📍नई दिल्ली/डिब्रूगढ़ | 14 Feb, 2026, 4:41 PM
C-130J Super Hercules India: चीन से सटी वास्तविक नियंत्रण रेखा से तकरीबन 300 किमी दूर असम के डिब्रूगढ़ जिले के मोरान इलाके में नेशनल हाईवे-37 पर बनी 4.2 किलोमीटर लंबी इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी अब आधिकारिक रूप से सक्रिय हो गई है। यह पूर्वोत्तर क्षेत्र की पहली ऐसी इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी है, जो सीधे हाईवे पर तैयार की गई है। इसे नेशनल हाईवे-2 पर मोरान बाईपास के पास बनाया गया है। जरूरत पड़ने पर यहां फाइटर जेट और ट्रांसपोर्ट विमान सुरक्षित रूप से उतर और उड़ान भर सकते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय वायुसेना के सी-130जे सुपर हरक्यूलिस विमान से यहां उतरकर इस एयर स्ट्रिप का उद्घाटन किया। सवाल उठता है कि इतने बड़े और अहम कार्यक्रम के लिए यही विमान क्यों चुना गया? (C-130J Super Hercules India)
C-130J Super Hercules India: क्या है सी-130जे सुपर हरक्यूलिस?
शनिवार को प्रधानमंत्री विशेष विमान से चाबुआ एयरफील्ड से उड़ान भरकर सीधे इस नई एयर स्ट्रिप पर उतरे। उनके विमान की लैंडिंग के साथ ही यह सुविधा आधिकारिक रूप से शुरू हो गई। प्रधानमंत्री के पहुंचने से पहले भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने यहां अभ्यास किया। पहले राफेल और सुखोई-30 ने लैंडिंग कर अपनी क्षमता दिखाई। इसके बाद सी-130जे ने रनवे को छुआ। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के दौरान फाइटर और ट्रांसपोर्ट विमानों ने टेकऑफ और लैंडिंग ड्रिल का प्रदर्शन किया।
सुखोई विमानों ने फ्लाई-पास्ट किया, फिर ओवरशूट करते हुए रनवे के ऊपर से दोबारा गुजरे और तीसरे विमान ने लैंडिंग की। राफेल ने भी इसी तरह अपनी ऑपरेशनल कैपेबिलिटी दिखाई। बाद में एएन-32 ट्रांसपोर्ट विमान भी यहां रनवे पर उतरा। लेकिन सबसे खास सी-130जे की लैंडिंग रही। (C-130J Super Hercules India)
Prime Minister Narendra Modi made a landmark landing in an Indian Air Force C-130J aircraft at Assam’s first Emergency Landing Facility (ELF) in Moran, marking a significant boost to strategic and emergency capabilities in the Northeast. @IAF_MCC@PMOIndia@narendramodi@EAC_IAF… pic.twitter.com/mb9zR7Y0pG
— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) February 14, 2026
सी-130जे एक आधुनिक टैक्टिकल एयरलिफ्टर है। इसे अमेरिका की कंपनी लॉकहीड मार्टिन बनाती है। भारत ने इसके कुल 12 विमान खरीदे हैं। यह विमान सैनिकों, हथियारों, राहत सामग्री और विशेष बलों को तेजी से एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने में सक्षम है। पहले छह विमान वर्ष 2008 में लिए गए थे और उसके बाद 2011 से 2019 के बीच छह और शामिल किए गए। आज ये सभी विमान उत्तर प्रदेश के हिंडन एयरबेस से ऑपरेट होते हैं और कई अहम अभियानों का हिस्सा रह चुके हैं। लेकिन इसे सिर्फ माल ढोने वाला विमान समझना भूल होगी। यह एक बहुउद्देश्यीय यानी मल्टी-रोल विमान है। (C-130J Super Hercules India)
कठिन इलाकों में काम करने की क्षमता
इसकी सबसे बड़ी है इसका कठिन इलाकों में काम करने की क्षमता। भारत का भूगोल बहुत विविध है। एक तरफ ऊंचे हिमालयी क्षेत्र हैं, दूसरी तरफ रेगिस्तान और समुद्री द्वीप। लद्दाख और अरुणाचल जैसे इलाकों में छोटे और ऊंचाई पर बने रनवे हैं। ऐसे स्थानों पर सामान्य विमान पूरी क्षमता से काम नहीं कर पाते। लेकिन सी-130जे कम लंबाई वाले और कच्चे रनवे पर भी उतर सकता है। दौलत बेग ओल्डी जैसे दुनिया के सबसे ऊंचे एयरस्ट्रिप पर भी इस विमान ने सफल लैंडिंग की है। गर्म और ऊंचाई वाले इलाकों में भी इसका प्रदर्शन बेहतर रहता है, जहां दूसरे विमानों की क्षमता आधी रह जाती है। (C-130J Super Hercules India)
स्पेशल ऑपरेशन के लिए है बेहद काम का
सी-130जे को भारतीय स्पेशल फोर्सेस की जरूरतों को ध्यान में रखकर खरीदा गया था। भारतीय विशेष बलों को ऐसे विमान की जरूरत थी जो चुपचाप, कम ऊंचाई पर और रात में भी सटीक उड़ान भर सके। इसमें इंफ्रारेड डिटेक्शन सिस्टम, नाइट विजन गॉगल्स के साथ काम करने की क्षमता, कम रोशनी में उतरने की सुविधा और इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा प्रणाली जैसी आधुनिक तकनीकें हैं।
यह दुश्मन की नजर से बचकर सैनिकों को किसी भी इलाके में उतार सकता है और जरूरत पड़ने पर तेजी से निकाल भी सकता है। इसलिए यह स्पेशल ऑपरेशन के लिए बेहद उपयोगी माना जाता है। (C-130J Super Hercules India)
आपदा के समय है सबसे भरोसेमंद
