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संसदीय समिति का बड़ा सुझाव, चीन से मुकाबले के लिए भारत को चाहिए छठवीं पीढ़ी के फाइटर जेट

31 सदस्यों वाली इस समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा कि युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब आज के समय में युद्ध केवल जमीन या समुद्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक मल्टी-डोमेन यानी कई क्षेत्रों में एक साथ लड़ा जा रहा है...

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📍नई दिल्ली | 18 Mar, 2026, 10:41 PM

Sixth Generation Fighter India: देश की रक्षा तैयारियों को मजबूत करने के लिए संसद की स्थायी समिति ने बड़ा सुझाव दिया है। रक्षा मामलों से जुड़ी इस समिति ने कहा है कि भारत को अब छठवीं पीढ़ी के फाइटर जेट यानी सिक्स्थ जेनरेशन फाइटर एयरक्राफ्ट के डेवलपमेंट के लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार करना चाहिए।

लोकसभा में पेश की गई और राज्यसभा में भी रखी गई इस रिपोर्ट में समिति ने कहा कि आधुनिक युद्ध तेजी से बदल रहा है और इसमें एयर पावर की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में भारत को केवल पुराने सिस्टम को अपग्रेड करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि भविष्य की तकनीक पर काम शुरू करना चाहिए। (Sixth Generation Fighter India)

Sixth Generation Fighter India: नई पीढ़ी के युद्ध की जरूरतों पर जोर

31 सदस्यों वाली इस समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा कि युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब आज के समय में युद्ध केवल जमीन या समुद्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक मल्टी-डोमेन यानी कई क्षेत्रों में एक साथ लड़ा जा रहा है। इसमें हवा, अंतरिक्ष और साइबर जैसे क्षेत्र भी शामिल हो गए हैं।

इसलिए भविष्य के फाइटर एयरक्राफ्ट ऐसे होने चाहिए, जो इन सभी क्षेत्रों में काम कर सकें। रिपोर्ट में कहा गया है कि सिक्स्थ जेनरेशन एयरक्राफ्ट में एडवांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होगा, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई, स्टेल्थ टेक्नोलॉजी और मैनड-अनमैनड टीमिंग जैसी क्षमताएं शामिल होंगी। (Sixth Generation Fighter India)

कई देश बनाने में जुटे

दुनिया के कई बड़े देश पहले से ही छठी पीढ़ी के फाइटर जेट बनाने पर काम कर रहे हैं। इन प्रोजेक्ट्स का मकसद भविष्य के युद्ध को ध्यान में रखते हुए नई तकनीक विकसित करना है।

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समिति ने कहा कि भारत को भी इस दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए ताकि वह वैश्विक स्तर पर पीछे न रह जाए। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि भारत इस समय यूरोप के कुछ देशों के साथ इस विषय पर बातचीत कर रहा है। (Sixth Generation Fighter India)

यूरोपीय कंसोर्टियम से जुड़ने की तैयारी

सूत्रों के अनुसार, भारत दो बड़े यूरोपीय समूहों में से किसी एक के साथ जुड़ने पर विचार कर रहा है। एक समूह में ब्रिटेन, इटली और जापान शामिल हैं, जबकि दूसरे में फ्रांस और जर्मनी शामिल हैं।

इन दोनों समूहों द्वारा सिक्स्थ जेनरेशन फाइटर एयरक्राफ्ट डेवलप किए जा रहे हैं। भारत इन प्रोजेक्ट्स में भागीदारी के जरिए तकनीक हासिल करने और उत्पादन में हिस्सेदारी चाहता है।

सूत्रों के अनुसार, भारत ने फ्रांस के साथ फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम (FCAS) कार्यक्रम में संभावित भागीदारी को लेकर शुरुआती स्तर पर बातचीत शुरू की है। यह एक अगली पीढ़ी का एयर कॉम्बैट प्रोग्राम है, जिसे फ्रांस जर्मनी और स्पेन के साथ मिलकर डेवलप कर रहा है। भारत इस सहयोग में खास तौर पर को-डेवलपमेंट यानी संयुक्त विकास और को-प्रोडक्शन यानी संयुक्त उत्पादन पर जोर दे रहा है।

