📍नई दिल्ली | 13 Nov, 2025, 2:59 PM
Indian Army Transformation: मई 2025 में पाकिस्तान के साथ हुई झड़प के कुछ महीनों बाद, भारतीय सेना ने बड़ा ट्रांसफॉर्म किया है। जिसके तहत सेना ने अपनी कॉम्बैट सिस्टम्स एंड ऑपरेशनल फ्रेमवर्क्स में बड़ा सुधार किया है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना ने दो बड़े बदलाव किए हैं, पहला हर इन्फैंट्री बटालियन में ड्रोन यूनिट का गठन और दूसरा, नई “भैरव बटालियन” की तैनाती। ये दोनों सुधार आधुनिक युद्ध को देखते हुए किए गए हैं।
Indian Army Transformation: 385 इन्फैंट्री बटालियनों के पास “अशनि यूनिट”
अब सेना की सभी 385 इन्फैंट्री बटालियनों के पास “अशनि यूनिट” नाम की विशेष ड्रोन यूनिट है। इन यूनिट्स के पास निगरानी ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन यानी “कामिकाजे ड्रोन” मौजूद हैं, जो दुश्मन पर सटीक प्रहार करने की क्षमता रखते हैं। इससे पहले ड्रोन ऑपरेटर केवल सपोर्ट यूनिट के तौर पर काम करते थे, लेकिन अब वे इन्फैंट्री बटालियन का अभिन्न हिस्सा बन गए हैं।
इन अशनि यूनिट्स में 20 से 25 ट्रेन्ड सैनिक होते हैं जो केवल ड्रोन ऑपरेशन के लिए हैं। ये यूनिट्स निगरानी, टारगेट की पहचान, बैटलफील्ड मूवमेंट और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर में काम करती हैं। इससे सेना की मारक क्षमता और वार जोन में सुरक्षा दोनों बढ़ी हैं।
दक्षिणी कमांड ने “ईगल ऑन एवरी आर्म” मंत्र के तहत एक स्वदेशी ड्रोन इकोसिस्टम तैयार किया है। इसी के तहत सेना ने अपने ड्रोन हब्स से तैयार किए गए ड्रोन को त्रिशूल अभ्यास के दौरान सफलतापूर्वक परीक्षण किया।
Indian Army Transformation: भैरव बटालियन: नई कॉम्बैट यूनिट्स
Army ने “भैरव बटालियन” नाम की नई कॉम्बैट यूनिट्स भी तैयार की हैं, जिनकी पहली पांच बटालियनें 31 अक्टूबर 2025 को तैनात की गईं। आने वाले महीनों में 20 और बटालियनें तैयार होंगी। इन बटालियनों का मकसद स्पेशल फोर्स और सामान्य इन्फैंट्री यूनिट्स के बीच की खाई को पाटना है।
भैरव बटालियनें तेजी से और हाई इम्पैक्ट वाले मिशन करने में सक्षम हैं। ये सीमाओं पर दुश्मन के खिलाफ तुरंत हमले, छापामार कार्रवाई और एडवांस सर्विलांस जैसे ऑपरेशन कर सकती हैं। हर बटालियन में लगभग 250 सैनिक हैं, जो इन्फैंट्री, आर्टिलरी, एयर डिफेंस और सिग्नल कोर से चुने गए हैं।
इन सैनिकों को पर्वतीय, जंगल और कमांडो वार फेयर की विशेष ट्रेनिंग दी गई है, जिसमें हाई एल्टीट्यूड वॉरफेयर स्कूल और काउंटर इंसर्जेंसी एंड जंगल वॉरफेयर स्कूल जैसे संस्थानों में ट्रेनिंग मिली है।
इन बटालियनों को ड्रोन, मोर्टार, मशीन गन, एंटी-टैंक मिसाइल, और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम से लैस किया गया है। सेना ने 25 ऐसी बटालियनों को तैयार करने का लक्ष्य रखा है, जिनमें से कई उत्तरी, पूर्वी और पश्चिमी कमांड में तैनात हैं।
Indian Army Transformation: सेना का नया सुरक्षा कवच: सक्षम् सिस्टम
ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना ने दुश्मन के ड्रोन से निपटने के लिए एक नई “काउंटर यूएएस ग्रिड सिस्टम” शुरू किया है। इसके लिए भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के बनाए “सक्षम सिस्टम” को अपनाया गया है। यह सिस्टम जमीन से 10,000 फीट तक के हवाई क्षेत्र को सुरक्षित रखेगा।
सक्षम सिस्टम दुश्मन के ड्रोन की पहचान करने, उन्हें ट्रैक करने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए रेडियो वेव्स का इस्तेमाल करता है। इसे फास्ट ट्रैक प्रोक्योरमेंट प्रक्रिया के तहत मंजूरी दी गई है ताकि इसे जल्द से जल्द सभी फील्ड यूनिट्स में लागू किया जा सके।
This system Artificial Intelligence पर बेस्ड है, जिससे यह भविष्य के युद्धों में और अधिक अपग्रेड किया जा सकेगा। सक्षम सिस्टम सेना के अपने सुरक्षित डेटा नेटवर्क पर चलेगा और सभी फील्ड कमांडरों को रीयल-टाइम स्थिति की जानकारी देगा।
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