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Pakistan Nuclear Test: ट्रंप का दावा- पाकिस्तान और चीन कर रहे गुप्त परमाणु परीक्षण, भारत में चिंता बढ़ी

ट्रंप ने यह बयान सीबीएस न्यूज के लोकप्रिय कार्यक्रम ‘60 मिनट्स’ में दिए गए एक इंटरव्यू में दिया। इस इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि जहाँ अमेरिका पिछले तीन दशकों से परमाणु परीक्षण नहीं कर रहा है, वहीं पाकिस्तान, चीन, रूस और उत्तर कोरिया भूमिगत परीक्षण कर रहे हैं ताकि दुनिया को इसकी जानकारी न हो...

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📍नई दिल्ली | 3 Nov, 2025, 5:52 PM

Pakistan Nuclear Test: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि पाकिस्तान और चीन गुप्त रूप से परमाणु परीक्षण कर रहे हैं। ट्रंप के इस बयान के बाद भारत में सुरक्षा हलकों में हलचल मच गई है। उन्होंने कहा कि अमेरिका भी अब परमाणु परीक्षण फिर से शुरू करेगा क्योंकि कई देश छिपकर परीक्षण कर रहे हैं।

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ट्रंप ने यह बयान सीबीएस न्यूज के लोकप्रिय कार्यक्रम ‘60 मिनट्स’ में दिए गए एक इंटरव्यू में दिया। इस इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि जहाँ अमेरिका पिछले तीन दशकों से परमाणु परीक्षण नहीं कर रहा है, वहीं पाकिस्तान, चीन, रूस और उत्तर कोरिया भूमिगत परीक्षण कर रहे हैं ताकि दुनिया को इसकी जानकारी न हो।

Pakistan Nuclear Test: ट्रंप बोले– पाकिस्तान कर रहा है भूमिगत परीक्षण

ट्रंप ने कहा, “हम भी अब परमाणु परीक्षण करेंगे क्योंकि बाकी देश कर रहे हैं। निश्चित रूप से उत्तर कोरिया कर रहा है, और पाकिस्तान भी। वे भूमिगत परीक्षण करते हैं ताकि किसी को पता न चले। आपको बस धरती में हल्का कंपन महसूस होता है।” यह पहली बार है जब किसी मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति ने पाकिस्तान पर गुप्त परमाणु परीक्षण करने का सीधा आरोप लगाया है।

ट्रंप ने कहा कि इन परीक्षणों का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं होता, क्योंकि वे अंतरराष्ट्रीय निगरानी प्रणाली से बचने के लिए दूरदराज इलाकों में किए जाते हैं। उनके इस बयान को उस आदेश से जोड़ा जा रहा है जिसमें उन्होंने अमेरिकी सेना को 33 साल बाद फिर से परमाणु परीक्षण शुरू करने की मंजूरी दी है।

Pakistan Nuclear Test: भारत के लिए दो मोर्चों पर चुनौती

भारत के संदर्भ में यह बयान काफी चिंता पैदा करने वाला है, क्योंकि भारत के पाकिस्तान और चीन दोनों से तनावपूर्ण संबंध हैं। अगर दोनों देश वाकई परमाणु हथियारों का परीक्षण कर रहे हैं, तो भारत के सामने दो मोर्चों पर खतरा खड़ा हो सकता है।

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ट्रंप ने इंटरव्यू के दौरान भारत-पाकिस्तान के मई 2025 में हुए संघर्ष का भी उल्लेख किया। उन्होंने फिर से दावा किया कि भारत और पाकिस्तान उस समय परमाणु युद्ध के बेहद करीब पहुंच गए थे और उन्होंने व्यक्तिगत हस्तक्षेप से इस संकट को टाल दिया।

ट्रंप ने कहा, “भारत पाकिस्तान के साथ परमाणु युद्ध के कगार पर था। अगर मैं बीच में न आता, तो लाखों लोग मारे जाते।” उन्होंने दावा किया कि उन्होंने दोनों देशों को चेतावनी दी थी कि अगर वे युद्ध नहीं रोकते, तो अमेरिका उनके साथ व्यापार बंद कर देगा। हालांकि, भारत ने ट्रंप के इस दावे को कई बार खारिज किया है।

दुनिया में परमाणु परीक्षणों की निगरानी सीटीबीटी (कॉम्प्रीहेंसिव न्यूक्लियर-टेस्ट-बैन ट्रीटी) के तहत की जाती है, जो भूकंपीय तरंगों के माध्यम से भूमिगत विस्फोटों का पता लगाती है। लेकिन ट्रंप का कहना है कि कुछ देश इतने गुप्त तरीके से परीक्षण करते हैं कि यह प्रणाली भी उन्हें पकड़ नहीं पाती।

पाकिस्तान ने आधिकारिक रूप से 1998 में चगाई परीक्षण (Chagai Tests) के बाद कोई परमाणु परीक्षण नहीं किया है। लेकिन अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों में उसके परमाणु कार्यक्रम के विस्तार का जिक्र किया गया है। वहीं, चीन ने भी पिछले कुछ वर्षों में अपने परमाणु बंकर और परीक्षण स्थलों का आधुनिकीकरण किया है।

