📍नई दिल्ली | 4 Feb, 2026, 10:50 PM
Tejas Mk-1A delivery delay: भारतीय वायुसेना के स्वदेशी फाइटर जेट एलसीए तेजस मार्क-1ए की डिलीवरी को लेकर अभी भी असमंजस बरकरार है। इंडियन एयर फोर्स मई 2026 में इस पूरे प्रोजेक्ट की एक विस्तृत समीक्षा करने जा रही है। यह रिव्यू इसलिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसी के बाद तय होगा कि तेजस मार्क-1ए की डिलीवरी कब और किस रफ्तार से शुरू होगी।
यह खबर ऐसे समय सामने आई है, जब एचएएल लगातार यह दावा कर रहा है कि उसके पास पांच तेजस मार्क-1ए विमान तैयार हालत में मौजूद हैं और वह इस साल मार्च तक इनकी डिलीवरी कर देगा। इसके बावजूद, वायुसेना ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी विमान को तभी स्वीकार करेगी, जब वह पूरी तरह ऑपरेशनल कॉन्फिगरेशन में होगा और सभी तय मानकों पर खरा उतरेगा। इसी वजह से डिलीवरी में और देरी होने की आशंका जताई जा रही है। (Tejas Mk-1A delivery delay)
Tejas Mk-1A delivery delay: मई 2026 में क्यों अहम है वायुसेना का रिव्यू
सूत्रों के मुताबिक, वायुसेना ने तेजस मार्क-1ए प्रोजेक्ट पर दिसंबर 2025 में भी एक विस्तृत चर्चा की थी। उस बैठक में कई तकनीकी और ऑपरेशनल पहलुओं पर बात हुई थी। अब अप्रैल 2026 तक विमान से जुड़े ज्यादातर तकनीकी माइलस्टोन पूरे होने की उम्मीद है। इसके बाद मई में होने वाला रिव्यू यह तय करेगा कि वायुसेना इन विमानों को स्वीकार करने के लिए तैयार है या नहीं।
वायुसेना का रुख इस बार पहले से ज्यादा सख्त बताया जा रहा है। उसकी मांग है कि जो भी तेजस मार्क-1ए विमान उसे सौंपे जाएं, वे सीधे स्क्वाड्रन में शामिल होकर ऑपरेशनल ड्यूटी निभाने लायक हों। यानी बाद में उनमें किसी बड़े अपग्रेड या सुधार की जरूरत न पड़े। (Tejas Mk-1A delivery delay)
एचएएल का दावा: पांच विमान तैयार, पंद्रह लाइन में
एचएएल के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि कंपनी के पास इस समय पांच तेजस मार्क-1ए फाइटर जेट पूरी तरह तैयार हैं। इनमें रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट और हथियारों का इंटीग्रेशन पूरा किया जा चुका है। इसके अलावा सूत्रों के मुताबिक, हाल के ट्रायल्स में विमान से दो मिसाइलों की फायरिंग की गई और एक लेजर-गाइडेड बम भी सफलतापूर्वक गिराया गया, जो एक बड़ा माइलस्टोन माना जा रहा है।
एचएएल यह भी कह रही है कि उसके पास लगभग 15 विमान रेडी कॉन्फिगरेशन में हैं और साल के अंत तक यह संख्या 20 तक पहुंच सकती है। कंपनी चाहती है कि वायुसेना जल्द से जल्द इन विमानों की डिलीवरी हो, ताकि प्रोजेक्ट में आई देरी का असर कुछ हद तक कम किया जा सके। (Tejas Mk-1A delivery delay)
फिर भी क्यों जताई जा रही देरी की आशंका?
