगलवार को जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने तेलंगाना के सिकंदराबाद में स्थित कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट का दौरा किया, जहां इस समय 21वां हायर डिफेंस मैनेजमेंट कोर्स (HDMC-21) चल रहा हैं। कोर्स में शामिल अधिकारियों, संस्थान की फैकल्टी और स्टाफ को संबोधित करते हुए जनरल द्विवेदी ने बदलते सुरक्षा माहौल के बीच भारतीय सेना के परिवर्तन की जरूरत पर विस्तार से बात की। (Indian Army transformation)

Indian Army transformation: भारतीय सेना के आधुनिकीकरण के पांच प्रमुख स्तंभ

उन्होंने कहा कि सेना के आधुनिकीकरण के लिए पांच प्रमुख स्तंभों पर काम किया जा रहा है। इनमें नई तकनीकों को अपनाना और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को शामिल करना, संगठनात्मक ढांचे में बदलाव और सेना का आधुनिकीकरण, मानव संसाधन और नेतृत्व विकास, तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल तथा रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना शामिल है।

सेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय सेना इस समय एक नए दौर के मुहाने पर खड़ी है, जहां तकनीकी प्रगति, संगठनात्मक लचीलापन और आत्मनिर्भरता बेहद महत्वपूर्ण होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सेना की मूल ताकत सत्य, विश्वास और पारदर्शिता जैसे मूल्यों पर आधारित है। (Indian Army transformation)

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ऑपरेशन सिंदूर से बदली भारत की रणनीति

जनरल द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर से मिले अनुभवों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर से यह साफ हुआ है कि भारत की सुरक्षा रणनीति अब धीरे-धीरे प्रतिक्रिया आधारित दृष्टिकोण से आगे बढ़कर सक्रिय रोकथाम यानी प्रोएक्टिव डिटरेंस की दिशा में जा रही है। भविष्य के युद्धों में मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस, डेटा-सेंट्रिक वारफेयर और अनमैन्ड सिस्टम्स जैसे ड्रोन और रोबोटिक प्लेटफॉर्म्स की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी। (Indian Army transformation)

सेना में बदलाव रणनीतिक जरूरत

सेना प्रमुख ने अधिकारियों से कहा कि सेना में बदलाव को अपनाना एक रणनीतिक जरूरत है, न कि कोई विकल्प। इसके लिए अधिकारियों को अपनी सोच को और व्यापक बनाना होगा। उन्होंने पांच प्रकार की सोच जिनमें क्रिएटिव, क्रिटिकल, सिस्टम्स, कॉग्निटिव और इमेजिनेटिव थिंकिंग विकसित करने पर जोर दिया। उनके अनुसार इससे सेना के भीतर नई सोच और इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा। (Indian Army transformation)

भविष्य के युद्ध में मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस की बढ़ती भूमिका

सेना प्रमुख ने यह भी कहा कि आधुनिक युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। आज के संघर्षों में कई प्रकार के युद्ध एक साथ देखने को मिलते हैं। इसलिए भविष्य के युद्धों में मल्टी-डोमेन अप्रोच बेहद जरूरी होगी, जहां जमीन, समुद्र, हवा, साइबर और स्पेस जैसे सभी क्षेत्रों में एक साथ कार्रवाई की जा सके।

उन्होंने कमांड स्तर पर ग्रे-जोन वारफेयर को समझने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि यूनिट कमांडर से लेकर उच्च सैन्य नेतृत्व तक हर स्तर पर अधिकारियों को इन नई चुनौतियों के बारे में जानकारी होनी चाहिए। (Indian Army transformation)

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Army Chief Upendra Dwivedi Indian Army transformation
Army Chief General Upendra Dwivedi

मानव संसाधन और जेसीओ की भूमिका पर जोर

अपने संबोधन में जनरल द्विवेदी ने सेना में मानव संसाधन के बेहतर इस्तेमाल पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जूनियर कमीशंड ऑफिसर्स (जेसीओ) को और सशक्त बनाना जरूरी है, ताकि अधिकारियों की कमी को संतुलित किया जा सके और जमीनी स्तर पर नेतृत्व को मजबूत किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि बदलती सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए सेना नई ऑपरेशनल स्ट्रक्चर भी तैयार कर रही है। इनमें भैरव बटालियन और स्पेशल ऑपरेशंस फोर्सेज ब्रिगेड जैसी नई यूनिट्स भी शामिल हैं, जो भविष्य के खतरों से निपटने के लिए तैयार की जा रही हैं।

इस दौरान सेना प्रमुख ने संस्थान की फैकल्टी और मित्र देशों से आए अंतरराष्ट्रीय अधिकारियों से भी बातचीत की। उन्होंने रणनीतिक प्रबंधन, नेतृत्व विकास और संसाधनों के बेहतर उपयोग जैसे विषयों पर विचार साझा किए। उन्होंने कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान भारतीय सशस्त्र बलों के लिए रणनीतिक नेतृत्व तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। (Indian Army transformation)

सिमुलेटर तकनीक से बदलेगी सैनिकों की ट्रेनिंग

इस दौरान जनरल द्विवेदी ने सिमुलेटर डेवलपमेंट डिवीजन का भी दौरा किया। यहां उन्हें कई आधुनिक प्रशिक्षण तकनीकों का प्रदर्शन देखा। इनमें ऑगमेंटेड रियलिटी, वर्चुअल रियलिटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, रोबोटिक्स और सिमुलेटर आधारित प्रशिक्षण प्रणालियां शामिल थीं।

इन प्रणालियों का उद्देश्य सैनिकों को वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में प्रशिक्षण देना है, जिससे उनकी तैयारी और फैसले लेने की क्षमता बेहतर हो सके। सिमुलेटर आधारित ट्रेनिंग भविष्य के जटिल युद्धक्षेत्र के लिए सैनिकों को अधिक प्रभावी ढंग से तैयार करने में मदद करेगा। (Indian Army transformation)

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इस दौरान सिमुलेटर डेवलपमेंट डिवीजन के कमांडेंट ब्रिगेडियर आशीष जोहर ने सेना प्रमुख को संगठन की विकास योजनाओं और नई तकनीकों पर चल रहे कार्यों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह डिवीजन भारतीय सशस्त्र बलों के लिए स्वदेशी और अत्याधुनिक तकनीकों के विकास पर काम कर रहा है।

सेना प्रमुख ने इन प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि तकनीक आधारित प्रशिक्षण भविष्य के युद्धों के लिए सैनिकों को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। (Indian Army transformation)

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