सी-130जे केवल ट्रांसपोर्ट विमान नहीं है। यह पैराड्रॉप कर सकता है, राहत सामग्री गिरा सकता है, सर्च एंड रेस्क्यू मिशन कर सकता है, और जरूरत पड़ने पर निगरानी मिशन भी पूरा कर सकता है। जरूरत पड़ने पर हवाई ईंधन भरने की सुविधा के साथ लंबी दूरी तक उड़ सकता है। खोज और बचाव अभियान, प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत सामग्री पहुंचाना, घायलों को निकालना और निगरानी जैसे कई काम यह एक ही प्लेटफॉर्म से कर सकता है। 2011 में सिक्किम में आए भूकंप और बाद में उत्तराखंड की बाढ़ जैसी आपदाओं के दौरान इस विमान ने राहत कार्यों में अहम भूमिका निभाई थी।
यह मेडिकल इवैक्यूएशन यानी घायल लोगों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने में भी सक्षम है। बड़े केबिन और मजबूत इंजन के कारण यह भारी उपकरण भी ले जा सकता है। (C-130J Super Hercules India)
कई देशों की वायुसेनाएं करती हैं इसका इस्तेमाल
भारतीय वायुसेना ने इसे अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों में परखा है। हिमालय, रेगिस्तान और समुद्री क्षेत्रों में इसकी उड़ान और लैंडिंग का परीक्षण किया गया। इन सभी जगहों पर यह भरोसेमंद साबित हुआ। इसके अलावा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान जैसे देशों की वायुसेनाएं भी इसी विमान का इस्तेमाल करती हैं। इससे संयुक्त अभ्यास के दौरान तालमेल बेहतर होता है।
सी-130जे की विश्वसनीयता भी इसकी बड़ी ताकत है। अमेरिका के फॉरेन मिलिट्री सेल्स कार्यक्रम के तहत इसकी खरीद समय पर और तय लागत में पूरी हुई। शुरुआती छह विमानों के अच्छे प्रदर्शन के बाद भारत ने छह और खरीदने का फैसला किया। (C-130J Super Hercules India)
रणनीतिक और कूटनीतिक कारण भी कम महत्वपूर्ण नहीं थे। यह भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग का एक बड़ा कदम था। कई दशकों बाद दोनों देशों के बीच इतना बड़ा रक्षा सौदा हुआ। भारत ने अपने सुरक्षा हितों को ध्यान में रखते हुए इसमें स्वदेशी तकनीकों को भी जोड़ा और जरूरत के अनुसार बदलाव किए। भविष्य में ‘मेक इन इंडिया’ के तहत इसके कुछ हिस्सों के निर्माण की संभावना भी जताई गई है।
सी-130जे की खासियत यह है कि यह रणनीतिक और सामरिक दोनों स्तर पर उपयोगी है। चीन सीमा के पास ऊंचाई वाले इलाकों में सैनिक और उपकरण पहुंचाने हों या किसी आपदा में तुरंत राहत पहुंचानी हो, यह विमान हर परिस्थिति में काम आता है। इसकी गति, विश्वसनीयता और बहुउपयोगिता इसे भारतीय वायुसेना के सबसे अहम विमानों में से एक बनाती है। (C-130J Super Hercules India)
पूर्वोत्तर में इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी क्यों जरूरी?
युद्ध की स्थिति में दुश्मन सबसे पहले एयरबेस को निशाना बनाता है। अगर मुख्य रनवे क्षतिग्रस्त हो जाएं, तो वैकल्पिक रनवे जरूरी होते हैं। देश में कई जगहों पर ऐसी सुविधाएं बनाने की योजना है। असम में बनी यह पहली इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी है।
असम की यह एयर स्ट्रिप रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पूर्वोत्तर क्षेत्र संवेदनशील इलाका है और यहां तेज सैन्य तैनाती की जरूरत पड़ सकती है। ऐसी सुविधाएं सेना को तेजी से प्रतिक्रिया देने में मदद करती हैं। आपात स्थिति में विमान सीधे हाईवे पर उतरकर सैनिकों, राहत सामग्री या उपकरणों की आपूर्ति कर सकते हैं। इसके अलावा पूर्वोत्तर क्षेत्र बाढ़ और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं से भी प्रभावित रहता है। ऐसे में यदि सामान्य एयरपोर्ट तक पहुंच संभव न हो, तो यह एयर स्ट्रिप राहत अभियान के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। (C-130J Super Hercules India)
और कहां इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी बनाने की है तैयारी
संसद में दी गई जानकारी के अनुसार भारतीय वायुसेना ने देश के अलग-अलग राज्यों में कुल 28 स्थानों की पहचान की है, जहां ऐसी सुविधा बनाई जानी है। इनमें असम में 5, पश्चिम बंगाल में 4, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और गुजरात में 3-3, तमिलनाडु, बिहार, जम्मू-कश्मीर और हरियाणा में 2-2, जबकि पंजाब और उत्तर प्रदेश में 1-1 स्थान शामिल हैं।
इनमें से कई स्थानों पर काम पूरा हो चुका है और कुछ जगहों पर अभ्यास भी किए जा चुके हैं। इससे पहले राजस्थान के बाड़मेर में 2021 में पहली इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी सक्रिय की गई थी।
दिल्ली-आगरा एक्सप्रेसवे और लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर भी पहले वायुसेना अभ्यास कर चुकी है। आंध्र प्रदेश के अड्डंकी में भी ऐसी सुविधा हाल ही में शुरू की गई थी। (C-130J Super Hercules India)



