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वर्ल्ड वॉर-2 में मिली जीत पर नई दिल्ली में बाइक रैली निकालेगा रूस, पढ़ें रूसी सेना का मोटरसाइकिल कनेक्शन

यह रैली 21 मार्च को आयोजित होगी, जिसमें भारत और रूस सहित कई देशों के 300 से अधिक बाइक राइडर्स हिस्सा लेंगे। इस आयोजन में दिल्ली के विभिन्न मोटरसाइकिल ग्रुप भी शामिल होंगे...

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📍नई दिल्ली | 17 Mar, 2026, 12:01 PM

Russia WWII Victory Motorcycle Rally: नई दिल्ली में द्वितीय विश्व युद्ध में जीत की 81वीं वर्षगांठ के मौके पर एक विशेष मोटरसाइकिल रैली आयोजित की जाएगी। यह आयोजन वर्ल्ड वॉर II विक्ट्री मोटरसाइकिल रैली (WWII Victory Motorcycle Rally) के नाम से किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का आयोजन रूस के दूतावास और नई दिल्ली स्थित रशियन हाउस द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है।

यह रैली 21 मार्च को आयोजित होगी, जिसमें भारत और रूस सहित कई देशों के 300 से अधिक बाइक राइडर्स हिस्सा लेंगे। इस आयोजन में दिल्ली के विभिन्न मोटरसाइकिल ग्रुप भी शामिल होंगे।

Russia WWII Victory Motorcycle Rally: रैली का रूट और कार्यक्रम

इस मोटरसाइकिल रैली का रूट भी खास महत्व रखता है। रैली की शुरुआत रूस के दूतावास से होगी और इसके बाद यह इंडिया गेट और नेशनल वॉर मेमोरियल से होते हुए रशियन हाउस तक पहुंचेगी।

यह रूट उन सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के उद्देश्य से चुना गया है, जिन्होंने युद्ध के दौरान अपने प्राणों की आहुति दी थी। इंडिया गेट और नेशनल वॉर मेमोरियल भारत के शहीद सैनिकों की याद में बनाए गए महत्वपूर्ण स्थल हैं। (Russia WWII Victory Motorcycle Rally)

300 से ज्यादा राइडर्स लेंगे हिस्सा

इस कार्यक्रम में भारत और रूस के अलावा अन्य मित्र देशों के भी नागरिक हिस्सा लेंगे। कुल मिलाकर 300 से अधिक मोटरसाइकिल राइडर्स इस रैली में शामिल होंगे।

पिछले वर्ष आयोजित पहली रैली में करीब 100 से 150 राइडर्स ने हिस्सा लिया था। इस बार प्रतिभागियों की संख्या में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। (Russia WWII Victory Motorcycle Rally)

द्वितीय विश्व युद्ध- “ग्रेट पैट्रियॉटिक वॉर”

द्वितीय विश्व युद्ध को रूस में “ग्रेट पैट्रियॉटिक वॉर” के नाम से जाना जाता है। यह युद्ध 1941 से 1945 के बीच लड़ा गया था। इस दौरान सोवियत संघ के लगभग 2.7 करोड़ लोगों ने अपनी जान गंवाई थी।

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रूस में हर साल 9 मई को विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह देश के सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय दिनों में से एक है। नई दिल्ली में आयोजित यह रैली उसी ऐतिहासिक विजय की याद में आयोजित की जा रही है।

रैली के बाद रशियन हाउस में एक विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। इसमें विभिन्न देशों के कलाकार हिस्सा लेंगे और संगीत प्रस्तुति देंगे।

इसके साथ ही नई दिल्ली में आयोजित होने वाली फोटो प्रदर्शनी “Motorcycles in the Service of the Soviet Army” में इसी M-72 और अन्य सैन्य मोटरसाइकिलों की भूमिका को दिखाया जाएगा। इसमें युद्ध के दौरान ली गई पुरानी तस्वीरें, सैनिकों के साथ बाइक्स के दृश्य और उनके उपयोग से जुड़ी जानकारी प्रदर्शित की जाएगी।

इस प्रदर्शनी का उद्देश्य यह दिखाना है कि कैसे इन मोटरसाइकिलों ने युद्ध के दौरान सेना को तेज, मोबाइल और प्रभावी बनाया। (Russia WWII Victory Motorcycle Rally)

सोवियत सेना में मोटरसाइकिलों रहीं बेहद अहम

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सोवियत सेना ने मोटरसाइकिलों का जमकर इस्तेमाल किया था। इनका इस्तेमाल सैनिकों के संदेश पहुंचाने, टोही मिशन, हथियार ले जाने और घायलों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के लिए किया जाता था। इस प्रदर्शनी के माध्यम से यह दिखाया जाएगा कि कैसे इन मोटरसाइकिलों ने युद्ध के दौरान सेना की मदद की थी।

