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India-China: पैंगोंग झील में चीन की बड़ी कारस्तानी! डिसइंगेजमेंट और वार्ता के बावजूद फिंगर-4 के आगे जारी है निर्माण कार्य

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📍नई दिल्ली | 19 Dec, 2024, 8:37 PM

India-China: पूर्वी लद्दाख के पैंगोंग झील के इलाके में चीन की तरफ निर्माण गतिविधियों के जारी रहने की नई सैटेलाइट तस्वीरें सामने आई हैं। चीन ने 21 अक्तूबर को हुए डिसइंगेजमेंट और कई दौर की वार्ताओं के बावजूद बफर ज़ोन से आगे के इलाकों में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। इन तस्वीरों से पता चलता है कि फिंगर-4 (फॉक्सहोल पॉइंट) से आगे के क्षेत्रों में, जो अब एक बफर ज़ोन के अंतर्गत आते हैं, चीन ने बड़ी निर्माण गतिविधियां शुरू कर दी हैं। इसमें सिरिजाप और रिमुचांग जैसे क्षेत्रों में पेट्रोल बोट बेस का विस्तार करते हुए देखा गया है।

India-China: Despite Disengagement, China Continues Construction Beyond Finger-4 at Pangong Lake
Source: Damien Symon

India-China: क्या कहती हैं सैटेलाइट तस्वीरें?

14 दिसंबर 2024 को ली गई सैटेलाइट तस्वीरों से यह पता चलता है कि चीन सिरिजाप और रिमुचांग पेट्रोल बोट बेस के पास नए निर्माण कार्य कर रहा है। सिरिजाप क्षेत्र में कई नई इमारतें निर्माणाधीन हैं और झील के किनारे पर नए निर्माण की संभावना दिखाई दे रही है। रिमुचांग बेस पर भी नए निर्माण कार्य की तस्वीर साफ तौर पर दिखाई दे रही है।

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इसके अलावा, खुरनाक फोर्ट के पास एक पुराने निर्माण स्थल को बड़े हेलीपैड में बदलने की पुष्टि हुई है। पैंगोंग ब्रिज, जो झील के उत्तर और दक्षिण किनारों को जोड़ता है, के पास भी चीन की गतिविधियां बढ़ती हुई दिखाई दे रही हैं।

India-China: डिसइंगेजमेंट के बाद भी चीन का खेल जारी

पिछले साल भारत और चीन के बीच हुए डिसइंगेजमेंट समझौते में दोनों देशों ने फिंगर-4 और अन्य विवादित क्षेत्रों में सैन्य बलों को पीछे हटाने और बफर ज़ोन बनाने का फैसला किया था। इसका उद्देश्य था कि सीमा पर शांति और स्थिरता बनाई जा सके। लेकिन नई तस्वीरें बताती हैं कि चीन ने समझौते का सम्मान नहीं कर रहा है, बल्कि अपनी सैन्य गतिविधियों को बफर ज़ोन के आगे बढ़ा रहा है।

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India-China: बसा रहा है बस्ती

इससे पहले इस साल 21 अक्तूबर को भारत-चीन डिसइंगेजमेंट समौते से पहले 14 अक्तूबर को भी सैटेलाइट तस्वीरों में खुलासा हुआ था कि चीन पैंगॉन्ग झील के उत्तरी तट पर एक बड़ी बस्ती का निर्माण कर रहा है। यह नई गतिविधि भारत और चीन के बीच 2020 के संघर्ष बिंदुओं से लगभग 38 किलोमीटर पूर्व में हो रही है। अमेरिकी कंपनी मैक्सार टेक्नोलॉजीज द्वारा अक्टूबर 2024 में कैप्चर की गई सैटेलाइट तस्वीरों से पता चल था कि झील के पास करीब 17 हेक्टेयर क्षेत्र में चीन ने तेजी से निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में निर्माण और मिट्टी हटाने वाली मशीनरी सक्रिय है।

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चीन ने इस क्षेत्र में हेलीकॉप्टर ऑपरेशन के लिए 150 मीटर लंबी आयताकार पट्टी का निर्माण भी किया है। यह निर्माण अप्रैल 2024 में शुरू हुआ था। माना जा रहा था कि यह बस्ती चीन के लिए एक “एड-हॉक फॉरवर्ड बेस” के रूप में काम कर सकती है। इससे चीनी सेना के लिए रेस्पॉन्स टाइम में कमी आएगी।

बुधवार को हुई थी विशेष प्रतिनिधि वार्ता

इससे पहले बुधवार 18 दिसंबर को बीजिंग में हुई भारत-चीन सीमा वार्ता में दोनों पक्षों ने “छह बिंदुओं पर सहमति” बनाई है। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने 23वें विशेष प्रतिनिधि (SR) स्तर की वार्ता में निम्नलिखित छह बिंदुओं पर सहमति व्यक्त की। यह 23वीं विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता थी, जो पांच साल के अंतराल के बाद आयोजित की गई। पिछली बार 2019 में यह बैठक भारत में हुई थी।

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पेंटागन की रिपोर्ट में खुलासा, LAC पर है चीनी सैनिकों का जमावड़ा

अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) की हाल ही में जारी वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) अब भी LAC पर अपने बड़े सैन्य जमावड़े और बुनियादी ढांचे को बनाए हुए है। रिपोर्ट में कहा गया है कि “2020 के संघर्ष के बाद से PLA ने अपनी तैनाती या सैनिकों की संख्या में कोई कमी नहीं की है और LAC के साथ कई ब्रिगेड स्तर की तैनाती के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण किया है।”

रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्वी लद्दाख के डेपसांग और डेमचोक में सैनिकों के पीछे हटने के बावजूद PLA ने लगभग 1.2 लाख सैनिक, टैंक, हॉवित्जर, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और अन्य भारी हथियार LAC पर तैनात किए हुए हैं।

LAC के तीन प्रमुख सेक्टरों—पश्चिमी (लद्दाख), मध्य (उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश), और पूर्वी (सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश)—में PLA के 20 से अधिक कॉम्बाइंड आर्म्स ब्रिगेड्स (CABs) मौजूद हैं। सूत्रों के अनुसार, “कुछ CABs वापस जा चुके हैं, लेकिन अधिकांश अभी भी वहीं तैनात हैं।”

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  • हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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