यह कार्यक्रम दसॉ एविएशन, एयरबस और स्पेन की डिफेंस कंपनी इंद्रा के कंसोर्टियम पर आधारित है। हालांकि इस प्रोजेक्ट में फ्रांस और जर्मनी के बीच काम के बंटवारे और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स को लेकर कुछ मतभेद भी सामने आए हैं। (Sixth Generation Fighter India)

स्वदेशी फाइटर प्रोग्राम पर भी काम जारी

इसी बीच भारत अपने स्वदेशी फाइटर जेट प्रोग्राम पर भी काम कर रहा है। एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट यानी एएमसीए प्रोजेक्ट भारत का पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर जेट है।

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इस प्रोजेक्ट के तहत भारत एक स्वदेशी इंजन डेवलप करने की दिशा में भी काम कर रहा है। फ्रांस की कंपनी के साथ मिलकर 110 से 120 किलो न्यूटन क्षमता का इंजन डेवलप करने को लेकर बातचीत चल रही है। जिसका इस्तेमाल इन स्वदेशी फाइटर जेट्स में किया जाएगा। (Sixth Generation Fighter India)

यह इंजन एएमसीए के भविष्य के वर्जन में इस्तेमाल किया जाएगा। इस सहयोग में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर यानी तकनीक का पूरा हस्तांतरण भी शामिल हो सकता है, जिससे भारत की विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम होगी।

भारतीय वायुसेना की योजना है कि वह इन पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स के कुल छह स्क्वाड्रन शामिल करेगी और उन्हें साल 2035 से तैनात किया जाएगा। (Sixth Generation Fighter India)

भारतीय वायुसेना की जिम्मेदारी पहले से बढ़ी

समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि भारतीय वायुसेना की जिम्मेदारी अब पहले से ज्यादा बढ़ गई है। अब वायुसेना को केवल पारंपरिक हमलों तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि उसे अंतरिक्ष और अन्य नए क्षेत्रों में भी काम करना होगा।

रिपोर्ट में कहा गया कि वायुसेना को “नियर स्पेस” यानी पृथ्वी के ऊपर के उस हिस्से में भी क्षमता डेवलप करनी चाहिए, जहां से निगरानी और सुरक्षा कार्य किए जा सकते हैं।

इसके लिए समिति ने सरकार से आग्रह किया है कि वायुसेना को पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि वह आधुनिक तकनीक से लैस हो सके। (Sixth Generation Fighter India)

जॉइंट मिलिट्री स्ट्रक्चर पर भी जोर

समिति ने यह भी कहा कि भविष्य के युद्ध में तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल जरूरी होगा। इसलिए संयुक्त सैन्य ढांचे को मजबूत करने की जरूरत है।

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रिपोर्ट में इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ को और मजबूत बनाने के लिए अतिरिक्त फंड देने की सिफारिश की गई है, ताकि तीनों सेनाएं मिलकर बेहतर योजना और संचालन कर सकें। (Sixth Generation Fighter India)

चीन बना चुका है पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट

रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया कि अन्य देश तेजी से अपनी सैन्य क्षमता बढ़ा रहे हैं। चीन भी अपने सिक्स्थ जेनरेशन फाइटर जेट पर काम कर रहा है और उसने इसके कुछ विजुअल्स भी जारी किए हैं।

इसके अलावा चीन के पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट पहले से ही तैयार हैं और उन्हें अन्य देशों के साथ साझा करने की चर्चा भी चल रही है।

ऐसे माहौल में भारत के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वह अपनी एयर पावर को मजबूत बनाए और नई तकनीकों को अपनाए। (Sixth Generation Fighter India)

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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