खासकर एम-72 मॉडल ने युद्ध के मैदान में सेना की गति और क्षमता को काफी बढ़ाया। यह मोटरसाइकिल सेना के कई महत्वपूर्ण कामों में इस्तेमाल होती थी।

एम-72 की शुरुआत जर्मनी की BMW R71 बाइक से हुई। सोवियत यूनियन ने इस बाइक के कुछ नमूने हासिल किए और फिर अपने इंजीनियरों की मदद से उसी तरह की मोटरसाइकिल तैयार की। 1941 के आसपास इसका उत्पादन शुरू हुआ। यह एक मजबूत और भारी बाइक थी, जिसमें साइडकार लगा होता था। इस साइडकार में सैनिक बैठ सकते थे या हथियार और जरूरी सामान रखा जा सकता था।

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इस बाइक का इंजन करीब 750cc का था और यह अच्छी स्पीड के साथ खराब रास्तों पर भी चल सकती थी। इसे खास तौर पर सैन्य जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया था, इसलिए इसमें मजबूत फ्रेम, ऊंचे मडगार्ड और हथियार लगाने की सुविधा दी गई थी। (Russia WWII Victory Motorcycle Rally)

सोवियत सेना में M-72 का इस्तेमाल कई तरह के कामों के लिए किया जाता था। सबसे पहले इसका उपयोग टोही यानी रिकॉनिसेंस मिशन में होता था। सैनिक इस बाइक पर आगे जाकर दुश्मन की स्थिति का पता लगाते थे और जानकारी वापस लाते थे। इसकी तेज रफ्तार और आसानी से चलने की क्षमता इसे इस काम के लिए बहुत उपयोगी बनाती थी।

इसके अलावा यह मोटरसाइकिल संदेश पहुंचाने के लिए भी इस्तेमाल होती थी। युद्ध के दौरान कई बार रेडियो संपर्क सही तरीके से काम नहीं करता था, ऐसे में सैनिक इन बाइक्स के जरिए जरूरी संदेश एक जगह से दूसरी जगह तक जल्दी पहुंचाते थे।

M-72 का एक खास उपयोग यह भी था कि इसके साइडकार पर मशीन गन लगाई जा सकती थी। इससे यह एक चलती-फिरती फायरिंग यूनिट बन जाती थी। सैनिक चलते हुए भी दुश्मन पर हमला कर सकते थे। इससे पैदल सेना को काफी मदद मिलती थी। (Russia WWII Victory Motorcycle Rally)

घायलों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने और जरूरी सामान सप्लाई करने में भी यह बाइक काम आती थी। साइडकार में घायल सैनिकों को ले जाया जा सकता था या फिर जरूरी दवाइयां और हथियार पहुंचाए जा सकते थे।

इसका इस्तेमाल पेट्रोलिंग और एस्कॉर्ट के लिए भी किया जाता था। कई बार वरिष्ठ अधिकारियों की सुरक्षा के लिए या सड़क पर निगरानी के लिए इन बाइक्स को तैनात किया जाता था।

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द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान M-72 ने सोवियत सेना को तेजी से आगे बढ़ने में मदद की। खासकर बड़े सैन्य अभियानों के दौरान यह बाइक सेना की मूवमेंट को तेज बनाने में काम आई। उस समय जर्मन सेना भी इसी तरह की मोटरसाइकिलों का इस्तेमाल कर रही थी, इसलिए सोवियत M-72 ने मुकाबले में बराबरी बनाए रखने में मदद की। (Russia WWII Victory Motorcycle Rally)

Russia WWII Victory Motorcycle Rally

कई देशों के राजनयिकों होंगे शामिल

इस कार्यक्रम में 10 से अधिक देशों के राजनयिकों के शामिल होने की संभावना है। यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग और मित्रता का भी प्रतीक माना जा रहा है।

रैली के लिए सुबह के समय रूस दूतावास के पास सभी बाइकर्स जुटेंगे, इसके बाद निर्धारित समय पर रैली को रवाना किया जाएगा।

प्रतिभागियों के लिए सुरक्षा नियम भी तय किए गए हैं। सभी राइडर्स को हेलमेट और अन्य सुरक्षा उपकरण पहनना अनिवार्य होगा। इसके अलावा ट्रैफिक नियमों का पालन करना भी जरूरी होगा।

रैली में हिस्सा लेने वाले सभी प्रतिभागियों को आयोजकों की ओर से स्मृति चिन्ह भी दिए जाएंगे। यह आयोजन को यादगार बनाने के उद्देश्य से किया जा रहा है। इस पूरे कार्यक्रम का मकसद द्वितीय विश्व युद्ध के इतिहास को याद करने और शहीदों को श्रद्धांजलि देने का कोशिश है। (Russia WWII Victory Motorcycle Rally)

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