HomeGeopoliticsChina Tibet airbases: चीन तिब्बत में बना रहा 16 नए एयरबेस, क्या...

China Tibet airbases: चीन तिब्बत में बना रहा 16 नए एयरबेस, क्या हाई-एल्टीट्यूड वॉरफेयर की तैयारी कर रहा है ड्रैगन

1970 के दशक में चीन ने पहली बार बांगड़ा नामक इलाके में एक एयरस्ट्रिप बनाई थी। उस समय 16,000 लोगों ने काम किया और 89 लोगों की मौत हुई। 2020 में भारत के साथ सीमा पर तनाव बढ़ने के बाद चीन ने इसी क्षेत्र में निर्माण को और तेज कर दिया है...

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US

📍नई दिल्ली | 6 Dec, 2025, 5:32 PM

China Tibet airbases: तिब्बत के ऊंचाई वाले इलाकों में चीन तेजी से अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है। एक नई रिपोर्ट में सामने आया है कि चीन ने बीते सालों में 16 से अधिक हाई-एल्टीट्यूड एयरफील्ड और हेलीपोर्ट तैयार किए हैं, जिनमें कई भारत की सीमा के बेहद करीब हैं। इन एयरबेस की ऊंचाई 14,000 फीट से ज्यादा है, जहां आम लोगों को सांस लेना भी मुश्किल होता है।

वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अंतरिक्ष से ली गई 100 से अधिक सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण किया है। इनमें तिब्बत के कई इलाकों में चीन की सैन्य गतिविधियों में बड़ी बढ़ोतरी के संकेत मिले हैं। तस्वीरों में फाइटर जेट, हेलीकॉप्टर और कई तरह के ड्रोन खुले तौर पर खड़े दिखाई दे रहे हैं।

India China Arunachal Issue: शंघाई एयरपोर्ट विवाद पर बोला चीन- अरुणाचल को बताया चीन का हिस्सा, भारत ने दिया करारा जवाब

तिब्बत के तिंगरी इलाके में 300 मील पूर्व में 14,100 फीट की ऊंचाई पर चीन एक एयरपोर्ट बना रहा है। इंजीनियर लगातार यह सुनिश्चित करने में लगे हैं कि रनवे बर्फ और ठंड में टूट न जाए। रिपोर्ट में कहा गया है कि काम करने वाले कई कर्मचारियों को तेज ठंड, सिरदर्द और सांस लेने में परेशानी हुई। कई चीनी कर्मचारियों को यहां एल्टिट्यूड सिकनेस तक हो गई और उन्हें आईवी ड्रिप्स तक दी गईं। कुछ को ऑक्सीजन सिलेंडर के सहारे काम करना पड़ा। (China Tibet airbases)

पास के अन्य दो इलाकों में भी निर्माण कार्य चल रहा है। यहां तीसरी साइट पर मजदूरों ने 2.8 बिलियन क्यूबिक फीट मिट्टी हटाई, जो 32,000 ओलंपिक स्विमिंग पूल भरने जितनी है ताकि रनवे को समतल बनाया जा सके। मजदूरों ने बेहद मुश्किल मौसम और पतली हवा के बीच रनवे को समतल करने के लिए बड़ी मात्रा में मिट्टी हटाई।

यह भी पढ़ें:  Chinese HQ-9B: ऑपरेशन सिंदूर में क्यों नाकाम रहा चीन का एयर डिफेंस सिस्टम, अमेरिकी एक्सपर्ट ने खोली पोल

1970 के दशक में चीन ने पहली बार बांगड़ा नामक इलाके में एक एयरस्ट्रिप बनाई थी। उस समय 16,000 लोगों ने काम किया और 89 लोगों की मौत हुई। 2020 में भारत के साथ सीमा पर तनाव बढ़ने के बाद चीन ने इसी क्षेत्र में निर्माण को और तेज कर दिया है। (China Tibet airbases)

चीन दावा करता है कि ये एयरपोर्ट दूरदराज आबादी को जोड़ने के लिए बनाए जा रहे हैं। लेकिन रिपोर्ट बताती है कि इन सभी एयरफील्ड पर लंबे रनवे और सैन्य विमानों के लिए बने मजबूत शेल्टर साफ पता लगता है कि इनका इस्तेमाल सैन्य गतिविधियों के लिए भी किया जाएगा।