वायुसेना और एचएएल के बीच सबसे बड़ा फर्क “तैयार” शब्द की परिभाषा को लेकर है। एचएएल जहां तकनीकी रूप से तैयार होने की बात कर रही है, वहीं वायुसेना का कहना है कि फुली ऑपरेशनल स्टेटस हासिल करना जरूरी है।
इसमें केवल हथियारों का परीक्षण ही नहीं, बल्कि कई और चीजें शामिल होती हैं- जैसे पूरे फ्लाइट एनवेलप की वैलिडेशन, एवियोनिक्स और सेंसर की परफॉर्मेंस, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम की प्रभावशीलता, मेंटेनेंस से जुड़े पैरामीटर और लंबे समय तक ऑपरेशन की विश्वसनीयता जैसे पैरामीटर्स शामिल होते हैं।
जब तक ये सभी ऑपरेशनल पैरामीटर्स पूरी तरह साबित और प्रमाणित नहीं हो जाते, तब तक वायुसेना तेजस मार्क-1ए को औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं करेगी। (Tejas Mk-1A delivery delay)
180 विमानों का बड़ा ऑर्डर
तेजस मार्क-1ए प्रोजेक्ट का महत्व इस बात से समझा जा सकता है कि वायुसेना ने इसके कुल 180 विमानों का ऑर्डर दिया है। पहली किश्त में 2021 में 83 विमानों का करार हुआ था, जिसकी कीमत करीब 48 हजार करोड़ रुपये है। इसके बाद दूसरी किश्त में 97 और विमानों को मंजूरी दी गई, जिसकी अनुमानित लागत 66,500 करोड़ रुपये बताई जाती है।
शुरुआती योजना के मुताबिक, इन विमानों की डिलीवरी 2023-24 के आसपास शुरू हो जानी चाहिए थी। लेकिन पहले यह समयसीमा 2025 तक खिसकी और अब 2026 के बाद भी देरी की संभावना जताई जा रही है। (Tejas Mk-1A delivery delay)
इंजन बना सबसे बड़ी बाधा
तेजस मार्क-1ए की देरी की सबसे बड़ी वजह जीई एफ-404 इंजन की सप्लाई में आई दिक्कतें रही हैं। यह इंजन अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस बनाती है। 2024 और 2025 के दौरान इंजन सप्लाई चेन में आई समस्याओं की वजह से एचएएल को प्रोडक्शन धीमा करना पड़ा। बिना इंजन के विमान तैयार होने के बावजूद उड़ान और ट्रायल आगे नहीं बढ़ पाए।
हालांकि बाद में इंजन सप्लाई में कुछ सुधार हुआ, लेकिन तब तक प्रोजेक्ट की टाइमलाइन काफी पीछे जा चुकी थी। (Tejas Mk-1A delivery delay)
नई प्रोडक्शन लाइन, फिर भी चुनौती बरकरार
तेजस प्रोग्राम की रफ्तार बढ़ाने के लिए एचएएल ने अपनी प्रोडक्शन क्षमता बढ़ाने की कोशिश की है। बेंगलुरु में पहले से मौजूद दो प्रोडक्शन लाइनों के अलावा नासिक में तीसरी प्रोडक्शन लाइन तैयार की गई। अक्टूबर 2025 में इसी नासिक फैसिलिटी से पहले तेजस मार्क-1ए प्रोटोटाइप की पहली उड़ान हुई थी, जिसे एक बड़ा माइलस्टोन माना गया।
इसके बावजूद, एचएएल की कुल उत्पादन क्षमता सालाना करीब 24 विमान बताई जाती है। इस रफ्तार से पूरे 180 विमानों की आपूर्ति में सात से आठ साल लग सकते हैं। (Tejas Mk-1A delivery delay)
तेजस मार्क-1ए क्यों जरूरी है वायुसेना के लिए
तेजस मार्क-1ए को भारतीय वायुसेना अपने पुराने मिग-21, मिग-27 और जगुआर जैसे विमानों के विकल्प के तौर पर देखती है। यह एक 4.5 जेनरेशन फाइटर जेट है, जिसमें इंडिजिनस उत्तम एईएसए रडार, आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट और लंबी दूरी की अस्त्र बीवीआर मिसाइल जैसी क्षमताएं शामिल हैं।
वर्तमान में वायुसेना के पास करीब 29-30 स्क्वाड्रन हैं, जबकि स्वीकृत संख्या 42 से ज्यादा है। ऐसे में तेजस मार्क-1ए की समय पर डिलीवरी वायुसेना के लिए बेहद अहम है। (Tejas Mk-1A delivery delay)
देरी का सीधा असर स्क्वाड्रन स्ट्रेंथ पर
अगर तेजस मार्क-1ए की डिलीवरी और आगे खिसकती है, तो वायुसेना की स्क्वाड्रन स्ट्रेंथ पर इसका सीधा असर पड़ेगा। पुराने विमानों के रिटायर होने की रफ्तार तेज है, लेकिन नए विमानों की एंट्री उतनी तेज नहीं हो पा रही। यही वजह है कि वायुसेना लगातार स्वदेशी प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने पर जोर दे रही है। (Tejas Mk-1A delivery delay)


