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ISI Taliban Clash: अफगानिस्तान और आईएसआई में इस्तांबुल में जबरदस्त टकराव, पाकिस्तान पर ‘शरणार्थियों’ के भेष में ISKP आतंकी भेजने का आरोप

अफगान खुफिया अधिकारियों ने इस बात के पुख्ता सबूत भी दिखाए कि कैसे पाकिस्तान की सीमा पार से कुछ आतंकवादी “ड्यूरंड लाइन” पार कर अफगानिस्तान में घुस रहे हैं। यह वही लाइन है जिसे अफगानिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा नहीं मानता...

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📍नई दिल्ली / इस्तांबुल | 8 Nov, 2025, 1:46 PM

ISI Taliban Clash: तुर्की की राजधानी इस्तांबुल में 6-7 नवंबर को पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हुई उच्चस्तरीय बातचीत फिर एक बार बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई। इस बैठक में अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर आरोप लगाए हैं कि पाकिस्तान शरणार्थियों के नाम पर इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत (आईएसकेपी) के आतंकियों की घुसपैठ करा रहा है। जबकि पाकिस्तान ने पूरी बातचीत को केवल तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) तक सीमित रखने की कोशिश की। इस बैठक में दोनों देशों के खुफिया एजेंसियों के प्रमुख शामिल हुए थे।

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सूत्रों के मुताबिक, यह बातचीत कतर और तुर्की के मध्यस्थता में आयोजित की गई थी। पाकिस्तान की ओर से इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) के डायरेक्टर जनरल लेफ्टिनेंट जनरल आसिम मलिक, जबकि अफगानिस्तान की तरफ से जनरल डायरेक्टरेट ऑफ इंटेलिजेंस (जीडीआई) के प्रमुख मौलवी अब्दुलहक वसीक शामिल हुए थे।

ISI Taliban Clash: तीसरे दौर की बातचीत में नहीं निकला कोई हल

यह इस्तांबुल में दोनों देशों के बीच तीसरा दौर था। इससे पहले दोनों देशों के बीच दो दौर की बातचीत 25 अक्टूबर को इस्तांबुल और 29 अक्टूबर को दोहा में हुई थी। लेकिन इस बार बातचीत का माहौल बिल्कुल अलग था। लेकिन बातचीत शुरू होते ही माहौल तनावपूर्ण हो गया। पाकिस्तान की तरफ से कहा गया कि केवल टीटीपी से संबंधित मुद्दे ही एजेंडा में शामिल होंगे।

अफगानिस्तान ने इसका कड़ा विरोध करते हुए कहा कि यह “बातचीत नहीं, थोपना” है। एक अफगान अधिकारी ने बताया, “जब एक पक्ष चाहता है कि सारा दोष दूसरे पर डाला जाए, तो कोई रचनात्मक बातचीत संभव नहीं है।”

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ISI Taliban Clash: अफगानिस्तान का आरोप- पाकिस्तान ‘शरणार्थियों को बना रहा है हथियार’

अफगान प्रतिनिधियों ने बैठक के दौरान पाकिस्तान पर गंभीर आरोप लगाए कि वह अफगान शरणार्थियों की वापसी के नाम पर इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत के आतंकियों को अफगान सीमा में भेज रहा है। अफगान खुफिया अधिकारियों ने दावा किया कि उन्होंने ऐसे कई रास्तों का पता लगाया है जहां से आईएसकेपी के आतंकी पाकिस्तान की ओर से घुसपैठ कर रहे हैं।

अफगानिस्तान के एक वार्ताकार ने कहा, “पाकिस्तान केवल हमारे लोगों को वापस नहीं भेज रहा, बल्कि शरणार्थियों की आड़ में आतंकियों को भेज रहा है। यह एक मानवीय संकट को सुरक्षा खतरे में बदलने की कोशिश है।”

अफगान खुफिया अधिकारियों ने इस बात के पुख्ता सबूत भी दिखाए कि कैसे पाकिस्तान की सीमा पार से कुछ आतंकवादी “ड्यूरंड लाइन” पार कर अफगानिस्तान में घुस रहे हैं। यह वही लाइन है जिसे अफगानिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा नहीं मानता।

काबुल ने यह भी कहा कि पाकिस्तान की यह कार्रवाई राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है। अफगान पक्ष ने पाक प्रधानमंत्री अनवार-उल-हक काकर के 2024 के उस बयान का हवाला दिया जिसमें उन्होंने स्वीकार किया था कि शरणार्थियों की वापसी का इस्तेमाल काबुल पर दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है ताकि वह टीटीपी पर कार्रवाई करे।

