📍खैबर पख्तूनख्वा | 21 Feb, 2026, 10:17 PM
Pakistani soldiers hostage BLA: हाल ही में बलूच लिबरेशन आर्मी ने पाकिस्तानी सैनिकों की कुछ तस्वीरें और वीडियो जारी किए और दावा किया कि उसने पाकिस्तान के सात सैनिकों को अपने कब्जे में ले लिया है। इसके साथ ही संगठन ने सात दिन की समय-सीमा दी और कहा कि अगर उसके पकड़े गए लड़ाकों को छोड़ा नहीं गया, तो इन सैनिकों के बदले कोई समझौता नहीं होगा। वहीं पकिस्तान ने इन सैनिकों को अपना मानने से इनकार किया है। ठीक वैसे ही जैसे तकरीबन 26 साल पहले कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना के मारे गए जवानों के शवों को पाकिस्तान ने अपनाने से इनकार कर दिया था।
21 फरवरी को एक हफ्ते की मोहलत भी खत्म हो गई, लेकिन तब तक बंधक बनाए गए पाकिस्तानी सैनिकों को लेकर स्थिति पूरी तरह अनिश्चितता बनी हुई है। दिनभर कोई बड़ा घटनाक्रम सामने नहीं आया, न ही किसी तरह की रिहाई हुई और न ही किसी एक्जीक्यूशन की पुष्टि हुई। लेकिन इस बीच एक कई वीडियोज वायरल हो रहे हैं, जिनमें बंधक सैनिकों के गांवों से आवाज उठने लगी है, जहां लोग खुलकर कह रहे हैं कि “ये हमारे ही बच्चे हैं, इन्हें कैसे नकारा जा रहा है?”
बंधक बनाए गए पाकिस्तानी जवानों को लेकर न तो कोई रिहाई की खबर आई है और न ही किसी तरह की कार्रवाई की पुष्टि हुई है। इस बीच जिन जवानों के वीडियो सामने आए हैं, उनके गांवों से लगातार आवाज उठ रही है। गांव वालों का कहना है कि ये जवान उनके ही इलाके के हैं, वे उन्हें पहचानते हैं और यह सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर सेना इन्हें अपना मानने से क्यों इनकार कर रही है। परिवारों और स्थानीय लोगों में बेचैनी और गुस्सा दोनों साफ दिखाई दे रहे हैं।
🚨 BREAKING: Villagers speak out over a soldier held hostage by the Baloch Liberation Army (BLA). Locals say the captive is from their village, warning that others could face a similar fate. The soldier is reported to be from Buner. pic.twitter.com/O4WrcPRCOD
— SILENT BRIEF (@SilentBriefHQ) February 21, 2026
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 14 फरवरी से हुई, जब बलोच लिबरेशन आर्मी यानी बीएलए ने दावा किया कि उसने पाकिस्तान सेना के 7 जवानों को पकड़ लिया है। इसके साथ ही उसने एक 7 दिन का अल्टीमेटम दिया था। बीएलए ने कहा था कि अगर पाकिस्तान सरकार उसके कैद लड़ाकों को रिहा नहीं करती, तो इन जवानों को मार दिया जाएगा।
20 फरवरी को इस मामले ने नया मोड़ लिया, जब बीएलए ने एक और वीडियो जारी किया। इस वीडियो में 7 की जगह 8 जवान दिखाई दिए। ये सभी जवान घुटनों के बल बैठे हुए थे और उनके पीछे हथियारबंद लोग खड़े थे। वीडियो में जवान अपनी पहचान साबित करने की कोशिश करते दिखे। उन्होंने अपने आर्मी सर्विस कार्ड और नाडरा आईडी कार्ड कैमरे के सामने दिखाए।
सबसे ज्यादा चर्चा सेपॉय मोहम्मद शहराम के बयान की हो रही है। वह वीडियो में रोते हुए कहते हैं कि अगर ये कार्ड नकली हैं, तो फिर इन्हें जारी किसने किया। वह बताते हैं कि वह अपने परिवार के इकलौते कमाने वाले हैं और उनके पिता दिव्यांग हैं। उनका सवाल सीधा था कि अगर वे सेना का हिस्सा नहीं हैं, तो उन्हें भर्ती क्यों किया गया था। इसी तरह दीदार उल्लाह और उस्मान नाम के जवान भी वीडियो में अपनी पहचान बताते नजर आते हैं।
दूसरी तरफ पाकिस्तान की सेना और आईएसपीआर लगातार इन दावों को खारिज कर रहे हैं। उनका कहना है कि ये वीडियो फर्जी हैं और एआई से बनाए गए हैं। 15 फरवरी से लेकर अब तक सेना का रुख नहीं बदला है। न तो इन जवानों को आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया गया है और न ही किसी तरह की बातचीत की पुष्टि हुई है। यही वजह है कि यह मामला और ज्यादा गंभीर होता जा रहा है।
इस बीच पाकिस्तान के कुछ इलाकों से जो जानकारी सामने आई है, उसमें यह दिख रहा है कि जिन जवानों के वीडियो आए हैं, उनके परिवार और गांव वाले सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। खासकर खैबर पख्तूनख्वा के बुनर गांव से जुड़े लोगों ने कहा है कि वीडियो में दिख रहा जवान उनके गांव का ही है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर वह सेना में नहीं है, तो फिर उसकी पहचान के इतने सबूत कैसे हैं।
हालांकि 21 फरवरी की शाम तक सबसे बड़ी बात यह रही कि बीएलए की तरफ से कोई नई वीडियो या बयान सामने नहीं आया है। साथ ही पाकिस्तान सरकार या सेना की ओर से भी कोई नई घोषणा नहीं की गई है। यानी स्थिति पूरी तरह अनिश्चित बनी हुई है। अगर 22 फरवरी तक भी कोई हल नहीं निकलता, तो खतरा और बढ़ सकता है।
इस पूरे मामले को कई लोग 1999 के कारगिल युद्ध से भी जोड़कर देख रहे हैं। उस समय भी पाकिस्तान ने अपने सैनिकों की मौजूदगी से इनकार किया था, लेकिन बाद में सबूत सामने आए थे। अब एक बार फिर वैसी ही स्थिति बनती दिखाई दे रही है, जहां जमीनी हकीकत और आधिकारिक बयान में अंतर नजर आ रहा है।
बीएलए का दावा है कि उसने कुल 17 जवानों को पकड़ा था, जिनमें से 10 को छोड़ दिया गया है और बाकी अभी भी उसके कब्जे में हैं। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। लेकिन वीडियो में दिख रहे जवानों की हालत और उनके बयान इस मामले को और संवेदनशील बना रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम का एक बड़ा असर पाकिस्तान सेना की छवि पर भी पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी इस पर चर्चा हो रही है कि क्या सेना अपने ही जवानों को पहचानने से इनकार कर रही है। इससे सेना की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ एक बंधक संकट नहीं है, बल्कि यह एक बड़ी रणनीतिक और मनोवैज्ञानिक लड़ाई भी है। बीएलए इस मामले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाकर दबाव बनाना चाहता है, जबकि पाकिस्तान सेना इसे सूचना युद्ध यानी इंफॉर्मेशन वॉर बताकर खारिज कर रही है।
फिलहाल सबसे अहम सवाल यही है कि आगे क्या होगा। क्या पाकिस्तान बातचीत करेगा या फिर स्थिति और बिगड़ेगी। क्या बीएलए अपने अल्टीमेटम पर अमल करेगा या फिर कोई नया रास्ता निकलेगा। इन सभी सवालों के जवाब अगले 24 घंटे में सामने आ सकते हैं।

