HomeGeopoliticsChicken Neck Corridor: मोहम्मद यूनुस को पाकिस्तानी जनरल शमशाद मिर्जा को किताब...

Chicken Neck Corridor: मोहम्मद यूनुस को पाकिस्तानी जनरल शमशाद मिर्जा को किताब गिफ्ट करना पड़ा भारी! भारत ने चिकन नेक पर कसी ‘नकेल’

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठान द्वारा “ग्रेटर बांग्लादेश” जैसे विचारों को बढ़ावा देना दक्षिण एशिया में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश है। भारत ने इस पर संयम बरतते हुए भी अपने इस नए इंफ्रास्ट्रक्चर (Chicken Neck Corridor) को एक्टिव कर दिया है...

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US

📍नई दिल्ली | 7 Nov, 2025, 3:14 PM

Chicken Neck Corridor: हाल ही में भारत ने बांग्लादेश सीमा से सटे कुछ संवेदनशील भारतीय इलाकों में तीन नए सैन्य ठिकाने बनाए हैं। ये नए सैन्य ठिकाने बांद्रा-धुबरी के पास बामुनी, बिहार के किशनगंज और पश्चिम बंगाल के चोप्रा जिले के पास बनाए गए हैं। इन स्थानों को चुना गया है क्योंकि इन्हें सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील माना गया है और ये सिलिगुड़ी कॉरिडोर, जिसे आम बोलचाल में “चिकन-नेक” (Chicken Neck Corridor) कहा जाता है, उसके नजदीक स्थित हैं। यह कॉरिडोर ही वह रास्ता है जिसके जरिए भारत अपने पूर्वोत्तर राज्यों असम, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और सिक्किम से जुड़ा हुआ है।

Chicken Neck Corridor: चिकन नेक के आसपास बढ़ाया ऑपरेशनल कंट्रोल

सरकारी और खुफिया सूत्रों के मुताबिक, इन तीनों इलाकों को भारत की सीमा सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता था। अब इन इलाकों में सेना की मौजूदगी बढ़ने से भारत की सीमा सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी। इस कदम को केवल सामरिक नहीं, बल्कि रणनीतिक स्तर पर भी एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। इस कदम के तहत भारतीय सेनाओं ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास लगभग 60 किलोमीटर तक अपना ऑपरेशनल कंट्रोल बढ़ा दिया है।

ISI in Bangladesh: आसिम मुनीर की अगुवाई में भारत के दो मोर्चों पर हाइब्रिड वॉरफेयर की तैयारी कर रहा पाकिस्तान! अलर्ट पर एजेंसियां

सरकारी सूत्रों ने कहा कि इन नए सैन्य ठिकाने का मुख्य मकसद सीमावर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ाना और जरूरी होने पर तुरंत जवाबी कार्रवाई करना है। सिलिगुड़ी कॉरिडोर (Chicken Neck Corridor) बेहद ही संकरा कॉरिडोर है, जो भारत को नौ उत्तर-पूर्वी राज्यों से जोड़ता है। इस कॉरिडोर की चौड़ाई कुछ स्थानों पर मात्र 22 किलोमीटर है और इसलिए इसे रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील माना जाता है। उसी को ध्यान में रख कर सुरक्षा व्यवस्थाओं को और मजबूत किया जा रहा है।

यह भी पढ़ें:  Army convoy accident in Ladakh: लद्दाख के गलवान में सेना के काफिले पर गिरा बोल्डर, एक अफसर और एक जवान शहीद, तीन अधिकारी गंभीर रूप से जख्मी

अगर इस क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ती है तो भारत का पूर्वोत्तर देश के बाकी हिस्से से कट सकता है। इसलिए, भारत ने इस क्षेत्र में सैन्य ढांचे को मजबूत करने और लगातार निगरानी बढ़ाने का फैसला लिया है।

