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भारत से नेपाल पर्यटन बढ़ाने की तैयारी, काशी से पशुपतिनाथ तक बौद्ध और सिख सर्किट पर जोर

इस पहल का मकसद हिंदू तीर्थयात्रियों को चार धाम यात्रा के दौरान पशुपतिनाथ मंदिर को शामिल करने के लिए प्रेरित करना है...

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📍वाराणसी | 31 Jan, 2026, 8:32 PM

Nepal Varanasi Roadshow: भारत और नेपाल के बीच पर्यटन और सांस्कृतिक रिश्तों को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल के तहत “नेपाल-वाराणसी रोड शो” का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम वाराणसी के द क्लार्क होटल में आयोजित हुआ, जिसका उद्देश्य भारत से नेपाल आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ाना था। इस रोड शो का आयोजन नेपाल-इंडिया चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एनआईसीसीआई) ने नेपाल टूरिज्म बोर्ड और बुद्धा एयर के सहयोग से किया।

कार्यक्रम के दौरान इस बात पर चर्चा हुई कि भारत और नेपाल के रिश्ते सिर्फ भौगोलिक या व्यापारिक नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों को जोड़ने वाली सबसे बड़ी कड़ी धार्मिक और आध्यात्मिक विरासत है। शिव सर्किट, बौद्ध सर्किट और सिख सर्किट ऐसे आध्यात्मिक मार्ग हैं, जो सदियों से भारत और नेपाल के लोगों को जोड़ते आए हैं। पशुपतिनाथ, मुक्तिनाथ, केदारनाथ और बनारस को जोड़ने वाला शिव सर्किट हो या फिर लुंबिनी, बोधगया, कुशीनगर और सारनाथ का बौद्ध सर्किट, ये सभी दोनों देशों के बीच प्राकृतिक धार्मिक सेतु का काम करते हैं। (Nepal Varanasi Roadshow)

हालांकि, साझा विरासत के बावजूद नेपाल अब तक भारत के विशाल आउटबाउंड टूरिज्म मार्केट का पूरा फायदा नहीं उठा पाया है। भारत आज भी नेपाल के लिए सबसे बड़ा टूरिस्ट सोर्स बना हुआ है, लेकिन लंबे समय तक रुकने और बार-बार आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ाने की अभी भी काफी गुंजाइश है।

आंकड़ों के मुताबिक, साल 2024 में नेपाल में करीब 11.5 लाख विदेशी पर्यटक पहुंचे, जो कोविड-19 के बाद पर्यटन क्षेत्र में धीरे-धीरे हो रही रिकवरी को दिखाता है। हालांकि कुल विदेशी पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी हुई, लेकिन भारत से आने वाले पर्यटकों की संख्या में हल्की गिरावट दर्ज की गई। 2024 में हवाई मार्ग से करीब 3.17 लाख भारतीय पर्यटक नेपाल पहुंचे, जो पिछले साल के मुकाबले थोड़ा कम रहा। वहीं नेपाल सरकार का लक्ष्य 2024 में 16 लाख पर्यटकों को आकर्षित करने का था, जो पूरा नहीं हो सका। (Nepal Varanasi Roadshow)

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Nepal Varanasi Roadshow

इसी पृष्ठभूमि में नेपाल-वाराणसी रोडशो जैसे प्रमोशनल इवेंट्स को बेहद अहम माना जा रहा है। इस पहल का मकसद हिंदू तीर्थयात्रियों को चार धाम यात्रा के दौरान पशुपतिनाथ मंदिर को शामिल करने के लिए प्रेरित करना है। साथ ही, बौद्ध श्रद्धालुओं को गौतम बुद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी से अपनी यात्रा शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