सैटेलाइट तस्वीरों के अनुसार, कम से कम आठ एयरबेस भारत की सीमा से कुछ ही दूरी पर मौजूद हैं। 2017 के डोकलाम विवाद और 2020 की गलवान झड़प के बाद से इस क्षेत्र में चीन ने मिलिटरी इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण तेज किया है। ऊंचाई पर बने इन एयरबेस से चीन सैनिकों और हथियारों को तेजी से सीमा तक ले जा सकता है। (China Tibet airbases)

चीन के लिए भी यह काम आसान नहीं है। पतली हवा के चलते पायलटों को विशेष ट्रेनिंग की जरूरत होती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इतनी ऊंचाई पर उड़ान भरना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। हवा तेज होती है, इंजन पर दबाव बढ़ता है और विमान पूरी क्षमता के साथ उड़ान नहीं भर सकता। (China Tibet airbases)

चीन अपने सैन्य पायलटों को लंबे समय तक हाई-एल्टीट्यूड ट्रेनिंग देता है। इन्हें प्लेटो ईगल्स कहा जाता है। चीनी स्टेट टीवी पर दिखाए गए ट्रेनिंग वीडियो में चीनी पायलटों को बर्फ से ढकी पहाड़ियों के बीच हेलीकॉप्टर उड़ाते हुए देखा जा सकता है।

यह भी पढ़ें:  Indian Army: भारतीय सेना ने सिविलयन हेलीकॉप्टर्स का इस्तेमाल किया शुरू; रसद, सैनिकों की आवाजाही और इमरजेंसी सेवाओं के लिए कर रहे यूज

तिब्बती पठार पर कई नए हेलीपोर्ट भी तैयार किए गए हैं, जिनकी ऊंचाई 14,500 फीट से अधिक है। यह ऊंचाई अमेरिका की रॉकी पर्वत श्रृंखला की किसी भी चोटी से ज्यादा है।

रिपोर्ट में यह भी पता चला है कि कई एयरफील्ड पर चीन ने आधुनिक ड्रोन तैनात किए हैं। इनमें शार्प स्वोर्ड, सोरिंग ड्रैगन और अन्य निगरानी व हमला करने वाले ड्रोन शामिल हैं। अक्टूबर में ली गई तस्वीरों में शिगात्से एयरफील्ड पर 24 सैन्य विमान दिखाई दिए, जिनमें 18 ड्रोन थे। (China Tibet airbases)

विशेषज्ञों के मुताबिक, पहाड़ियों वाले इस क्षेत्र में निगरानी करना बेहद मुश्किल होता है। ऐसे में ड्रोन और ज्यादा ऊंचाई पर उड़ने वाले विमान चीन को जमीन पर हो रही गतिविधियों पर नजर रखने में मदद देते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि तिब्बत के न्यिंगची एयरपोर्ट जैसे कई ठिकाने भारत की सीमा से महज 10 मील की दूरी पर हैं। इन एयरफील्ड पर चीन लगातार नए निर्माण कर रहा है। सैटेलाइट तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि कई साइटों पर 70 से अधिक नए एयरक्राफ्ट शेल्टर्स बनाए जा रहे हैं, जो भविष्य में बड़े सैन्य विमानों को भी रख सकते हैं। (China Tibet airbases)

पूर्वी लद्दाख की पैंगोंग त्सो झील भारत–चीन सीमा पर सबसे संवेदनशील इलाके में आती है। 2020 की झड़पों के बाद से यह इलाका लगातार चर्चा में बना हुआ है। पैंगोंग त्सो के फिंगर एरिया में चीन ने पक्की सड़कें, चौड़ी ट्रैक-लेन और सैनिकों के लिए स्थाई शेल्टर बनाए हैं। इसी इलाके में चीन ने पैंगोंग त्सो पर एक पुल भी बनाया है। यह पुल झील के उत्तर और दक्षिण हिस्से को जोड़ता है। इस पुल की वजह से चीन अपनी सेना, वाहनों और हथियारों को पहले से कहीं ज्यादा तेजी से एक तरफ से दूसरी तरफ ले जा सकता है। भारत ने इस पुल का विरोध किया था, क्योंकि यह क्षेत्र भारत के दावे वाले इलाके में आता है। लेकिन चीन ने इसे लगभग पूरी तरह तैयार कर लिया है और इसका इस्तेमाल भी शुरू हो चुका है। (China Tibet airbases)

यह भी पढ़ें:  Explainer: क्या खत्म हो गया SAARC? पाकिस्तान, बांग्लादेश और चीन बना रहे हैं नया संगठन, जानें भारत पर क्या होगा असर?

Author

  • News Desk

    रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US
News Desk
News Desk
रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

Most Popular