ट्रंप का दावा तथ्यों से कोसों दूर

अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक विशेषज्ञ डॉ. ब्रह्मा चेलानी ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के परमाणु परीक्षण वाले बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि ट्रंप का दावा तथ्यों से कोसों दूर है और अमेरिका पहले से ही गैर-विस्फोटक परीक्षण कर रहा है।

चेलानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि रूस ने आखिरी बार 1990, चीन ने 1996, उत्तर कोरिया ने 2017 और पाकिस्तान ने 1998 में परमाणु परीक्षण किया था। ट्रंप ने इन देशों का नाम लेते हुए कहा था कि अमेरिका भी “बराबर आधार” पर परमाणु परीक्षण फिर से शुरू करेगा।

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डॉ. चेलानी ने कहा कि ट्रंप अक्सर तथ्यों की अनदेखी करते हैं। उन्होंने बताया कि ट्रंप के इस बयान को उनके ही ऊर्जा सचिव ने खारिज कर दिया है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि अमेरिका जो परीक्षण करेगा, वे “नॉन-क्रिटिकल एक्सप्लोजन होंगे, जिन्हें तकनीकी रूप से सब-क्रिटिकल टेस्ट कहा जाता है।

इन परीक्षणों में परमाणु विस्फोट नहीं होता, बल्कि परमाणु सामग्री के व्यवहार को समझने के लिए सीमित वैज्ञानिक प्रयोग किए जाते हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पुराने परमाणु हथियार समय के साथ सुरक्षित और भरोसेमंद बने रहें।

1992 से अमेरिका कर रहा है सब-क्रिटिकल परीक्षण

वास्तविकता यह है कि अमेरिका 1992 में परमाणु विस्फोटक परीक्षणों को रोक चुका है। तब से वह लगातार सब-क्रिटिकल न्यूक्लियर टेस्ट कर रहा है। इन परीक्षणों में विस्फोट नहीं होता, बल्कि विशेष परिस्थितियों में परमाणु सामग्री की प्रतिक्रिया का अध्ययन किया जाता है।

डॉ. चेलानी ने कहा कि ट्रंप का यह बयान सिर्फ एक खाली दिखावा था, जिसका मकसद अपनी “मजबूत छवि” पेश करना था। उन्होंने लिखा कि “अमेरिका दशकों से यही परीक्षण कर रहा है, इसलिए ट्रंप का आदेश नया कदम नहीं बल्कि पुराना अभ्यास दोहराने जैसा है।”

भारत की नीति “नो-फर्स्ट-यूज”

भारत ने 1998 में पोखरण-2 परीक्षणों के बाद “नो-फर्स्ट-यूज” नीति अपनाई थी, यानी भारत पहले परमाणु हथियार का इस्तेमाल नहीं करेगा। भारत अब तक कोई नया परीक्षण नहीं कर चुका है।

सीपरी (स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट) की 2025 रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पास फिलहाल लगभग 180 परमाणु हथियार हैं। पाकिस्तान के पास करीब 170 और चीन के पास लगभग 600 परमाणु हथियार हैं। पेंटागन की 2024 रिपोर्ट के मुताबिक चीन 2030 तक 1,000 से अधिक ऑपरेशनल हथियार तैनात कर सकता है।

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भारत की चिंता इस बात को लेकर है कि अगर उसके दोनों पड़ोसी गुप्त रूप से परीक्षण कर रहे हैं, तो यह उसके लिए सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकता है। भारत ने सीटीबीटी पर दस्तखत नहीं किए हैं, लेकिन परीक्षण की स्थिति में अमेरिका के साथ 2005 के न्यूक्लियर डील पर असर पड़ सकता है।

ट्रंप के इस बयान ने दक्षिण एशिया में परमाणु प्रतिस्पर्धा को लेकर चर्चा बढ़ा दी है। भारत, पाकिस्तान और चीन पहले से ही मिसाइल और परमाणु तकनीक के क्षेत्र में सक्रिय हैं।

रिपोर्टों के मुताबिक, भारत ने कई कैनिस्टराइज्ड मिसाइलें डेवलप की हैं, जो एक साथ कई हथियार ले जा सकती हैं। वहीं पाकिस्तान ने शाहीन-तीन और अब्दाली जैसी मिसाइलों का परीक्षण किया है। चीन एफओबीएस यानी फ्रैक्शनल ऑर्बिटल बॉम्बार्डमेंट सिस्टम जैसी नई तकनीक पर काम कर रहा है, जो लंबी दूरी से परमाणु हमले की क्षमता रखती है।

ट्रंप के इस दावे ने वैज्ञानिक और राजनीतिक दोनों हलकों में बहस छेड़ दी है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान अमेरिका की आंतरिक राजनीति से जुड़ा है और इसका मकसद रक्षा नीति में बदलाव को सही ठहराना है। वहीं, कुछ विश्लेषकों का कहना है कि यह बयान वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर संकेत है।

भारत में रक्षा विशेषज्ञों ने कहा है कि यह दावा “जागने की घंटी” है, क्योंकि अगर पाकिस्तान और चीन वास्तव में गुप्त परीक्षण कर रहे हैं, तो इससे भारत की सुरक्षा रणनीति पर असर पड़ सकता है।

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