HomeIndian ArmyOperation Sindoor Kamikaze Drones: Operation Shifter's Picture of Replaceable Rust, Learn...

Operation Sindoor Kamikaze Drones: Operation Cindoor's photo of replaceable corrosion, learn how to become workable drones of enemy

This purchase of 850 Worktable Drone is just the beginning. The Army is working on a plan to include around 30 thousand Loitingmissions in the coming years...

WhatsApp Channel Follow US

📍New Delhi | 20 Dec, 2025, 12:11 PM

Operation Sindoor Kamikaze Drones: The operation has also found a big lesson as well as the success of Indian forces in Sindoor. The lesson is that the future wars will now be fought not just by guns and missiles, but by drones and technology. The Indian Army is also taking this lesson seriously. The Army is now going to buy 850 worktable drones which will cost about Rs 2000 crore. These are also called the loitering Muniition or Suicide Drone. This proposal will be placed for approval in the meeting of the Defence Exhibition Council, which took place in the last week of December 2025.

The purchase will be under the fast-track process and all drones will go for indigenous companies, according to the Army sources. These drones will be deployed in thalsena, aero, navy and special forces.

Operation Sindoor Kamikaze Drones: How to blow the drone in operation syntre Pakistan’s sense

In May 2025, Pakistan sent more than 500 drones to India in operation centre. Some of which were attacked drones. The Indian forces responded to Bakhubi and killed them. The Indian Army also has a massive lowering mission in this operation for the first time. Worktable Drone used. In this operation, India started following the initiative’s terror attack, made accurate and tremendous attacks on terror bases in Pakistan and Pok.

सेना के सूत्र बताते हैं कि ड्रोन हमलों की वजह से पहले ही दिन 9 में से 7 आतंकी ठिकाने पूरी तरह तबाह हो गए। इन हमलों में खास बात यह रही कि बिना किसी पायलट को खतरे में डाले, दुश्मन के कमांड सेंटर, लॉन्च पैड और लॉजिस्टिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। इस पूरे ऑपरेशन में ड्रोन ने वह काम किया, जो पहले फाइटर जेट या आर्टिलरी से किया जाता था। जिसमें खतरा कम था और लेकिन सटीकता और मारक क्षमता ज्यादा थी।

Pinaka MBRL: ड्रोन या FPV अटैक से बचाने के लिए सेना ने पिनाका रॉकेट लॉन्चर पर लगाया यह खास जुगाड़, ऑपरेशन सिंदूर के बाद उठाया यह कदम

Read also:  Indian Army New Combat Coat: Indian Army Will Meet New Digital Print Combat Coat, Army Found Design Rights

वहीं, जब पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई की कोशिश की और बड़ी संख्या में ड्रोन भेजे, तो भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम ने उनमें से अधिकतर को हवा में ही मार गिराया। इसके बाद भारतीय ड्रोनों ने पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर भी हमला किया।

Operation Sindoor Kamikaze Drones: क्या होते हैं कामिकेज ड्रोन?

कामिकेज ड्रोन ऐसे हथियार होते हैं जो उड़ते हुए ही टारगेट के ऊपर मंडराते रहते हैं। जैसे ही सही टारगेट दिखता है, यह ड्रोन खुद को उसी पर गिराकर विस्फोट कर देता है। इसमें पायलट की जान को कोई खतरा नहीं होता और हमला बेहद सटीक होता है।

सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, “आज के युद्ध में दुश्मन को हराने से ज्यादा जरूरी है उसकी सोच, कमांड और संसाधनों को पंगु बनाना। कामिकेज ड्रोन इसमें बेहद असरदार हैं।”

यूक्रेन-रूस युद्ध और नागोर्नो-कराबाख संघर्ष में इन ड्रोंस की भूमिका पहले ही दुनिया देख चुकी है। अब भारत भी इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

Operation Sindoor Kamikaze Drones: ऑपरेशन सिंदूर में कौन-कौन से कामिकेज ड्रोन हुए इस्तेमाल

ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना ने अलग-अलग रेंज और भूमिकाओं वाले ड्रोन इस्तेमाल किए। इनमें सबसे अहम नाम स्काईस्ट्राइकर, नागास्त्र-1 और हारोप रहे। स्काईस्ट्राइकर ड्रोन भारत और इजरायल के संयुक्त सहयोग से बनाया गया है और इसका निर्माण बेंगलुरु में होता है। यह ड्रोन बिना शोर किए बेहद शांत तरीके से उड़ता है, लक्ष्य के ऊपर मंडराता है और सही समय पर सटीक हमला करता है। ऑपरेशन सिंदूर में इसका इस्तेमाल आतंकी ठिकानों और मूविंग टारगेट्स के खिलाफ किया गया।

नागास्त्र-1 भारत का पूरी तरह स्वदेशी कामिकेज ड्रोन है, जिसे नागपुर की सोलर इंडस्ट्रीज समूह ने बनाया है। यह ड्रोन पैदल सैनिक भी अपने साथ ले जा सकता है। इसकी खासियत यह है कि अगर मिशन बीच में रोकना हो, तो यह पैराशूट से सुरक्षित लैंडिंग भी कर सकता है। ऑपरेशन सिंदूर में इसका इस्तेमाल सीमावर्ती इलाकों में आतंकी लॉन्च पैड्स और छोटे ठिकानों के खिलाफ किया गया।