व्यापारिक मार्गों पर भी विवाद

अफगान वार्ताकारों के अनुसार, पाकिस्तान की यह रणनीति अफगानिस्तान की कमजोर अर्थव्यवस्था को तोड़ने और उसकी सुरक्षा को खतरे में डालने की कोशिश है। उन्होंने इस कदम को “आर्थिक युद्ध” कहा और कहा कि पाकिस्तान जानबूझकर व्यापारिक रास्तों को बंद कर अफगान व्यापार को कमजोर कर रहा है।

काबुल ने कहा कि पाकिस्तान बार-बार तोर्खम और स्पिन बोल्डक जैसे व्यापारिक मार्गों को बंद कर देता है, जिससे अफगान अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान होता है। अफगान प्रतिनिधियों ने कहा कि ये बार-बार बंद होने वाले मार्ग न सिर्फ व्यापार को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि उन मरीजों को भी प्रभावित करते हैं जिन्हें इलाज के लिए पाकिस्तान जाना होता है।

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अफगानिस्तान ने ड्रोन गतिविधियों पर भी आपत्ति जताई

इस्तांबुल वार्ता के दौरान अफगान पक्ष ने एक और गंभीर मुद्दा उठाया। अफगानिस्तान ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान अमेरिका को अपने हवाई क्षेत्र से अफगानिस्तान के ऊपर ड्रोन उड़ाने की अनुमति दे रहा है, जिससे अफगान संप्रभुता का उल्लंघन हो रहा है।

अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर यह भी आरोप लगाया कि वह आईएसकेपी के नेटवर्क को खत्म करने के प्रति गंभीर नहीं है। अफगान प्रतिनिधियों ने कहा कि बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में आईएसकेपी की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं, और पाकिस्तान की चुप्पी पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए खतरा बन रही है।

अफगानिस्तान ने लगाया ‘राजनीतिक साजिश’ का आरोप

अफगान अधिकारियों ने यह भी कहा कि पाकिस्तान अब भी उन राजनीतिक समूहों को संरक्षण दे रहा है जो काबुल सरकार के विरोधी हैं, इनमें मसूद परिवार और अन्य निर्वासित नेता शामिल हैं। अफगानिस्तान ने इसे “अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप” बताया और कहा कि इस तरह की गतिविधियां

अफगानिस्तान ने कहा कि पाकिस्तान इन समूहों को सम्मेलन आयोजित करने और मीडिया में बयान देने के लिए मंच उपलब्ध करा रहा है, जिससे देश में जातीय विभाजन और अस्थिरता बढ़ रही है। काबुल ने चेतावनी दी कि इस तरह की गतिविधियां अफगानिस्तान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप हैं और यह उन सिद्धांतों के खिलाफ हैं जिनकी रक्षा दोनों देश करने का दावा करते हैं।

पाकिस्तान ने सभी आरोपों से किया इनकार

आईएसआई प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल आसिम मलिक ने अफगानिस्तान के सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बातचीत का विषय केवल टीटीपी है। इस्लामाबाद ने कहा कि अफगानिस्तान को अपनी जमीन पर मौजूद टीटीपी आतंकियों की जिम्मेदारी लेनी होगी और उन्हें “नष्ट” करना होगा।

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पाकिस्तानी प्रतिनिधियों ने कहा कि “शरणार्थी, व्यापार और ड्रोन” जैसे मुद्दे इस दौर की बातचीत का हिस्सा नहीं हैं। अफगान पक्ष ने इसे “तानाशाही रवैया” बताया और कहा कि पाकिस्तान “बातचीत नहीं, आदेश दे रहा है।”

कतर पर पक्षपात का आरोप, तुर्की ने साधी चुप्पी

इस बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे कतर पर पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के पक्ष में झुकाव का आरोप लगाया। पाक मीडिया में आई लीक रिपोर्ट्स में कहा गया कि कतर अफगानिस्तान का समर्थन कर रहा है। हालांकि, कतर ने इस आरोप पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी। तुर्की ने भी इस पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया।

एक पश्चिमी राजनयिक ने कहा कि पाकिस्तान यह आरोप इसलिए लगा रहा है ताकि बातचीत के असफल होने की जिम्मेदारी पहले से कतर पर डाली जा सके।

ISI Taliban Clash एक अफगान अधिकारी ने इस्तांबुल बैठक के बाद कहा, “अगर पाकिस्तान इसी तरह दोष मढ़ता रहा, तो अब बात करने के लिए कुछ नहीं बचेगा।”

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  • News Desk

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