नेपाल–इंडिया चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एनआईसीसीआई) के वाइस प्रेसिडेंट कुनाल कयाल ने भारत और नेपाल के रिश्तों पर बात करते हुए कहा कि दोनों देशों का जुड़ाव सिर्फ भूगोल या व्यापार तक सीमित नहीं है। यह रिश्ता गहरी आस्था और साझा धार्मिक विरासत से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि काशी विश्वनाथ और काठमांडू के पशुपतिनाथ सिर्फ दो मंदिर नहीं, बल्कि एक ही आध्यात्मिक धारा के दो छोर हैं। उन्होंने कहा कि चाहे गंगा में स्नान हो या बागमती में, दोनों देशों की संस्कृति हमेशा एक-दूसरे की परछाई रही है। (Nepal Varanasi Roadshow)

कुनाल कयाल ने आगे बताया कि भारत और नेपाल की आध्यात्मिक विरासत इससे भी कहीं ज्यादा गहरी है। बौद्ध सर्किट इसका बड़ा उदाहरण है, जो गौतम बुद्ध के जन्मस्थल लुंबिनी से लेकर उनके पहले उपदेश स्थल सारनाथ तक फैला हुआ है। इसी तरह सिख सर्किट भी दोनों देशों को जोड़ता है, जो गुरु नानक देव जी की हिमालय से लेकर मैदानी इलाकों तक की यात्राओं से जुड़ा है।

रोडशो के उद्देश्य पर बात करते हुए कुनाल कयाल ने कहा कि आज की जरूरत इन प्राचीन धार्मिक मार्गों को एक आधुनिक और सुगम “रिलिजियस और स्पिरिचुअल सर्किट” में बदलने की है। उनका कहना था कि हमारा लक्ष्य यह है कि जो श्रद्धालु सुबह काशी में आरती करता है, वह आसानी से वहां तक भी पहुंच सके कि उसकी अगली प्रार्थना हिमालय की छांव में पशुपतिनाथ मंदिर में होगी। (Nepal Varanasi Roadshow)

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नेपाल टूरिज्म बोर्ड के ऑफिशिएटिंग डायरेक्टर सुनील शर्मा ने अपने प्रेजेंटेशन में कहा कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों, खासकर भारतीय पर्यटकों को नेपाल जरूर आना चाहिए, ताकि वे इसे “देखें, महसूस करें और अनुभव करें, जहां समय जैसे थम सा जाता है।” उन्होंने नेपाल को तीन शब्दों में समझाया, मिस्ट्री, हिस्ट्री और हॉस्पिटैलिटी। उनका कहना था कि जहां रहस्य होता है, वहां इतिहास होता है और जहां इतिहास होता है, वहां मेहमाननवाजी अपने आप आती है। यही नेपाल की असली पहचान है।

रोडशो के कीनोट स्पीकर बिनोद कुमार चौधरी ने कहा कि नेपाल के पास ऐसी खूबियां हैं, जो बहुत कम देशों में देखने को मिलती हैं। चाहे धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन हो, प्राकृतिक सुंदरता, पहाड़ों और झीलों के मनोरम दृश्य, वाइल्डलाइफ, मौसम या फिर वहां के लोगों की गर्मजोशी, ये सब नेपाल की सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्होंने कहा कि इन्हीं खूबियों को सही तरीके से दुनिया के सामने लाने की जरूरत है, ताकि नेपाल आर्थिक रूप से और मजबूत बन सके। (Nepal Varanasi Roadshow)

एनआईसीसीआई की एक्जीक्यूटिव कमेटी के सदस्य शशिकांत अग्रवाल ने कहा कि नेपाल–वाराणसी रोडशो एनआईसीसीआई का नेपाल से बाहर आयोजित किया गया पहला बड़ा कार्यक्रम है, जिसका मकसद भारत और नेपाल के लोगों को तीर्थ पर्यटन के जरिए जोड़ना है। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में एनआईसीसीआई ऐसे और कार्यक्रम आयोजित करेगा, ताकि दोनों देशों के बीच लोगों से लोगों का जुड़ाव और पर्यटन व आर्थिक सहयोग को और मजबूत किया जा सके। रोडशो के दौरान नेपाल और भारत के धार्मिक व आध्यात्मिक सर्किट्स पर आधारित एक कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया गया। (Nepal Varanasi Roadshow)

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