Read also:  Inspirational: Marathon of the 4th half of the corporate job left armed in the army, now the races all over India, completed in 32 states

इसके अलावा लंबी दूरी और बड़े टारगेट्स के लिए इजरायली मूल के हारोप ड्रोन का भी इस्तेमाल हुआ। यह ड्रोन दुश्मन के रडार और एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाने में माहिर है। पाकिस्तानी सेना के ठिकानों पर हुए कई सटीक हमलों में इसकी अहम भूमिका रही।

भारतीय सेना के पास मौजूद प्रमुख कामिकेज और लोइटरिंग ड्रोन

फिलहाल भारतीय सेना के पास स्वदेशी और विदेशी, दोनों तरह के कामिकेज ड्रोन हैं। नागास्त्र-1 को सेना पहले ही शामिल कर चुकी है और इसके एडवांस वर्जन पर भी काम चल रहा है। स्काईस्ट्राइकर ड्रोन को भी सीमित संख्या में पहले ही शामिल किया जा चुका है।

इसके अलावा हारोप और हार्पी जैसे ड्रोन वायुसेना और थलसेना के पास पहले से मौजूद हैं, जिनका इस्तेमाल खास तौर पर दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को निष्क्रिय करने के लिए किया जाता है। वहीं, सेना अब छोटे, मध्यम और लंबी दूरी के ड्रोन का ऐसा मिश्रण चाहती है, जिससे हर स्तर पर कमांडर को तुरंत हमला करने की क्षमता मिल सके।

हर बटालियन में बनेगी ‘अश्नि’ प्लाटून

सेना के सूत्रों के अनुसार, इस खरीद के बाद हर इन्फैंट्री बटालियन में एक अलग ‘अश्नि प्लाटून’ बनाई जाएगी। यह प्लाटून ड्रोन ऑपरेशन के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित होगी और सीधे दुश्मन के ठिकानों पर हमला कर सकेगी। ये प्लाटून आतंकवाद विरोधी अभियानों, सीमा पर निगरानी और दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमले में अहम भूमिका निभाएंगी।

सेना के सूत्रों का कहना है कि आने वाले समय में पैदल सेना सिर्फ राइफल और मशीनगन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ड्रोन ऑपरेटर भी उसकी पहचान बनेंगे।

इससे पहले जहां किसी लक्ष्य पर हमला करने के लिए ऊपर से अनुमति और भारी हथियारों की जरूरत होती थी, वहीं अब बटालियन स्तर पर ही फैसला लेकर तेजी से कार्रवाई की जा सकेगी।

30 हजार ड्रोन का लक्ष्य

850 कामिकेज ड्रोन की यह खरीद सिर्फ शुरुआत है। सेना आने वाले वर्षों में करीब 30 हजार लोइटरिंग म्यूनिशन शामिल करने की योजना पर काम कर रही है। इसका मकसद यह है कि हर इन्फैंट्री यूनिट के पास अपनी निगरानी और हमला करने की क्षमता हो। इससे युद्ध का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा, जहां दुश्मन पर हमला करने से पहले उसकी हर गतिविधि को पहले ही देखा और समझा जा सकेगा। यह रणनीति खास तौर पर पाकिस्तान और चीन से आने वाले ड्रोन खतरों को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है।

Read also:  Former DGMO Rajiv Ghee Bole - GOLD STANDARD for the World Becomes Operation Shifter

स्वदेशी कंपनियों को मिलेगा बड़ा मौका

इस पूरी डील की एक अहम बात यह है कि सभी ड्रोन भारतीय कंपनियों से खरीदे जाएंगे। इससे न सिर्फ रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, बल्कि देश की निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स को भी बड़ा मौका मिलेगा। इस 2000 करोड़ रुपये की डील से देश की निजी रक्षा कंपनियों, स्टार्टअप्स और सप्लाई चेन को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

रक्षा सूत्रों का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर ने साबित कर दिया है कि ड्रोन अब भविष्य का हथियार नहीं, बल्कि वर्तमान का निर्णायक हथियार बन चुके हैं।

पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान और चीन दोनों ने ड्रोन क्षमताओं पर तेजी से काम किया है। पाकिस्तान ने कई बार सीमावर्ती इलाकों में ड्रोन के जरिए हथियार और ड्रग्स की सप्लाई की है। वहीं चीन स्वॉर्म ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम पर निवेश कर रहा है।

भारतीय सेना का मानना है कि कामिकेज ड्रोन की बड़ी संख्या में तैनाती से इन खतरों का तुरंत और प्रभावी जवाब दिया जा सकता है।

Author

  • News Desk

    Defence News Desk is India’s leading Hindi defence news team, offering reliable and analytical news associated with Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, Defence Equipment, War Strategy and National Security. We bring accurate, simple and updated Defence News in Hindi. Our aim is "Every news, connected with the defence of the country. ""

WhatsApp Channel Follow US
News Desk
News Desk
Defence News Desk is India’s leading Hindi defence news team, offering reliable and analytical news associated with Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, Defence Equipment, War Strategy and National Security. We bring accurate, simple and updated Defence News in Hindi. Our aim is "Every news, connected with the defence of the country. ""

LEAVE A REPLY

Most Popular

Recent Comments