📍नई दिल्ली | 22 Jan, 2026, 10:27 PM
Military Quantum Mission Policy Framework: भारत की सेनाओं को फ्यूचर फोर्स बनाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने 22 जनवरी को मिलिटरी क्वांटम मिशन पॉलिसी फ्रेमवर्क जारी किया। यह डॉक्यूमेंट भारतीय सेनाओं थलसेना, नौसेना और वायुसेना में क्वांटम टेक्नोलॉजी को लागू करने का रोडमैप तय करेगा। यह फ्रेमवर्क ऐसे समय जारी हुआ है, जब दुनिया भर में सैन्य तकनीक तेजी से बदल रही है और युद्ध केवल हथियारों तक सीमित नहीं रह गया है। कम्यूनिकेशन, डेटा, सेंसर और कंप्यूटिंग अब युद्ध के अहम हिस्से बन चुके हैं।
क्या है Military Quantum Mission Policy Framework
मिलिटरी क्वांटम मिशन पॉलिसी फ्रेमवर्क एक कॉम्प्रीहेंसिव पॉलिसी डॉक्यूमेंट है। इसमें यह बताया गया है कि भारतीय सेनाओं में क्वांटम टेक्नोलॉजी को किस तरह से अपनाया जाएगा, किन क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल होगा और इसके लिए किस तरह का इंस्टीट्यूशनल फ्रेमवर्क बनाया जाएगा। यह डॉक्यूमेंट केवल तकनीकी जानकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें नीति, रोडमैप और कार्यान्वयन की रूपरेखा भी शामिल है। इसका उद्देश्य क्वांटम टेक्नोलॉजी को एक संगठित और संयुक्त तरीके से सेना में शामिल करना है। (Military Quantum Mission Policy Framework)
क्वांटम टेक्नोलॉजी क्या होती है
क्वांटम टेक्नोलॉजी विज्ञान की उस शाखा पर आधारित है, जो बहुत छोटे कणों जैसे इलेक्ट्रॉन और फोटॉन के व्यवहार को समझती है। इसी सिद्धांत का इस्तेमाल करके ऐसी तकनीक विकसित की जाती है, जो पारंपरिक तकनीक से कहीं अधिक तेज, सुरक्षित और सटीक होती है।
डिफेंस सेक्टर में क्वांटम टेक्नोलॉजी का मतलब है बेहद सुरक्षित कम्यूनिकेशन, तुरंत फैसले लेने वाली कंप्यूटिंग क्षमता और अत्यधिक सटीक सेंसर। (Military Quantum Mission Policy Framework)
फ्रेमवर्क के चार मुख्य स्तंभ कौन-से हैं
इस नीति दस्तावेज में क्वांटम टेक्नोलॉजी के चार मुख्य स्तंभ तय किए गए हैं। पहला स्तंभ है क्वांटम कम्युनिकेशन। इसका उद्देश्य ऐसी संचार व्यवस्था तैयार करना है, जिसे बिना पता चले कोई सुन या हैक न कर सके। यदि कोई संदेश से छेड़छाड़ करता है, तो उसकी जानकारी तुरंत मिल जाती है।
दूसरा स्तंभ है क्वांटम कंप्यूटिंग। यह पारंपरिक कंप्यूटरों की तुलना में बहुत तेजी से जटिल गणनाएं कर सकती है। सैन्य अभियानों में इससे बड़े डेटा का विश्लेषण और तेज फैसले संभव हो पाते हैं।
तीसरा स्तंभ है क्वांटम सेंसिंग एंड मेट्रोलॉजी। इसमें ऐसे सेंसर शामिल हैं, जो बहुत सूक्ष्म बदलावों को भी पहचान सकते हैं। इससे निगरानी, नेविगेशन और लक्ष्य पहचान में मदद मिलती है।
चौथा स्तंभ है क्वांटम मटेरियल्स एंड डिवाइसेस। इसमें उन खास सामग्री और उपकरणों का विकास शामिल है, जिनसे क्वांटम तकनीक को जमीन पर लागू किया जा सके। (Military Quantum Mission Policy Framework)
क्यों जरूरी माना जा रहा है यह फ्रेमवर्क
दुनिया भर में युद्ध की प्रकृति बदल रही है। अब लड़ाई केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि साइबर स्पेस, स्पेस और सूचना क्षेत्र में भी होती है। ऐसे में सुरक्षित संचार और तेज निर्णय लेने की क्षमता बेहद जरूरी हो गई है।
मिलिटरी क्वांटम मिशन पॉलिसी फ्रेमवर्क इसी जरूरत को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इस डॉक्यूमेंट के मुताबिक भविष्य के युद्धक्षेत्र में तकनीकी बढ़त का महत्व बढ़ता जाएगा। (Military Quantum Mission Policy Framework)
नेशनल क्वांटम मिशन से क्या है संबंध
