📍नई दिल्ली | 19 Dec, 2025, 12:54 PM
IIC Membership Controversy: दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (IIC) को देश की सबसे प्रतिष्ठित बौद्धिक और सांस्कृतिक संस्थाओं में गिना जाता है। यहां मेंबरशिप को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। मामला एक एसोसिएट मेंबर के प्रोफेशन की गलत जानकारी से जुड़ा है। इस खुलासे से इंडिया इंटरनेशनल सेंटर की चयन प्रक्रिया और पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं।
इंडिया इंटरनेशनल सेंटर की वेबसाइट पर अगस्त 2024 में जो मेंबरशिप डॉक्यूमेंट अपलोड हुआ, उसमें मिस पोर्टिया बर्नाडाइन कॉनराड (मेंबर आईडी: ए-7841) का नाम एसोसिएट मेंबर के रूप में दर्ज है। उनके प्रोफेशन में लिखा है-“गवर्नमेंट इम्प्लॉयी।” यह लिस्ट 1 जून 2023 से 31 मई 2024 तक चुने गए लोगों की है।
हालांकि, जब इसकी पड़ताल की गई तो पता चला कि पोर्टिया कॉनराड इस वक्त इंटरनेशनल बौद्धिस्ट कॉन्फेडरेशन (IBC) में इंटरनेशनल रिलेशंस डिवीजन की हेड हैं। इंटरनेशनल बौद्धिस्ट कॉन्फेडरेशन, एक अंतरराष्ट्रीय बौद्ध संगठन है, जिसका मुख्यालय दिल्ली में है। हालांकि इस संगठन को भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय से कुछ स्तर पर सहयोग मिलता है, लेकिन यह किसी सरकारी विभाग का हिस्सा नहीं है और इसके कर्मचारी सीधे तौर पर सरकारी कर्मचारी नहीं माने जाते।
पोर्टिया कॉनराड का नाम 2025 में कई अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलनों, सेमिनारों और लेखों में इंटरनेशनल बौद्धिस्ट कॉन्फेडरेशन की वरिष्ठ अधिकारी के तौर पर आया है। जुलाई 2025 में काठमांडू पोस्ट में छपे एक लेख में भी उनका यही परिचय छपा था। रूस और दक्षिण एशिया के तमाम कार्यक्रमों में भी उन्होंने आईबीसी का प्रतिनिधित्व किया। सितंबर 2025 में रूस के कल्मीकिया में ‘थर्ड इंटरनेशनल बौद्धिस्ट फोरम’ हुआ था, वहां उन्होंने “बुद्ध धर्म और एआई टेक्नोलॉजी” पर प्रेजेंटेशन दिया था, वहां भी खुद को आईबीसी की सीनियर अफसर ही बताया।
आईआईसी की सदस्यता प्रक्रिया वैसे तो काफी सेलेक्टिव मानी जाती है। एसोसिएट मेंबरशिप के लिए लोग खुद अपने प्रोफेशन, योग्यता और अनुभव की जानकारी फॉर्म में भरते हैं। ये डिटेल्स सेल्फ-डिक्लेयर्ड होती हैं, और चयन समिति इन्हीं जानकारी के आधार पर फैसला लेती है। आमतौर पर इनके पेशे या बैकग्राउंड की गहराई से जांच नहीं होती।
अगर कॉनराड के करियर की बात करें, तो 2016-2018 में वो विदेश मंत्रालय में कंसल्टेंट रहीं, वहां उन्होंने साउथ एशिया सिक्योरिटी और पाकिस्तान-अफगानिस्तान मामलों पर काम किया। 2014-2016 में नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (प्रधानमंत्री कार्यालय) में स्ट्रैटेजिक एनालिस्ट थीं। लेकिन 2018 के बाद से उनका सरकारी कनेक्शन खत्म हो गया। 2018-2019 में वो खुद आईआईसी में प्रोग्राम ऑफिसर भी रही हैं, तब पूर्व राजदूत श्याम सरन के साथ काम किया। श्याम सरन फिलहाल आईआईसी के अध्यक्ष हैं।