Chicken Neck Corridor: ढाका में विवादास्पद घटना के बाद भारत का कदम

भारत का यह फैसला उस घटना के बाद आया है, जब 25 अक्टूबर को ढाका में एक बैठक के दौरान बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस पाकिस्तान के जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमिटी के चेयरमैन जनरल साहिर शमशाद मिर्जा को एक किताब भेंट की थी। जिसमें भारत के पूर्वोत्तर हिस्से को “ग्रेटर बांग्लादेश” का हिस्सा दिखाया गया था। यह घटना भारत के लिए एक साफ राजनीतिक संदेश मानी गई और नई दिल्ली ने इसे उकसावे की कार्रवाई बताया।

US Military in Bangladesh: क्या बांग्लादेश के जरिए चटगांव में किसी बड़े खेल की फिराक में हैं ट्रंप? म्यांमार के आर्मी कमांडर की भारत यात्रा के बाद क्यों एक्टिव हुआ अमेरिका?

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठान द्वारा “ग्रेटर बांग्लादेश” जैसे विचारों को बढ़ावा देना दक्षिण एशिया में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश है। भारत ने इस पर संयम बरतते हुए भी अपने इस नए इंफ्रास्ट्रक्चर (Chicken Neck Corridor) को एक्टिव कर दिया है।

हालांकि केंद्र सरकार का रुख अभी भी संवाद और क्षेत्रीय सहयोग की ओर है, लेकिन उसे यह साफ भी बताया गया है कि देश की संप्रभुता पर हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

बांग्लादेश में हुई इस घटना के बाद से भारत में कई वर्गों में निराशा और चिंता है। भारत ने 1971 में बांग्लादेश की आजादी में अहम भूमिका निभाई थी और तब से दोनों देशों के बीच एतिहासिक मित्रता रही है। लेकिन हालिया घटनाओं को इस रिश्ते में दरार डालने वाला माना जा रहा है। भारत में इस बात पर भी नाराजगी है कि पाकिस्तान की भूमिका इस पूरे विवाद में फिर से उभरकर सामने आई है।

यह भी पढ़ें:  Nepal Army chief India visit: नेपाल सेना प्रमुख का भारत दौरा; गोरखा भर्ती और रक्षा सहयोग पर रहेगा जोर

सरकारी और खुफिया सूत्रों ने बताया कि इन तीन नये सैन्य ठिकानों (Chicken Neck Corridor) में रोटेशनल टुकड़ियां, इलाके की निगरानी के आधुनिक संसाधन, कॉन्वॉय मॉनिटरिंग सिस्टम और लोकल लायजन यूनिट्स शामिल होंगी। ये स्थानीय सिविल प्रशासन और सीमा बलों के साथ मिलकर काम करेंगे ताकि सीमापार गतिविधियों पर सटीक जानकारी मिले और किसी भी असामान्य गतिविधि का समय पर जवाब दिया जा सके।

तीनों नए ठिकानों से भारतीय सेना को सीमावर्ती इलाकों में रियल-टाइम निगरानी और रैपिड रिस्पॉन्स क्षमता मिलेगी। अब अगर किसी भी सीमा पार गतिविधि का संकेत मिलता है, तो भारतीय बल तुरंत कार्रवाई कर सकेंगे। इन ठिकानों से ड्रोन नेटवर्क, इंटेलिजेंस यूनिट्स और रडार सिस्टम्स को भी जोड़ा गया है।

सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम भारत की कम्प्रिहेंसिव बॉर्डर स्ट्रैटेजी (Chicken Neck Corridor) का हिस्सा है। इसके तहत सरकार डिप्लोमेसी, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और मिलिट्री प्रिपेयर्डनेस तीनों को एक साथ जोड़ रही है, ताकि सीमाओं पर हर प्रकार के खतरे का प्रभावी जवाब दिया जा सके।

Author

  • Chicken Neck Corridor: मोहम्मद यूनुस को पाकिस्तानी जनरल शमशाद मिर्जा को किताब गिफ्ट करना पड़ा भारी! भारत ने चिकन नेक पर कसी 'नकेल'

    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

यह भी पढ़ें:  Republic Day 2025: इंडोनेशिया राष्ट्रपति के भारत दौरे में ब्रह्मोस डील पर लगेगी अंतिम मुहर, खाद्य, ऊर्जा और स्वास्थ्य सुरक्षा पर रहेगा फोकस
रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US
हरेंद्र चौधरी
हरेंद्र चौधरी
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

Most Popular