📍नई दिल्ली | 5 Feb, 2026, 7:10 PM
Tejas Mk-1A delivery delay: तेजस एलसीए मार्क-1ए की डिलीवरी को लेकर हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने कहा है कि प्रोजेक्ट पर काम जारी है और कंपनी तय लक्ष्यों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। एचएएल का कहना है कि इस समय पांच तेजस मार्क-1ए लड़ाकू विमान पूरी तरह तैयार हैं और डिलीवरी के लिए उपलब्ध हैं, जबकि नौ अन्य विमान इंजन सप्लाई का इंतजार कर रहे हैं।
यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब तेजस मार्क-1ए की डिलीवरी में देरी को लेकर भारतीय वायुसेना, रक्षा मंत्रालय और एचएएल के बीच तालमेल और समयसीमा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। एचएएल ने साफ किया है कि वह सभी स्टेकहोल्डर्स को सही जानकारी देना चाहती है, ताकि किसी तरह की गलतफहमी न रहे। (Tejas Mk-1A delivery delay)
Tejas Mk-1A delivery delay: पांच विमान पूरी तरह तैयार, नौ इंजन का इंतजार
एचएएल के मुताबिक, इस समय पांच तेजस मार्क-1ए फाइटर जेट्स पूरी तरह तैयार हैं। इन विमानों में वे सभी प्रमुख क्षमताएं शामिल की जा चुकी हैं, जिन पर कॉन्ट्रैक्ट के तहत सहमति बनी थी। यानी डिजाइन, सिस्टम्स और हथियारों से जुड़ी जरूरी चीजें इन विमानों में मौजूद हैं।
इसके अलावा नौ और तेजस मार्क-1ए विमान बनाए जा चुके हैं और उनकी उड़ान भी हो चुकी है। हालांकि इन विमानों को अभी डिलीवरी के लिए इसलिए तैयार नहीं किया जा सका है, क्योंकि इनमें इस्तेमाल होने वाले इंजन अभी उपलब्ध नहीं हैं। जैसे ही इंजन की सप्लाई होती है, इन विमानों को भी तेजी से डिलीवरी के लिए तैयार कर दिया जाएगा। (Tejas Mk-1A delivery delay)
इंजन सप्लाई को लेकर क्या है स्थिति
तेजस मार्क-1ए में इस्तेमाल होने वाला इंजन अमेरिका की कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक का एफ-404 इंजन है। पिछले कुछ समय से इंजन की सप्लाई में देरी प्रोजेक्ट के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
एचएएल ने बताया है कि अब तक उसे जनरल इलेक्ट्रिक से पांच इंजन मिल चुके हैं। कंपनी का कहना है कि आगे की सप्लाई को लेकर स्थिति सकारात्मक है और आने वाले समय में इंजन की डिलीवरी एचएएल की योजना के मुताबिक होती नजर आ रही है। एचएएल को उम्मीद है कि जैसे-जैसे इंजन मिलते जाएंगे, वैसे-वैसे तैयार विमानों की संख्या भी तेजी से बढ़ेगी। (Tejas Mk-1A delivery delay)
डिजाइन और डेवलपमेंट से जुड़े मुद्दों पर काम जारी
एचएएल ने यह भी साफ किया है कि तेजस मार्क-1ए के डिजाइन और डेवलपमेंट से जुड़े जो भी मामले सामने आए हैं, उन्हें तेजी से सुलझाया जा रहा है। कंपनी का दावा है कि सभी तकनीकी दिक्कतों पर काम चल रहा है और उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जा रहा है।
HAL clarifies LCA Mk1A delivery status: 5 aircraft are fully ready for delivery, built to agreed specifications with all major contracted capabilities in place. #LCA #Tejas #HAL @HALHQBLR pic.twitter.com/eDqsOucvUU
— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) February 5, 2026
इस प्रक्रिया में एचएएल और भारतीय वायुसेना के बीच लगातार बातचीत हो रही है। दोनों पक्ष मिलकर यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि विमान पूरी तरह ऑपरेशनल कॉन्फिगरेशन में ही वायुसेना को सौंपे जाएं, ताकि बाद में किसी तरह की कमी न रह जाए। (Tejas Mk-1A delivery delay)
डिलीवरी को लेकर वायुसेना की है ये योजना