कॉनराड पहले इंस्टीट्यूट ऑफ पीस एंड कॉन्फ्लिक्ट स्टडीज (IPCS) में रिसर्च इंटर्न भी रह चुकी हैं। इसके बाद से उनका मुख्य जुड़ाव आईबीसी और रिसर्च संस्थानों से ही रहा है। उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया से इंटरनेशनल स्टडीज में पीएचडी की है। हमारे पास मौजूद दस्तावेजों में उनका विजिटिंग कार्ड भी है, जिसमें उन्होंने खुद को इंटरनेशनल बौद्धिस्ट कॉन्फेडरेशन में हेड ऑफ इंटरनेशनल रिलेशंस डिवीजन लिखा है।
इस मामले पर आईआईसी और पोर्टिया कॉनराड की प्रतिक्रिया लेने के लिए मेल भेजा है। पोर्टिया कॉनराड की तरफ से जवाब मिल चुका है।
पोर्टिया कॉनराड की ओर से भेजे गए जवाब में उन्होंने कहा, “उनकी प्रोफेशनल डिटेल खुद उनके द्वारा एक लिखित पत्र के जरिए दी गई थी। उनका कहना है कि वे इंटरनेशनल बौद्धिस्ट कॉन्फेडरेशन से जुड़ी रही हैं, जो भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के तहत काम करता है। वहां वे रिसर्च कोऑर्डिनेटर के रूप में काम कर चुकी हैं और वर्तमान में भी इंटरनेशनल रिलेशंस डिवीजन की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।”
पोर्टिया कॉनराड ने यह भी बताया कि वे वर्ष 2014 से अलग-अलग भूमिकाओं में सरकार से जुड़ी रही हैं, जिसे उन्होंने अपने “गवर्नमेंट सर्विस” से जुड़े अनुभव के तौर पर पेश किया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इंडिया इंटरनेशनल सेंटर की सदस्यता उन्हें सीधे उस समय के अध्यक्ष (प्रेजिडेंट) द्वारा दी गई थी। इसके पीछे वजह उन्होंने यह बताई कि वे पहले आईआईसी की कर्मचारी रह चुकी हैं और उनकी एजुकेशनल औफ क्वॉलिफिकेशंस इस सदस्यता के लिए पर्याप्त मानी गईं हैं।
अपने जवाब में उन्होंने यह भी जोड़ा कि उन्होंने अब अपनी डॉक्टरेट की पढ़ाई पूरी कर ली है, और यदि आवश्यक हो तो इस एजुकेशनल क्वॉलिफिकेशंस को भी उनके प्रोफाइल में शामिल किया जा सकता है।
आईआईसी में करीब 7,000 मेंबर हैं, जिनमें इंस्टीट्यूशनल मेंबर भी शामिल हैं। सदस्यता सभी राष्ट्रीयताओं के लिए खुली है, अगर व्यक्ति की रुचि शिक्षा, संस्कृति, विज्ञान या शासन में हो। लेकिन स्थायी सदस्यता बेहद सीमित है, यह सिर्फ उन्हीं को मिलती है, जिन्होंने शॉर्ट टर्म एसोसिएट मेंबरशिप (STAM) पूरी की हो। एसोसिएट मेंबरशिप ही आईआईसी में एंट्री का रास्ता है। हालांकि आईआईसी गैर-सरकारी संस्था है और अपने अबाउट पेज में आईआईसी ने स्पष्ट तौर पर यह लिखा भी है।
वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, आईआईसी की मेंबरशिप प्रक्रिया सख्त है। आवेदक को फॉर्म में प्रोफेशन, योग्यता वगैरह खुद भरनी होती है। इन एप्लिकेशन्स की जांच STAM चयन समिति करती है, जिसमें डायरेक्टर, एक्जीक्यूटिव कमेटी के मेंबर और सचिव होते हैं। समिति साल में दो-तीन बार बैठती है और अध्यक्ष को अपनी सिफारिश भेजती है।
इंडिया इंटरनेशनल सेंटर की सदस्यता को प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जाता है। यहां देश-विदेश के बड़े नौकरशाह, राजनयिक, जज, लेखक, कलाकार और विद्वान सदस्य हैं। यह सिर्फ एक सेंटर नहीं, बल्कि बौद्धिक विमर्श और नीति संवाद का बड़ा मंच है। ऐसे में अगर कोई गलत जानकारी देकर मेंबर बन जाता है, तो पूरी चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठना लाजिमी है।
(यह रिपोर्ट सार्वजनिक दस्तावेजों, वेबसाइट्स और प्रकाशित सामग्री पर आधारित है।)


