📍नई दिल्ली | 11 Dec, 2025, 8:00 PM
Russia R-37M Deal: भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस अब भारतीय वायुसेना के सुखोई-30एमकेआई फाइटर जेट्स पर अपनी अल्ट्रा लॉन्ग-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल आर-37एम (एक्सेहेड) को इंटीग्रेट करने की अनुमति दे दी है। इस मिसाइल को रूस अपनी सबसे लंबी दूरी वाली “बियोंड विजुअल रेंज” मिसाइल कहता है। कहा जा रहा है कि दोनों देशों के बीच जारी बातचीत अब अंतिम चरण में है और शुरुआती चरण में भारत को लगभग 300 मिसाइलें मिल सकती हैं।
इस मिसाइल के आने से सुखोई-30 की क्षमता में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी। सुखोई-30 को आर-37एम जैसी मिसाइल मिलने से यह दुश्मन के हाई-वैल्यू एसेट्स जैसे अवॉक्स, टैंकर एयरक्राफ्ट और हाई-एंड फाइटर जेट्स को 200 से 300 किलोमीटर (लॉन्च की ऊंचाई और स्पीड पर निर्भर) की दूरी से निशाना बना सकेगा। ये दुनिया की सबसे लंबी रेंज वाली एयर-टू-एयर मिसाइलों में से एक हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार रूस भारत को जरूरी तकनीकी मदद भी देगा, ताकि विमान के एवियोनिक्स, फायर-कंट्रोल सिस्टम और रडार में जरूरी बदलाव किए जा सकें।
आर-37एम को रूसी वायुसेना ने पहले ही अपने सुखोई-35 और सुखोई-57 फाइटर जेट पर तैनात कर रखा है। यह मिसाइल हाइपरसोनिक स्पीड यानी मैक 6 (लगभग 7400 किमी/घंटा) तक उड़ान भर सकती है। जिससे टारगेट के पास पहुंचने में बहुत कम समय लगता है और इंटरसेप्ट करना मुश्किल होता है। इसमें इनर्शियल, मिड-कोर्स अपडेट और एक्टिव रडार होमिंग (फायर-एंड-फॉरगेट) सिस्टम लगा है। यह टर्मिनल फेज में एक्टिव सीकर से टारगेट को लॉक कर सकती है।
इसका हाई-एक्सप्लोसिव फ्रैगमेंटेशन वॉरहेड करीब 60 किलो का है और यह मिसाइल लगभग 4.2 मीटर लंबी है। रूस के अनुसार यह मिसाइल एक बार हवा में छोड़े जाने के बाद फायर-एंड-फॉरगेट मोड में काम करती है और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से बचते हुए टारगेट को लॉक कर सकती है।
दुनिया भर में यह मिसाइल अवॉक्स किलर के नाम से भी जानी जाती है, क्योंकि यह दुश्मन के एयरबोर्न रडार सिस्टम को दूर से ही इनैक्टिव कर सकती है। बता दें कि पाकिस्तान के जे-10सीई और जेएफ-17 ब्लॉक III जैसे लड़ाकू विमानों पर पहले से ही चीनी पीएल-15 मिसाइल लगी है, जिसकी रेंज 200 किलोमीटर से अधिक है। ऐसे में आर-37एम के आने से पाकिस्तान की मुसिबतें बढ़ सकती हैं।
यह इंटीग्रेशन भारत के सुपर सुखोई अपग्रेड कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। इस कार्यक्रम के तहत भारतीय वायुसेना के 100 से अधिक सुखोई-30 लड़ाकू विमानों को आधुनिक हथियार, सेंसर और नई तकनीक से अपग्रेड किया जा रहा है। रूस का दावा है कि आर-37एम मिसाइल को सुखोई-30एसएम विमान पर पहले से टेस्ट किया जा चुका है और इस वजह से सुखोई-30एमकेआई पर इसे इंटीग्रेट करने में कम बदलाव करने पड़ेंगे। मिसाइल को विमान के फ्यूजलेज के नीचे दो जगहों पर लगाया जा सकेगा।
मिसाइल की पहली खेप मिलने के बाद भारत इसे सीमावर्ती इलाकों में हाई-टेंशन मिशनों में तैनात कर सकेगा। बता दें कि लंबी दूरी वाली बियोंड द विजुअल रेंज मिसाइलें मॉडर्न एरियल वारफेयर में निर्णायक भूमिका निभाती हैं और आर-37एम जैसी मिसाइलें आने के बाद दुश्मन के फाइटर जेट्स को दूर से ही गिराया जा सकेगा।