यह सैन्य फ्रेमवर्क नेशनल क्वांटम मिशन (एनक्यूएम) के अनुरूप तैयार किया गया है। नेशनल क्वांटम मिशन की शुरुआत वर्ष 2023 में हुई थी और इसमें रक्षा बलों को एक अहम भागीदार माना गया है।
सरकार ने इस मिशन के लिए 6003 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जो 2030–31 तक लागू रहेगा। मिलिटरी क्वांटम मिशन उसी राष्ट्रीय ढांचे के भीतर सेना की जरूरतों को संबोधित करता है। (Military Quantum Mission Policy Framework)
क्यों जरूरी है क्वांटम टेक्नोलॉजी का सैन्य उपयोग
आधुनिक युद्ध अब केवल हथियारों और सैनिकों तक सीमित नहीं रह गया है। संचार, साइबर सुरक्षा, डेटा प्रोसेसिंग और सटीक निगरानी आज युद्ध का अहम हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में क्वांटम टेक्नोलॉजी को रक्षा क्षेत्र में अपनाने की जरूरत लगातार बढ़ रही है।
मिलिटरी क्वांटम मिशन फ्रेमवर्क इस बात पर जोर देता है कि भविष्य के युद्धक्षेत्र में तकनीकी श्रेष्ठता निर्णायक भूमिका निभाएगी। सुरक्षित संचार, तेज निर्णय क्षमता और सटीक सेंसिंग के बिना आधुनिक सैन्य अभियान सफल नहीं हो सकते। (Military Quantum Mission Policy Framework)
सिविल-मिलिट्री फ्यूजन पर क्यों दिया गया जोर
फ्रेमवर्क में सिविल-मिलिट्री फ्यूजन को अहम माना गया है। इसका अर्थ है कि क्वांटम टेक्नोलॉजी के विकास और उपयोग में केवल सेना ही नहीं, बल्कि सरकारी विभाग, रिसर्च संस्थान, शिक्षण संस्थान और उद्योग भी शामिल होंगे।
दस्तावेज में यह भी बताया गया है कि इसके लिए अलग-अलग सरकारी क्षेत्रों के प्रतिनिधियों को मिलाकर समर्पित गवर्निंग बॉडीज बनाई जाएंगी। इन संस्थाओं का काम क्वांटम टेक्नोलॉजी से जुड़े लक्ष्यों और माइलस्टोन को तय करना होगा। (Military Quantum Mission Policy Framework)
तीनों सेनाओं में जॉइंटनेस पर फोकस
मिलिटरी क्वांटम मिशन पॉलिसी फ्रेमवर्क में जॉइंटनेस और इंटीग्रेशन को अहम माना गया है। इसका अर्थ है कि थलसेना, नौसेना और वायुसेना तीनों में क्वांटम टेक्नोलॉजी का उपयोग अलग-अलग नहीं, बल्कि एक साझा रणनीति के तहत किया जाएगा।
इससे संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल होगा और तकनीक को तेजी से अपनाया जा सकेगा। फ्रेमवर्क के अनुसार, क्वांटम टेक्नोलॉजी को अलग-थलग तरीके से लागू करने के बजाय साझा दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है। (Military Quantum Mission Policy Framework)
वरिष्ठ सैन्य अधिकारी रहे मौजूद
मिलिटरी क्वांटम मिशन पॉलिसी फ्रेमवर्क के विमोचन के मौके पर सशस्त्र बलों के शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे। इस अवसर पर नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी, थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित उपस्थित थे।
इन सभी अधिकारियों की मौजूदगी यह दिखाती है कि क्वांटम टेक्नोलॉजी को तीनों सेनाओं में एक साथ अपनाने की दिशा में गंभीरता से काम किया जा रहा है। (Military Quantum Mission Policy Framework)
यह दस्तावेज आगे क्या भूमिका निभाएगा
मिलिटरी क्वांटम मिशन पॉलिसी फ्रेमवर्क को एक आधार दस्तावेज के रूप में तैयार किया गया है। इसके आधार पर आने वाले समय में रक्षा क्षेत्र में क्वांटम टेक्नोलॉजी को शामिल करने से जुड़े फैसले लिए जाएंगे। यह डॉक्यूमेंट यह भी बताता है कि आने वाले समय में रक्षा क्षेत्र में क्वांटम तकनीक को किस तरह से चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा और इसके लिए किन संस्थानों के बीच तालमेल जरूरी होगा। (Military Quantum Mission Policy Framework)


