📍नई दिल्ली | 21 Jan, 2026, 9:24 PM
Subroto Mukerjee International Seminar 2026: भारतीय वायुसेना के चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि किसी भी देश की राष्ट्रीय सुरक्षा की असली ताकत उसकी सैन्य क्षमता में होती है, और मौजूदा दौर में वायु शक्ति सबसे तेज और निर्णायक भूमिका निभाती है। बदलते वैश्विक हालात और बहु-आयामी खतरों के बीच भारत को अपनी सुरक्षा तैयारियों को भविष्य की जरूरतों के हिसाब से लगातार मजबूत करना होगा। उन्होंने यह बात 22वें सुब्रोतो मुखर्जी इंटरनेशनल सेमिनार के उद्घाटन अवसर पर कही, जहां राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर गहन मंथन किया गया।
Subroto Mukerjee International Seminar 2026: वायु शक्ति की भूमिका बेहद निर्णायक
देश की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े बड़े और गंभीर मुद्दों पर मंथन के लिए 21 जनवरी को राजधानी नई दिल्ली में 22वां सुब्रोतो मुखर्जी इंटरनेशनल सेमिनार आयोजित किया गया। इस सेमिनार का आयोजन सेंटर फॉर एयरोस्पेस पावर एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज (कैप्स – CAPSS) द्वारा किया जाता है। यह सेमिनार हर साल भारतीय वायुसेना के पहले भारतीय चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर मार्शल सुब्रोतो मुखर्जी की स्मृति में आयोजित किया जाता है, जिन्हें भारतीय वायुसेना के दूरदर्शी संस्थापकों में गिना जाता है। (Subroto Mukerjee International Seminar 2026)
इस साल सेमिनार का विषय “नेशनल सिक्योरिटी इम्पेरेटिव्स” रखा गया था। इसका मकसद बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा माहौल, नई तकनीकों और उभरती चुनौतियों पर खुलकर विचार-विमर्श करना था। यह सेमिनार कैप्स के सिल्वर जुबली ईयर के तहत आयोजित होने वाला पहला प्रमुख कार्यक्रम भी था।
सेमिनार का उद्घाटन भारतीय वायुसेना के चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने किया। अपने उद्घाटन भाषण में उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि किसी भी देश की राष्ट्रीय सुरक्षा का अंतिम आधार उसकी सैन्य शक्ति होती है, और इसमें वायु शक्ति की भूमिका बेहद निर्णायक है। (Subroto Mukerjee International Seminar 2026)
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि केवल आर्थिक ताकत या कूटनीति किसी देश की संप्रभुता की पूरी तरह रक्षा नहीं कर सकती। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि दुनिया में ऐसे कई देश रहे हैं, जहां आर्थिक संसाधन होने के बावजूद कमजोर सैन्य क्षमता के कारण अस्थिरता और सुरक्षा संकट पैदा हुए। उनके अनुसार, “मिलिट्री पावर जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है उस शक्ति का सही समय पर इस्तेमाल करने का राजनीतिक और रणनीतिक संकल्प।”
उन्होंने यह भी कहाा कि आज के दौर में युद्ध सिर्फ जमीन, समुद्र या हवा तक सीमित नहीं रह गए हैं। अब युद्ध मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस का रूप ले चुके हैं, जिनमें साइबर स्पेस, स्पेस, सूचना युद्ध और टेक्नोलॉजी की बड़ी भूमिका होती है। ऐसे में राष्ट्रीय सुरक्षा की परिभाषा भी लगातार बदल रही है। (Subroto Mukerjee International Seminar 2026)
एयर चीफ ने अपने संबोधन में भारतीय वायुसेना की क्षमताओं का जिक्र करते हुए कहा कि आधुनिक युद्ध में एयर पावर सबसे तेज और निर्णायक परिणाम देने वाली ताकत बन चुकी है। उन्होंने बताया कि भारतीय वायुसेना ने बीते सालों में कई बार यह साबित किया है कि वह कम समय में सटीक और प्रभावी कार्रवाई करने में सक्षम है। चाहे संकटग्रस्त क्षेत्रों से नागरिकों को सुरक्षित निकालने का अभियान हो या आतंकवादी ठिकानों पर सटीक स्ट्राइक, वायु शक्ति ने हमेशा अहम भूमिका निभाई है। (Subroto Mukerjee International Seminar 2026)
उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी देश को अपने पिछले गौरव पर टिके नहीं रहना चाहिए, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए लगातार तैयार रहना चाहिए। तेजी से बदलते वैश्विक हालात, नई तकनीकों और भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच सुरक्षा से जुड़े फैसले और भी जटिल होते जा रहे हैं। ऐसे में कैप्स जैसे थिंक टैंक और सेमिनार सैन्य नेतृत्व और नीति निर्माताओं को बौद्धिक रूप से तैयार रखने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।
इस सेमिनार में देश और विदेश से आए पॉलिसी मेकर्स, स्कॉलर्स, प्रैक्टिशनर्स, सरकारी प्रतिनिधि और रक्षा मामलों के जानकार शामिल हुए। सभी का उद्देश्य भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े उन प्रमुख कारकों पर चर्चा करना था, जो आने वाले वर्षों में देश की रणनीतिक दिशा तय करेंगे। (Subroto Mukerjee International Seminar 2026)
सेमिनार के दौरान मुख्य रूप से दो अहम विषयों पर गहन चर्चा हुई। पहला विषय था “मल्टी डोमेन ऑपरेशंस में नेशनल सिक्योरिटी इम्पेरेटिव्स”, जिसमें यह समझने की कोशिश की गई कि अलग-अलग डोमेन्स में एक साथ काम करने की क्षमता कैसे राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत बनाती है। दूसरा विषय था “मल्टी-पोलर वर्ल्ड में नेशनल सिक्योरिटी को री-इमैजिन करना”, जिसमें बदलती वैश्विक शक्ति संरचना और उसके भारत पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा की गई। (Subroto Mukerjee International Seminar 2026)
विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि आज की दुनिया अब एक ध्रुवीय नहीं रही। कई पावर सेंटर उभर चुके हैं और ऐसे माहौल में भारत को अपनी सुरक्षा रणनीति को ज्यादा लचीला, आत्मनिर्भर और तकनीक आधारित बनाना होगा। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, आधुनिकरण और मजबूत सैन्य क्षमता आने वाले समय में भारत की सुरक्षा नीति की रीढ़ बने रहेंगे। (Subroto Mukerjee International Seminar 2026)