रक्षा और सुरक्षा से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, वायुसेना चाहती है कि तेजस मार्क-1ए को औपचारिक रूप से शामिल करने से पहले सभी जरूरी सर्टिफिकेशन और ऑपरेशनल क्लियरेंस पूरे हों। इसमें सिर्फ हथियारों की टेस्टिंग ही नहीं, बल्कि एवियोनिक्स, सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, फ्लाइट एनवेलप और मेंटेनबिलिटी जैसे पहलू भी शामिल हैं।
यही वजह है कि भले ही एचएएल पांच विमानों को “रेडी” बता रहा है, वायुसेना उनकी स्वीकृति से पहले एक बार पूरे प्रोजेक्ट की समीक्षा करना चाहती है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मई 2026 में इस प्रोजेक्ट का रिव्यू हो सकता है, जिसके बाद नई डिलीवरी टाइमलाइन तय की जा सकती है। (Tejas Mk-1A delivery delay)
पहले ही दो साल से ज्यादा की देरी
तेजस मार्क-1ए प्रोग्राम पहले ही अपने तय शेड्यूल से काफी पीछे चल रहा है। शुरुआती योजना के मुताबिक, इन विमानों की डिलीवरी 2023-24 के आसपास शुरू हो जानी थी। बाद में यह समयसीमा 2025 तक खिसकी और अब मार्च 2026 के बाद भी देरी की आशंका जताई जा रही है।
इस देरी की कई वजहें रही हैं। इंजन सप्लाई में बाधा, नए रडार और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम का इंटीग्रेशन, और जरूरी सर्टिफिकेशन में लगने वाला समय – इन सबने मिलकर प्रोग्राम की रफ्तार को धीमा किया है। (Tejas Mk-1A delivery delay)
ऑर्डर कितना बड़ा है, चुनौती भी उतनी
हालांकि, रक्षा से जुड़े सूत्रों का कहना है कि GE F404 इंजनों की सप्लाई में देरी के कारण तेजस मार्क-1A की डिलीवरी शेड्यूल प्रभावित हुई है। भारतीय वायुसेना ने तेजस मार्क-1ए के लिए कुल 180 विमानों का ऑर्डर दिया है। यह ऑर्डर दो हिस्सों में दिया गया है। पहला कॉन्ट्रैक्ट 2021 में 83 विमानों के लिए हुआ था, जिसकी कीमत करीब 48,000 करोड़ रुपये है। इसके बाद 2025 में 97 और विमानों को मंजूरी दी गई, जिनकी अनुमानित लागत 66,500 करोड़ रुपये बताई जाती है।
इंजनों की देरी भारत के लिए परेशानी का कारण बन गई है। पिछले साल जुलाई में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने अमेरिकी समकक्ष से इंजनों की सप्लाई तेज करने की मांग भी की थी।
एचएएल की मौजूदा फाइटर जेट प्रोडक्शन क्षमता करीब 24 विमान प्रति वर्ष है। इस रफ्तार से पूरे 180 विमान तैयार करने में सात साल से ज्यादा का समय लग सकता है। ऐसे में अगर डिलीवरी की शुरुआत और पीछे खिसकती है, तो वायुसेना को अपने स्क्वाड्रन स्ट्रेंथ को बनाए रखने में और मुश्किलें आ सकती हैं। (Tejas Mk-1A delivery delay)
वायुसेना के पास लगभग 29 फाइटर स्क्वाड्रन
वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास लगभग 29 फाइटर स्क्वाड्रन हैं, जबकि स्वीकृत संख्या 42 से ज्यादा की है। पुराने मिग-21, मिग-27 और जगुआर जैसे विमानों के रिटायर होने से यह कमी और बढ़ी है। ऐसे में तेजस मार्क-1ए को इस गैप को भरने वाला सबसे अहम स्वदेशी प्लेटफॉर्म माना जा रहा है।
यही वजह है कि वायुसेना तेजस को जल्द से जल्द शामिल करना चाहती है, लेकिन किसी भी तरह की जल्दबाजी में वह गुणवत्ता या ऑपरेशनल क्षमता से समझौता करने को तैयार नहीं है।
एचएएल ने भरोसा दिलाया है कि वह चालू वित्त वर्ष के लिए तय किए गए लक्ष्यों को पूरा करेगी। कंपनी का कहना है कि इंजन सप्लाई की स्थिति सुधरने के साथ ही डिलीवरी की रफ्तार भी बढ़ेगी।
इसके साथ-साथ एचएएल अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स पर भी काम कर रही है, जिनमें तेजस मार्क-2, इंडियन मल्टी रोल हेलीकॉप्टर और कॉम्बैट एयर टीमिंग सिस्टम जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। हालांकि ये सभी प्रोजेक्ट 2032 के बाद ही प्रोडक्शन फेज में पहुंचेंगे। (Tejas Mk-1A delivery delay)


